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चेह्रा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे - तरही ग़ज़ल

221  2121 1221 212


राह- ए- बदी से हम कभी वाक़िफ़ नहीं रहे 
फिर भी तेरे निशाने पे वाइज़ हमीं रहे     

कर ग़ौर अपने तौर-तरीकों पे एक बार
चहरा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे 

दिल के दियार की ज़रा रौनक बहाल हो
गर इस मकाँ में आप सा कोई मकीं रहे

कर इश्क या जगा दे तसव्वुफ़ तेरी रज़ा
ऐ दिल तेरे खिलाफ़ कभी हम नहीं रहे 


अब भी यहीं हैं फूल कली चाँद सब मगर
दिलकश तुम्हारे बाद ये उतने नहीं रहे

दिल के फ़लक पे ख़ूब सितारे अयाँ हैं पर
बनके यहाँ पे चाँद हमारा तुम्हीं रहे


सब है ख़ुदा के हाथ में सच है यही मगर 
खुद पर भी ऐ बशर तुझे कुछ तो यकीं रहे 

उलझा लिया है जीस्त के फ़ित्नों ने इस तरह 
" ऐ इश्क़ हम तो अब तेरे क़ाबिल नहीं रहे"

------------------------------------------------------------

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Gajendra shrotriya on December 11, 2017 at 11:36pm

आपका आभारी हूँ आ.सुरेन्द्र नाथ जी।

Comment by Gajendra shrotriya on December 11, 2017 at 11:34pm
Comment by Gajendra shrotriya on December 11, 2017 at 11:32pm

बहुत शुुक्रिया आ.Ram Awadh VIshwakarma  जी।

Comment by Gajendra shrotriya on December 11, 2017 at 11:27pm

उत्साहवर्धन  हेेतु  आपका आभारी हूूँ   आ. Gurpreet Singh जी

Comment by नाथ सोनांचली on December 11, 2017 at 5:04am

आद0 गजेंद्र जी सादर अभिवादन, बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने, बहुत बहुत बधाई आपको।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 10, 2017 at 1:45pm

हार्दिक बधाई

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on December 9, 2017 at 5:29pm

आदरणीय गजेन्द्र जी आपकी ग़ज़ल का हर शेर लाजबाब है। आपको बहुत बहुत बधाई।

Comment by Gurpreet Singh jammu on December 8, 2017 at 3:35pm

वाह वाह आदरणीय गजेन्द्र जी,,बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने ,,,,

Comment by Gajendra shrotriya on December 7, 2017 at 11:46pm

आ० समर कबीर साहिब सादर अभिवादन !  ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ । आपके द्वारा निर्देशित सुधार कर रहा हूँ। सादर।

Comment by Gajendra shrotriya on December 7, 2017 at 11:29pm

आ० अजय तिवारी जी  सादर अभिवादन ! ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ । आपका सुझाव उपयुक्त हेै, तदनुसार संशोधन कर रहा हूँ। आगे भी आपके मार्गदर्शन का आकांक्षी हूंँ। सादर।

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