For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रश्न मैं तुझ पर उठाऊँ, हूँ नहीं इतना पतित भी,
किन्तु जो प्रत्यक्ष है उस पर अचंभित हूँ, अकिंचन!
पूछ बैठा हूँ स्वयं के, बोध की अल्पज्ञता में,
बोल दे हे नाथ मेरे, क्या यही तेरा सृजन था?

जब दिखी मुस्कान तब-तब, आँसुओं का आचमन था।

आस के मोती हृदय की, सीप में किसने भरे थे?
कौन भावों की लहर में, घोल रंगों को गया था ?
धड़कनों की थाप पर, किसने किया मन एकतारा?
प्रीत की पहली छुअन को, पुण्य सम किसने किया था?

किन्तु क्षण के बाद ही, जब-तब समय का फेर देखा,
स्वप्न से रीते हृदय के, नाम विष का देख लेखा,
सोचता हूँ पूर्णता के हे शिखर! तूने रचा तो,
इस धरा पर क्यों निरंतर, बस अधूरा हर मिलन था?
बोल दे हे नाथ मेरे, क्या यही तेरा सृजन था?

 

चाहतों की सूचियाँ ले, थाल में दीपक सजाए,
कब झुकाए सर, हथेली खोल, कोई याचना की?
सृष्टि के हर एक कण में, देख कर प्रतिबिंब तेरा,
प्रेमवत अविराम तेरी, सिर्फ तेरी वंदना की।

जब कहीं ठहरा हृदय, तब रूप तेरा ही दिखा था,
पर सृजन के पृष्ठ पर, निकृष्टतम किसने लिखा था?
झूठ विजयी देख कर मैं, सर्वव्यापी बूझता हूँ,
तू अगर है सत्य तब फिर, सत्य का ही क्यों दमन था?
बोल दे हे नाथ मेरे, क्या यही तेरा सृजन था?

 

प्रेम निस्सृत अश्रुओं से, नाथ तेरे पग पखारूँ,
बूंद के सागर विलय की, राह लेकिन गुप्त क्यों है?
मोह के अनुबंध थामे, क्यों भ्रमित करते विषय हैं?
जो हृदय में प्रज्जवलित हो, रौशनी वो सुप्त क्यों है?

दो धुरों के बीच अनगिन, तंतु रच हर इक फलक पर,
खेलता क्यों भावनाओं के समुच्चय में पुलक कर,
हे परम आनंदमय! इतना बता क्यों अंश तेरा
दर्द के इन जंगलों में बस भटकता इक हिरन था?
बोल दे हे नाथ मेरे क्या यही तेरा सृजन था?

मौलिक और अप्रकाशित 

Views: 137

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 29, 2019 at 8:10pm

आ. प्राची बहन, सादर अभिवादन । उत्तम रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on November 29, 2019 at 6:36pm

बेहतरीन रचना हुई बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आज़ादी के परवानों की बातें ख़ूब निराली थीं अपने ही हाथों में उन्होने ज़ंजीरें बँधवा ली थीं…"
17 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीया रचना भाटिया जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने बधाई स्वीकार करें।  इस्लाह…"
1 hour ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय तस्दीक अहमद ख़ान साहब आदाब बहुत बेहतरीन गगल हुई है  दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ !"
1 hour ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्ते बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  पाँचवा शैर बहुत…"
1 hour ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी प्रणाम बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  मतला क्या…"
1 hour ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीया डिम्पल शर्मा जी नमस्ते  बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  तीसरा…"
1 hour ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप ' जी सादर अभिवादन बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई…"
1 hour ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें पाँचवा…"
2 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' भाई आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें…"
2 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय मो अनीस अरमान जी आदाब बहुत शुक्रिया आपकी हौसलाअफ़ज़ाई का !"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद दाद और सुख़न नवाज़ी का तहे-दिल से शुक्रिया…"
2 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय दयाराम मेथानी  जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आये  और हौसला…"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service