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deepak kumar shukla
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Self Emplyed
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I am simple person

Deepak kumar shukla's Blog

जो हुआ जैसा हुआ अच्छा हुआ

जो हुआ जैसा हुआ अच्छा हुआ

कब हुआ है पर मेरा सोचा हुआ

ले रहा हूँ साँस तो मैं हर घड़ी

सच तो ये मुझको मरे अरसा हुआ

कौन सुलझाता ये मेरी मुश्किलें

हर कोई अपने में जब उलझा हुआ

मैंने सबको अपना ही माना मग़र

दिल से कोई कब मेरा अपना हुआ

कोशिशें नाकाम ही होंगी सभी

वक़्त कब लौटा भला बीता…

Continue

Posted on June 30, 2016 at 1:00pm — 3 Comments

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At 10:20pm on February 11, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

At 4:10pm on February 11, 2016, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है आदरणीय दीपक जी आपका गजल की कक्षा गजल की बाते और भारतीय छंद विधान के ग्रुप को एक बार ज्‍वाईन कर लें उससे आपको इच्छित जानकारी मिल जाएगी । और चार उत्‍सव भी होते है प्रति माह उनमे अपनी रुचि के अनुकूल भाग लीजिये ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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