For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तरही ग़ज़ल : साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

2122  1122  1122  22/112

कोई पूछे तो मेरा हाल बताते भी नहीं,
आशनाई का सबब सबसे छुपाते भी नहीं।

शेर कहते हैं बहुत हुस्न की तारीफ़ में हम

पर कभी अपनी ज़बाँ पर उन्हें लाते भी नहीं।

जब भी देते हैं किसी फूल को हँसने की दुआ,
शाख़ से ओस की बूंदों को गिराते भी नहीं।

ये तुम्हारी है अदा या है कोई मजबूरी,
प्यार भी करते हो और उसको जताते भी नहीं।

सिर्फ़ अल्फ़ाज़ से पहचान करोगे कैसे,
बात करते  हो मगर बात बताते भी नहीं।

ये मरासिम का अजब मोड़ है जिस पर तुमको,
याद हम करते नहीं दिल से भुलाते भी नहीं।

तिश्नगी दीद की वो और बढ़ा देते है,
"साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं।

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 160

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Balram Dhakar on October 24, 2018 at 10:54pm

आदरणीय रवि शुक्ल जी, शेर दर शेर के साथ दिली मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। बहुत खूब ग़ज़ल हुई है।

सादर।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 11, 2018 at 7:53pm

वाह वाह, उम्दा गजल आदरणीय रवि सर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 7, 2018 at 3:23pm

वाह आदरणीय शुक्ला जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 21, 2018 at 2:30pm

आदरणीय रवि शुक्ल जी, आपकी ग़ज़ल के हर शेर पर दाद दे रहा हूँ. उपयुक्त सुझावों से शेर और निखर कर सामने आ रहे हैं. 

शुभ-शुभ

Comment by Ravi Shukla on September 2, 2018 at 11:39pm

आदरणीय बसंत कुमार जी ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति से उत्साहित हूं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

Comment by Ravi Shukla on September 2, 2018 at 11:38pm

आदरणीय लक्ष्मण जी गजल की सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

Comment by Ravi Shukla on September 2, 2018 at 11:38pm

आदरणीय अजय तिवारी जी ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति से बहुत खुशी हुई शेर आपको पसंद आया बहुत-बहुत धन्यवाद

Comment by Ravi Shukla on September 2, 2018 at 11:37pm

आदरणीय समर साहब आदाब गजल को आपका आशीर्वाद मिला तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं दोनों शेर पर जो आपने इस्लाह दी उसे मूल प्रति में सही कर लिया है पुनः बहुत-बहुत धन्यवाद

Comment by Ravi Shukla on September 2, 2018 at 11:36pm

आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी ग़ज़ल आपको पसंद आई इसकी सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

Comment by Ravi Shukla on September 2, 2018 at 11:35pm

आदरणीय सत्यम जी ग़ज़ल पर आपकी सराहना का बहुत-बहुत धन्यवाद

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Neelam Upadhyaya commented on TEJ VEER SINGH's blog post पहल - लघुकथा -
" आदरणीय तेजवीर सिंह जी, अच्छी संदेशपरक लघुकथा की प्रस्तुति पैर हार्दिक बधाई स्वीकार…"
34 minutes ago
क़मर जौनपुरी posted blog posts
55 minutes ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या- माह अक्टूबर,  2018- एक प्रतिवेदन  -डा. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

21 अक्टूबर 2018, दिन रविवार को लोकप्रिय कथाकार डॉ. अशोक शर्मा के आवास, 81 विनायकपुरम, विकासनगर.…See More
56 minutes ago
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब, सबसे पहले आपकी ग़ज़ल के क़वाफ़ी के अर्थ देखते हैं…"
2 hours ago
राज़ नवादवी commented on Sushil Sarna's blog post 3 क्षणिकाएँ....
"अनुभूतियाँ उक्केरती हैं जो आपकी क्षणिकाएँ, खुले नभ में जैसे चमकें हैं रात को मणिकाएं ! बहुत सुन्दर…"
3 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

11212 11212. 11212. 11212हुई तीरगी की सियासतें उसे बारहा यूँ निहार कर ।कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे…See More
4 hours ago
राज़ नवादवी posted blog posts
5 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted blog posts
5 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"जीने की चाह में हुआ बंजारा आदमी बस घूमता दिखे है मक़ामात से अलग। उम्दा शेर के साथ अच्छी ग़ज़ल।…"
5 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on Sushil Sarna's blog post 3 क्षणिकाएँ....
"बेहतरीन रचना।"
6 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
7 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब डॉ छोटेलाल सिंह साहब। खुशी हुई आपसे मिलकर।"
7 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service