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गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ चलना बस निरंतर

रेल गाड़ी की तरह सहकार का संदेश गाएं

 

प्यार से जो भी मिले तो हर कली दिल की खिलेगी

किन्तु आतंकी अधर्मी की चुनौती जब मिलेगी

स्वाभिमानी भारतीयों की तरह हम पेश आएं

 

शौर्य गाथा चंद्र के अभियान की चहुँ ओर है

अग्नि का, ब्रह्मोस का अब शत्रु दल में शोर है

अब समर्थन दे रही संयुक्त राष्ट्रों की सभाएं  

 

देश है कश्मीर से कन्या कुमारी तक सलामत

एक इसकी रूह है कानून करता है हिफाजत

क्यूँ मतांतर की बिना पर हों विभाजित टूट जाएं

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 11, 2017 at 12:39pm

 Ravi Shukla जी,
देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत शानदार गीत के लिए बधाई स्वीकार करें | यूँ तो पूरा गीत ही भावों  और सधे शिल्प का संगम है पर रेल सेवा में कार्य करने और अभी भी ट्रेड यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण मुझे ये पंक्तियाँ बहुत पसंद आईं :
" रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ चलना बस निरंतर

रेल गाड़ी की तरह सहकार का संदेश गाएं"
बस एक ही सुझाव है कि जहाँ-जहाँ  "एं" लिखा है वहाँ "एँ"  कर लें तो सुंदरता और बढ़ जाएगी | 

 

Comment by आशीष यादव on July 30, 2017 at 2:16pm
आदरणीय रवि शुक्ला जी सुंदर एवं संदेशपरक गीत पर बहुत बहुत बधाई।
Comment by Ravi Shukla on July 26, 2017 at 1:12pm

हमारे गीत का मान देने के लिये आपका बहुत बहुत आभार आदरणी बसंत कुमार जी

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 26, 2017 at 8:35am

मुग्ध हूँ पढ़कर, देशभक्ति और उर्जा से भरपूर लाजबाब गीत के लिए बहुत बहुत बधाई आपको  आदरणीय रवि शुक्ला जी 

Comment by Ravi Shukla on July 25, 2017 at 4:36pm

जी सही कह रहे है आप आदरणीय समर साहब हैं में अनुस्‍वार नहीं लगाना टंकण त्रुटि हो गई है इसको और भी टिप्‍पणिया आने के बाद एक साथ संशो‍धन करते है । सादर

Comment by Samar kabeer on July 25, 2017 at 3:04pm
जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,बहुत सुंदर और सन्देशप्रद गीत लिखा। आपने,बहुत पसंद आया,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
दूसरे बन्द की दूसरी पंक्ति 'चली है टोलियां सब' को "चली ह्रें टोलियां सब" कर लीजियेग ।
Comment by Ravi Shukla on July 25, 2017 at 2:03pm

आदरणीय मोहम्‍मद आरिफ साहब गीत पर आपकी स्‍नेहिल प्रतिक्रिया पाकर प्रसन्‍नता हुई गीतकार के रूप में हम मानते है कि गीतों में सामाजिक सरोकार भी होना चाहिये । केवल मनोरंजन साहित्‍य का उद्देश्‍य नहीं हो सकता । आपको गीत पंसद आया हार्दिक आभार स्‍वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on July 25, 2017 at 12:09pm
आदरणीय रवि शुक्ला जी आदाब, देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत बेहतरीन गीत । आजकल ऐसे गीतों की काफी आवश्यकता है। गीत में आक्रोश भी है,बदलाव का विशेष आग्रह भी है और परिवर्तन की छटपटाहट भी है । ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें ।

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