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221 2121 1221 212

आए वो बज़्म ए शौक में आ कर चले गए,
फ़ित्ना सा एक दिल में उठा कर चले गए।

महफ़िल में आये जलवः दिखा कर चले गए,
जादू सा एक पल में जगा कर चले गए।

आने का और जाने का होता नहीं यकीन,
कुछ लोग इस तरह से भी आकर चले गए।

आँचल सरक के दोश से पहलू में क्या गिरा,
बैठे भी वो नहीं थे लजा कर चले गए।

पुरसान-ए-हाल के लिये यूँ आये मेरे पास
गोया कि एक रस्म निभा कर चले गए

आये वो दर्द बाँटने लेकिन हक़ीक़तन,
शिद्दत गमों की और बढ़ा कर चले गए।

गुज़रेगी इंतज़ार में कैसे तमाम उम्र,
राहे वफ़ा में मुझको बिठा कर चले गए।

जितने भी हैं चराग वो सदमे से जाँ ब लब,
आंधी से लोग हाथ मिला कर चले गए।

हमको थी जिन चरागों से उम्मीदे रोशनी,
वो तुम सुकूते शब में बुझा कर चले गए।

मय्यत पे आके उसने किया एक ही सवाल,
क्यूँ दिल्लगी में जान लुटा कर चले गये।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 1, 2017 at 2:12pm

प्रिय  Ravi Shukla,
वाह वाह ! शानदार ग़ज़ल के लिए दिल से निकली बधाई स्वीकार करें | 

Comment by vijay nikore on July 21, 2017 at 11:17am

बहुत ही खूबसूरत गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 20, 2017 at 8:56pm
आ. भाई रवि जी सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।
Comment by Niraj Kumar on July 20, 2017 at 5:22pm

आदरणीय रवि शुक्ला जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद. पुराने लहजे की मुआमला बंदी का एक शेर बहुत अच्छा बन पड़ा है :  

 आँचल सरक के दोश से पहलू में क्या गिरा,
 बैठे भी वो नहीं थे लजा कर चले गए।

मेरे ख्याल से मोमिन के शेर में गोया का अर्थ 'जैसे' ही ज्यादा उपयुक्त है. यूं बात करने का अर्थ भी मुमकिन है.

 

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2017 at 11:54am

आदरणीय रवि भाई , बहुत अच्छी कही है आपने गज़ल , सभी अशआर अच्छे हुये हैं , मुबारक बाद स्वीकार करें ।

पुरसान-ए-हाल के लिये यूँ आये मेरे पास
गोया कि एक रस्म निभा कर चले गए

आये वो दर्द बाँटने लेकिन हक़ीक़तन,
शिद्दत गमों की और बढ़ा कर चले गए।    --  दोनो एक बात कहते लगते हैं .. अलग अलग अंदाज ज़रूर् है ... सही लगे तो एक ही रखिये ।

Comment by Gurpreet Singh on July 20, 2017 at 10:31am

इस जानकारी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रवि शुक्ला जी ,,,गोया शब्द मैंने कई अशआर में पढ़ा था,,लेकिन इस के बारे में  जानता नहीं था,, आप ने बात स्पष्ट कर दी,,, शुक्रिया 

Comment by Ravi Shukla on July 20, 2017 at 9:42am

आदरणीय गुरप्रीत जी हौसला आफजाई का श्‍ुा्क्रिया  पुरसान ए हाल  हाल चाल पूछना  और सुकूते शब  सूकूत का अर्थ है शान्ति नीरवता और शब तो रात है ही सुकूते शब रात्रि की नीरवता

गोया दो तरह से प्रयुक्‍त होता है एक तो गोया मतलब जैसे   ( गोया कि आप हमे जानते नहीं )

दूसरा गोया बात करना  इस पर मोमिन साहब का शेर बहुत प्रसिद्ध है जिस पर गालिब साहब ने कहा था कि ये शेर मेरे नाम कर दें आप और मेरा सारा दीवान लें ले

तुम मेरे  पास होत हो गोया

जब कोई दूसरा नहीं होता   यहां गोया का अर्थ   बात करने से है

इसी पर एक शेर हमने पहले कहा था गजल मंच पर पोस्‍ट नही हुई है शेर देंखें कि

खामोशियों में फ़र्क न आया कभी जनाब,

गोयाई तो बदल गई हालात देखकर।   इस शेर से गोया का मआनी और भी स्‍पष्‍ट हो गया होगा । सादर

Comment by Gurpreet Singh on July 19, 2017 at 9:26pm
आदरणीय रवी सर जी नमस्कार ...बहुत खूब ग़ज़ल कही है आपने...इतने सारे अशआर और वो भी इतने उच्च स्तरीय ..कमाल कर दिया है आपने.
पुरसान-ए-हाल, सुकूते शब ....इन शब्दों के अर्थ जानना चाहूंगा सर जी और साथ ही गोया का इसतेमाल करने की तरकीब भी जानना चाहूंगा की ये कहाँ और कैसे इसतेमाल किया जाता है...शुक्रिया
Comment by Ravi Shukla on July 19, 2017 at 10:57am

आदरणनीय बृजेश जी आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत श्‍ुाक्रिया

Comment by Ravi Shukla on July 19, 2017 at 10:57am

आदरणीय तस्‍दीक साहब आदाब आपसे प्रोत्‍साहन पाकर बहुत खुशी हुई है बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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