For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Usha Awasthi's Blog (16)

धुआँ-धुआँ क्यों है?

ये आसमां धुआँ-धुआँ क्यों है?
सुबू शाम बुझा-बुझा क्यों है?
इन्सां बाहर निकलने से डर रहा है
बीमारियों की फ़िज़ा क्यों है?

यह सारा किया उसी ने है
ज़हर फैलाया उसी ने है
बेजान इमारतों के ख़ातिर
वृक्षों को गिराया उसी ने है

कितने अपशिष्ट जलाए उसने?
कितने कारखाने चलाए उसने?
क्या उसे नहीं पता ?
इतनी बद्दुआएँ क्यों हैं?

ये आसमां धुआँ-धुआँ क्यों है?

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on November 21, 2019 at 11:30am — 3 Comments

किस्से हैं, कहानी है

किस्से हैं , कहानी है

दुनिया अनजानी है

कोई कब आएगा ?

कोई कब जाएगा ?

कौन जानता भला ?

केवल रवानी है

किस्से हैं - -

अभी तो यहीं था

कैसे चला गया ?

बार-बार दोहराती

बात पुरानी है

किस्से हैं - -

ख़ाली ही आया धा

ख़ाली विदा हुआ

बार -बार पाने की

ज़िद , दीवानी है

किस्से हैं - -

निर्मोही देह में

मोह पोसा गया

पाया न मनभाया

नित- नित कोसा गया

फिर…

Continue

Added by Usha Awasthi on October 12, 2019 at 9:00pm — 2 Comments

वे ही सन्त होते हैं

करो कितना विवेचन

शैलियों , पांडित्य का, लेकिन

भावों के धरातल पर ही

गौतम बुद्ध बनते हैं

हुए तर्कों , वितर्कों से परे

वे शुद्ध हो गए

प्रकृति के सब प्रपंचों से 

निरुद्ध , प्रबुद्ध हो गए

जो खेलें दूसरों की गरिमा से

उन्मत्त होते हैं

सदा जो प्रेम से भरपूर

वे ही सन्त होते हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on September 18, 2019 at 10:30pm — 1 Comment

तुझसे ही धोखे खाए हैं

सबसे ज्यादा ज़िन्दगी 
तुझसे ही धोखे खाए हैं
जब किया विश्वास तब
तूने कहर बरपाए हैं
सबसे - -

दीप आशा का लिए
जब - जब उमंगित मैं खड़ी
द्वार जो नैराश्य के 
आकर सतत खटकाए हैं
सबसे - -

मत समझना तू हरा देगी
मुझे ऐ ज़िन्दगी
हमने ही तो कूट प्रश्नों के
गिरह सुलझाए हैं
सबसे - -

परत दर परतों के पीछे
कितना ही छुपती फिरे
पर तेरे झूठे मुखौटे
हमने ही विलगाए हैं
सबसे - -

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on August 28, 2019 at 9:51pm — 1 Comment

कहें किससे व्यथा ?

तुम हुए जो व्यस्त

अभिभावक कहें किससे व्यथा?

हो गए कितने अकेले 

क्या तुम्हे यह भी पता?



जिन्दगी की राह में

तुम तो निकल आगे गए

वे गहन अवसाद, द्वन्दों

में उलझ कर रह गए



सहन कर पाए न वे 

संतान की ये बेरुखी

बेसहारा , ढलती वय

थक कर, हताशा में फंसी



तुम उन्हे कुछ वक्त दो

प्यार दो , संतृप्ति दो

जिन्दगी जीने को कुछ

आधार कण रससिक्त दो



पुष्प फिर आशीष के

तुम पर बरस ही जाएंगे

कवच बन संसार…

Continue

Added by Usha Awasthi on August 22, 2019 at 9:50pm — 6 Comments

श्रमेव जयते

उद्मम करते जो सदा
कर्मनिष्ठ , मतिधीर
वे सम्पन्न समाज की 
रखते नींव , प्रवीर

श्रमेव जयते में सदा
जिनका है विश्वास
उनके ही श्रम विन्दु से 
ले वसुन्धरा श्वास

मेहनत भी एक साधना
नहीं कोई यह भोग
लक्ष्य केन्द्रित वृत्ति ही
बन जाए फिर योग

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on August 6, 2019 at 7:00pm — 3 Comments

धन के वे हकदार हैं , श्रम करते भरपूर

धन के वे हकदार हैं , श्रम करते भरपूर

कामचोर को क्यों मिलें लड्डू मोतीचूर ?



बैठे - बैठे खा रहे सरकारी दामाद

कर्म करें जो रात - दिन , मिले उन्हे अवसाद



कोई भी ऐसे नियम , कभी न आए रास

कर्मयोगियों को मिले , जिनसे केवल त्रास



विविध करों की भीड़ में , मेहनतकश मजबूर

टैक्स नहीं ' जनसेवकों ' पर , सम्पति भी भूर…





Continue

Added by Usha Awasthi on July 23, 2019 at 8:30pm — 4 Comments

स्वयं को एक बार देखो

अवनि के विस्तृत पटल पर

प्रकृति के नित नव सृजन,

संगीत की अद्भुत समन्वित

राग-रागनियों के रस , लय ,

छन्द का विस्तार देखो

स्वयं को एक बार देखो



चहुँ दिशाओं में थिरकतीं

इन्द्रधनुषी नृत्य करतीं

रंगों की मनहर ऋचाएँ 

सृष्टिकर्ता प्रकृति का प्रतिपल

नया अभिसार देखो

स्वयं को एक बार देखो



विपुल रवि , ग्रह , चन्द्र मंडित

गहन अनुशासित अखंडित

ज्योति किरणों से प्रभासित

व्योम में , गतिमान

सामंजस्य का श्रृंगार देखो…

Continue

Added by Usha Awasthi on January 27, 2019 at 8:30pm — 3 Comments

जाने कितने बढ़े हुए हैं

जाने कितने बढ़े हुए हैं
दुष्ट, अधर्मी, व्यभिचारी
पग-पग पर धोखा देते जो
लोभी, कृपण,अनाचारी

इनकी घातों का कब तक,अब
बोझ सहन करना होगा?
कलियुग के इन दुष्ट,पापियों 
का, कुछ तो करना होगा

अन्यायी, पापाचारी जो
कामी, भ्रष्ट, दुराचारी जो
इनकी कुटिल कुचालों का
प्रतिरोध हमे करना होगा


मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on January 11, 2019 at 6:30pm — 3 Comments

आधुनिक शिक्षा संस्थान

शिक्षा संस्थाओं के
हाल आज और हैं
छात्र यूनियनों में
लड़ाई  के दौर हैं

शिक्षालय आज 
राजनीति के अड्डे हैं
कमाई,चुनाव के
थ॓धों पर थंधे हैं

फैली अराजकता
अलग -अलग झंडे हैं
परिसर में घूमते
दलालों के पंडे हैं


मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on August 4, 2018 at 10:30am — No Comments

प्राचीन गुरुकुल

पूर्णतया शिक्षा को गुरू समर्पित थे

कंद,मूल,फल,बिना जोता अन्न खाते थे

पठन -पाठन को समय बचाते थे

तभी तो गुरुजन श्रृषि कहलाते थे



गुरुकुल के प्राँगण में व्यर्थ वाद वर्जित था

गुरू ज्ञान-धारा से हर छात्र सिंचित था

चरणों में उनके नतमस्तक हो जाते थे

तभी तो गुरुजन श्रृषि कहलाते थे



राजा उनसे मिलने गुरुगृह जब जाते थे

आयुध अपने बाहर रख अन्दर आते थे

उलझनें शासन की,उन स॔ग सुलझाते थे

तभी तो गुरुजन श्रृषि कहलाते थे



मौलिक एव॔…

Continue

Added by Usha Awasthi on August 4, 2018 at 10:30am — 8 Comments

जरा धीरे चलो

जिन्दगी थोड़ा ठहर जाओ
जरा धीरे चलो
तेज इस रफ्तार से 
घात से प्रतिघात से 
वक्त रहते , सम्भल जाओ
जरा धीरे चलो
जिन्दगी - - - -
कामना के ज्वार में
मान के अधिभार में
डूबने से बच , उबर जाओ
जरा धीरे चलो
जिन्दगी - - - -
शब्दाडम्बरों के
उत्तरों प्रत्युत्तरों के
जाल से बच कर , निकल जाओ 
जरा धीरे चलो
जिन्दगी - - - -

(मौलिक एवम अप्रकाशित)

Added by Usha Awasthi on June 12, 2018 at 10:27pm — 11 Comments

कितने रोगों से बच जाते

जब कागज के ये रुपये

सुन्दर सिक्कों में ढल जाते

तब सचमुच अच्छा होता

कितने रोगों से बच जाते



कम से कम गंदे नोटों को

हमें नहीं छूना पड़ता

जिनमें गुटखा पीक लगा हो

और हिसाब लिखा चुभता



तभी पुराने महाराजे

सुन्दर सिक्के गढ़वाते थे

जो भी हो , गंदे सिक्के

पानी  से तो धुल जाते थे

सिक्कों की प्राचीन प्रथा

सचमुच में कितनी अच्छी थी

स्वस्थ रहे जनता अपनी

यह सुभग भावना सच्ची…

Continue

Added by Usha Awasthi on May 21, 2018 at 7:30pm — 2 Comments

रोगी मन का शब्दों से उपचार नहीं होने वाला

चाहे जितने लेख लिखें हम

और लिखें कितनी कविता

नहीं समझ आती कामी को

अब कोई भी मर्यादा



रोगी मन का शब्दों से

उपचार नहीं होने वाला

सद्गुण , संस्कार के बिन

उद्धार नहीं…

Continue

Added by Usha Awasthi on April 28, 2018 at 7:30pm — 9 Comments

समता दीपक जलना होगा

राजनीति करते वोटों की

कुत्सित चाल चला करते

अपना स्वार्थ सिद्ध करने को

आपस में झगड़ा करते

भीड़ जुटाकर आग उगलते

वाक्-वाण वे चलवाते

धर्म जाति का जहर घोल

भड़काकर नफरत फैलाते

कर दें विफल योजना इनकी

जो जन धन लूटा करते

इन्हें नहीं है प्यार राष्ट्र से

यह अपना ही घर भरते

जाने कितने शकुनि यहाँ पर

अनगिन चालें चलवाते

लड़वाते जन को आपस में

खुद बेदाग निकल जाते

इनके…

Continue

Added by Usha Awasthi on February 22, 2018 at 6:40pm — 4 Comments

जय हे काली

जय हे काली,करालि,कालिके

वसुधा का प्रांगण स्वच्छ करो

दुर्व्यसनी दुष्ट पिशाचों का

संहार करो,संहार करो



विषयी,कामातुर,कुलहंता

करते कलियों का शीलभंग

ऐसे पापी व्यभिचारियों का

तुम अंत त्वरित अविलम्ब करो



नहीं जिन्हें शील कुल की लज्जा

बढ़ रहे रक्तबीजों से जो

उन निर्लज्जों के शोणित का

खप्पर भर भरकर पान करो



पर धन हर्ता महिषासुरों का

जब दर्प भंग कर आओगी

कलियुग के शुंभ निशुंभों का

जब मान रौंदकर आओगी



तब… Continue

Added by Usha Awasthi on September 18, 2017 at 11:29pm — 8 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna replied to Saurabh Pandey's discussion मात्रिक पदों में शब्द-संयोजन in the group भारतीय छंद विधान
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम ... सर छंदों में गेयता के आधारभूत सिद्धांतों को आपने बहुत ही सरल और…"
2 hours ago
प्रशांत दीक्षित 'सागर' posted a blog post

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212याद उसको कभी,मेरी आती नहीं ।और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।सो रही अब भी वो, चैन…See More
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Saurabh Pandey's discussion मात्रिक पदों में शब्द-संयोजन in the group भारतीय छंद विधान
"बहुत बारीकी सी समझाया गया कल गणना और निर्वहन का मन्त्र  सादर "
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Saurabh Pandey's discussion पद्य-रचनाओं में पंक्चुएशन के चिह्न // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"बहुत आवश्यक जानकारी देता विस्तृत आलेख साधुवाद आदरणीय "
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Saurabh Pandey's discussion हरिगीतिका छन्द के मूलभूत सिद्धांत // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"हरिगीतिका छंद (२२१२,२२१२,२२१२,२२१२ )पर हम सबने यहीं मंच पर बहुत गंभीर रचनाएँ की हैं.. और आगे भी…"
4 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय vijay nikore जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का तहे दिल से शुक्रिया।"
5 hours ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"नवीन जी सम सामयिक अच्छी रचना के लिए बधाई। "ये नीलामी ये पी एस यू का नाटक बंद भी कर दो  …"
10 hours ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

नक़्श-ए-पा

मुझको पता नहीं है, मैं कहाँ पे जा रही हूँ तेरे नक़्श-ए-पा के पीछे,पीछे मैं आ रही हूँउल्फत का रोग है…See More
10 hours ago
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय समर कबीर साहब, इतनी कमज़ोर हुई मेरी रचना फिर भी आप बधाई देकर मेरा प्रोत्साहन बढ़ा रहे हैं।…"
12 hours ago
Manju Saxena posted a blog post

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है दिल पे गुज़री हुई हर बात का आईना है।देखते हो जो ये गुलनार तबस्सुम…See More
12 hours ago
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय महेंद्र साहब, समर कबीर साहब का हर सुझाव मेरे लिए मान्य है। मैं प्रयासरत हूँ कि अच्छा कर…"
12 hours ago
Usha posted a blog post

ऐसी सादगी भरी शोहरत को सलाम। (अतुकांत कविता)

शोहरतों का हक़दार वही जो,न भूले ज़मीनी-हकीक़त, न आए जिसमें कोई अहम्,न छाए जिसपर बेअदबी का…See More
12 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service