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Sheela Sharma
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Dimple Sharma commented on Sheela Sharma's blog post रोक लेते तुम अगर..
"आदरणीया शीला शर्मा जी नमस्ते, खुबसूरत रचना पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Sep 2, 2020
आशीष यादव commented on Sheela Sharma's blog post सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं
"स्वतंत्रता दिवस पर एक अच्छी रचना हुई है। बधाई स्वीकार कीजिए।"
Aug 25, 2020
आशीष यादव commented on Sheela Sharma's blog post रोक लेते तुम अगर..
"बहुत अच्छी रचना हुई है। कहीं कहीं गेयता भंग हो रही है किंतु भाव बिल्कुल सच्चे हैं। बधाई स्वीकार कीजिए।"
Aug 25, 2020
Samar kabeer commented on Sheela Sharma's blog post रोक लेते तुम अगर..
"मुहतरमा शीला शर्मा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । कुछ शब्दों में टंकण त्रुटियाँ देख लें ।"
Aug 25, 2020
Samar kabeer commented on Sheela Sharma's blog post सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं
"मुहतरमा शीला शर्मा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
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Sheela Sharma commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post माँ की मिली जो गोद तो जन्नत में आ गए.- गजल
"बहुत सुंदर रचना..।हार्दिक बधाई।"
Aug 24, 2020
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"आदरणीया दीदी, रचन के लिये बधाई।"
Aug 24, 2020
Sheela Sharma is now a member of Open Books Online
May 28, 2020

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Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Lucknow
Profession
Home maker
About me
I am like to read and write.

Sheela Sharma's Blog

रोक लेते तुम अगर..

अपनी माटी गांव छोड़,हम

माया नगरी आए थे..

अम्मा बाबू और बच्चों के

सपने संग में लाए थे।



हाँफ रहे बेजान शहर मे

जीवन हमने डाला था..

अपने श्रम सीकर से इसको

हरा भरा कर डाला था।

टैम्पो रिक्शा खींचा हमने

उद्योगों के पहिये घुमाए थे

रहे सदा झोपड़ी मे हम

पर कितने महल बनाए थे।

समय का पहिया ऐसे घूमा

सारे पहिए जाम हुए...

तुम अपने थे,फिर यों कैसे

निष्ठुर बन अनजान हुए।

एक बार तो कहते हमसे

रूको यहाँ मत जाओ…

Continue

Posted on August 24, 2020 at 10:00am — 3 Comments

सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

पन्द्रह अगस्त फिर आया है

हमको यह याद दिलाने को,

स्वतंत्रता की खुशी मनाएं

पर ना भूलें बलिदानों को।

ये धरती, येअम्बर अब भी

साक्षी है उन दीवानों की,

सर्वस्व लुटाकर अमर हुए

आजादी के परवानों की।

ना सहन कर सके जो थे

भारत माता का बन्धन,

निज शीश चढ़ा आहुति में

करते थे राष्ट्र यज्ञ, वन्दन।

हम भूलें नहीं कभी भी

आजादी का वह नारा,

हम मिटें भले, लेकिन यह

लहराए तिरंगा प्यारा।

हम बंटे नहीं टुकड़ों में

यह शपथ हमें लेना है,

उन वीरों की यह…

Continue

Posted on August 24, 2020 at 9:30am — 2 Comments

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