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Dimple Sharma
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Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय Vinay Prakash Tiwari जी नमस्ते, इस  खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय दीपक कुमार जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीया राजेश कुमारी जी नमस्ते, बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें ! "
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय Md. Anis Arman जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी नमस्ते, आपने इस मुशायरे में हिस्सा लिया इसके लिए हार्दिक बधाइयां एवं शुभकामनाएं स्वीकार करें , बाकी मैं तो खुद अभी सीख ही रहीं हूं , कुछ कह सकूं इस लायक तो हूं नहीं पर हाँ इतना जरूर कहूंगी कि डरें नहीं उस्ताद मोहतरम हैं न हारे…"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय Md. Anis Arman जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और बधाई मायने रखती है आदरणीय, स्नेह बनाए रखें , हृदय तल से आभार आपका।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, आदरणीय आप ने ग़ज़ल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई इसके लिए हृदय तल से आभारी हूं आपकी, यूं ही स्नेह एवं आशीर्वाद बनाए रखें आदरणीय।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय दण्डपाणि 'नाहक'जी नमस्ते, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई मायने रखती है आदरणीय, हृदय तल से आभार आदरणीय।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय Tasdiq Ahmed Khan जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत आभार शुक्रिया धन्यवाद आदरणीय।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय अजय गुप्ता जी ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति मायने रखती है, हौसला अफ़ज़ाई के लिए हृदय तल से आभार आपका आदरणीय।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय उस्ताद मोहतरम प्रणाम चरण स्पर्श, आपकी पारखी नजर से कुछ नहीं छिप सकता ,आप कमाल हो उस्ताद मोहतरम , क्या कहने, दंडवत प्रणाम है आपको।"
Jun 27
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय मुनीश ' तन्हा' जी खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jun 26
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय उस्ताद मोहतरम Samar Kabeer साहब आदाब एवं चरण स्पर्श स्वीकार करें , गुरुदेव आपके मार्गदर्शन और आपकी प्यार भरी डांट का ही नतीजा है ये , उस्ताद मोहतरम बहुत बहुत धन्यवाद आभार, यूं ही डांटते हुए आशीर्वाद बनाए रखें ताकि एक दिन मैं आपकी वाह और बहुत…"
Jun 26
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी आदाब, आपकी उपस्थिति और बधाई के ये शब्द मेरा मेरा हौसला बढ़ाते हैं आदरणीय , बहुत बहुत धन्यवाद आभार आपका आदरणीय , कृपा दृष्टि एवं आशीर्वाद बनाए रखें।"
Jun 26

Profile Information

Gender
Female
City State
Shillong
Native Place
Shillong
Profession
Poetress
About me
Love writing n cooking

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बगैर बादल के आ बरस जा तू इश्क़ की कुछ फुवार कर दे

1212, 212, 122, 12 12, 212, 122

बगैर बादल के आ बरस जा तू इश्क़ की कुछ फुवार कर दे

है एक अर्से से प्यासी धरती बढ़ा ले क़ुर्बत बहार कर दे

बहुत बड़ा है शहर ये दिल्ली यहाँ के चर्चे बहुत सुने हैं

हमें तो अपना ही गांव प्यारा तू लाख इसको सुधार कर दे

बदल रहे हैं घरों के ढांचे सभी के अपने अलग है कमरे

पुराने बर्तन नए हुए हैं तू भी बदल जा कनार कर दे

क़मर से कह दो ठहर के निकले कि दीद उनका अभी हुआ है

नहीं भरा उनसे दिल हमारा ख़ुदा क़मर को बुख़ार कर…

Continue

Posted on June 13, 2020 at 5:30pm — 6 Comments

तू ही तू है

एक नज़्म

अरकान-2212, 2212, 2212

दिल-ए-दरीया आब में तू ही तू है

हर इक लहर-ए-नाब में तू ही तू है

मौसम शगुफ़्ता है मुहब्बत में देखो

लाहौर ते पंजाब में तू ही तू है

हर इक वुज़ू पे हर दफ़ा मांगा तुझे

मेरी दुआ से याब में तू ही तू है

पकड़े हुए हूं आज तक दस्तार को

ख़ुर्शीद में महताब में तू ही तू है

हासिल कहाँ मुझको मेरे महबूब तू

फिर भी मेरे हर ख़्वाब में तू ही तू है

भीगी हुई पलकों का दामन छोड़ कर

बढ़ते हुए सैलाब में तू ही…

Continue

Posted on June 9, 2020 at 7:05pm — 18 Comments

बेख़ौफ़ हम

कहा रूक जा सब ने, बेख़ौफ़ हम
चले गांव जल्दी से बेख़ौफ़ हम

कहीं एक विधवा अकेले खड़ी
खड़े साथ उसके ले बेख़ौफ़ हम

हटा ले ये चादर मेरे शव से तू
जला दे या दफ़ना दे, बेख़ौफ़ हम

अरे क्या कहें साँप हम पे गिरा
डरे थे सभी बस थे, बेख़ौफ़ हम

हमें रेत का घर सरल सा लगा
समन्दर कि लहरों से, बेख़ौफ़ हम

वो पीछे से मारे ,हुनर उनका था
खड़े सामने उनके, बेख़ौफ़ हम

डिम्पल शर्मा
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 7, 2020 at 2:36pm — 10 Comments

वहाँ एक आशिक खड़ा है ।

वहाँ एक आशिक खड़ा है ।

जो दिल तोड़ कर हँस रहा है ।।

मुहब्बत करें तो करें क्या ..?

मुहब्बत में धोका बड़ा है ।।

हमें आग का डर नहीं था ।

कि सैलाब अन्दर भरा है ।।

भले जिस्म थक हार जाए ।

अभी जोश दिल में बड़ा है ।।

ख़ुदा ख़ैर हमको मिले वो ।

ज़माना बहुत ही बुरा है ।।

कहांँ है जहाँ में मुहब्बत ।

सभी तो सभी से ख़फ़ा है ।।

हमें रात लड़ना पड़ा था ।

उजाला बहुत ग़मज़दा है ।।

यकीं कौन हम पे करेगा ।

ये ढांचा हमीं पे…

Continue

Posted on June 5, 2020 at 2:00pm — 10 Comments

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