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Ketan Kamaal
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ajay sharma commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"bahut hi khoob gazal kahi hai ketan saab ...............baki .....matra girana aur uthana meri samajh ke bahar hai ...man ko jo bhi aachha lage mere lihaz see vohi zyada behtar aur sunder hota haia ...gazal ki tachnicality to gurujan zyada achha hi…"
Dec 26, 2014
Anurag Prateek commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"2122- 1212-  22 बदला बदला सा घर नज़र आया। जब कभी मैं कही से घर आया।-- बहुत खूब  बस तुझे देखती रही आँखें। ( रहीं )हर तरफ तू ही तू नज़र आया।-- अच्छा है  छोड़ कर कश्तियाँ किनारे पर। बीच दरिया में डूब कर आया।-- लहज़ा अटपटा…"
Dec 22, 2014
Rahul Dangi commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"बहुत सुन्दर वाह!"
Dec 10, 2014

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल : खुदा से पूछता ये बात कब तक।
"खूबसूरत ग़ज़ल हुई है भाई केतन कमाल जी, दिली दाद हाज़िर है।"
Dec 10, 2014

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"//यूँ हज़ारो हैं ऐब तुझमे भी। याद मुझको तेरा हुनर आया।// वाह वाह वाह !! क्या ही दनिश्वराना ख्याल है केतन कमाल साहिब, वाह। बाकी अशआर भी दिल छूने वाले हुए हैं। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Dec 10, 2014

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई  बेहतरीन शेर  यूँ हज़ारो हैं ऐब तुझमे भी। याद मुझको तेरा हुनर आया।"
Dec 9, 2014
Ketan Kamaal's blog post was featured

ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।

2122 12 12 22बदला बदला सा घर नज़र आया। जब कभी मैं कही से घर आया।बस तुझे देखती रही आँखें। हर तरफ तू ही तू नज़र आया।छोड़ कर कश्तियाँ किनारे पर। बीच दरिया में डूब कर आया।यूँ हज़ारो हैं ऐब तुझमे भी। याद मुझको तेरा हुनर आया।नींद गहरी हुई फिर आज "कमाल"। ख्वाब उसका ही रात भर आया।मौलिक एवम अप्रकाशित केतन "कमाल"See More
Dec 3, 2014
Ketan Kamaal commented on harivallabh sharma's blog post ग़ज़ल: लौ मचलती रही.
"Abhi Kahan Kaafi kamzor hai koshish achchi hai kahi kahi sentence adhure lag rahe hai  Jaise yaha  बादियों में दिखी, ओस बूँदें सहर, AUS KI aana chahiye jo nahin aaya jo achche shayar hai unhe khoob padhiye aur unhone jis tarah se sher…"
Nov 29, 2014
Ketan Kamaal commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post गजल - "एक तरफा प्यार की ये बेबसी मत पूछिये"
"waaaaah"
Nov 29, 2014
Ketan Kamaal commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"Shukriya Meena Pathak Ji aapka Nawazish"
Nov 25, 2014
Meena Pathak commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"अति सुन्दर ..बधाई "
Nov 25, 2014
Ketan Kamaal commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आँख का आँसू हॅसेगा - (ग़ज़ल ) -लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’
"bahut hi pyaari ghazal kahi hai bhai Daaad qabool Farmaye "
Nov 25, 2014
Ketan Kamaal commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"Shukriya Rajesh Kumari Ji Ram Pathak Bhai Shukriya aapka "
Nov 25, 2014
ram shiromani pathak commented on Ketan Kamaal's blog post ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।
"वाह केतन भाई बहुत खूब।।"
Nov 25, 2014
Ketan Kamaal commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post ग़ज़ल
"Zindabad Zindabad Mere bhai Chandra Shekhar Pandey JI kya kahne "
Nov 25, 2014
Ketan Kamaal commented on Shyam Narain Verma's blog post यार बैरी बना आशिकी के लिये |
"Bahut achche sujhaav diye hai Ganesh Ji ne waaah achchi koshish hai sahab kahte rahiye qamyabi milegi zaroor duaa karta hun "
Nov 25, 2014

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Indore
Profession
Writter

Ketan Kamaal's Blog

ग़ज़ल बदला बदला सा घर नज़र आया।

2122 12 12 22

बदला बदला सा घर नज़र आया।
जब कभी मैं कही से घर आया।

बस तुझे देखती रही आँखें।
हर तरफ तू ही तू नज़र आया।

छोड़ कर कश्तियाँ किनारे पर।
बीच दरिया में डूब कर आया।

यूँ हज़ारो हैं ऐब तुझमे भी।
याद मुझको तेरा हुनर आया।

नींद गहरी हुई फिर आज "कमाल"।
ख्वाब उसका ही रात भर आया।

मौलिक एवम अप्रकाशित
केतन "कमाल"

Posted on November 24, 2014 at 5:15pm — 21 Comments

ग़ज़ल : खुदा से पूछता ये बात कब तक।

1222/1222/122

खुदा से पूछता ये बात कब तक।

कि सुधरेंगे मिरे हालात कब तक।।

मैं शर्मा हूँ कि वर्मा हूँ कि क्या हूँ

भला पूछोगे मेरी ज़ात कब तक।।

ज़माने कम से कम ये तो बता दे।

मुझे मिलती रहेगी मात कब तक।।

उजालों से हमेशा पूछता हूँ।

रहेगी ये अँधेरी रात कब तक।।

मेरे आकाश से होती रहेगी।

सुनो तेज़ाब की बरसात कब तक।।

वो देखेगा मुझे मुड कर कभी क्या।

वो समझेगा मिरे जज़्बात कब…

Continue

Posted on September 3, 2014 at 7:30pm — 18 Comments

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