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ग़ज़ल : खुदा से पूछता ये बात कब तक।

1222/1222/122

खुदा से पूछता ये बात कब तक।

कि सुधरेंगे मिरे हालात कब तक।।

मैं शर्मा हूँ कि वर्मा हूँ कि क्या हूँ

भला पूछोगे मेरी ज़ात कब तक।।

ज़माने कम से कम ये तो बता दे।

मुझे मिलती रहेगी मात कब तक।।

उजालों से हमेशा पूछता हूँ।

रहेगी ये अँधेरी रात कब तक।।

मेरे आकाश से होती रहेगी।

सुनो तेज़ाब की बरसात कब तक।।

वो देखेगा मुझे मुड कर कभी क्या।

वो समझेगा मिरे जज़्बात कब तक।।

(मौलिक और अप्रकाशित)

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 10, 2014 at 3:18pm

खूबसूरत ग़ज़ल हुई है भाई केतन कमाल जी, दिली दाद हाज़िर है।

Comment by Ketan Kamaal on September 8, 2014 at 5:42pm

gumnaam pithoragarhi Ji sadar shukriya aapka

Comment by gumnaam pithoragarhi on September 6, 2014 at 5:13pm

मैं शर्मा हूँ कि वर्मा हूँ कि क्या हूँ

भला पूछोगे मेरी ज़ात कब तक।।,,,,,,वाह

उजालों से हमेशा पूछता हूँ।

रहेगी ये अँधेरी रात कब तक।।

सुन्दर ग़ज़ल...बधाई.

Comment by Ketan Kamaal on September 5, 2014 at 5:51pm

Shukriya Mohtarma aapka Nawazish ke liye

Comment by MAHIMA SHREE on September 5, 2014 at 5:08pm

खुदा से पूछता ये बात कब तक।

कि सुधरेंगे मिरे हालात कब तक।।

मैं शर्मा हूँ कि वर्मा हूँ कि क्या हूँ

भला पूछोगे मेरी ज़ात कब तक।।....लाजवाब ..बाकमाल ग़ज़ल हुयी है ..बधाई बधाई 

Comment by Ketan Kamaal on September 5, 2014 at 4:01pm

Shukriya sabhi hazraat ka nawazish ke liye

Comment by Ketan Kamaal on September 4, 2014 at 10:21pm
बहुत शुक्रिया आप सभी आदरणीय भाइयो और बड़ो का आशीर्वाद बना रहे।
Comment by Ram Awadh VIshwakarma on September 4, 2014 at 6:43pm

केतन जी आप के सभी शेर बोलते हुए हैं उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2014 at 5:28pm

लाजवाब , आदरणीय केतन भाई , सभी अश आर बढ़िया कहे हैं , हार्दिक बधाइयाँ |

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 4, 2014 at 4:53pm

वाह केतन भाई ..वाह "कमाल" का कमाल 

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