For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डॉ नूतन डिमरी गैरोला
Share

डॉ नूतन डिमरी गैरोला's Friends

  • Manav Mehta
  • गिरिराज भंडारी
  • arvind ambar
  • Drshorya Malik
  • Abhishek Kumar Jha Abhi
  • CHANDRA SHEKHAR PANDEY
  • Madan Mohan saxena
  • Dr Babban Jee
  • RAMESH YADAV
  • Kishorekant
  • Sumit Naithani
  • D P Mathur
  • यशोदा दिग्विजय अग्रवाल
  • Dr Lalit Kumar Singh
  • कल्पना रामानी

डॉ नूतन डिमरी गैरोला's Groups

 

डॉ नूतन डिमरी गैरोला's Page

Profile Information

Gender
Female
City State
देहरादून
Native Place
जोशीमठ
Profession
Medical, चिकित्सीय , स्त्री रोग विशेषज्ञ
About me
एक आम इंसान जो एक लेखक कवि और चिकित्सक भी है|

डॉ नूतन डिमरी गैरोला's Photos

  • Add Photos
  • View All

डॉ नूतन डिमरी गैरोला's Videos

  • Add Videos
  • View All

डॉ नूतन डिमरी गैरोला's Blog

केतली में उज़ाला

उसने खौला लिया था सूरज एक चम्मच चीनी के साथ

वह जीवन के कडुवे अंधेरों में कुछ मिठास घोलना चाहता था 

उसके दिन के उजाले चाय के कप में डूबे हुए थे 

और उसका सूरज

ताजगी देता हुआ जीवन की उष्मा से भरपूर

गर्म शिप बनकर उतर आता था लोगों की जिव्हा पर …

Continue

Posted on November 7, 2014 at 11:00am — 16 Comments

माटी का आसमान

वह माटी  थी पर नहीं थी वह  ...जिसे कुम्हार ने माजा चाक पे चढ़ाया, गढा, चमकाया बाजार  में बिठाया ... वह तो किस्मत की धनी थी पर वह ?  वह तो सिर्फ उसके बगिया की माटी  थी  उसके पैरों तले गाहे बगाहे आ जाती  ... कुचली जाती रही .. टूटती रही, खोदी जाती रही, तोडी जाती रही ..... और बदले में रंगबिरंगे फूलों से फलों से  अपनी हरियाली को सजा कर बगिया को महकाती रही .... यही तो था  उन् दोनों के अपने अपने हिस्से का आसमान .. लेकिन उन् दोनों के लिए एक आसमान से इतर एक दूसरा आसमान किसी बंद दरवाजे से बाहर भीतर…

Continue

Posted on October 4, 2013 at 9:30pm — 17 Comments

वह जो नहीं कर सकती है, वह कर जाती है .

वह जो नहीं कर सकती वह कर जाती है ...

घंटों वह अपनी एक खास भाषा मे हँसती है

जिसका उसे अभी अधूरा ज्ञान भी नहीं

उसके ठहाके से ऐसे कौन से फूल झड़ते है

जो किसी खास जंगल की पहचान है .... ...



जबकि उसकी रूह प्यासी है

और वह रख लेती है निर्जल व्रत 

सुना है कि उसके हाथों के पकवान

से महका करता था पूरा गाँव भर 

और घर के लोग पूरी तरह जीमते नहीं थे 

जब तक कि वे पकवान मे डुबो डुबो कर

बर्तन के पेंदे और 

अपनी उँगलियों को चाट नहीं लेते अच्छी तरह…

Continue

Posted on August 19, 2013 at 9:00am — 11 Comments

खनखनाता रुपैया मेरे देश का --

मेरे आजाद देश की  

बेहतरीन खिलाडी

बिना डोपिंग परिक्षण के, 

महंगाई हो गई है

दौड़ती है सबसे आगे

तेज धावक की तरह

मारती है सबसे ऊँची

छलांग

पहुंचना चाहती है

सबसे पहले  

बाहरवें आसमान|

और रुपया बेचारा

मुंह उतारे

लुढ़क रहा है नीचे नीचे

अपना ही बाजार सौतेला हो गया जिसके लिए

जैसे इस मंडी से नाराज  

वह मुंह छुपाना चाहता हो

प्रचलन से बाहर किसी तरह से

निकल आना चाहता हो

वह…

Continue

Posted on August 15, 2013 at 6:00am — 13 Comments

Comment Wall (19 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:29pm on July 31, 2013, Dr Ashutosh Mishra said…

आदेर्नीया नूतन जी आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को शामिल पाकर मैं प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ ..एक बार पुनः आभार के साथ

At 8:00pm on July 28, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

स्वागत है आपका आदरणीया डॉ नूतन डी गैरोला जी  आपकी मित्रता

स्वीकार करते हुए बड़ी प्रसन्नता हो रही है | सादर 

At 11:05am on July 28, 2013, Pradeep Bahuguna Darpan said…

आपका लेखन जितना शानदार है उतना ही प्रभावपूर्ण भी.... अपने निकट (देहरादून) से  ऐसे व्यक्तित्व को 

इस मंच पर पाकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ ... हार्दिक बधाई ... 

At 5:02pm on July 14, 2013, Vindu Babu said…
आदरेया गिरौला जी सर्वश्रेष्ट रचना के लिए पुरस्कृत होने के लिए सादर बधाई स्वीकारें मेरी तरफ से भी।
At 4:09pm on July 14, 2013, Abhinav Arun said…

सुविख्यात रचनाकार डॉ नूतन जी को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना पुरस्कार प्रदान किये जाने पर हार्दिक बधाई !!

At 5:28pm on July 11, 2013, Dr Ashutosh Mishra said…

आदेर्नीया नूतन जी ..केक देखा जो संभवतः अब नहीं होगा ..तो जनम दिन की बधाई न दे पाना भी याद आया ..आपको जनम दिन की बधाई ..महीने की सर्वश्रेष्ट रचना की रचनाकार होने के पर भी मेरी और से हार्दिक बधाई ..मैं ब्लॉग पर तो आपकी कवितायें पढने का लुत्फ़ उठाता ही रहता हूँ ..सादर 

At 7:31pm on July 10, 2013, ram shiromani pathak said…

आदरणीया जन्म दिन की हार्दिक शुभकामना ///

At 2:45pm on July 10, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक मंगल काम्नानाए | प्रभु आको खुशाहाल रखे और विकास के मार्ग पर अग्रसर कर 

घर परिवार, समाज, राष्ट्र में योगदान हेतु संबल प्रदान करे | शुभम 

At 2:33pm on July 10, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:47am on July 9, 2013, कल्पना रामानी said…

नूतन जी, आपकी मित्रता से मन बहुत हर्षित हुआ। माह की सर्वश्रेष्ठ रचना सम्मान पाने पर आपको बहुत बहुत बधाई !

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"प्रिय रुपम बहुत शुक्रिया ,बालक.ऐसे ही मिहनत करते रहो.बहुत ऊपर जाना है. सस्नेह"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"जनाब रूपम कुमार जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत शुक्रिय: ।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"जनाब रूपम कुमार जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत शुक्रिय: ।"
7 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह posted a blog post

परम पावनी गंगा

चन्द्रलोक की सारी सुषमा, आज लुप्त हो जाती है। लोल लहर की सुरम्य आभा, कचरों में खो जाती है चाँदी…See More
7 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"दर्द बढ़ता ही जा रहा है,"समर" कैसी देकर दवा गया है मुझे  क्या शेर कह दिया साहब आपने…"
7 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"समर कबीर साहब आपकी ग़ज़ल पढ़ के दिल खुश हो गया मुबारकबाद देता हूँ इस बालक की बधाई स्वीकार करे !!! :)"
7 hours ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

ये ग़म ताजा नहीं करना है मुझको

१२२२/१२२२/१२२ ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको वफ़ा का नाम अब डसता है मुझको[१] मुझे वो बा-वफ़ा लगता…See More
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गंगादशहरा पर कुछ दोहे
"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन । दोहों पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
7 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( हम सुनाते दास्ताँ फिर ज़िन्दगी की....)
"खूब ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद हार्दिक बधाई सालिक गणवीर  सर "
7 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गंगादशहरा पर कुछ दोहे
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत बढ़िया दोहे मन प्रसन्न हो गया सादर बधाई कुबूल कीजिए"
8 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)
"मुझे भी तुम अगर तिनका बनाते हवा के साथ उड़ जाता कभी मैं बनाया है मुझे सागर उसीने हुआ करता था इक…"
8 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"क्या रदीफ़ ली है सालिक गणवीर  सर आपने वाह!"
8 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service