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Euphonic Amit
  • Male
  • New Delhi
  • India
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Euphonic Amit commented on Mamta gupta's blog post गजल
"अच्छी ग़ज़ल कही आपने बधाई "
Monday
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"उस्ताद-ए-मुहतरम आदरणीय समर कबीर साहिब की आज्ञानुसार :- "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक 168 को सफ़ल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक आभार व धन्यवाद ।" शब-बख़ैर"
Jun 28
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"//मेरा दिल जानता है मैंने कितनी मुश्किलों से इस आयोजन में सक्रियता बनाई है।// आदरणीय गुरुदेव आप सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें ईश्वर से हमारी यही प्रार्थना है।"
Jun 28
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"//उर्दू ज़बान सीख न पाए अगर जनाब वाक़िफ़ कभी न होंगे ग़ज़ल के हुनर से हम'// सत्यवचन गुरुदेव। सादर प्रणाम आपको "
Jun 28
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"जनाब Aazi Tamaam जी वाक़िफ़ हुए हैं जब से ज़माने के शर से हम १ डरने लगे हैं कितने निकलने में घर से हमडर डर के तब से यार निकलते हैं घर से हम अपनी ख़ता नहीं ये मुक़द्दर का खेल है २उस ओर ग़म के साये थे गुज़रे जिधर से हमसाये मिले हैं दर्द के गुज़रे जिधर…"
Jun 28
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"दफ़'अ दफ़ २ 'अ १ दफ़ का उच्चारण एक साथ २ और 'अ (ऐन) १ को अलग से उच्चारित किया जाता है। जैसे शह्र २ र १= शह्र दर् २ द १ = दर्द शम् २ 'अ१ = शम'अ"
Jun 28
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय Aazi Tamaam जी आदाब। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। २२१ २१२१ १२२१ २१२ वाक़िफ़ हुए हैं जब से जहाँ के हुनर से हम डरने लगे हैं अपने ही दीवार-ओ-दर से हम १ 'हुनर' की जगह 'शर' क़ाफ़िया रखने पर विचार करें। मरने का…"
Jun 28
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय Dayaram Methani जी आदाब  ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। ग़ज़ल 221 2121 1221 212 - मस्ती भरी जवानी से क्यों बेख़बर से हम बदनाम / हम हुए ऐ /से बिगड़े कि/धर से हम कृपया सानी की बह्र जाँच लें  - उलझाया था कई दफा तो सोचना…"
Jun 27
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय Richa Yadav जी आदाब अच्छी ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकार करें।"
Jun 27
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय Chetan Prakash जी आदाब  ग़ज़ल के अच्छे प्रयास पर बधाई स्वीकार करें। 221 2121 1221 212 अनजान/ कब स मन् दर / जो तेरे कह् /र से हम रहते हैं बचके आज भी मौजों के घर से हम कह्र का वज़्न 21 होगा  कब डूब जाए कश्ती हमें भी पता नहीं जाते…"
Jun 27
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय DINESH KUMAR VISHWAKARMA जी आदाब  ग़ज़ल के अच्छे प्रयास पर बधाई स्वीकार करें। निकले न थे कभी जो किनारों के डर से हम किश्ती बचा रहे हैं अभी इक भँवर से हम । 1 निकले कभी न घर से समंदर के डर से हम कश्ती बचा रहे हैं मगर इक भँवर से हम ।…"
Jun 27
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय Zaif जी आदाब  अच्छी ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकार करें। //हम ख़ुद से लड़ के रात कहीं भाग आए थे ख़ुद को मनाने आ रहे हैं आज घर से हम// इसे और बिहतर तरीक़े से लिखने पर विचार करें।        // शुभकामनाएँ //"
Jun 27
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब  ग़ज़ल के अच्छे प्रयास पर बधाई स्वीकार करें।"
Jun 27
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी जी आदाब  अच्छी ग़ज़ल कही आपने बधाई स्वीकार करें। //सर-गर्म थीं हमारे ही दम से ये महफ़िलें देखे क/ भी न जाते / थे यूँ तंग/-नज़र से ह म // कृपया सानी की बह्र देख लें, सादर।।"
Jun 27
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय संजय शुक्ला जी आदाब, ग़ज़ल के अच्छे प्रयास पर  बधाई स्वीकार करें। मय्यत पे जो भी आए वो हँसता हुआ दिखे रोना मना है कह चुके हैं नौहागर से हम /2 सहीह शब्द है मन'अ 21  " रोना है मन'अ  कह चुके हैं नौहागर से हम…"
Jun 27
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-168
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। //नासेह सौ खड़े हों तो सब सोचना फ़ुज़ूल, केवल ये सोचना है कि भागे किधर से हम।// सहीह शब्द है नासिह 22  //आए न काम जो उसे बिलकुल न कीजिए, कॉलेज में ये बात भी सीखे गदर…"
Jun 27

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At 10:24am on April 9, 2024, Erica Woodward said…

I need to have a word privately, please get back to me on ( mrs.ericaw1@gmail.com) Thanks.

 
 
 

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जयनित कुमार मेहता commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"आदरणीय आज़ी तमाम जी, सादर नमस्कार! बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने। इसके लिए आपको हार्दिक बधाई प्रेषित…"
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Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक .. इच्छा , कामना, चाह आदि
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Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"बहुत बहुत शुक्रिया इस ज़र्रा नवाज़ी का आ चेतन जी"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक .. इच्छा , कामना, चाह आदि
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय ।"
Tuesday

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