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Sarita Sinha
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Sarita Sinha and अनिल कुमार 'अलीन' are now friends
Apr 19, 2014
Sarita Sinha and Sumit Naithani are now friends
Jun 28, 2013
Sarita Sinha commented on Sonam Saini's blog post जीवन में जिन्दगी का माँ एहसास हो तुम .........
"माँ के लिए बहुत प्यारी अभिव्यक्ति......बधाई...आपकी माँखुशकिस्मत हैं..."
May 7, 2013
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Sarita Sinha's blog post मुआवज़ा दे दिया और काम ख़तम...
"न्याय व्यवस्था की बेबसी, क्या कर्मशील के लिए कोई बेबसी नहीं होती, मद्रास हाईकोर्ट में जस्टिस च्नाद्रू औसतन ६० फैसले रोज  सुनारे है (देखे मेरी राधना "काम करे निष्काम-लक्ष्मण लडीवाला") रचना के  कथ्य के लिए बधाई सरिता सिन्हा जी "
Mar 7, 2013
JAWAHAR LAL SINGH commented on Sarita Sinha's blog post मुआवज़ा दे दिया और काम ख़तम...
"दिन प्रतिदिन बढ़ते अपराध से मन बहुत ही दुखी है! कही कोई लगाम नहीं लग रही. न्याय ब्यवस्था की बेबसी भी अजीब है कि सजा भी नहीं मिलती जल्द किसी भी अपराधी को..... "
Mar 7, 2013
ram shiromani pathak commented on Sarita Sinha's blog post मुआवज़ा दे दिया और काम ख़तम...
"हार्दिक बधाई इस रचना पर."
Mar 6, 2013
Sonam Saini liked Sarita Sinha's blog post मुआवज़ा दे दिया और काम ख़तम...
Mar 6, 2013
Sarita Sinha posted a blog post

मुआवज़ा दे दिया और काम ख़तम...

क़लम कोमा मे आ गयी है मेरी,ब्रेनस्ट्रोक ज़बरदस्त लगा है इसको, रगों मे दौड़ती स्याही पे बड़ा प्रेशर है, क्या लिखे, क्या ना लिखे, कितना चले, कैसे चले, सुना था तेज़ चलेगी ये तलवार से भी, इस दफ़ा खुद ही कट के रह गयी ज़ुबान इसकी, कोई राजा है नाम का मगर पिशाच है वो, नहीं रघुराज का, प्रताप है रावण का वो, तोड़ देता है वो उंगली जो उठी हो उस पर, फोड़ देता है वो आँखे ,उसे तरेरे जो, क्या मज़ाल कर ले कोई ओवरटेक गाड़ी उसकी, कुचल देता है पल में ऐसा कर के देखे कोई, करोड़ों रखे है , फिर भी भूखा है अभी, काले…See More
Mar 5, 2013
Sonam Saini commented on Sarita Sinha's blog post जागतीआँखें .. टूटते ख्वाब...
"आदरणीय मैम नमस्कार....... दोस्ती लफ्ज़ से नफ़रत थी हमको पहले भी, रहा सहा यकीं भी उठ गया अच्छा ही हुआ..... sahi kaha .......................... अफसुर्दा होना मेरा तेरा ही अत्फ़ था तेरे ही तसव्वुर से आब-ए-चश्म यार निकले ......"
Mar 4, 2013
Sarita Sinha liked Admin's blog post ओ बी ओ सदस्य डॉ सूर्या बाली "सूरज" को मिला “अनस्टापेबल इंडियन” पुरस्कार
Feb 27, 2013
Sarita Sinha and ajay yadav are now friends
Feb 21, 2013

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on Sarita Sinha's blog post जागतीआँखें .. टूटते ख्वाब...
"दर्दे ग़मों की जमीन पर रची गई यह रचना बरबस आकर्षित करती है , आदरणीया सरिता सिन्हा जी , आपकी और रचना तथा साथी सदस्यों की रचनाओं पर आपके बहुमूल्य विचार आमंत्रित हैं । इस अभिव्यक्ति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 16, 2013
Sarita Sinha commented on mrs manjari pandey's blog post माँ सरस्वती के चरणों में अर्पित आज का पुष्प।
"बहुत खूब मंजरी जी, अच्छा है कि पानी विहीन आँखें और दूध विहीन आँचल देखने को आज मैथिलिशरण गुप्त जी नही हैं..अच्छी रचना की बधाई.."
Feb 15, 2013
Sarita Sinha commented on Sarita Sinha's blog post जागतीआँखें .. टूटते ख्वाब...
"मंजरी दी, अपने समय दिया , बहुत बहुत धन्यवाद,..."
Feb 15, 2013
Sarita Sinha left a comment for अरुन शर्मा 'अनन्त'
"महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई अरुण जी.."
Feb 15, 2013
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on Sarita Sinha's blog post जागतीआँखें .. टूटते ख्वाब...
"जो हुआ अच्छा हुआ  जो होगा वो भी अच्छा होगा  सुन्दर गजल  बधाई, ईश पुत्री  सस्नेह "
Feb 15, 2013

Profile Information

Gender
Female
City State
up
Native Place
allahabad
Profession
homemaker
About me
wherever i go , i steal the show...

Sarita Sinha's Blog

मुआवज़ा दे दिया और काम ख़तम...

क़लम कोमा मे आ गयी है मेरी,

ब्रेनस्ट्रोक ज़बरदस्त लगा है इसको,

रगों मे दौड़ती स्याही पे बड़ा प्रेशर है,

क्या लिखे, क्या ना लिखे, कितना चले, कैसे चले,

सुना था तेज़ चलेगी ये तलवार से भी,

इस दफ़ा खुद ही कट के रह गयी ज़ुबान इसकी,…

Continue

Posted on March 5, 2013 at 4:30pm — 3 Comments

जागतीआँखें .. टूटते ख्वाब...

पत्थरों के शहर मे दिल ही टूटते थे अभी,

भरम भी टूट गया अब के, अच्छा ही हुआ..

दोस्ती लफ्ज़ से नफ़रत थी हमको पहले भी,

रहा सहा यकीं भी उठ गया अच्छा ही हुआ..

खुली थी आँखें फिर भी नींद आ गयी जाने,

तुमने झकझोर के जगा दिया अच्छा ही हुआ..

ज़मीन होती क़दम तले तो भला गिरते क्यों,

हवा मे उड़ने का अंजाम मिला अच्छा ही हुआ..

ख्वाब था या के हादसा था जो गुज़र ही गया,

यकीं से अपने यकीं उठ गया अच्छा ही हुआ..

यूँ भी मुर्दे पे सौ मन मिट्टी थी पहले से,

एक मन और पड़ गयी…

Continue

Posted on February 13, 2013 at 11:52pm — 16 Comments

कही अनकही...

ख्वाबों की दुकान से ख़रीदे थे अरमानो के बीज,

सोचा था रोपूँगी   एहसास की ज़मीं पे...
कहा था तुमसे सींच देना , क़द्र के पानी से अपने, 
कल जो देखा तो चिटक गयी थी…
Continue

Posted on June 14, 2012 at 3:30pm — 4 Comments

ऐसे ही बस..

(1)

जो ग़ालिब थे , मेरे जैसी ही उन पर भी गुज़रती थी,

अगर और जीते वो तो उनको क्या मिला होता....



डुबोया हम दोनों को अपने अपने जैसे होने ने,

वो न होते तो क्या होता , मैं न होती तो क्या…

Continue

Posted on May 18, 2012 at 2:30pm — 20 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 8:46pm on April 14, 2012, Admin said…

At 7:20am on April 13, 2012, JAWAHAR LAL SINGH said…

adarneey sarita bahan aapne sahee samjha hai.

copy paste kariye aur hindi ko badhawa deejiye!

At 5:06pm on April 8, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

snehi ish putri, sadar 

aapka ye comment maine apni profile par mera panna main dekha hai. aapke comment ke niche likha hai comment back. maine vahan click kiya aur vo sidhe le aaya aapki profile par. vaha box main ya aapke comment par pratikriya de raha hoon. aap mere blog par practical kar sakti hain . chama ki koi baat nahi. yahan ka vatavaran itna swaksh evam sukhad hai ki koi bura nahi manta, aur har prakar se madad karta hai chahen sathi lekhak ho ya obo prabandhan team. kisi ke bolg par yadi apko coment karna hai to vahin box main coment likhiye. yadi aapke blog par kisi ko dhanyvad gyapan karna hai to niche se shuru kijiye aur bari bari baox main uttar dijiye kam ho gaya.

apki badhai swikar hai, ye aap logon ke parishram evam sneh ka pratifal hai. asha hai aesa sneh banaye rakhengi.dhanyvad.

At 9:10pm on April 6, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

snehi, sarita ji, saadar aapka swagat evam hardik abhinandan. 

 
 
 

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