ख्वाबों की दुकान से ख़रीदे थे अरमानो के बीज,
Comment
आदर्य सरिता सिन्हा जी,
आपकी कवितायें बांच कर बहुत अच्छा लगा .
वो बीज मैं गलत उठा लायी लगता है,
लगा कि कविता की कला अपने पूर्ण कौशल के साथ साक्षात खड़ी है,,,,,,,, लगा कि सम्बन्धों में आई दरारें संवेदना के आँचल में से झांक रही हैं,,,,,,,लगा कि नारी हृदय की कोमलकांत भावनाओं को प्रखर स्वर मिल गया है ..........
आपकी लेखनी से निकले हर शब्द को मेरा सादर नमन
ईश पुत्री , सस्नेह
वो बीज मैं गलत उठा लायी लगता है,
नमस्कार मैम
जितनी भी तारीफ की जाये कम है , बहुत गहरी बाते है
कई बार पढ़ी , इतनी गहराई से वही इंसान लिख सकता है जो महसूस कर चूका हो !
इतने कम शब्दों में इतने सवाल पूछ लिए .और दर्द और अहसाश की नक्काशी जो उतारी है अपने .बहुत सुन्दर सरिता जी ...बधाई सा सम्मान स्वीकार करें सरिता जी
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