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Santosh khirwadkar's Blog (35)

क़ैद मैं....संतोष

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फेलुन

क़ैद मैं, कैसे दायरे में हूँ

कौन है जिसके सिलसिले में हूँ

आप तो मीठी नींद सोते हैं

और मैं सदियों…

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Added by santosh khirwadkar on December 26, 2018 at 7:00am — 4 Comments

मिट गए नक़्श सभी....संतोष

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन/फ़इलुन

मिट गये नक़्श सभी दिल के दिखाऊँ कैसे

एक भुला हुआ क़िस्सा मैं सुनाऊँ कैसे

जा चुका है…

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Added by santosh khirwadkar on November 13, 2018 at 1:06pm — 14 Comments

क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष

अरकान:

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फेलुन

क़ैद मैं, कैसे दायरे में हूँ

कौन है जिसके सिलसिले में हूँ

आप तो मीठी नींद सोते हैं

और…

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Added by santosh khirwadkar on October 26, 2018 at 9:11am — 15 Comments

बीते लम्हों को चलो .....संतोष

अरकान:-

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन

बीते लम्हों को चलो फिर से पुकारा जाए

वक़्त इक साथ सनम मिलके गुज़ारा जाए

तोड़कर आज ग़लत…

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Added by santosh khirwadkar on September 26, 2018 at 8:22am — 12 Comments

फिर ज़ख़्मों को ...संतोष

अरकान:-

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फ़ा

फिर ज़ख़्मों को धोने का दिल करता है

चुपके चुपके रोने का दिल करता है

जब जब…

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Added by santosh khirwadkar on August 22, 2018 at 10:09pm — 14 Comments

दिल के नज़दीक से ....”संतोष”

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन/फ़इलुन

दिल के नज़दीक से गुज़रो तो बता कर जाना

ये भी चाहत की है इक रस्म निभा कर…

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Added by santosh khirwadkar on July 23, 2018 at 7:08pm — 10 Comments

उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन

उसने बिखरे काग़ज़ों को छू के संदल कर दिया

इक अधूरी सी ग़ज़ल को यूँ मुकम्मल कर दिया

कुछ तो दीवाना…

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Added by santosh khirwadkar on June 30, 2018 at 8:30am — 18 Comments

क्या सबब था...संतोष

अरकान फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

क्या सबब था,किसलिये दुनिया से मैं डरता रहा

सर झुका कर जिसने जो भी कह दिया करता रहा



सी दिया था मेरे होटों को ज़माने ने मगर

ज़िक्र सुब्ह-ओ-शाम तेरा फिर भी मैं करता रहा



ज़िन्दगी के रास्ते में ज़ख़्म जो मुझको मिले

चुपके चुपके प्यार के मरहम से वो भरता रहा



जाते जाते वो मुझे कह कर गये थे इसलिये

लम्हा लम्हा ज़िन्दगी जीता रहा मरता रहा



सादगी की मैंने ये क़ीमत चुकाई उम्र…

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Added by santosh khirwadkar on June 3, 2018 at 4:34pm — 12 Comments

यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!

अरकान:-

मफ़ऊल फ़ाईलात मफ़ाईल फ़ाइलुन



यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया,

इंसा जिसे बनाया था हैवान हो गया।।



भेजा था इसको अम्न की ख़ातिर जहान में,

कैसे ख़िलाफ़ अम्न के इंसान हो गया।।



शैतान का भी शर्म से देखो झुका है सर,

इंसान ख़ुद ही आज तो शैतान हो गया।।



चिंता में बेटियों की हर इक बाप है यहाँ,

अब क्या बताऊँ मैं तो परेशान हो गया।।



ढाये यहाँ पे गंदी सियासत ने वो सितम,

लगता है जैसे मौत का सामान हो गया।।…

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Added by santosh khirwadkar on May 11, 2018 at 8:30pm — 6 Comments

गुज़रे वक़्तों की वो तहरीर.....संतोष

अरकान:-

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन

गुज़रे वक़्तों की वो तहरीर सँभाले हुए हैं,

दिल को बहलाने की तदबीर सँभाले हुए हैं।।

बाँध रक्खा है हमें जिसने अभी तक जानाँ,

हम महब्बत की वो ज़ंजीर सँभाले हुए हैं।।

देखते रहते हैं अजदाद के चहरे जिसमें,

हम वफ़ाओं की वो तस्वीर सँभाले हुए हैं।।

जिन लकीरों में नजूमी ने कहा था,तू है,

दोनों हाथों में वो तक़दीर सँभाले हुए हैं।।

वस्ल की शब…

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Added by santosh khirwadkar on April 17, 2018 at 11:21am — 16 Comments

खुली आँखें हैं और सोया हुआ हूँ ...संतोष

अरकान:-

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन

खुली आँखें हैं,पर सोया हुआ हूँ

तुम्हारी याद में डूबा हुआ हूँ।।



बदन इक दिन छुआ था तुमने मेरा

उसी दिन से बहुत महका हुआ हूँ।।



मुझे पागल समझती है ये दुनिया

तसव्वुर में तेरे खोया हुआ हूँ।।



जहाँ तुम छोड़कर मुझको गये थे

उसी रस्ते पे मैं बैठा हुआ हूँ।।



ख़ुदा का है करम 'संतोष' मुझ पर

हर इक महफ़िल पे मैं छाया हुआ हूँ।।

#संतोष_खिरवड़कर

(मौलिक एवं…

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Added by santosh khirwadkar on March 29, 2018 at 4:30pm — 12 Comments

ज़िंदगी से दूर कब तक.....संतोष

अरकान:फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन

ज़िन्दगी से दूर कब तक जाओगे,

किस तरह सच्चाई को झुटलाओगे।।

सादगी इतनी मियाँ अच्छी नहीं,

ज़िन्दगी में रोज़ धोका खाओगे।।

तल्ख़ यादें दिल से मिटती ही नहीं,

ज़िन्दगी में चैन कैसे पाओगे।।

तुम ग़मों को मात देना सीख लो,

अश्क पीकर कब तलक ग़म खाओगे।। 

अपनी कमज़ोरी को ज़ाहिर मत करो,

वरना हर सौदे में घाटा खाओगे।।

(मौलिक एवं…

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Added by santosh khirwadkar on March 12, 2018 at 11:00pm — 15 Comments

तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”

 

फ़ाइलातुन फ़ईलातुन फ़ईलातुन फ़ेलुन

तेरे नज़दीक ही हर वक़्त भटकता क्यों हूँ

तू बता फूल के जैसा मैं महकता क्यों हूँ

मैं न रातों का हूँ जुगनू न कोई तारा पर

उसकी आँखों में मगर फिर भी चमकता क्यों हूँ

इस पहेली का कोई हल तो बताओ यारो

हिज्र की रातों में आतिश सा दहकता क्यों हूँ

घर बनाया है तेरे दिल में उसी दिन से सनम

सारी दुनिया की निगाहों में खटकता क्यों हूँ

हासिदों को बड़ी तश्वीश है इसकी…

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Added by santosh khirwadkar on January 20, 2018 at 11:21am — 8 Comments

पहले था अश्क़बार...संतोष....

फ़ाइलातून मफ़ाईलुन फेलुन

पहले था अश्क़बार आज भी है
दिल मेरा सोगवार आज भी है

मैं नहीं हूँ किसी भी लायक़ पर
आपको एतिबार आज भी है

जो था पहले वही है रिश्ता-ए-दिल
प्यार वो बे-शुमार आज भी है

इश्क़ आँखें बिछाए बैठा है
आपका इन्तिज़ार आज भी है

लाख दुनियां ने तोड़ना चाहा
दिल से दिल का क़रार आज भी है

#संतोष

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by santosh khirwadkar on December 23, 2017 at 6:04am — 12 Comments

धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष

ग़ज़ल

मफ़्ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फाइलुन

धोखे ने मुझको इश्क़ में क्या क्या सिखा दिया

गिरना सिखा दिया है,सँभलना सिखा दिया

रोती थीं ज़ार ज़ार ये,वादे ने आपके

आँखों को इन्तिज़ार भी करना सिखा दिया

सूरज की तेज़ धूप बड़ा काम कर गई

ख़्वाबों के दायरे से निकलना सिखा दिया

अपनों की ठोकरों ने गिराया था बारहा

ग़ैरों ने सीधी राह पे चलना सिखा दिया

"संतोष"दुश्मनों का करूँ शुक्र किस तरह

मुझको भी दोस्ती का सलीक़ा सिखा…

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Added by santosh khirwadkar on December 14, 2017 at 8:30pm — 12 Comments

भुलाने के लिए राज़ी...संतोष

ग़ज़ल

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन

भुलाने के लिए राज़ी तुझे ये दिल नहीं होता

तभी तो याद से तेरी कभी ग़ाफ़िल नहीं होता

महब्बत को अभी तक मैंने अपनी राज़ रक्खा है

तुम्हारा ज़िक्र यूँ मुझसे सरे महफ़िल नहीं होता

तुझे ही ढूँढता रहता मैं अपने आप में हर दम

सनम तू मेरे जीवन में अगर शामिल नहीं होता

दग़ा देना ही आदत बन गई हो जिसकी ऐ यारो

भरोसे के कभी वो आदमी क़ाबिल नहीं होता

हमेशा बीज बोता है जो…

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Added by santosh khirwadkar on December 8, 2017 at 9:30am — 11 Comments

कुछ मिठास पाने को .....संतोष

फ़ाइलुन मफ़ाईलुन फाइलुन मफ़ाईलुन



कुछ मिठास पाने को तल्खियाँ ज़रूरी हैं

क़ुर्ब के लिए जैसे दूरियाँ ज़रूरी हैं



सिर्फ़ रोने धोने से दिल न उनका पिघलेगा

साथ अश्क बारी के सिसकियाँ ज़रूरी हैं



तैर कर तो दरया को पार कर नहीं सकते

इसके वास्ते यारो किश्तियाँ ज़रूरी हैं



देख सूखी धरती में फ़स्ल उग नहीं सकती

बारिशों के मौसम में बदलियाँ ज़रूरी हैं



जब मकां बनाओ तो ध्यान ये भी रख लेना

धूप के लिए कुछ तो खिड़कियाँ ज़रूरी… Continue

Added by santosh khirwadkar on November 18, 2017 at 11:30am — 13 Comments

खेल दिल का अजीब होता है.....संतोष

फ़ाइलातून मफ़ाइलुन फेलुन

खेल दिल का अजीब होता है
कौन किसके क़रीब होता है

प्यार मिलता,किसी को रुसवाई
अपना अपना नसीब होता है

काम आए बुरे समय में जो
वो ही सच्चा हबीब होता है

प्यार है जिसके पास वो इंसां
इस जहाँ में ग़रीब होता है

राज़ जिसको बता दिया दिल का
वो ही मेरा रक़ीब होता है
#संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by santosh khirwadkar on October 26, 2017 at 4:59pm — 12 Comments

हुस्न को ......संतोष

अरकान:-फाइलुन मफ़ाईलुन

हुस्न को छुपा कर रख
तू इसे बचा कर रख

अक्स है मेरा इनमें
आँखों को झुका कर रख

इश्क़ है अगर तुझको
आरज़ू दबा कर रख

ज़िन्दगी का मारा हूँ
सीने से लगा कर रख

रौशनी मिले सबको
इक दिया जला कर रख
~संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by santosh khirwadkar on October 16, 2017 at 10:52pm — 5 Comments

है कौन....”संतोष”

अरकान:-फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़्इलातुन फेलुन



है कहाँ, कौन है,कैसा वो नज़र आता है

ख़ुद में कम मुझ में ज़ियादा वो नज़र आता है



क्या तअल्लुक़ है मेरा उससे बताऊँ कैसे

हर दुआ में मुझे चहरा वो नज़र आता है



तिश्नगी जब मुझे दीदार की तड़पाये तो

ऐसे हालात में दरया वो नज़र आता है



घेर लेते हैं मुझे जब भी अँधेरे ग़म के

मेरा हमदर्द अकेला वो नज़र आता है



तुमने पूछा कभी'संतोष'से जाकर यारो

किसलिये भीड़ में तन्हा वो नज़र आता है

#संतोष

(मौलिक… Continue

Added by santosh khirwadkar on October 11, 2017 at 8:53pm — 8 Comments

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