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यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!

अरकान:-
मफ़ऊल फ़ाईलात मफ़ाईल फ़ाइलुन

यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया,
इंसा जिसे बनाया था हैवान हो गया।।

भेजा था इसको अम्न की ख़ातिर जहान में,
कैसे ख़िलाफ़ अम्न के इंसान हो गया।।

शैतान का भी शर्म से देखो झुका है सर,
इंसान ख़ुद ही आज तो शैतान हो गया।।

चिंता में बेटियों की हर इक बाप है यहाँ,
अब क्या बताऊँ मैं तो परेशान हो गया।।

ढाये यहाँ पे गंदी सियासत ने वो सितम,
लगता है जैसे मौत का सामान हो गया।।

#संतोष_खिरवड़कर
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 577

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Comment by santosh khirwadkar on May 15, 2018 at 7:57pm

धन्यवाद आ.विजय जी !!!

Comment by vijay nikore on May 15, 2018 at 12:30pm

गज़ल अच्छी लगी। बधाई।

Comment by santosh khirwadkar on May 13, 2018 at 11:12am
प्रणाम आ. समर साहब ...शुक्रिया!!
अभी दुरुस्त कर लेता हूँ
Comment by santosh khirwadkar on May 13, 2018 at 11:11am
शुक्रिया भाई श्री निलेश जी
Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 13, 2018 at 8:40am

अच्छी ग़ज़ल हुई है संतोष दादा 
कहीं कहीं सपाट बयानी लग रही है..
सादर 

Comment by Samar kabeer on May 13, 2018 at 12:05am

जनाब संतोष जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

मतले के सानी मिसरे में 'इंसा' को ''इंसाँ" कर लें ।

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