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पहले था अश्क़बार...संतोष....

फ़ाइलातून मफ़ाईलुन फेलुन

पहले था अश्क़बार आज भी है
दिल मेरा सोगवार आज भी है

मैं नहीं हूँ किसी भी लायक़ पर
आपको एतिबार आज भी है

जो था पहले वही है रिश्ता-ए-दिल
प्यार वो बे-शुमार आज भी है

इश्क़ आँखें बिछाए बैठा है
आपका इन्तिज़ार आज भी है

लाख दुनियां ने तोड़ना चाहा
दिल से दिल का क़रार आज भी है

#संतोष

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 763

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Comment by santosh khirwadkar on January 29, 2018 at 8:33pm

धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र जी ....

Comment by नाथ सोनांचली on December 26, 2017 at 8:44am

आद0 सन्तोष खैरवाड़कर जी सादर अभिवादन। 

लाख दुनियां ने तोड़ना चाहा

दिल से दिल का क़रार आज भी है

वाह, बढ़िया गजल  कही आपने। बाधाइयाँ 

Comment by santosh khirwadkar on December 26, 2017 at 7:24am

धन्यवाद आदरणीय अजय जी ....

Comment by santosh khirwadkar on December 26, 2017 at 7:23am

शुक्रिया ,आदरणीय अफ़रोज़ साहब !!!

Comment by santosh khirwadkar on December 26, 2017 at 7:22am

आदरणीय समर साहब प्रणाम सहित धन्यवाद.....

Comment by santosh khirwadkar on December 26, 2017 at 7:21am

आदरणीय आरिफ़ साहब धन्यवाद.....

Comment by santosh khirwadkar on December 26, 2017 at 7:21am

आदरणीय बृजेश जी शुक्रिया....

Comment by Ajay Tiwari on December 25, 2017 at 12:03pm

आदरणीय संतोष जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.

Comment by Afroz 'sahr' on December 24, 2017 at 3:45pm
आदरणीय संतोष जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको।
" दुनियां" को दुनिया करलें,,,,
Comment by Samar kabeer on December 24, 2017 at 3:23pm

जनाब संतोष जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई,बधाई स्वीकार करें ।

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