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Sushil yadav's Blog (8)

लोग  ही जब  नजर को   चुराते रहे

मुतदारिक मुसम्मन सालिम

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन

212 212 212 212

 

लोग  ही जब  नजर को   चुराते रहे

पास मेरे खुदा   ख़ूब आते रहे

 

ऐब तेरे  कहीं जब  छुपाते रहे

वो गिनाते रहे हम लजाते रहे

 

याद में थी  गलतियाँ अनेकों जिसे

हम…

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:51am — No Comments

दोस्ती का हाथ हमसे भी

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

2122 2122 2122 212

दोस्ती का हाथ हमसे भी  मिलाते  जाइए

एक गुल जिंदा दिली की बस खिलाते  जाइए

 

मशवरा मै भूलता हूँ कब किसी का आजकल

बेसबब तोहमत  कहीं फिर   ना लगाते जाइए

 

इस सियासत की जड़ें ज्यादा कहीं गहरी …

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:49am — No Comments

लापता मैं    हो गया इक गुमशुदा के वास्ते

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

 

           2122 2122 2122  212

 

लापता मैं    हो गया इक गुमशुदा के वास्ते

मांग लूँ  मैं माफियाँ  हरदम ख़ता के वास्ते

 

जिंदगी की राह  में खोने लगा है आदमी

 खलबली सी है मची शर्मों -हया  के…

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:48am — No Comments

जो  नाजुक दौर में  हिलता  रहा है

हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन

 

1222 1222  122

जो  नाजुक दौर में  हिलता  रहा है

वो  कुर्सी का  मिरा   पाया रहा है

 

ये हाले जार पर मेरे किसी के

खयालों का कसीदा आ  रहा है

 

हमारी जिंदगी का फैसला भी

अदालत में…

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:47am — No Comments

बद-नसीबी क्या कहें हम आज जो हालत हुई

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

2122 2122 2122 212

 

बद-नसीबी क्या कहें हम आज जो हालत हुई

रोक कर पूछा किसी ने क्या कहीं दहशत हुई

 

ये जमाना है नहीं अपने लिए अब आजकल

छोड़ दें इसको अभी बस हार की हसरत हुई

 

हम अकेले ही सफर में …

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:46am — No Comments

कातिल  मुझे तू शहर का  कहते  रहा तो है

Muzare.a musamman aKHrab makfuuf mahzuuf

maf'uul faa'ilaat mufaa'iil faa'ilun

221 2121 1221 212

कातिल  मुझे तू शहर का  कहते  रहा तो है

चेहरा मिरा  करीब से देखा हुआ तो है

 

मेरी जुबां  पे ताले  पड़े थे कई  दिनों

यकता  मिरा गरीब  कहीं बोलता  तो है

 

अब कोतवाल शहर का निकला …

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:44am — No Comments

आज कितनी यहाँ नर्म  कमजोर है जिंदगी

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन

212 212 212 212 212

 

आज कितनी यहाँ नर्म  कमजोर है जिंदगी

लोग सब पीटते  शहर लतखोर है जिंदगी

 

एक बे जान सा  आदमी  है खड़ा बोलता

ढोल लेकर  गले  सामने  शोर है जिंदगी

 

शर्त मेरी नहीं मानता कोई भी  अजनबी

पालतू  सा …

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:43am — No Comments

तू   मुझे धोका दे कम  से कम मैं  पछता तो सकूँ

2122 2122 2122 212

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

2122  2122  2122  212

तू   मुझे धोका दे कम  से कम मैं  पछता तो सकूँ

याद मुझको तू न आए दिल को समझा तो सकूँ

 

छोड़ कर अब जा रहा हूँ शहर को  इस हाल में

दौर-ए-आफ़त भी अगर आए तुझे पा तो…

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:41am — No Comments

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