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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"नीलम जी, ये तेजवीर सिंह जी की लघुकथा नहीं,विनय जी की ग़ज़ल है, देखिये ।"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
" आदरणीय तेजवीर सिंह जी, अच्छी सन्देश परक लघुकथा की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें । "
6 hours ago
Shyam Narain Verma commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई । सादर "
6 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम जनाब समर कबीर साहब, त्रुटि की तरफ इंगित करने का शुक्रिया. सुधारने की कोशिश करता हूँ"
7 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
7 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आ बबिता गुप्ता जी"
7 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आ शेख शहज़ाद उस्मानी साहब"
7 hours ago
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,आपको ग़ज़ल कहते देख प्रसन्नता हुई,अच्छा प्रयास हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । अंतिम दो अशआर में क़ाफ़िया दोष है,देखियेगा ।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। दर्द अगर हद से बढ़ जाए हमने पिघलना सीख लिया है"
yesterday
विनय कुमार posted blog posts
yesterday
babitagupta commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"समय के साथ चलने से जिन्दगी थोडी सी आसान हो जाती है, बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय सर जी. "
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"जी,बिल्कुल। .... वक़्त/विज्ञान-तकनीक-विकास/विश्व-विकास/सामाजिक-आर्थिक-व्यावसायिक विकास अर्थात वक़्त के साथ, हालात के साथ हमने बदलना सीख लिया है। बेहतरीन यथार्थपूर्ण ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय विनय कुमार साहिब।"
Saturday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post हिचक--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ नीलम उपाध्याय जी"
Friday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post हिचक--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ शेख सहजाद उस्मानी साहब"
Friday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post हिचक--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ तस्दीक़ अहमद खान साहब"
Friday
Neelam Upadhyaya commented on विनय कुमार's blog post हिचक--लघुकथा
"आदरणीय विनय कुमार जी, बहुत ही अच्छी रचना।  प्रस्तुति के लिए बधाई। "
Thursday

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Male
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Varanasi
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Banker
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पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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सीख लिया है- एक ग़ज़ल

बचके चलना सीख लिया है
हमने संभलना सीख लिया है


वक़्त सदा होता ना अच्छा
हमने बदलना सीख लिया है


देख समंदर की लहरों को
हमने मचलना सीख लिया है


दर्द अगर हद से बढ़ जाए
हमने पिघलना सीख लिया है


भाग रही अपनी दुनिया में
हमने ठहरना सीख लिया है


आसमाँ की ख़्वाहिश सबकी
हमने उतरना सीख लिया है !!

Posted on July 21, 2018 at 4:09pm — 1 Comment

सीख लिया है- एक ग़ज़ल

बचके चलना सीख लिया है
हमने संभलना सीख लिया है


वक़्त सदा होता ना अच्छा
हमने बदलना सीख लिया है


देख समंदर की लहरों को
हमने मचलना सीख लिया है


दर्द अगर हद से बढ़ जाए
हमने पिघलना सीख लिया है


भाग रही अपनी दुनिया में
हमने ठहरना सीख लिया है


आसमाँ की ख़्वाहिश सबकी
हमने उतरना सीख लिया है !!

Posted on July 21, 2018 at 4:07pm — 10 Comments

हिचक--लघुकथा

हिचक--

"कभी बेटे को भी गले से लगा लिया कीजिये, वह भी आपके सीने से लगकर कुछ देर रहना चाहता है", रिमी ने गहरी सांस लेते हुए कहा. रमन को सुनकर तो अच्छा लगा लेकिन वह उसे दर्शाना नहीं चाहता था.

"ठीक है, इससे क्या फ़र्क़ पड़ जायेगा. वैसे भी तुम तो जानती हो कि मैं इन सब दिखावों में नहीं पड़ता", रमन ने अपनी तरफ से पूरी लापरवाही दिखाते हुए कहा. अंदर ही अंदर वह जानता था कि इसकी कितनी जरुरत है आजकल के माहौल में, लेकिन एक हिचक थी जो उसे रोकती थी.

"फ़र्क़ पड़ता है, आखिर उसके अधिकतर दोस्त तो अपने…

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Posted on July 17, 2018 at 6:58pm — 12 Comments

मजदूर- कविता

एक बार फिर कंधे पर,

लैपटॉप बैग लटकाये,

वह अलस्सुब्ह निकल पड़ा.

रात को देर से आने पर,

हमेशा की तरह

नींद पूरी नहीं हुई थी,

जलती हुई आँखों,

और ऐठन से भरे शरीर,

को घसीटता हुआ वह,

जल्दी जल्दी बस स्टॉप की तरफ

भागने की कोशिश कर रहा था.

कल रात की बॉस की डांट,

उसे लाख चाहने के बाद भी,

भुलाते नहीं बन रही थी.

कहाँ सोचा था उसने पढ़ते समय,

कि यह हाल होगा नौकरी में.

कहाँ वह सोचता था कि उसे,

मजदूरी नहीं करनी…

Continue

Posted on May 1, 2018 at 4:30pm — 2 Comments

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At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post सम्मान - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी।"
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TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post साँझा चूल्हा - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय नीलम उपाध्याय जी।"
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Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post रिलेशनशिप (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी, नमस्कार ।  अच्छी लघुकथा हुई है।  प्रस्तुति के लिए बधाई…"
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Shyam Narain Verma commented on Arpana Sharma's blog post "धरा की पाती"/ कविता-अर्पणा शर्मा, भोपाल
""क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को " .सादर "
6 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
" आदरणीय तेजवीर सिंह जी, अच्छी सन्देश परक लघुकथा की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें । "
6 hours ago

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