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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। बढिया समकालीन परिस्थितियों में उत्तम लघुकथा। बधाई निवेदित है इस रचना पर।"
7 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"रचना के मर्म को समझकर टिपण्णी करने के लिए बहुत बहुत आभार आ शेख शहज़ाद उस्मानी जी"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"एक तीर से कई निशाने पूजा और तलाक व प्रसाद/जुगाड़ बहाने। वाह! बेहतरीन समसामयिक सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार साहिब! पहली दो और अंतिम पंक्तियां महत्वपूर्ण बन गई हैं विचारोत्तेजक! "
9 hours ago
विनय कुमार posted a blog post

परवाह- लघुकथा

पूरा ऑफिस इकट्ठा हो गया था, बॉस जूते निकालकर मंदिर में घुसा और गणपति आरती शुरू हो गयी. उसे यह सब ठीक नहीं लग रहा था लेकिन सब आये थे तो उसे भी आना पड़ा. एक किनारे खड़ा वह सोच रहा था कि अगर यहीं किसी और धर्म का व्यक्ति अपनी इबादत शुरू करना चाहे तो क्या ये लोग उसे भी इसी तरह करने देंगे.चंद मिनटों बाद उसकी नज़र सफाई कर्मचारी हमीदन बी पर पड़ी, वह भी एक तरफ चुपचाप खड़ी थी. उसे बेहद आश्चर्य हुआ, यह उसकी धारणा के उलट था. खैर पूजा संपन्न हुई और प्रसाद देने वाले ने हमीदन बी को भी एक लड्डू और मोदक दिया जिसे…See More
10 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उम्मीद दिल में पल रही है- ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
14 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उम्मीद दिल में पल रही है- ग़ज़ल
"बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
14 hours ago
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post उम्मीद दिल में पल रही है- ग़ज़ल
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।बेहतरीन रचना।"
Saturday
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post उम्मीद दिल में पल रही है- ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय  विनय कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। एक  दिन  ख़त्म  होगी  मायूसी ऐसी उम्मीद  दिल  में पल रही है !!"
Saturday
mirza javed baig commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब  बहुत उम्दा अंदाज़ में लघूकथा कही आपने  बहुत बहुत बधाई आपको इस शानदार प्रस्तुति पर"
Friday
विनय कुमार commented on Samar kabeer's blog post "हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल
"//जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँमेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है//, बहुत खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली ग़ज़ल दिवस विशेष पर आदरणीय मुहतरम जनाब समर कबीर साहब, दिली मुबारकवाद क़ुबूल करें. "कानों में मिश्री सा रस घोलते हैं हिंदी में अपनी जो सब…"
Friday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"बहुत बहुत शुक्रिया आ मुहतरम जनाब समर कबीर साहब"
Friday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"बहुत बहुत शुक्रिया आ मुहतरम जनाब शेख शहज़ाद उस्मानी जी"
Friday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post असली विसर्जन- लघुकथा
"बहुत बहुत शुक्रिया आ बृजेश कुमार 'ब्रज' जी"
Friday
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post ईमान- लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on विनय कुमार's blog post असली विसर्जन- लघुकथा
"बहुत ही अच्छी भावपूर्ण लघुकथा लिखी है आदरणीय..."
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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परवाह- लघुकथा

पूरा ऑफिस इकट्ठा हो गया था, बॉस जूते निकालकर मंदिर में घुसा और गणपति आरती शुरू हो गयी. उसे यह सब ठीक नहीं लग रहा था लेकिन सब आये थे तो उसे भी आना पड़ा. एक किनारे खड़ा वह सोच रहा था कि अगर यहीं किसी और धर्म का व्यक्ति अपनी इबादत शुरू करना चाहे तो क्या ये लोग उसे भी इसी तरह करने देंगे.

चंद मिनटों बाद उसकी नज़र सफाई कर्मचारी हमीदन बी पर पड़ी, वह भी एक तरफ चुपचाप खड़ी थी. उसे बेहद आश्चर्य हुआ, यह उसकी धारणा के उलट था. खैर पूजा संपन्न हुई और प्रसाद देने वाले ने हमीदन बी को भी एक लड्डू और मोदक दिया…

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Posted on September 25, 2018 at 4:51pm — 3 Comments

उम्मीद दिल में पल रही है- ग़ज़ल

उनके आने से सांस चल रही है
वर्ना लगता था सांझ ढल रही है


अपनी किस्मत कहाँ थी ऐसी पर
जो  मांगी  थी  दुआ  फल रही है


हौसले  भी  थे  और  यकीं भी था
बुझने वाली थी  शमा जल रही है


वक़्त का क्या है कुछ नहीं मालूम
दिक्क़त आजकल  तो टल रही है


एक  दिन  ख़त्म  होगी  मायूसी
ऐसी उम्मीद  दिल  में पल रही है !!


मौलिक एवम अप्रकाशित

Posted on September 20, 2018 at 4:57pm — 4 Comments

ईमान- लघुकथा

"मेरे पास अभी कुछ भी नहीं है जमा करने के लिए सर, आप बताईये क्या करूँ", सामने बैठी लड़की ने बड़ी मायूसी से कहा और एक प्रार्थना पत्र मेज पर रख दिया. उसने प्रार्थना पत्र उठाया और पढ़ने लगा, नीचे लिखे नाम पर उसकी नजर अटक गयी "नाज़िया खान". अरे यह तो वही लड़की है जिसकी सब बहुत तारीफ़ करते थे कि इतनी गरीब होने के बाद भी हमेशा शिक्षा ऋण की किश्त जमा करती है.

"क्या हो गया नाज़िया, तुम तो हमेशा समय पर पैसे जमा करती थी. और तुम्हारा ऋण खाता भी तो रेगुलर है?, उसके मन में कारण जानने की जिज्ञासा होने लगी.…

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Posted on September 19, 2018 at 6:42pm — 12 Comments

असली विसर्जन- लघुकथा

उसको आये लगभग आधा घंटा हो चुके थे, रोज की तरह आज भी आने में देर हो गयी थी. दिन पर दिन काम का बढ़ता बोझ और ऊपर से नया बद्तमीज बॉस, रात होते होते ही वह छूट पाता था. हमेशा गुस्से में रहने वाला उसका दिमाग अब तो और भी गरम रहता, शाम को आने के बाद कोई उसके पास भी नहीं फटकता था. अकेले टी वी के सामने बैठकर चाय पीना और घटिया सीरियल देखकर समय काटना उसकी दिनचर्या बन गयी थी. लेकिन आज गणपति विसर्जन और उससे जुड़े कार्यक्रम उसको काफी सुकून दे रहे थे.

दूसरे कमरे में रिंकी अपनी माँ के पास खड़ी थी, दोनों की…

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Posted on September 18, 2018 at 2:30pm — 16 Comments

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At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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"आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन सृजन, वाह वाह, मजा आ गया पढ़के। बधाई देता हूँ आपको।…"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'नज़रिये के ज़रिये' (लघुकथा)
"आद0 शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन।एक बेहतरीन लघुकथा आपके हवाले से पढ़ने को मिली।  बात भी…"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। बढिया समकालीन परिस्थितियों में उत्तम लघुकथा। बधाई निवेदित है इस…"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on rajesh kumari's blog post नाभी में लेकर कस्तूरी  तय करता मृग कितनी दूरी (गीत राज )
"आद0 बहन राजेश कुमारी जी बेहतरीन गीत लिखा है आपने, कई बातों को आपने छुआ है। बहुत बहुत बधाई आपको।"
7 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"रचना के मर्म को समझकर टिपण्णी करने के लिए बहुत बहुत आभार आ शेख शहज़ाद उस्मानी जी"
7 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी बहुत बेहतरीन गजल मन प्रसन्न…"
7 hours ago

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