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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post फिर भी - लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ नीता कसार जी इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए"
Monday
विनय कुमार commented on Balram Dhakar's blog post जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"वाह, वाह, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आ बलराम धाकड़ साहब, सभी शेर बेहतरीन है. बहुत बहुत बधाई आपको इस ग़ज़ल के लिए"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"बहुत उलझा हुआ विषय है समलैंगिकता, इसे सिर्फ मानसिक विकार कहना आज के विज्ञान के हिसाब से सही नहीं लगता. वैसे विषय बहुत अच्छा चुना है आपने और कुछ लोग तो जरूर असमंजस की स्थिति में होते हैं और उनको समझाकर सामान्य जीवन की तरफ मोड़ा जा सकता है. बहरहाल…"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"एक सच्ची घटना पर आधारित बढ़िया रचना विषय पर, ऊपर कोई अदालत होती तो शायद स्थिति और बेहतर होती. बहुत बहुत बधाई आ प्रतिभा पांडे जी इस रचना के लिए"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"एक औसत परिवार में घटने वाली घटना को लेकर बढ़िया लिखा है आपने, थोड़े संपादन से और निखर जाएगी आपकी रचना. बहुत बहुत बधाई आपको आ कनक हरलालका जी"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"कुछ लोग इसे वरदान समझते है तो अधिकांश आजकल इसे अभिशाप ही मानते हैं, बहुत बढ़िया रचना विषय पर. बहुत बहुत बधाई आ डॉ विजय शंकर जी"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"सिर्फ खुद का फायदा देखने के चक्कर में इंसान ने अपना ही सबसे ज्यादा नुकसान किया है, टाइम मशीन को प्रतीक बनाकर बढ़िया लिखा है आपने. बहुत बहुत बधाई आ महेंद्र कुमार जी इस गंभीर रचना के लिए"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"एक खबर जैसी प्रतीत हो रही है रचना, और मेहनत की जरुरत है इसपर. बहरहाल बधाई इस प्रयास के लिए आ अनीता शर्मा जी"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आजकल यह धोखाधड़ी खूब हो रही है, बढ़िया समसामयिक रचना विषय पर. बहुत बहुत बधाई आ मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी साहब"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"कभी कभी काम की अधिकता से ऐसा हो सकता है, बढ़िया रचना विषय पर. बहुत बहुत बधाई आ मोहन बेगोवाल जी"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"लघुकथा पर टिप्पणी करके उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"लघुकथा पर टिप्पणी करके उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"लघुकथा पर टिप्पणी करके उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"लघुकथा पर टिप्पणी करके उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"लघुकथा पर टिप्पणी करके उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत आभार"
Oct 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"लघुकथा पर टिप्पणी करके उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार आपका"
Oct 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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फिर भी - लघुकथा

"आज फिर नींद नहीं आ रही है आपको, भूलने की कोशिश कीजिये उसे", रश्मि ने बेचैनी से करवट बदलते हुए राजन से कहा और उठकर बैठ गयी. कुछ देर तक तो वह अँधेरे में ही राजन का सर सहलाते रही, फिर उसने कमरे की बत्ती जला दी.

"लाइट बंद कर दो रश्मि, अँधेरे में फिर भी थोड़ा ठीक लगता है. उजाला तो अब बर्दास्त नहीं होता, काश उस दिन मैं नहीं रहा होता", राजन ने रश्मि की गोद में सर छुपा लिया.

धीरे धीरे रश्मि ने अब अपने आप को संभाल लिया था लेकिन अभी भी जब वह बाहर निकलती, उसे लगता जैसे लोगों की निगाहें उससे…

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Posted on October 26, 2018 at 12:24pm — 14 Comments

धरती का बोझ- लघुकथा

शोक सभा चालू थी, हर आदमी आता और मरे हुए लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी बात शुरू करता और फिर प्रशासन को कोसते हुए अपनी बात ख़त्म करता. बीच बीच में लोग उस एक व्यक्ति की भी तारीफ़ जरूर करते जिसने कई लोगों को बचाया था लेकिन अपनी जान से भी हाथ धो बैठा था.

उधर कही आसमान में रूहें एक जगह बैठी हुई जमीन पर चलने वाले इस कार्यक्रम को देख रही थीं. उनमें अधिकांश तो उस एक रूह से बहुत खुश थीं जिसने उनके कुछ अपनों को बचा दिया था लेकिन एक रूह बहुत बेचैन थी. उसे यह बात जरा भी हजम नहीं हो…

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Posted on October 25, 2018 at 11:34am — 12 Comments

मिलन-लघुकथा

चारो तरफ मची भगदड़ अब धीरे धीरे कम हो चली थी, बस घायल लोगों की चीखें ही चारो तरफ गूंज रही थीं. इस भयानक हादसे में सैकड़ों लोग मरे थे और उससे ज्यादा ही घायल थे. राहत में पहुंचे लोग मृत शरीरों को एक तरफ इकट्ठा कर रहे थे और घायलों को हस्पताल भेजने की तैयारी में भी जुटे थे.

पटरी के एक तरफ पड़े एक युवा के मृत शरीर को लोगों ने उठाकर एक तरफ कर दिया. कुछ ही देर बाद कुछ और लोग एक लड़की के मृत शरीर को भी वहीँ डाल गए. कुछ घंटे बीतते बीतते तमाम लाशें एक दूसरे से गड्डमड्ड पड़ीं थीं और लड़के का हाथ लड़की के…

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Posted on October 24, 2018 at 12:33pm — 14 Comments

परछाईयों का भय - लघुकथा

पिछले कुछ घंटों से उदास दिख रहे अपने दोस्त को देखकर उससे रहा नहीं गया. "क्या हो गया राजमन, बहुत उदास लग रहे हो".

राजमन ने एक नजर उसकी तरफ डाली और सोच में पड़ गया कि तेजू को बात बताएं कि नहीं. लेकिन तेजू तो उसकी हर बात, हर राज से वाकिफ़ था इसलिए उसे बताने में कोई हर्ज भी नहीं था.

"यार, तुम तो देख ही रहे हो ये आजकल का ट्रेंड, जिसे देखो वही इस #मी टू# के बहाने लोगों के नाम उछाल रहा है. रिटायरमेंट के बाद अब कहीं कोई मेरे खिलाफ भी यह चैप्टर न खोल दे, यही सोचकर घबरा रहा हूँ".

तेजू ने…

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Posted on October 17, 2018 at 5:00pm — 8 Comments

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At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 91 in the group चित्र से काव्य तक
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