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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post चिट्ठियाँ --
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी कविता हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post एक और कसम-व्यंग्य
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on विनय कुमार's blog post चिट्ठियाँ --
"बढ़िया कविता है आदरणीय..बधाई"
Wednesday
विनय कुमार posted blog posts
Tuesday
विनय कुमार commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"वाह, बहुत बढ़िया और हक़ीक़त के करीब की रचना, बुढ़ापे में तो खाने पीने की लालसा और बढ़ जाती है लेकिन स्वास्थ्य साथ नहीं देता. बहुत बहुत बधाई इस बढ़िया लघुकथा के लिए आ डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब"
Tuesday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post चलो मुद्दों की बात करते हैं
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी"
Mar 18
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post चलो मुद्दों की बात करते हैं
"आद0 विनय जी अच्छी कविता लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Mar 17
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post चलो मुद्दों की बात करते हैं
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
Mar 16
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post चलो मुद्दों की बात करते हैं
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ सुशील सरना जी"
Mar 16
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post चलो मुद्दों की बात करते हैं
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 16
Sushil Sarna commented on विनय कुमार's blog post चलो मुद्दों की बात करते हैं
"वाह आदरणीय एक यथार्थ को बहुत ही ख़ूबसूरती से आपने उजागर किया है। इस रचना के लिए दिल से बधाई।"
Mar 15
विनय कुमार posted a blog post

चलो मुद्दों की बात करते हैं

चलो मुद्दों की बात करते हैं वही मुद्दे जिनसे वो डरते हैंवादे जितने भी उनको करने हों बेहिचक वो तो किया करते हैंबात जो पूछ लो गरीबों की वो अमीरों की बात करते हैंआपने प्रश्न उनसे जो पूछे देशद्रोही करार करते हैंहै कहाँ रोजगार गर पूछो बैंड बाजे की बात करते हैंक्या किसानों की करेंगे ये मदद सोना, आलू से पैदा करते हैंइनकी नज़रों में जनता उल्लू है उल्लू ये सीधा किया करते हैंविकास क्या करेंगे ये सबका अपनी जेबों को भरा करते हैंछोड़ के हस्पताल और सड़क मंदिर मस्जिद की बात करते हैंहर तरफ इंडिया तो डिजिटल है…See More
Mar 15
विनय कुमार replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"इस त्वरित  संकलन के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय योगराज प्रभाकर सर|"
Mar 1
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"प्रदत्त विषय पर बढ़िया लघुकथा, विस्तार ज्यादा पा गयी है. बहरहाल बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए आ शेख शहज़ाद उस्मानी साहब"
Feb 28
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"इस उत्साह बढ़ाने वाली और विस्तृत टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ मिथिलेश वामनकर साहब"
Feb 28
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-47
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ तस्दीक़ अहमद खान साहब"
Feb 28

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Male
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Johannesburg
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Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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चिट्ठियाँ --

चिट्ठियाँ नहीं जानती

वो तो बस चली आती हैं

कभी सही पते पर

तो अक्सर गलत पते पर

लेकिन उन्हें क्या पता

कि वह सालों साल

धूल खाती रहेंगी

दरअसल उनका गंतव्य

बदल चुका होता है

लेकिन लोग अपने पते

इन चिट्ठियों के लिए

अक्सर नहीं बदलते

बस फोन नंबर ही

बदल लेते हैं

सन्देश मिलते रहते हैं

उन बदले हुए नंबरों पर

लेकिन चिट्ठियाँ आती रहती हैं

उन पुराने पतों पर

लोग अक्सर भूल जाते हैं

लोग उन्हें अब नहीं बदलते…

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Posted on March 19, 2019 at 7:13pm — 2 Comments

एक और कसम-व्यंग्य

दोस्त क्यूँ होते हैं, इस सवाल का जवाब जिंदगी के अलग अलग समय में अलग अलग हो सकता है. लेकिन एक जवाब तो कामन है कि जो आपके लिए हमेशा खड़ा रहे, आपकी हर मुसीबत में काम आए, वही असली दोस्त होता है. बहरहाल अधिकांश दोस्त ऐसे होते भी हैं, बस कुछेक अपवाद को छोड़कर.

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अगर सियापा ही न करें तो दोस्त कैसे, ये अलग बात है कि आप माने या न माने. अमूमन ऐसे दोस्त तो जिंदगी के शुरूआती दिनों में ही मिलते हैं जब आपके ऊपर किसी किस्म के सियापे का कोई असर नहीं पड़े. और मुझे तो बिलकुल नहीं…

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Posted on March 19, 2019 at 7:00pm — 1 Comment

चलो मुद्दों की बात करते हैं

चलो मुद्दों की बात करते हैं

वही मुद्दे जिनसे वो डरते हैं



वादे जितने भी उनको करने हों

बेहिचक वो तो किया करते हैं



बात जो पूछ लो गरीबों की

वो अमीरों की बात करते हैं



आपने प्रश्न उनसे जो पूछे

देशद्रोही करार करते हैं



है कहाँ रोजगार गर पूछो

बैंड बाजे की बात करते हैं



क्या किसानों की करेंगे ये मदद

सोना, आलू से पैदा करते हैं



इनकी नज़रों में जनता उल्लू है

उल्लू ये सीधा किया करते…

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Posted on March 15, 2019 at 4:05pm — 6 Comments

जन्नत- लघुकथा

कल से ही खबर आ रही थी कि क्षेत्र में कुछ संदिग्ध लोग देखे गए हैं और रात में चौकसी बढ़ा दी गयी थी. हमेशा की तरह रमेश और रोशन एक साथ ही नाईट ड्यूटी पर थे. जैसे जैसे रात आगे बढ़ रही थी, चारो तरफ अँधेरा कुछ यूँ गहरा रहा था मानो इस रात की सुबह होगी ही नहीं. अचानक एक खटका हुआ और रोशन ने अपनी राइफल आवाज़ की तरफ तान दी. कुछ मिनट तक सन्नाटा रहा और उनको लग गया कि कोई खतरा नहीं है.

"तू तो निरा डरपोक ही है रोशन, जरा सी आहट हुई नहीं कि घबरा जाता है", रमेश ने उसे छेड़ते हुए कहा.

"अच्छा तो पंडित, तू…

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Posted on February 18, 2019 at 7:20pm — 2 Comments

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At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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