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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"शुक्रिया सर"
Dec 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"पहली औलाद-लघुकथा "हाय डैड, कैसे हैं आप? सब ठीकठाक है ना, मैं कई महीनों से आने की सोच रहा हूँ लेकिन क्या करूँ?, वीडियो काल पर रोहन सुदूर अटलांटा से अपने डैड से बात कर रहा था."मैं ठीक हूँ बेटा, तुम लोग कैसे हो. नीनू कैसी है, अगर पास में है…"
Dec 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"असली औलाद तो यही है जो सही राह पर चले और दूसरों का भी ख्याल रखे. बढ़िया अलग कलेवर की रचना विषय पर, बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए आ मनन कुमार सिंह जी"
Dec 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"बढ़िया विचारोत्तेजक रचना विषय पर, बहुत बहुत बधाई आ शेख शहज़ाद साहब"
Dec 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"पिता के नक्शेकदम पर पुत्र, बहुत बढ़िया रचना प्रदत्त विषय पर. बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए आ तेज वीर सिंह साहब"
Dec 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"एक अलग सी और बहुत प्रभावशाली रचना लिखी है आपने प्रदत्त विषय पर. बहुत बहुत बधाई इस बढ़िया रचना के लिए आ प्रतिभा पांडे जी"
Dec 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"बहुत खूबसूरत और सुखद लघुकथा लिखी है आपने प्रदत्त विषय पर, बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए आ अजय गुप्ता जी"
Dec 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"वाह, बहुत भावपूर्ण और मर्मस्पर्शी लघुकथा लिखी है आपने और इशारों इशारों में जो बात कही है वह तो कमाल है. बहुत बहुत बधाई इस बेहतरीन लघुकथा के लिए आ ओम प्रकाश जी"
Dec 31, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post जिम्मेदारियाँ--लघुकथा
"आ. भाई विनय जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 20, 2019
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post जिम्मेदारियाँ--लघुकथा
"इस उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ समर कबीर साहब"
Nov 16, 2019
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उसका हक़- लघुकथा
"इस उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ समर कबीर साहब"
Nov 16, 2019
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post जिम्मेदारियाँ--लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब, बहुत अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 16, 2019
विनय कुमार posted a blog post

जिम्मेदारियाँ--लघुकथा

आज वह सोचकर आया था कि पापा से नई घडी और पैंट शर्ट के लिए कह ही देगा. अब तो स्कूल के बच्चे भी कभी कभी चिढ़ाने लगे थे. लेकिन घर की हालत देखकर उसकी कहने की इच्छा नहीं होती थी. जैसे ही वह पापा के कमरे में पहुंचा, पीछे पीछे उसका चचेरा भाई भी आ गया. अभी वह कुछ कहता तभी उसके चचेरे भाई ने अपनी फरमाईस रख दी "बड़े पापा, मेरी साइकिल बिलकुल खचड़ा हो गयी है, इस महीने नई दिला दीजिये".पापा ने उसकी तरफ प्यार से देखते हुए कहा "ठीक है, इस बार बोनस मिलना है, जरूर खरीद दूंगा. लेकिन संभाल कर चलाना, गिरना मत".चचेरा भाई…See More
Nov 13, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"बढ़िया रचना प्रदत्त विषय पर, बहुत बहुत बधाई आ मनन कुमार सिंह जी"
Oct 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"बहुत बढ़िया रचना प्रदत्त विषय पर, वार्तालाप भी बढ़िया है. अंत और बेहतर किया जा सकता है, बहरहाल बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए आ कल्पना भट्ट जी"
Oct 31, 2019
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"वाह, कुछ अलग सा लिखा है आपने प्रदत्त विषय पर, बहुत बढ़िया. आज के सेल्फी के दौर में हर चीज सेल्फी से शुरू होकर सेल्फी पर ही ख़त्म होती है. आज के परिवेश में सही पेरेंटिंग जैसे गंभीर सवाल को भी उठाया है आपने, बहुत बहुत बधाई इस बढ़िया रचना के लिए आ शेख…"
Oct 31, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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जिम्मेदारियाँ--लघुकथा

आज वह सोचकर आया था कि पापा से नई घडी और पैंट शर्ट के लिए कह ही देगा. अब तो स्कूल के बच्चे भी कभी कभी चिढ़ाने लगे थे. लेकिन घर की हालत देखकर उसकी कहने की इच्छा नहीं होती थी. जैसे ही वह पापा के कमरे में पहुंचा, पीछे पीछे उसका चचेरा भाई भी आ गया. अभी वह कुछ कहता तभी उसके चचेरे भाई ने अपनी फरमाईस रख दी "बड़े पापा, मेरी साइकिल बिलकुल खचड़ा हो गयी है, इस महीने नई दिला दीजिये".

पापा ने उसकी तरफ प्यार से देखते हुए कहा "ठीक है, इस बार बोनस मिलना है, जरूर खरीद दूंगा. लेकिन संभाल कर चलाना, गिरना…

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Posted on November 13, 2019 at 5:55pm — 3 Comments

उसका हक़- लघुकथा

जैसे ही छोटू के रोने की आवाज मालती के कानों में पड़ी, वह उठकर भागी. दूसरे कमरे के उसके बिस्तर पर लेटे छोटू की नींद खुल गयी थी, शायद उसने नैप्पी भी गीला कर दिया था.

"अले ले, जग गया मेरा राजा बेटा, भुक्खू लगी है क्या?, मालती ने उसे उठाकर प्यार करना शुरू किया और उसे लाड़ करती हुई ड्राइंग रूम में आ गयी.

ड्राइंग रूम में एक कोने में वह बैठा हुआ अखबार पढ़ रहा था, मालती और छोटू के मिले जुले स्वर से उसकी तन्द्रा भंग हुई. उसके चेहरे पर भी उनको देखकर मुस्कराहट आ गयी. वह उठकर छोटू को लेने ही जा रहा…

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Posted on October 7, 2019 at 6:42pm — 8 Comments

समीकरण- लघुकथा

अचानक उसे लगा कि पीछे से किसी ने नाम लेकर पुकारा, उसने साइकिल रोकी और पलट कर देखा. थोड़ा पीछे ही उसके परिचित वकील साहब खड़े थे और उसकी तरफ इशारा कर रहे थे. वह साइकिल धीरे धीरे चलाते हुए वकील साहब के पास पहुंचा और उनको नमस्ते किया.

"क्या बात है मैनेजर साहब, आज साइकिल चला रहे हैं. गाड़ी पंचर हो गयी है या खराब है", वकील साहब ने मुस्कुराते हुए पूछा.

उसे हंसी आ गयी, वह क्या साइकिल सिर्फ तभी चला सकता है जब उसकी गाड़ी खराब हो. फिर उसने हँसते हुए ही कहा "अरे नहीं वकील साहब, गाड़ी ठीक है. बस यूँ…

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Posted on September 26, 2019 at 5:49pm — 4 Comments

व्यस्तता- लघुकथा

"अब गांव चलें बहुत दिन बिता लिए यहाँ", शोभाराम ने जब पत्नी ललिता से कहा तो जैसे उनके मुंह की बात ही छीन ली.

लेकिन बेटे और बहू से क्या कहेंगे, गांव पर तो कोई रहता नहीं था,पट्टीदारों के अलावा. वैसे वहां पर अपने हिसाब से जीने की आज़ादी थी लेकिन यहाँ भी तो है ही, कोई बंधन नहीं है. उनके दिमाग में कई दिनों से यह सब घूम रहा था.

"अच्छा यह बताओ, आखिर क्या कह कर गांव जाओगे. बेटा तो यही कहकर शहर लाया था कि गांव में अकेले रहते हैं, कौन है जो आपका अकेलापन बाँटने के लिए", ललिता के सवाल पर लाजवाब हो…

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Posted on September 17, 2019 at 7:36pm — 6 Comments

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At 8:01pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय विनय कुमार जी नमस्कार! बहुत बहुत धन्यवाद् आपने अपना अमूल्य समय निकाला और मेरी कोशिश को सराहा | आपने सही कहा की रचना अधूरी है और शीर्षकवीहीन भी | हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गयी है इसीलिए मैं रचना का आखिरी शब्द ' थे' भूल गया और शीर्षक तो ज़ाहिर है पहले ही भूल गया हूँ! कोशिश करता हूँ सुधरने की
At 12:52pm on April 30, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय विनय कुमार जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनांयें।

At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
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"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और निरन्तर प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
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