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Jitendra Upadhyay
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Jitendra Upadhyay's blog post माँ
"सहज सरस आत्मीय भावदशा को शाब्दिक करती इस लघुकथा के लिए हृदय से शुभकामनाएँ, भाई जीतेन्द्र उपाध्यायजी. आपकी प्रस्तुति में माँ-पुत्र के बीच का अनन्य सम्बन्ध पूरी गहनता से साझा हुआ है. शुभ-शुभ"
May 18, 2015

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Jitendra Upadhyay's blog post इंसानियत का रिश्ता
"सुहृदय कथा हार्दिक बधाइयाँ जितेन्द्र जी"
May 14, 2015

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Jitendra Upadhyay's blog post बाँझ माँ
"इस संवेदनशील प्रस्तुति क्लिए हार्दिक बधाई, आ. जितेन्द्र भाई .. सतत प्रयासरत रहें."
May 14, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Jitendra Upadhyay's blog post माँ
"बहुत सुंदर लघुकथा. बधाई आदरणीय जीतू जी"
May 13, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Jitendra Upadhyay's blog post माँ
"बहुत खूब आदरनीय जितेन्द्र भाई , माँ बेटे के सम्बन्धो मे आज  एक उजला पक्ष देख के बहुत अच्छा लगा ॥ आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥"
May 12, 2015
विनय कुमार and Jitendra Upadhyay are now friends
May 11, 2015
VIRENDER VEER MEHTA commented on Jitendra Upadhyay's blog post इंसानियत का रिश्ता
"सार्थक और सुन्दर कथा आदरणीय जीतेंदर जी.... ..सादर बधाई !"
May 11, 2015
Jitendra Upadhyay posted a blog post

माँ

माँ छोटू के सो जाने के बाद भी उसे देर तक जगाती, किचेन से दूध का एक बड़ा भरा गिलास जबरदस्ती पकड़ाते हुए कहती,जल्दी पी जा नहीं बुढ़िया आ जाएगी.! और छोटू डर के मारे एक ही साँस में पूरा दूध पी जाता ! छोटू बड़ा हो गया है, माँ की अवस्था हो चली है ! माँ बीमार रहती है डॉक्टर ने दवाइयों के साथ दूध पीने को भी कहा है ! माँ दूध नहीं पीती तब छोटू माँ से कहता "माँ जल्दी दूध पी जाओ नहीं बुढ़िया आ जाएगी.! माँ उसके बालपन पे मुस्कराती है और धीरे-धीरे पूरा दूध पी जाती है.!-जीतू मौलिक व अप्रकाशितSee More
May 11, 2015
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Jitendra Upadhyay's blog post इंसानियत का रिश्ता
"सच  है  इंसानियत  किसी कोनें में आज भी ज़िंदा  है तभी यह संसार  चल रहा  है | सार्थक लघु कथा के लिए बहाई "
May 11, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Jitendra Upadhyay's blog post इंसानियत का रिश्ता
"आदरणीय जितेन्द्र जी बहुत अच्छी लघुकथा है हार्दिक बधाई "
May 11, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Jitendra Upadhyay's blog post बाँझ माँ
"आदरणीय जितेन्द्र जी बहुत मार्मिक कथा हुई है इस बेहतरीन प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई."
May 11, 2015
विनय कुमार commented on Jitendra Upadhyay's blog post इंसानियत का रिश्ता
"सुन्दर लघुकथा के लिए बधाई आदरणीय जीतेन्द्र उपाध्याय जी .."
May 10, 2015
Jitendra Upadhyay commented on विनोद खनगवाल's blog post मदर्स डे (लघुकथा)
"badhai ! marmik kahani ke liye"
May 10, 2015
Jitendra Upadhyay commented on Jitendra Upadhyay's blog post इंसानियत का रिश्ता
"Sadar Aabhar Manoj sir ji"
May 10, 2015
jaan' gorakhpuri commented on Jitendra Upadhyay's blog post बाँझ माँ
"मार्मिक कथा पर बधाई!"
May 10, 2015
Manoj kumar Ahsaas commented on Jitendra Upadhyay's blog post इंसानियत का रिश्ता
"अच्छी और सफल रचना"
May 10, 2015

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad/Uttar Pradesh
Native Place
Allahabad
Profession
Student
About me
Simple Living and make new Friend's some time talkative.

Jitendra Upadhyay's Blog

माँ

माँ छोटू के सो जाने के बाद भी उसे देर तक जगाती, किचेन से दूध का एक बड़ा भरा गिलास जबरदस्ती पकड़ाते हुए कहती,जल्दी पी जा नहीं बुढ़िया आ जाएगी.! और छोटू डर के मारे एक ही साँस में पूरा दूध पी जाता ! छोटू बड़ा हो गया है, माँ की अवस्था हो चली है ! माँ बीमार रहती है डॉक्टर ने दवाइयों के साथ दूध पीने को भी कहा है ! माँ दूध नहीं पीती तब छोटू माँ से कहता "माँ जल्दी दूध पी जाओ नहीं बुढ़िया आ जाएगी.! माँ उसके बालपन पे मुस्कराती है और धीरे-धीरे पूरा दूध पी जाती…

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Posted on May 10, 2015 at 4:30pm — 4 Comments

इंसानियत का रिश्ता

लड़का रोज शाम को कानो में लीड लगाकर सड़क के बीचो बीच बने पार्क में वाकिंग करने पहुंच जाता.! और वो बुजुर्ग दम्पति भी रोज शाम को पार्क के बीचो बीच बने बेन्च पे बैठकर घंटो खेलते हुए बच्चो को एक टक निहारते.! कभी -कभी प्यार से बच्चो को पुचकार भी देते तो कभी थपकियाँ देने के बहाने सहला भर लेते.! ऐसा करके उन्हें एक अलग सा सुकून मिलता था ! लड़का भी पार्क के एक कोने में बैठकर हर पल उन बूढी आँखों में एक ख़ुशी की चमक देख खुश भर हो जाता..! हर रोज वो लड़का सोचता आज मै इनसे बात करुगा, पर किस बारे में उनसे मेरा…

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Posted on May 9, 2015 at 4:00pm — 7 Comments

बाँझ माँ

उसकी अपनी कोई संतान नहीं थी लोग उसे बाँझ कहते थे ! उसने (बाँझ) दरवाजे में कुण्डी लगाया ही था, की तभी किसी बच्चे की रोने की आवाज सुन वो वही ठिठक भर गयी ! दरवाजे की कुण्डी खोल हाथ में लालटेन लिए वो आवाज के दिशा में चल पड़ी ! थोड़ी दूर पहुंची ही थी की अचानक सामने का दृश्य देख चौक पड़ी, छोटे से कपडे में लिपटा वो बच्चा भूख से बुरी तरह बिलबिला रहा था ! उसने बच्चे को उठा कर सीने से लगा लिया,बच्चा ममतामयी स्पर्श पा शांत होकर सो गया ! सुबह लोगो ने उसके झोपडी से बच्चे की आवाज सुनी सुनकर सब चौक गए ! सच से…

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Posted on May 7, 2015 at 4:58pm — 9 Comments

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At 12:17pm on May 5, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है ,आदरणीय जीतेन्द्र उपाध्याय जी

सादर!

 
 
 

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