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अलका 'कृष्णांशी'
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अलका 'कृष्णांशी' posted a blog post

श्राद्ध.....लघुकथा..../अलका 'कृष्णांशी'

श्राद्ध" पर....? हर बार तो आनंद ही ..." दूसरी तरफ की कड़क आवाज़ में बात अधूरी ही रह गई"जी ,जैसा आप ठीक समझें ,पैरी पै..." बात पूरी होने से पहले ही दूसरी तरफ से मोबाइल कट गया ....रुआंसी सी प्राप्ति सोफे में ही धंस गई , बंद आँखों से अश्क बह निकले"८ बरसों में जड़ें भी मिटटी पकड़ चुकी थी ......""पर आंगन को फूल देना कितना जरूरी है ये एहसास देवरानी के बेटा पैदा होने के बाद हुआ .....""नर्म हवाओं ने तूफान बन कर सब रौंदते हुए रुख जब आनंद की ओर किया तो आनंद ने बिना किसी से सलाह किये ये किराए का मकान ले लिया…See More
Sep 19
अलका 'कृष्णांशी' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
".आद0 बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी, बहुत अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई। सादर"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on रामबली गुप्ता's blog post जयति जयति जय...-रामबली गुप्ता
".आद0 रामबली गुप्ता जी, बहुत ही सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई। सादर"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके से- गजल, पंकज मिश्र
"आद0  Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" जी, सुंदर ग़ज़ल  के लिए बधाई ।सादर"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on Sunil Verma's blog post जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"आदरणीय सुनील  वर्मा  जी, सुन्दर प्रस्तुति  बहुत बधाई ! सादर "
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - मैं उसकी ताब से खो कर हवास बैठा था ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, सादर अभिवादन ,बेहद खूबसूरत गजल के लिए बहुत बधाई । सादर  ।"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post अधकटा पेड़(लघुकथा)
" आ0. कल्पना जी,खूबसूरत लघु कथा के लिए बधाई,"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय  Samar kabeer जी बहुत धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई,  आभार  सादर ।"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी बहुत धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई,  आभार  सादर ।"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी बहुत धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई।  आभार।  सादर ।"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय  गिरिराज भंडारी जी बहुत धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई , अंग्रेजी वाले  शब्दों में मुझे भी लगा पर कुछ और सूझ नहीं रहा , फिर भी कोशिश करती हूँ. . मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।  सादर ।"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय   शिज्जु "शकूर"  जी बहुत धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई , आभार सादर ।"
Sep 18
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय  पंकजोम " प्रेम "  जी बहुत धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई , आभार सादर ।"
Sep 18
Samar kabeer commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"मोहतरमा अलका जी आदाब,अच्छा गीत हुआ,बधाई ।"
Sep 17

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari and अलका 'कृष्णांशी' are now friends
Sep 17
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"बहुत सुन्दर सरस और सारगर्भित रचना हुई आदरणीया..हार्दिक बधाई"
Sep 17

Profile Information

Gender
Female
City State
New Delhi
Native Place
New Delhi
Profession
house wife

अलका 'कृष्णांशी''s Blog

जला पुतला सभी ने पाप की कर दी विदाई है//अलका 'कृष्णांशी'

1222 1222 1222 1222 

.

हमारे सामने सबने कसम गीता की खाई है

जला पुतला सभी ने पाप की कर दी विदाई है

.

सभी ये बेटियाँ बहनें सुरक्षित आज से होंगी

अजी रावण की रावण ने यहां कर दी पिटाई है

.

बड़ी बातें सभी करते नही है राम कोई भी

कहीं हिन्दू कहीं सिख है यहाँ कोई ईसाई है

.

न होती धर्म की सेवा न है संस्कार से नाता

दया बसती नही दिल में दिखावे की भलाई है

.

लगाकर हाथ आँचल को वहीं खींसे…

Continue

Posted on October 1, 2017 at 1:00pm — 12 Comments

श्राद्ध.....लघुकथा..../अलका 'कृष्णांशी'

श्राद्ध

" पर....? हर बार तो आनंद ही ..." दूसरी तरफ की कड़क आवाज़ में बात अधूरी ही रह गई

"जी ,जैसा आप ठीक समझें ,पैरी पै..." बात पूरी होने से पहले ही दूसरी तरफ से मोबाइल कट गया ....

रुआंसी सी प्राप्ति सोफे में ही धंस गई , बंद आँखों से अश्क बह निकले

"८ बरसों में जड़ें भी मिटटी पकड़ चुकी थी ......"

"पर आंगन को फूल देना कितना जरूरी है ये एहसास देवरानी के बेटा पैदा होने के बाद हुआ ....."

"नर्म हवाओं ने तूफान बन कर सब रौंदते हुए रुख जब आनंद की ओर किया तो आनंद…

Continue

Posted on September 19, 2017 at 4:51pm — 6 Comments

हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'

समीक्षार्थ.........छंद-- तांटक  (एक प्रयास)

*******

हिन्दी का घटता रुझान पर , भाषा में गहराई है

हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है

.

नव पीढ़ी ने हिंदी में अब, लिखना पढ़ना छोड़ा है

परिवर्तन ऐसा आया दिल ,अंग्रेजी से जोड़ा है

निज भाषा का परचम लहराने का करते हैं दावा

मंचों से ही है चिंतन अंग्रेजी पर बोलें धावा

.

अंग्रेजी स्टेटस सिंबल है, हिंदी दिखती काई है

हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है

.…

Continue

Posted on September 14, 2017 at 7:00pm — 16 Comments

कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित

16 मात्रा आधारित गीत (चोपाई छन्द आधारित )

*****

कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन

रे स्याह भौंर गुंजन गुंजन

.

किसलय पुंजित ह्रदय हुलसित

उत्कंठा इंद्रजाल पुलकित

नित भोर भये चिर कोकिल-रव

मधु कुंज कुंज गुंजित कलरव

.

रे गंध युक्त मसिमय अंजन

रे स्याह भौंर गुंजन गुंजन

.

घनघोर घटा चितचोर विहग

नभ अंतःपुर द्युतिमान सुभग

अकलुष प्रदीप्त कोमल उज्ज्वल

तप नेह वेदना में प्रतिपल

.

रे स्वर्ण…

Continue

Posted on August 8, 2017 at 4:30pm — 14 Comments

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At 11:48pm on August 11, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

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ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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