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Vipul Kumar
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यारब जहान-ए-सह्ल_शरा' और मैं गिरां......(giraN=mushkil)...... मुझको मेरे कमाल की दुनिया नहीं मिली.......................................... vipul kumar

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Male
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Ajmer
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Hanumangarh
Profession
Student

Vipul Kumar's Blog

गरचे तेरे ख़याल का मेयार हम नहीं

नमस्कार अहबाब, तरही मुशायरा २३ में वक़्त पर मैं कोई ग़ज़ल नहीं कह पाया, क्योंकि तब तक मैं इस परिवार का हिस्सा ही नहीं था. अब उस मिसरे पर ख़ामा घिसाई का मन हुआ तो कुछ अश'आर कह दिए. आपकी नज़्र हैं, कोई ग़लती या ऐब दिखाई दे तो बेशक़ इत्तेला करें

****

गरचे तेरे ख़याल का मेयार हम नहीं

तो क्या तेरी तलब से भी दो-चार हम नहीं

वो चारागर है, सोचके मरता है दिल का हाल

आज़ार तो यही है कि बीमार हम नहीं

ऐ जान-ए-जान ग़ौर से देख इन्तहा-ए-शौक़

ख़ून-ए-जिगर है हम पे,…

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Posted on June 29, 2012 at 7:00pm — 14 Comments

Comment Wall (1 comment)

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At 1:28pm on June 25, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

विपुल भाई आपका ओबीओ परिवार में बहुत बहुत स्वागत है। आपकी सटीक और सुंदर प्रतिकृया मिली बहुत अच्छा लगा और आपने दो महत्वपूर्ण त्रुटियों की तरफ इशारा किया जिससे उसे दूर कर पाया। आपका बहुत बहुत शुक्रिया !!

 
 
 

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