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अरुण कुमार निगम
  • दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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अरुण कुमार निगम's Discussions

क्या यह मेरा भ्रम है ?
17 Replies

व्यक्तिगत जीवन की व्यस्तताओं व विवशताओं के कारण पूर्व की भाँति न तो लिख पा रहा हूँ और न ही प्रतिक्रिया ही प्रकट कर पा रहा हूँ किन्तु ओबीओ पर पोस्ट रचनायें प्रतिदिन नियमित तौर पर पढ़ रहा हूँ. हाँ !…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Jul 21, 2015.

विवाह की बत्तीसवीं वर्षगाँठ :
7 Replies

सपना-अरुण निगम (मदिरा सवैया)ब्याह  हुये  बत्तीस  सुहावन  साल भये नहिं भान हुआ  नित्य निरंतर जीवन में पल का पहिया गतिमान हुआ छाँव कभी  अरु धूप कभी  हर मौसम एक समान हुआ  शब्द सधे  सुर-ताल सजे  यह जीवन…Continue

Started this discussion. Last reply by Dr.Vijay Prakash Sharma Jun 11, 2014.

 

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"पास आ भी न सकूँ पास बुला भी न सकूँ और मज़बूरी मेरी क्या ये बता भी न सकूँ | लाँघ दीवार पड़ोसन से मिला करता था आज लाठी के बिना पाँव उठा भी न सकूँ | हड्डियों को भी चबा करके निगल जाता था अब कलेजी भी मिले हाय चबा भी न सकूँ | देव आनंद सरीखी थी कभी जुल्फ…"
11 hours ago

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आल्हा छंद - सीख रहा तलवार चलाना और बचा लेना अरि वार सूर्योदय के साथ नित्य ही, हो जाता चेला  तैयार. हरा-भरा औ खुला-खुला है, कस्बे के बाहर मैदान जहाँ बाँटते गुरुवर देखो, अपना संचित सारा ज्ञान. पलक झपकते देर नहीं औ, चेला कर देता है वार बड़ी चपलता…"
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी, उत्कृष्ट आल्हा का सृजन कर चित्र को परिभाषित किया है. बधाइयाँ. शक्ति में ३ मात्राएँ होंगी फलतः विषम चरण १५ मात्रा का माना जायेगा, जबकि १६ मात्रा होनी चाहिए. उनमान और इतबार को शायद उन्वान और ऐतबार के अपभ्रंश के रूप में लिया गया…"
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय रक्ताले साहब. अद्भुत आल्हा रच दिया आपने बधाई.....एक रहा ललकार देख लो, केवल रहा कहने से क्रिया अपूर्ण है आदरणीय."
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर साहब, बेहतरीन आल्हा छंद. वाह !!!!!!!!!!!!!!!!!!"
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेश जी, उत्कृष्ट आल्हा छन्द. बधाइयाँ. आदरणीय अखिलेश जी ने मेरे भी मन की बात पूर्व में ही कह दी है. मूसलधार शब्द भी विचारणीय है. सादर..."
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह आदरणीय सौरभ भाई जी, अतिश्योक्ति का विलक्षण प्रयोग. प्रतिक्रिया का आल्हा, आल्हादित कर गया. "
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी, सुन्दर आल्हा छंद. हर पद मुग्ध कर रहा है. बधाइयाँ...."
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद साहब, आल्हा और सरसी छन्द में अनुपम प्रस्तुतियाँ. बधाई. ऐसा का एसा लिखा जाना बेशक टाइपिंग त्रुटी होगी. जंग के लिए हैं तैयार ... इस चरण में लय बाधित हो रही है दो विषम कलों के बीच में एक समकल आने के कारण ऐसा हुआ है.  जो…"
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतीश जी, अतिश्योक्ति से सुसज्जित वीर छंद चित्र को परिभाषित कर रहा है. ज्वार का उदित होना कुछ जम नहीं रहा है. क्या उमड़ रहा छाती में ज्वार कहा जा सकता है ?  गूँज उठी कहना मेरे विचार में उचित होगा. जोश का पारावार न कोई में कल प्रयोग…"
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"सुधार आपने कर दिया है, अब यह प्रस्तुति निर्दोष हो है. बस, ओर / ओर में भी उचित तुकांत देख लें. "
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"श्री सुरेन्द्र जी सुन्दर सरसी, खूब उकेरा चित्र  दो पद संशोधित हो जाएँ, विनती इतनी मित्र . भ्राता सौरभ के इंगित पर, करिए तनिक विचार  निश्चित यह संशोधन देगा, प्रस्तुति को आकार. "
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"कितना सुन्दर चित्र उकेरा, आल्हा में भ्राता अखिलेश  क्रीड़ा में संपन्न बहुत है, पता चल रहा भारत देश . मूल भाव अक्षरशः बिम्बित, शब्द शब्द दिखते जीवंत  किन्तु "जोश-संतोष" देख लें, दोषपूर्ण तुक हैं श्रीमंत . छन्दोत्सव का फीता काटा,…"
Sep 16

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आभार आदरणीय समर साहब. उर्दू शब्दों में तुकबंदी खोजना मेरे लिए बहुत मुश्किल काम होता है. ख़ास करके रदीफ़ को निभाता हुआ काफिया तो मुश्किल से ही खोज पाता हूँ.  आपका कथन बिलकुल सही है, बागबाँ के बदलने से सिर्फ रातरानी पर असर नहीं होता है, पर वही....…"
Aug 25

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आभार आदरणीय धामी साहब ....."
Aug 25

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आभार आदरणीय उस्मानी साहब...."
Aug 25

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दुर्ग, छत्तीसगढ़
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भारतीय स्टेट बैंक में मुख्य प्रबंधक
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एक सामयिक ग़ज़ल - अरुण कुमार निगम

एक सामयिक ग़ज़ल.....

(१२२ १२२ १२२ १२)

समाचार आया नए नोट का

गिरा भाव अंजीर-अखरोट का |

 

दवा हो गई बंद जिस रात से

हुआ इल्म फौरन उन्हें चोट का |

 

मुखौटों में नीयत नहीं छुप सकी

सभी को पता चल गया खोट का |

 

जमानत के लाले उन्हें पड़ गए

भरोसा सदा था जिन्हें वोट का |

 

नवम्बर महीना बना जनवरी

उड़ा रंग नायाब-से कोट का |

 

मकां काँच के हो गए हैं अरुण

नहीं आसरा रह गया ओट का…

Continue

Posted on November 11, 2016 at 4:30pm — 4 Comments

आम गज़ल - अरुण निगम

आम  हूँ  बौरा रहा हूँ

पीर में  मुस्का रहा हूँ

मैं नहीं दिखता बजट में

हर  गज़ट पलटा रहा हूँ  

फल रसीले बाँट कर बस

चोट को सहला रहा हूँ

गुठलियाँ किसने गिनी हैं

रस मधुर बरसा रहा हूँ

होम में जल कर, सभी की

कामना पहुँचा रहा हूँ

द्वार पर तोरण बना मैं

घर में खुशियाँ ला रहा हूँ

कौन पानी सींचता…

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Posted on March 1, 2015 at 2:00pm — 15 Comments

अच्छे दिन – अरुण कुमार निगम

पापा पापा बतलाओ ना , अच्छे दिन कैसे होते हैं

क्या होते हैं चाँद सरीखे, या तारों जैसे होते हैं.

 

बेटा ! दिन तो दिन होते हैं ,गिनती के पल-छिन होते हैं

अच्छे बीतें तो सुखमय हैं, वरना ये दुर्दिन होते हैं.

 

पापा पापा बतलाओ ना , अच्छे दिन कैसे होते हैं

क्या होते हैं दूध-मलाई , या माखन जैसे होते हैं.

 

बरसों से मैं सुनते आया, स्वप्न सजीले बुनते आया

लेकिन देखे नहीं आज तक, अच्छे दिन कैसे होते हैं

 

पापा पापा बतलाओ…

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Posted on November 23, 2014 at 11:00pm — 10 Comments

कुंडलिया छन्द : अरुण कुमार निगम

 (१)

पिसते  हरदम  ही  रहे , मन  में  पाले टीस

तुझको भी मौका मिला, तू भी ले अब पीस

तू  भी  ले  अब  पीस , बना कर खा ले रोटी

हम  चालों   के  बीच , सदा चौसर की गोटी

पूछ   रहा  विश्वास , कहाँ बदला   है मौसम

घुन  गेहूँ  के  साथ , रहे  हैं   पिसते  हरदम ||

(२)

बिल्ली  है  सम्मुख  खड़ी , घंटी  बाँधे कौन

एक  अदद  इस  प्रश्न  पर ,  सारे  चूहे  मौन

सारे   चूहे   मौन   ,  घंटियाँ   शंख   बजाते

मजबूरी   में   नित्य  ,  आरती   सारे …

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Posted on June 22, 2014 at 3:00pm — 6 Comments

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At 8:43pm on January 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

आ० अरुण जी ,मित्रता निवेदन स्वीकार कीजिये मुझे मेसेज भेजने में सहूलियत होगी |

३ फरवरी तक माह की सर्वश्रेष्ठ रचना तथा सक्रिय सदस्य का नाम मुझे मेसेज करने की कृपा करें धन्यवाद .

At 1:07pm on July 4, 2014, बृजेश नीरज said…

मेरा मित्रता निवेदन स्वीकार करने के लिए आपका हार्दिक आभार!

At 9:02pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अरुण कुमार जी।
At 9:25pm on March 25, 2014, बृजेश नीरज said…

आदरणीय आपके पास मेरा मित्रता निवेदन बहुत लम्बे अरसे से लंबित है!

At 8:28am on October 2, 2013, vijay nikore said…

आदरणीय अरूण जी:

 

ओ बी ओ कार्यकारिणी टीम में शामिल होने के लिए आपको हार्दिक बधाई।

 

विजय निकोर

 

At 4:53pm on September 29, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

// चलो छत्तीसगढ़ से एक तारा और उभरा है

तुम्हारा नाम अब आये अरुण के नाम से पहले.//......

आदरणीय आपकी इस टिप्प्णी से अन्दाज़ा हुआ , आप भी छ्तीस गढ के हैं , बहुत खुशी हुई !! मै भी छतीस गढ से हूँ , भिलाई स्टील प्लांट मे हूँ !!  सादर !!

..

At 1:32pm on August 4, 2013, hemant sharma said…

बहुत बहुत धन्यवाद तथा  आपको जन्मदिन कि हार्दिक शुभकामनायें.........

 

At 1:18pm on August 4, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

भाई अरुण कुमार निगम जी, जन्म दिन की शुभ मंगल कामनाएं -

जन्म दिवस पर आपको, खुशियाँ मिले हजार

मन की बगिया भी रहे, जीवन भर गुलजार |

कृपा करे माँ शारदा, सदा  बहे  रसधार,

माँ से ही सबको मिले,सच्चा प्यार दुलार | 

 

At 7:39am on July 4, 2013, vandana said…

आपके द्वारा सरिता जी की पोस्ट पर दोहों सम्बन्धी टिप्पणी से मेरे भी कुछ सवाल हल हुए ....आभार 

At 8:52pm on May 26, 2013, sanju shabdita said…

respected sir sadar pranam,,aapko mere ghazal ka sher pasand aaya matlab mera likhna sarthak hua . aapke sneh evm aashirvad ki sada aawashyakta rahegi...

 
 
 

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