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अरुण कुमार निगम
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अरुण कुमार निगम's Discussions

क्या यह मेरा भ्रम है ?
17 Replies

व्यक्तिगत जीवन की व्यस्तताओं व विवशताओं के कारण पूर्व की भाँति न तो लिख पा रहा हूँ और न ही प्रतिक्रिया ही प्रकट कर पा रहा हूँ किन्तु ओबीओ पर पोस्ट रचनायें प्रतिदिन नियमित तौर पर पढ़ रहा हूँ. हाँ !…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Jul 21, 2015.

विवाह की बत्तीसवीं वर्षगाँठ :
7 Replies

सपना-अरुण निगम (मदिरा सवैया)ब्याह  हुये  बत्तीस  सुहावन  साल भये नहिं भान हुआ  नित्य निरंतर जीवन में पल का पहिया गतिमान हुआ छाँव कभी  अरु धूप कभी  हर मौसम एक समान हुआ  शब्द सधे  सुर-ताल सजे  यह जीवन…Continue

Started this discussion. Last reply by Dr.Vijay Prakash Sharma Jun 11, 2014.

 

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"हौसलाअफजाई के लिए शुक्रिया आरिफ साहब ."
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय सतविन्द्र जी, उम्दा गजल कही है. बधाइयाँ."
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय योगराज जी, लाजवाब गजल कही है.  हमारे दौर में पैसा बहुत हैमगर पैसे में बरकत है? नही तो!..............आज की हकीकत यही है, वाह !!!!!!!!!!!"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय मनन जी, बेहतरीन गजल हुई. बधाइयाँ. बँटी थीं रोटियाँ भी मुफ़लिसी मेंअभी वह सब मलामत है?नहीं तो..............इस अश'आर पर विशेष दाद ....."
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय समर कबीर साहब, लाजवाब गजल हुई. बधाइयाँ.  ग़ज़ल के नाम पर बकवास करनाबुज़ुर्गों की रिवायत है? नहीं तो.....................वाह, क्या बात है...."
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय नादिर खान साहब, उम्दा गजल हुई. बधाइयाँ.  जो हम सदियों से लड़ते आ रहे हैं   किसी की ये वसीयत है ? नहीं तो....................बेहतरीन "
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय रवि जी, शानदार गजल हुई.  नहीं तुमको अगर अफ़सोस तो फिरये क्या अश्क-ए-मसर्रत है, नहीं तो।..................वाह, क्या कहने !!!!!!!"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय अजय जी, लाजवाब गजल के लिए बधाइयाँ. अमाँ कुछ तो हमें भी दो तवज़्ज़ोबुलाया क्यों था फुर्सत है नहीं तो! बड़ा प्यारा सा अश'आर, वाह !!!!!!!!!"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, उम्दा गजल कही है. हर शेर में गहरा फलसफा मन को मोह रहा है. बधाइयाँ."
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय हेमंत जी, उम्दा गजल  कही. बुढ़ापा को बुढ़ापे और खमोश को खामोश होना चाहिए.  जहाँ अम की मात्रा आवश्यक होती है वहाँ चूकना नहीं चाहिए, वरना पढ़ने में खटकता है.  मेरी आँखें हैं गहरा इक समन्दरतुम्हें लहरों की आदत है? नहीं तो इस शेर के…"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"तुम्हारे पास दौलत है ? नहीं तो ये दौलत ही इबादत है ? नहीं तो | अजी खुद को समझते ऊँट जैसा कभी देखा भी पर्वत है ? नहीं तो | हमें उलझाए रक्खा भाषणों में शराफत या शरारत है ? नहीं तो | कहो दिल पे जरा तुम हाथ रख के तुम्हें हमसे मुहब्बत है ? नहीं तो…"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया नयना जी, सार छंद पर सुन्दर प्रयास . दूसरे छंद में सम चरणों को आपस में बदल कर और सोम की जगह फागुन को लाकर देखिये, बस थोड़ा सा बदलाव करना होगा...जैसे..... छन्न पकैया छन्न पकैया, देखो फागुन आया फाग सुनाते ढोल बजाते, डाल डाल…"
Mar 18

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर साहब, हौसला आफजाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया. "
Mar 18

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"आदरणीय बासुदेव जी, आपके स्नेहाशीष हेतु आभार . "
Mar 18

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, आपके शीतल स्नेह की छाँव सदा मुझे नै प्रेरणा प्रदान करती रही है. आजीवन यह बनी रहे. सादर . "
Mar 18

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाई साहब, आपकी प्रतिक्रियाएँ देखकर ओबीओ के पुराने दिन याद आ गए. आपके स्नेह हेतु आभारी हूँ. "
Mar 18

Profile Information

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Male
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दुर्ग, छत्तीसगढ़
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durg
Profession
भारतीय स्टेट बैंक में मुख्य प्रबंधक
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एक सामयिक ग़ज़ल - अरुण कुमार निगम

एक सामयिक ग़ज़ल.....

(१२२ १२२ १२२ १२)

समाचार आया नए नोट का

गिरा भाव अंजीर-अखरोट का |

 

दवा हो गई बंद जिस रात से

हुआ इल्म फौरन उन्हें चोट का |

 

मुखौटों में नीयत नहीं छुप सकी

सभी को पता चल गया खोट का |

 

जमानत के लाले उन्हें पड़ गए

भरोसा सदा था जिन्हें वोट का |

 

नवम्बर महीना बना जनवरी

उड़ा रंग नायाब-से कोट का |

 

मकां काँच के हो गए हैं अरुण

नहीं आसरा रह गया ओट का…

Continue

Posted on November 11, 2016 at 4:30pm — 4 Comments

आम गज़ल - अरुण निगम

आम  हूँ  बौरा रहा हूँ

पीर में  मुस्का रहा हूँ

मैं नहीं दिखता बजट में

हर  गज़ट पलटा रहा हूँ  

फल रसीले बाँट कर बस

चोट को सहला रहा हूँ

गुठलियाँ किसने गिनी हैं

रस मधुर बरसा रहा हूँ

होम में जल कर, सभी की

कामना पहुँचा रहा हूँ

द्वार पर तोरण बना मैं

घर में खुशियाँ ला रहा हूँ

कौन पानी सींचता…

Continue

Posted on March 1, 2015 at 2:00pm — 15 Comments

अच्छे दिन – अरुण कुमार निगम

पापा पापा बतलाओ ना , अच्छे दिन कैसे होते हैं

क्या होते हैं चाँद सरीखे, या तारों जैसे होते हैं.

 

बेटा ! दिन तो दिन होते हैं ,गिनती के पल-छिन होते हैं

अच्छे बीतें तो सुखमय हैं, वरना ये दुर्दिन होते हैं.

 

पापा पापा बतलाओ ना , अच्छे दिन कैसे होते हैं

क्या होते हैं दूध-मलाई , या माखन जैसे होते हैं.

 

बरसों से मैं सुनते आया, स्वप्न सजीले बुनते आया

लेकिन देखे नहीं आज तक, अच्छे दिन कैसे होते हैं

 

पापा पापा बतलाओ…

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Posted on November 23, 2014 at 11:00pm — 10 Comments

कुंडलिया छन्द : अरुण कुमार निगम

 (१)

पिसते  हरदम  ही  रहे , मन  में  पाले टीस

तुझको भी मौका मिला, तू भी ले अब पीस

तू  भी  ले  अब  पीस , बना कर खा ले रोटी

हम  चालों   के  बीच , सदा चौसर की गोटी

पूछ   रहा  विश्वास , कहाँ बदला   है मौसम

घुन  गेहूँ  के  साथ , रहे  हैं   पिसते  हरदम ||

(२)

बिल्ली  है  सम्मुख  खड़ी , घंटी  बाँधे कौन

एक  अदद  इस  प्रश्न  पर ,  सारे  चूहे  मौन

सारे   चूहे   मौन   ,  घंटियाँ   शंख   बजाते

मजबूरी   में   नित्य  ,  आरती   सारे …

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Posted on June 22, 2014 at 3:00pm — 6 Comments

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At 8:43pm on January 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

आ० अरुण जी ,मित्रता निवेदन स्वीकार कीजिये मुझे मेसेज भेजने में सहूलियत होगी |

३ फरवरी तक माह की सर्वश्रेष्ठ रचना तथा सक्रिय सदस्य का नाम मुझे मेसेज करने की कृपा करें धन्यवाद .

At 1:07pm on July 4, 2014, बृजेश नीरज said…

मेरा मित्रता निवेदन स्वीकार करने के लिए आपका हार्दिक आभार!

At 9:02pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अरुण कुमार जी।
At 9:25pm on March 25, 2014, बृजेश नीरज said…

आदरणीय आपके पास मेरा मित्रता निवेदन बहुत लम्बे अरसे से लंबित है!

At 8:28am on October 2, 2013, vijay nikore said…

आदरणीय अरूण जी:

 

ओ बी ओ कार्यकारिणी टीम में शामिल होने के लिए आपको हार्दिक बधाई।

 

विजय निकोर

 

At 4:53pm on September 29, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

// चलो छत्तीसगढ़ से एक तारा और उभरा है

तुम्हारा नाम अब आये अरुण के नाम से पहले.//......

आदरणीय आपकी इस टिप्प्णी से अन्दाज़ा हुआ , आप भी छ्तीस गढ के हैं , बहुत खुशी हुई !! मै भी छतीस गढ से हूँ , भिलाई स्टील प्लांट मे हूँ !!  सादर !!

..

At 1:32pm on August 4, 2013, hemant sharma said…

बहुत बहुत धन्यवाद तथा  आपको जन्मदिन कि हार्दिक शुभकामनायें.........

 

At 1:18pm on August 4, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

भाई अरुण कुमार निगम जी, जन्म दिन की शुभ मंगल कामनाएं -

जन्म दिवस पर आपको, खुशियाँ मिले हजार

मन की बगिया भी रहे, जीवन भर गुलजार |

कृपा करे माँ शारदा, सदा  बहे  रसधार,

माँ से ही सबको मिले,सच्चा प्यार दुलार | 

 

At 7:39am on July 4, 2013, vandana said…

आपके द्वारा सरिता जी की पोस्ट पर दोहों सम्बन्धी टिप्पणी से मेरे भी कुछ सवाल हल हुए ....आभार 

At 8:52pm on May 26, 2013, sanju shabdita said…

respected sir sadar pranam,,aapko mere ghazal ka sher pasand aaya matlab mera likhna sarthak hua . aapke sneh evm aashirvad ki sada aawashyakta rahegi...

 
 
 

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