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अरुण कुमार निगम
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अरुण कुमार निगम's Discussions

क्या यह मेरा भ्रम है ?
17 Replies

व्यक्तिगत जीवन की व्यस्तताओं व विवशताओं के कारण पूर्व की भाँति न तो लिख पा रहा हूँ और न ही प्रतिक्रिया ही प्रकट कर पा रहा हूँ किन्तु ओबीओ पर पोस्ट रचनायें प्रतिदिन नियमित तौर पर पढ़ रहा हूँ. हाँ !…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Jul 21, 2015.

विवाह की बत्तीसवीं वर्षगाँठ :
7 Replies

सपना-अरुण निगम (मदिरा सवैया)ब्याह  हुये  बत्तीस  सुहावन  साल भये नहिं भान हुआ  नित्य निरंतर जीवन में पल का पहिया गतिमान हुआ छाँव कभी  अरु धूप कभी  हर मौसम एक समान हुआ  शब्द सधे  सुर-ताल सजे  यह जीवन…Continue

Started this discussion. Last reply by Dr.Vijay Prakash Sharma Jun 11, 2014.

 

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय रवि शुक्ल जी, उम्दा गजल कही, बधाइयाँ।"
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय नमन साहब खूबसूरत गजल के लिए बधाई।"
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"राज साहब, लाजवाब गजल के लिए बधाइयाँ"
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"सुंदर गजल कही। अंतिम शेर में नेता और निकला पर गौर फरमाएँ। अंतिम मात्रा समान राह के पर दोष कहा जाता है। "
Jun 27
dandpani nahak left a comment for अरुण कुमार निगम
"आदरणीय अरुण कुमार निगम जी आदाब, बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का"
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, लाजवाब गजल के लिए बधाइयाँ। हर शेर दमदार है। "
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय मनन जी, अच्छा प्रयास।  सुर्खियों में हो गई, यहाँ लय बाधित लग रही है। "हो" को मात्रा गिरा कर पढ़ना सम्भव नहीं लग रहा है। "
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय दण्डपाणि जी, सुंदर गजल कही। गिरह खूब जमी।बधाई।"
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय आसिफ साहब, सुंदर गजल कही। ये गजल कुछ समय और मानती है। "
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय सुरेंदर जी, तरही मुशायरे का आगाज करने के लिए बधाइयाँ अच्छी गजल कही है। "
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"छेड़ जज़्बात से बेजान सितमगर निकला सीटियाँ मारता था रोज वो कूकर निकला। जुल्फोरुखसार सजाए थे बड़ी हसरत से हाँ मगर देखने वाला बड़ा कायर निकला। हम खजाने की जिसे सौंप गए थे चाबी भोली सूरत थी मगर नस्ल से अजगर निकला। खूँ पसीने से बनाए हैं कई घर जिसने एक…"
Jun 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"शानदार गजल के लिए बधाइयाँ।"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"वाह, लाजवाब गजल। बधाइयाँ।"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"शानदार गजल के लिए बधाइयाँ"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"सुंदर प्रयास हेतु बधाइयाँ।"
Apr 27

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अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"सुंदर प्रयास के लिए बधाइयाँ।"
Apr 27

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नसीहत को गिनिए नहीं धमकियों में - अरुण कुमार निगम

एक ग़ज़ल.......


122 122 122 122


नजर है तो पढ़िए गजल झुर्रियों में
ये चेहरा कभी है रहा सुर्खियों में।


वतन को सजाने के वादे किए थे
सदा आप उलझे रहे कुर्सियों में।


मसीहा समझ के था अगुवा बनाया
मगर आप भी ढल गए मूर्तियों में।


चढ़ाया हमीं ने उतारेंगे हम ही
पलक के झपकते, यूँ ही चुटकियों में।


अरुण के इशारे समझ लें समय है
नसीहत को गिनिए नहीं धमकियों में।।

(मौलिक व अप्रकाशित)☺

Posted on August 4, 2018 at 8:00pm — 5 Comments

एक सामयिक ग़ज़ल - अरुण कुमार निगम

एक सामयिक ग़ज़ल.....

(१२२ १२२ १२२ १२)

समाचार आया नए नोट का

गिरा भाव अंजीर-अखरोट का |

 

दवा हो गई बंद जिस रात से

हुआ इल्म फौरन उन्हें चोट का |

 

मुखौटों में नीयत नहीं छुप सकी

सभी को पता चल गया खोट का |

 

जमानत के लाले उन्हें पड़ गए

भरोसा सदा था जिन्हें वोट का |

 

नवम्बर महीना बना जनवरी

उड़ा रंग नायाब-से कोट का |

 

मकां काँच के हो गए हैं अरुण

नहीं आसरा रह गया ओट का…

Continue

Posted on November 11, 2016 at 4:30pm — 4 Comments

आम गज़ल - अरुण निगम

आम  हूँ  बौरा रहा हूँ

पीर में  मुस्का रहा हूँ

मैं नहीं दिखता बजट में

हर  गज़ट पलटा रहा हूँ  

फल रसीले बाँट कर बस

चोट को सहला रहा हूँ

गुठलियाँ किसने गिनी हैं

रस मधुर बरसा रहा हूँ

होम में जल कर, सभी की

कामना पहुँचा रहा हूँ

द्वार पर तोरण बना मैं

घर में खुशियाँ ला रहा हूँ

कौन पानी सींचता…

Continue

Posted on March 1, 2015 at 2:00pm — 15 Comments

अच्छे दिन – अरुण कुमार निगम

पापा पापा बतलाओ ना , अच्छे दिन कैसे होते हैं

क्या होते हैं चाँद सरीखे, या तारों जैसे होते हैं.

 

बेटा ! दिन तो दिन होते हैं ,गिनती के पल-छिन होते हैं

अच्छे बीतें तो सुखमय हैं, वरना ये दुर्दिन होते हैं.

 

पापा पापा बतलाओ ना , अच्छे दिन कैसे होते हैं

क्या होते हैं दूध-मलाई , या माखन जैसे होते हैं.

 

बरसों से मैं सुनते आया, स्वप्न सजीले बुनते आया

लेकिन देखे नहीं आज तक, अच्छे दिन कैसे होते हैं

 

पापा पापा बतलाओ…

Continue

Posted on November 23, 2014 at 11:00pm — 10 Comments

Comment Wall (17 comments)

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At 3:30pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अरुण कुमार निगम जी आदाब, बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 6:37am on August 5, 2018, Kishorekant said…

आदरणीय अरूणकुमार निगमजी, हमने अपनी नजरोंसे आपकी क़लमकार कमाल देख लिया है ! बहुत ही प्रभावि रचना केलिये साधुवाद स्विकार करें ?

At 8:43pm on January 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

आ० अरुण जी ,मित्रता निवेदन स्वीकार कीजिये मुझे मेसेज भेजने में सहूलियत होगी |

३ फरवरी तक माह की सर्वश्रेष्ठ रचना तथा सक्रिय सदस्य का नाम मुझे मेसेज करने की कृपा करें धन्यवाद .

At 1:07pm on July 4, 2014, बृजेश नीरज said…

मेरा मित्रता निवेदन स्वीकार करने के लिए आपका हार्दिक आभार!

At 9:02pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अरुण कुमार जी।
At 9:25pm on March 25, 2014, बृजेश नीरज said…

आदरणीय आपके पास मेरा मित्रता निवेदन बहुत लम्बे अरसे से लंबित है!

At 8:28am on October 2, 2013, vijay nikore said…

आदरणीय अरूण जी:

 

ओ बी ओ कार्यकारिणी टीम में शामिल होने के लिए आपको हार्दिक बधाई।

 

विजय निकोर

 

At 4:53pm on September 29, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

// चलो छत्तीसगढ़ से एक तारा और उभरा है

तुम्हारा नाम अब आये अरुण के नाम से पहले.//......

आदरणीय आपकी इस टिप्प्णी से अन्दाज़ा हुआ , आप भी छ्तीस गढ के हैं , बहुत खुशी हुई !! मै भी छतीस गढ से हूँ , भिलाई स्टील प्लांट मे हूँ !!  सादर !!

..

At 1:32pm on August 4, 2013, hemant sharma said…

बहुत बहुत धन्यवाद तथा  आपको जन्मदिन कि हार्दिक शुभकामनायें.........

 

At 1:18pm on August 4, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

भाई अरुण कुमार निगम जी, जन्म दिन की शुभ मंगल कामनाएं -

जन्म दिवस पर आपको, खुशियाँ मिले हजार

मन की बगिया भी रहे, जीवन भर गुलजार |

कृपा करे माँ शारदा, सदा  बहे  रसधार,

माँ से ही सबको मिले,सच्चा प्यार दुलार | 

 

 
 
 

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