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अरुण कुमार निगम's Discussions (3,693)

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"आदरणीय गणेश बागी जी को जन्म दिवस की हार्दिक बधाइयाँ"

अरुण कुमार निगम replied May 4, 2022 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"अलबेला खत्री जी, संजय मिश्रा हबीब जी, अरुण अनंत जी और अब महिमाश्री....अल्प समय में ह…"

अरुण कुमार निगम replied Apr 28, 2022 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीया कल्पना भट्ट जी की पोस्ट से ज्ञात हुआ कि ओपेनबुक्स ओ लाइन की एक समय की सक्रिय…"

अरुण कुमार निगम replied Apr 28, 2022 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"वाह! ओपन बुक्स ऑनलाइन की बारहवीं वर्षगाँठ पर समस्त मित्रों को अनेकानेक बधाइयाँ, शुभक…"

अरुण कुमार निगम replied Apr 3, 2022 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय समीर कबीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयाँ"

अरुण कुमार निगम replied Sep 16, 2021 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"सम्पूर्ण ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार को दसवीं वर्षगाँठ की  हार्दिक शुभकामनाएँ"

अरुण कुमार निगम replied Apr 3, 2020 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय समर कबीर साहब को जन्मदिन की अशेष बधाइयाँ"

अरुण कुमार निगम replied Sep 8, 2019 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय कबीर साहब से अनुरोध कृपया मेरे नए मतले पर एक नजर जरूर फेरें"

अरुण कुमार निगम replied Jul 27, 2019 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109

305 Jul 27, 2019
Reply by Samar kabeer

"मंच संचालक महोदय से निवेदन -  मेरी तरही गजल का मतला बदल कर यूँ कर दीजिएगा  हम आपको…"

अरुण कुमार निगम replied Jul 27, 2019 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109

305 Jul 27, 2019
Reply by Samar kabeer

"आदरणीया रचना जी, बेहतरीन गजल कही। बधाइयाँ।"

अरुण कुमार निगम replied Jul 27, 2019 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109

305 Jul 27, 2019
Reply by Samar kabeer

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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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Sushil Sarna posted a blog post

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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
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