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दीप दान की थाती

नेह रचित इक बाती रखनादीप दान की थाती रखना जग के  अंकगणित में उलझेकुछ सुलझे से कुछ अनसुलझेगठबंधन कर संबंधों कीस्नेहिल परिमल पाती रखना कुछ सहमी सी कुछ सकुचाईजिनकी किस्मत थी धुंधलाईमलिन बस्तियों के होठों परकलियाँ कुछ मुस्काती रखना बंद खिडकियों को खुलवाकरदहलीजों पर रंग सजाकरजगमग बिजली की लड़ियों सेदीपमाल बतियाती रखना मधुरिम मधुरिम अपनेपन काअभिनन्दन कर उत्सव मन काबचपन की फुलझड़ियों सी तुमचंचल काना-बाती रखना-मौलिक एवं अप्रकाशित  See More
Oct 16
vandana posted a blog post

दीप दान की थाती

नेह रचित इक बाती रखनादीप दान की थाती रखना जग के  अंकगणित में उलझेकुछ सुलझे से कुछ अनसुलझेगठबंधन कर संबंधों कीस्नेहिल परिमल पाती रखना कुछ सहमी सी कुछ सकुचाईजिनकी किस्मत थी धुंधलाईमलिन बस्तियों के होठों परकलियाँ कुछ मुस्काती रखना बंद खिडकियों को खुलवाकरदहलीजों पर रंग सजाकरजगमग बिजली की लड़ियों सेदीपमाल बतियाती रखना मधुरिम मधुरिम अपनेपन काअभिनन्दन कर उत्सव मन काबचपन की फुलझड़ियों सी तुमचंचल काना-बाती रखना-मौलिक एवं अप्रकाशित  See More
Oct 16
vandana commented on SALIM RAZA REWA's blog post दिल का मुआमला है कोई दिल लगी नहीं - सलीम रज़ा रीवा : ग़ज़ल
"..ख़ूनें जिगर से मैंने सवाँरी है हर ग़ज़ल,मेरे सुख़न का  रंग कोई  काग़ज़ी नहीं..मैं  खुद गुनाहगार हूँ अपनी निगाह  में,उसके ख़ुलूस-ओ-प्यार में कोई कमी नहीं वाह बहुत खूब आदरणीय "
Oct 16
vandana commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"एक बस वो नहीं हुआ मेराक्या नहीं होता वर्ना होने कोकिस लिये हैं इन आँखों में आँसूपास भी क्या था जब कि खोने कोज़िद नहीं करता अब खिलौनों कीक्या हुआ दिल के इस खिलौने को बहुत खूब आदरणीय दिनेश जी "
Oct 16
Samar kabeer commented on vandana's blog post दीप दान की थाती
"'गणित की पुस्तक'में 'की'ही बोला जायेगा,क्योंकि 'किताब'शब्द स्त्रीलिंग है,और 'जग की अंकगणित में 'जग'और 'गणित'दोनों पुल्लिंग हैं,इसलिये 'की'नहीं हो सकता । 'गठबंधन कर संबंधों…"
Oct 15
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on vandana's blog post दीप दान की थाती
"बहुत ही सुमधुर रचना हुई आदरणीया..सादर बधाई"
Oct 15
vandana commented on vandana's blog post दीप दान की थाती
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय कबीर सर आपके सुझाव बहुत महत्वपूर्ण हैं सर अंक- गणित के पूर्व 'के' शब्द का ही प्रयोग होना चाहिए था सामान्यत: हम गणित की पुस्तक बोलते रहे हैं इस वज़ह से यह गलती हुई |मैं  इसमें सुधार कर लूंगी आदरणीय …"
Oct 15
Samar kabeer commented on vandana's blog post दीप दान की थाती
"मोहतरमा वंदना जी आदाब,दीपावली के अवसर पर गीत का अच्छा प्रयास हुआ है,इसके लिये बधाई स्वीकार करें । गीत में शिल्प और प्रवाह का बहुत महत्व होता है जिसका ध्यान रखना आवश्यक है,इसके अलावा व्याकरण दोष का भी ध्यान जरुरी है :- 'जग की अंकगणित में…"
Oct 15
vandana commented on vandana's blog post दीप दान की थाती
" बहुत बहुत आभार आदरणीय आरिफ साहब आदरणीय शहज़ाद सर और आदरणीय सलीम सर "
Oct 15
vandana commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - अब हक़ीकत से ही बहल जायें ( गिरिराज भंडारी )
"ज़ख़्म को खोद कुछ बड़ा कीजे ता कि कुछ कैमरे दहल जायें बहुत ग़ज़ब का व्यंग्य बहुत बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय "
Oct 15
vandana commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"नहीं अनबन, नहीं शिकवा ही कोई*बस इतना है कि अब वो मन नहीं है* बहुत बढ़िया आदरणीय "
Oct 15
vandana commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल - चाहे आँखों लगी, आग तो आग है.. // --सौरभ
"बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई आदरणीय सौरभ सर "
Oct 15
vandana commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।
"वाह ग़ज़ब की सोच वाकई कमाल आदरणीय बहुत बहुत बधाई "
Oct 15
vandana commented on SALIM RAZA REWA's blog post ग़ज़ल : ज़रा  सोचिए दिल लगाने से पहले : SALIM RAZA REWA
"बहुत सुन्दर ग़ज़ल आदरणीय सलीम साहब "
Oct 15
vandana commented on rajesh kumari's blog post वक़्त ऐसी किताब माँगेगा (ग़ज़ल 'राज')
"कैद जिसके लिए किया जुगनू कल वही माहताब माँगेगा वाह आदरणीया राजेश दी बहुत खूब "
Oct 15
vandana commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल: बलराम धाकड़
"वो ही ख़ैरात बांटेंगे वो ही एहसां जताएंगेविमानों से निज़ामों का भ्रमण होगा तो क्या होगा सामयिक परिदृश्य पर बढ़िया हिंदी  ग़ज़ल आदरणीय "
Oct 15

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Female
City State
sikar rajasthan
Native Place
sikar
Profession
teacher
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keen interest in literature

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दीप दान की थाती

नेह रचित इक बाती रखना

दीप दान की थाती रखना

 

जग के  अंकगणित में उलझे

कुछ सुलझे से कुछ अनसुलझे

गठबंधन कर संबंधों की

स्नेहिल परिमल पाती रखना

 

कुछ सहमी सी कुछ सकुचाई

जिनकी किस्मत थी धुंधलाई

मलिन बस्तियों के होठों पर

कलियाँ कुछ मुस्काती रखना

 

बंद खिडकियों को खुलवाकर

दहलीजों पर रंग सजाकर

जगमग बिजली की लड़ियों से

दीपमाल बतियाती रखना

 

मधुरिम मधुरिम अपनेपन…

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Posted on October 14, 2017 at 9:30pm — 8 Comments

तरही ग़ज़ल -वंदना

सभी विद्वजनों से इस्लाह के लिए -

वज्न 2122   /   2122   /   2122   /   212  (2121)

कोई तुझसा होगा भी क्या इस जहाँ में कारसाज

डर कबूतर को सिखाने रच दिए हैं तूने बाज

 

तीरगी के करते सौदे छुपछुपा जो रात - दिन

कर रहे हैं वो दिखावा ढूँढते फिरते सिराज

 

ज्यादती पाले की सह लें तो बिफर जाती है धूप

कर्ज पहले से ही सिर था और गिर पड़ती है गाज

   

जो ज़मीं से जुड़ के रहना मानते हैं फ़र्ज़-ए-जाँ

वो ही काँधे को झुकाए बन…

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Posted on February 1, 2014 at 7:30am — 25 Comments

तरही ग़ज़ल -वंदना

मंच पर सभी विद्वजनों से इस्लाह के लिए

२१२२  १२१२  २२१ 

पैरवी मेरी कर न पाई चोट                                                          

पास रहकर रही पराई चोट

फलसफे अनगिनत सिखा ही देगी

असल में करती रहनुमाई चोट

महके चन्दन पिसे भी सिल पर तो

रोता कब है कि मैनें खाई चोट

सब्र का ही तो मिला सिला हमको

सहते रहकर मिली सवाई चोट

तन्हा ढ़ोता है दर्द हर इंसां

क्यूँ तू रिश्ते बढ़ा न पाई  चोट…

Continue

Posted on January 2, 2014 at 8:00am — 22 Comments

भागीरथ के देश में ( लघुकथा )

प्राचार्य जी के साथ विद्यालय से निकल के कुछ दूर चले ही थे कि मुखिया जी ने पुकार लिया | बैठक में काफी लोग चर्चामग्न थे | बढती बेरोजगारी और आतंकवाद के परस्पर सम्बन्धों  से लेकर शिक्षित लोगों के ग्राम पलायन तक अनेक मुद्दों पर सार्थक विचार गंगा बह रही थी |कुछ देर बाद जब अधिकांश लोग उठकर चले गए तो मुखिया जी ने प्राचार्य जी से कहा –

“वो रामदीन के नवीं कक्षा वाले छोरे को पूरक क्यों दे दी ?”…

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Posted on October 8, 2013 at 7:30am — 15 Comments

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At 6:54pm on January 30, 2014, NEERAJ KHARE said…
VANDNA JI LAGHU KATHA PASAND AAI ...BAHUT BAHUT DHANYVAD
At 12:15pm on December 10, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

वंदना जी

आपकी भावनाओ का  समादर  i

शुभ कामनाओ सहित  i

At 9:50pm on December 7, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय वन्दना जी

सर्व श्रेष्ठ रचनाकार होना कोई हंसी खेल नही है i

आपको यह गौरव  मिला  i  आपको कोटि-कोटि बधाइयाँ i

ईश्वर आपको ऐसे ही  गौरवान्वित करे i

सादर i

At 2:34pm on December 7, 2013, Ayub Khan "BismiL" said…

bahut bahut mubarak ho Vandna Sahiba Aapko 

At 10:54am on December 7, 2013, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया वंदना जी ..आपकी बेहतरीन ग़ज़ल को इस माह की सर्वश श्रेष्ठ  रचना चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई ..सादर 

At 6:52am on December 7, 2013, Nilesh Shevgaonkar said…

आप की रचना को सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने पर बधाइयाँ ..अभिनन्दन 

At 10:43pm on December 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया वंदना जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति  तरही ग़ज़ल (ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक-41) को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना पुरस्कार के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको पुरस्कार राशि रु 1100 /- और प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत हेतु), तथा पत्राचार का पता व् फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 12:02pm on July 1, 2013, DR SHRI KRISHAN NARANG said…

Vandana ji, open books main aapka swagat hai. Aap bhi kuch likhati hain ya nahi?

Dr Shri Krishan Narang, Ph.D(IISc)

 
 
 

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