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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 चेतन प्रकाश साहब अच्छी ग़ज़ल हुई । आपको हार्दिक बधाई ।"
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 अमित जी ग़ज़ल का सुंदर प्रयास हुआ है । विद्वान जनो से सहमत । ग़ज़ल अभी वक्त मांग रही है ।"
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 साहब बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आपको "
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 गुलशन खैराबादी साहब बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आपको "
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"साहब बहुत शुक्रियः । गिरह के विषय मे मंच पर चर्चा होनी चाहिए । अनावश्यक तौर पर किसी शायर के मिसरे पर वक्त जाया करना , ....इस पर चिंतन होना चाहिए । मैं किसी भी तरही मुशायरे में अब तक गिरह से बचता रहा हूँ । जिस दिन गिरह की सार्थकता समझ मे आ जायेगी तब…"
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 मैथानी साहब दिल से शुक्रियः"
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 बागपतवी साहब अच्छी इस्लाह के लिए दिल से शुक्रियः"
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 ऋचा यादव जी हार्दिक आभार "
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 चेतन प्रकाश साहब विशेष आभार । मेरे विचार से तरही ग़ज़ल  में गिरह लगाना उचित नहीं । किसी अन्य शाइर के मिसरे में अपना मिसरा जोड़ना मात्र अभ्यास के लिए ही उचित है अगर कहीं ग़लती से यह मिसरा ग़ज़ल के साथ प्रकाशित हो जाये तो और बड़ी आफ़त । इसलिए मैं…"
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ0 बागपतवी साहब अच्छी इस्लाह के लिए तहेदिल से शुक्रियः। "
Jun 25
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"इतना काफ़ी नहीं है उसकी शिक़ायत क्या है ।जानना ये भी ज़रूरी है हक़ीक़त क्या है ।।1 बारहा जेहन में उसको बिठा के क्या करना ।है ख़बर जिसको नहीं जीस्त में उल्फ़त क्या हैll2     हुई है दुनिया यहां बेवफ़ा सी जब यारो ।इश्क़ में हद से गुज़रने की…"
Jun 24
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ0 तस्दीक अहमद खान जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई "
May 27
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ0 सालिक गणवीर जी बहुत खूब ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
May 27
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ0 शुक्ला जी बहुत खूब ग़ज़ल कही आपने हार्दिक बधाई "
May 27
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ0 स्वप्निल जी बहुत खूब ग़ज़ल हुई बधाई ।"
May 27
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ0 अनिल सिंह साहब बहुत खूब ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आपको ।"
May 27

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

   1212        1122         1212               112

हैं मुन्तज़िर मेरे अहबाब देखने के लिए ।

जमीं पे उतरेगा महताब देखने के लिए ।।1

न जाने कैसा नशा है तुम्हारी सूरत में ।

सुना है रिन्द हैं बेताब देखने के लिए ।।2

तू अपनी तिश्नगी पे यार आज काबू रख ।

मिलेंगे और भी ज़हराब देखने के लिए ।।3

बहेंगे आप भी दरिया ए अश्क़ में इक दिन ।

अगर यूँ आएंगे शैलाब देखने के लिए ।।4

कुछ इस तरह से ख़ुदा ने नसीब बख़्शा है ।

हमें मिला ही…

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Posted on August 29, 2021 at 8:52am — 4 Comments

ग़ज़ल-क़ातिलों के साथ जब हमको नज़र आई सियासत

2122 2122 2122 2122

कैसे कह दें मुल्क में कितनी निखर आयी सियासत ।

क़ातिलों के साथ जब हमको नज़र आई सियासत ।।

चाहतें सब खो गईं और खो गए अम्नो सुकूँ भी ।

इक तबाही का लिए मंज़र जिधर आई सियासत ।।

नफ़रतों के ज़ह्र से भीगा मिला हर शख़्स मुझको ।

कुर्सियों के वास्ते जब गाँव- घर आई सियासत।।

मन्दिरो मस्ज़िद में बैठे खून के प्यासे बहुत हैं ।

क्या हुआ इस मुल्क में जो इस कदर आई सियासत ।।

आदमी का ख़्वाब देखो फिर ठगा सा…

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Posted on December 23, 2020 at 1:00am — 8 Comments

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



ख़ाक हो गयी खुशी, था आग का पता नहीं ।

ख़्वाब सारे जल गए, मगर धुआँ उठा नहीं ।

पूछिये न हाले दिल यूँ बारहा मेरा सनम ।

ये हमारे दर्दोगम का सिलसिला नया नहीं ।।

इक नज़र से दिल मेरा वो लूट कर चला गया ।

इस सितम पे क्यूँ अभी तलक कोई खफ़ा नहीं ।।

रूबरू था हुस्न …

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Posted on August 4, 2020 at 11:31pm — 7 Comments

ग़ज़ल

2212 2212 2212 2212

मैं ठोकरें खाता रहा मुझ पर तरस आता था कब ।

इस ज़िंदगी पर सच बताएं आपका साया था कब ।।1

जीता रहा मैं बेखुदी में मुस्कुरा कर उम्र भर।

अब याद क्या करना कि मैंने होश को खोया था कब ।।2

वो कहकशां की बज़्म थी, उन बादलों के दरमियां ।

मुझको अभी तक याद है वो चाँद शर्माया था कब ।।3

जलते रहे क्यूँ शमअ में परवाने सारी रात तक ।

तू वस्ल के अंज़ाम का ये फ़लसफ़ा समझा था कब ।।4

जो अश्क़ में डूबा मिला था…

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Posted on August 4, 2020 at 5:44pm — 4 Comments

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At 10:37pm on May 11, 2020, Naveen Mani Tripathi said…

आ0 मिथिलेश वामनकर साहब

आ0 किशोर कान्त साहब

आ0तेजवीर सिंह साहब

आ0 दण्ड पाणि नाहक साहब

आप सभी आदरणीय को तहेदिल से शुक्रिया और नमन ।

At 12:06pm on May 8, 2020, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें। स्वस्थ रहें। दीर्घायु बनें।जीवन में हमेशा उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 11:34am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!
At 10:44am on May 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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