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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Neelam Upadhyaya commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बेहतरीन ग़ज़ल की पेशकश के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी। "
6 minutes ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर साहब सप्रेम आभार और तहे दिल से शुक्रिया ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 तेजवीर सिंह साहब ग़ज़ल तक आने के लिए तहे दिल से शुक्रिया और आभार व्यक्त करता हूँ ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर बहुत बहुत आभार और तहे दिल से शुक्रियः । मैंने रब्त बनाने का प्रयास किया था सम्भवतः कामयाब नहीं हो सका ।  सादर नमन ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 बबिता गुप्ता जी हार्दिक आभार ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 श्याम नारायण वर्मा जी हार्दिक आभार ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 तेजवीर सिंह साहब बहुत बहुत शुक्रिया ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी सादर अभिवादन । सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। कर्ज कुछ तो वतन का है तुम पर।खून को दागदार मत करना ।।"
12 hours ago
babitagupta commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बेहतरीन प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।"
14 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

इस चमन में गुबार मत करना ।अम्न को तार तार मत करना ।।हो रही हर तरफ़ नई साज़िश ।बेसबब जां निसार मत करना ।।कर्ज कुछ तो वतन का है तुम पर।खून को दागदार मत करना ।।ख़्वाहिशें गर हैं आज़माने की ।हौसलों को फ़रार मत करना ।।लूट जाता है मुस्कुरा कर वो ।दिल का सौदा उधार मत करना ।।कैसे कह दें बहक नहीं सकते।तुम अभी ऐतबार मत करना ।।उम्र गुजरी जिसे बनाने में ।दोस्ती में दरार मत करना ।।माँग कर फिर मेरी मुहब्बत को ।प्यार को शर्म सार मत करना ।।क़ामयाबी अगर ज़रूरी है ।ख़ाब का इश्तिहार मत करना ।।मैं तुम्हारी नियत से वाक़िफ़…See More
15 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है ।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बेहतरीन गज़ल। सत्ता में बैठ कर वो बहुत माल खा रहा ।यह बात भी कहीं तो उछाला करे कोई ।।"
Saturday
Shyam Narain Verma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"इस उम्दा ग़ज़ल के लिए ह्रदय से बधाई स्वीकार करें सादर "
Saturday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 बसन्त कुमार साहब बहुत बहुत आभार ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदारणीया नीलम उपाध्याय जी सादर नमन रचना तक आने के लिए सप्रेम आभार ।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

इस चमन में गुबार मत करना ।

अम्न को तार तार मत करना ।।

हो रही हर तरफ़ नई साज़िश ।

बेसबब जां निसार मत करना ।।

कर्ज कुछ तो वतन का है तुम पर।

खून को दागदार मत करना ।।

ख़्वाहिशें गर हैं आज़माने की ।

हौसलों को फ़रार मत करना ।।

लूट जाता है मुस्कुरा कर वो ।

दिल का सौदा उधार मत करना ।।

कैसे कह दें बहक नहीं सकते।

तुम अभी ऐतबार मत करना ।।

उम्र गुजरी जिसे बनाने में ।

दोस्ती में दरार मत करना…

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Posted on July 16, 2018 at 5:33pm — 5 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

इन्साफ का हिसाब लगाया करे कोई।

होता कहीं तलाक़ हलाला करे कोई।।

उनको तो अपने वोट से मतलब था दोस्तों ।

जिन्दा रखे कोई भी या मारा करे कोई।।

मजहब को नोच नोच के बाबा वो खा गया ।

बगुला भगत के भेष में धोका करे कोई ।।

लूटी गई हैं ख़ूब गरीबों की झोलियाँ ।

हम से न दूर और निवाला करे कोई ।।

सत्ता में बैठ कर वो बहुत माल खा रहा ।

यह बात भी कहीं तो उछाला करे कोई ।।

आ जाइये हुजूर जरा अब ज़मीन…

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Posted on July 13, 2018 at 2:20pm — 12 Comments

न कोई तिश्नगी होती न कोई हादसा होता

1222 1222 1222 1222



यहां इंसानियत से गर सभी का राबिता होता ।।

यकीनन मुल्क का यह सर नहीं झुकता मिला होता ।।1

मुहब्बत के उसूलों को अगर उसने पढ़ा होता ।

न कोई तिश्नगी होती न कोई हादसा होता ।।2

बहुत बेचैन दरिया की उसे पहचान है शायद ।

वग़रना वह समंदर तो नदी को ढूढ़ता होता ।।3

तुम्हारी शर्त को हम मान लेते बेसबब यारों।

हमें अंजामे रुसवाई अगर इतना पता होता ।।4

सियासत दां…

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Posted on July 7, 2018 at 2:00pm — 13 Comments

कोई दुपट्टा उड़ा रहा था

121 22 121 22

वो शख्स क्यूँ मुस्कुरा रहा था ।

जो मुद्दतों से ख़फ़ा रहा था ।।

वो चुपके चुपके नये हुनर से ।

सही निशाना लगा रहा था ।।

अदाएँ क़ातिल निगाह पैनी।

जो तीर दिल पर चला रहा था ।।

तबाह करने को मेरी हस्ती ।

कोई इरादा बना रहा था ।।

मुग़ालता है उसे यकीनन ।

नया फ़साना सुना रहा था ।।

बदलते चेहरे का रंग कुछ तो ।

तुम्हारा मक़सद बता रहा था…

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Posted on July 3, 2018 at 3:09pm — 12 Comments

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At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
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"आ0 कबीर सर बहुत बहुत आभार और तहे दिल से शुक्रियः । मैंने रब्त बनाने का प्रयास किया था सम्भवतः…"
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"आ0 बबिता गुप्ता जी हार्दिक आभार ।"
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"आ. भाई दिनेश जी, बहुत अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी सादर अभिवादन । सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।"
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