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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले का सानी मिसरा यूँ कर लें मफ़हूम साफ़ हो जायेगा :- 'जिसको सुकून मिलता था उलझे सवाल में' 'आनी थी हिज्र आ गई शिकवा ख़ुदा से क्या' इस मिसरे में…"
2 hours ago
dandpani nahak commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल अजब सी बेकरारी हो रही है
"वाह क्या बात है आदरणीय"
10 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल अजब सी बेकरारी हो रही है

1222 1222 122किसी पर जां निसारी हो रही है ।नदी अश्कों से खारी हो रही है ।।सुकूँ की अब फरारी हो रही है ।अजब सी बेकरारी हो रही है ।।तुम्हारे हुस्न पर है दाँव सारा ।यहाँ दुनियां जुआरी हो रही है ।।शिकस्ता अज़्म है कुछ आपका भी ।सजाये मौत जारी हो रही है ।।जली है फिर कोई बस्ती वतन की ।फजीहत फिर हमारी हो रही है ।।यहां तहजीब का आलम न पूछो।वफ़ा की ख़ाकसारी हो रही है ।।कहा था मत पियो इतना जियादह ।बड़ी लम्बी खुमारी हो रही है ।।जरा पर्दे में रहना सीख लो तुम ।नज़र कोई शिकारी हो रही है ।।कतारें लग चुकीं रिन्दों की…See More
12 hours ago
Shyam Narain Verma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"बहूत उम्दा हार्दिक बधाई l सादर"
yesterday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

गज़ल

221 2121 1221 212डूबा मिला है आज वो गहरे खयाल में ।मिलता कहाँ सुकून है उलझे सवाल में ।।बरबादियों का जश्न मनाते रहे वो खूब ।फंसते गए जो लोग मुहब्बत के जाल में ।।आनी थी हिज्र आ गयी शिकवा खुदा से क्या ।रहते मियां हैं आप भी अब क्यों मलाल में ।।करता है ऐश कोई बड़े धूम धाम से ।डाका पड़ा है आज यहां फिर रिसाल में ।।शेयर गिरा धड़ाम से सदमा लगा बहुत।जिसने लिया था माल को बढ़ते उछाल में ।।पोंछा था अश्क़ आप का उस दिन के बाद से ।खुशबू बची है आपकी मेरी रुमाल में ।।अक्सर वो मेरी जान के पीछे पड़ा है क्यूँ।रहता जो एक…See More
Friday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"दूसरा शेर बह्र से खारिज़ हो रहा है ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"शुक्रिया जनाब आरिफ साहब"
Friday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"221 2121 1221 212 उल्फत में अपना दिल न जलाएं तो क्या करें । जब आप ही ये आग लगाएं तो क्या करें ।। यह अज़्म भी शिकस्ता है मजबूरियों के नाम । तीरे नज़र वो दिल में चुभाएँ तो क्या करें ।। मैं तो वफ़ा के नाम पे कुर्बान हो गया । वो बेवफा ही कह के बुलाएं तो…"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल- समझा हूँ तेरे हुस्न के ज़ेरे ज़बर को में
"आदरणीय कबीर सर सादर नमन । सबसे पहले आपके स्वस्थ रहने की दुआ करता हूँ । आपके बिना ओबीओ सूना हो जाता है । आपकी बात पर ध्यान देकर ग़ज़ल की री राइटिंग करूँगा । आपके जैसे उस्ताद दुर्लभ हैं । "
Wednesday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल- समझा हूँ तेरे हुस्न के ज़ेरे ज़बर को में
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, "ग़ालिब'की ज़मीन में ग़ज़ल का प्रयास अभी और समय चाहता है,कई अशआर में रदीफ़ से इंसाफ़ नहीं हो सका, कई अशआर के दोनों मिसरों में रब्त नहीं पैदा हो सका, इस ज़मीन में फ़िल्म 'बरसात की रात'में 'साहिर की ग़ज़ल…"
Wednesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब हार्दिक आभार"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आ. भाई नवीन जी, सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई ।"
Wednesday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल- समझा हूँ तेरे हुस्न के ज़ेरे ज़बर को में

221 2121 1221 212ढूढा हूँ मुश्किलों से सलामत गुहर को मैं।समझा हूँ तेरे हुस्न के जेरो जबर को मैं ।।यूँ ही नहीं हूं आपके मैं दरमियाँ खड़ा ।नापा हूँ अपने पाँव से पूरे सफर को मैं ।।मारा वही गया जो भला रात दिन किया ।।देखा हूँ तेरे गाँव में कटते शजर को मैं ।।मत पूछिए कि आप मेरे क्या नहीं हुए ।।पाला हूँ बड़े नाज़ से अहले जिगर को मैं ।।शायद तेरे वजूद की कोई खबर मिले ।पढ़ता रहा हूँ आज तलक हर खबर को मैं ।।कुछ तो करम हो आपका उल्फत के नाम पर ।रक्खूँगा आप पर भी कहाँ तक नज़र को मैं ।।इस फ़ासले के दौर में ऐसा न हो…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
Feb 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए
"लाजवाब...."
Feb 19
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
" आ0 राम अवध विश्वकर्मा जी बह्र मुझे तो ठीक लग रही है । सम्भवतः 3 और 4 शेर का ओला दुरुस्त है ।"
Feb 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

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ग़ज़ल अजब सी बेकरारी हो रही है

1222 1222 122

किसी पर जां निसारी हो रही है ।

नदी अश्कों से खारी हो रही है ।।

सुकूँ की अब फरारी हो रही है ।

अजब सी बेकरारी हो रही है ।।

तुम्हारे हुस्न पर है दाँव सारा ।

यहाँ दुनियां जुआरी हो रही है ।।

शिकस्ता अज़्म है कुछ आपका भी ।

सजाये मौत जारी हो रही है ।।

जली है फिर कोई बस्ती वतन की ।

फजीहत फिर हमारी हो रही है…

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Posted on February 24, 2018 at 10:57pm — 1 Comment

गज़ल

221 2121 1221 212

डूबा मिला है आज वो गहरे खयाल में ।

मिलता कहाँ सुकून है उलझे सवाल में ।।

बरबादियों का जश्न मनाते रहे वो खूब ।

फंसते गए जो लोग मुहब्बत के जाल में ।।

आनी थी हिज्र आ गयी शिकवा खुदा से क्या ।

रहते मियां हैं आप भी अब क्यों मलाल में ।।

करता है ऐश कोई बड़े धूम धाम से ।

डाका पड़ा है आज यहां फिर रिसाल में…

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Posted on February 23, 2018 at 6:50pm — 2 Comments

ग़ज़ल- समझा हूँ तेरे हुस्न के ज़ेरे ज़बर को में

221 2121 1221 212

ढूढा हूँ मुश्किलों से सलामत गुहर को मैं।

समझा हूँ तेरे हुस्न के जेरो जबर को मैं ।।

यूँ ही नहीं हूं आपके मैं दरमियाँ खड़ा ।

नापा हूँ अपने पाँव से पूरे सफर को मैं ।।

मारा वही गया जो भला रात दिन किया ।।

देखा हूँ तेरे गाँव में कटते शजर को मैं ।।

मत पूछिए कि आप मेरे क्या नहीं हुए ।।

पाला हूँ बड़े नाज़ से अहले जिगर को मैं ।।

शायद…

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Posted on February 20, 2018 at 7:28pm — 2 Comments

बात दिल मे ही ठहर जाती है

2122 1122 22



छू के साहिल को लहर जाती है ।

रेत नम अश्क़ से कर जाती है ।।

सोचता हूँ कि बयाँ कर दूं कुछ ।

बात दिल में ही ठहर जाती है ।।

याद आने लगे हो जब से तुम ।

बेखुदी हद से गुजर जाती है ।।

कुछ तो खुशबू फिजां में लाएगी ।

जो सबा आपके घर जाती है ।।





कितनी ज़ालिम है तेरी पाबन्दी ।

यह जुबाँ रोज क़तर जाती है ।।

हुस्न को देख लिया है जब से ।

तिश्नगी और…

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Posted on February 17, 2018 at 10:52pm — 5 Comments

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