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Naveen Mani Tripathi
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Rakshita Singh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"उम्र कमसिन जरा सभल चलो। आशिकी रोज आजमाती है ।। आदरणीय नवीन जी, बहुत ही खूबसूरत गज़ल, दिली मुबारकबाद।"
1 hour ago
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4 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई । बधाई ।"
14 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"आ0 सन्तोष ख़िरवादकर साहब तहे दिल से शुक्रिया"
14 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"आ0 बहन रक्षिता सिंह जी सप्रेम आभार ।"
14 hours ago
Rakshita Singh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"आदरणीय नवीन जी, बहुत बहुत और बहुत ही खूबसूरत गज़ल के लिए तहे दिल से मुबारकबाद.... स्वीकार करें।"
16 hours ago
santosh khirwadkar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"कोई आँचल उड़ाना चाहता है.....आदरणीय ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई!!"
22 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब बहुत बहुत शुक्रिया"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल -आग हम अंदर लिए हैं
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'हाँ वही नेता सुरक्षा में कई रहबर लिए हैं' इस मिसरे में क़ाफ़िया काम नहीं कर रहा है,'रहबर'का अर्थ रास्ता दिखाने वाला होता है,जिसे आपने 'अंग…"
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"जनाब नवीन मणि साहिब ,सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
yesterday
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल -आग हम अंदर लिए हैं
"है उन्हें दरकार लाशों की चुनावों में कहीं से । अम्न के क़ातिल नए अंदाज में ख़ंजर लिए हैं ।।बहुत ख़ूब! बहुत ख़ूब!! बहुत ही सामयिक शे'र है । शे'रत्रदर शे'रत्रदाद के साथ मुबारकबाद आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Thursday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"आ0 कबीर सर सादर नमन । आपका सुझाव ही तो मेरा पुरष्कार है । आपके सुझाव से तो मेरी ग़ज़ल और निखर के आती है । सादर नमन के साथ सादर नमन ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'चुभा देता है जो ख़ंजर ख़ुशी से' इस मिसरे में 'ख़ुशी'शब्द भर्ती का है, इसे बदलने का प्रयास करें,एक सुझाव है,अगर उचित…"
Wednesday
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ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है

1222 1222 122तपन को आजमाना चाहता है ।समंदर सूख जाना चाहता है ।।तमन्ना वस्ल की लेकर फिजा में।कोई मुमकिन बहाना चाहता है ।।जमीं की तिश्नगी को देखकर अब ।यहाँ बादल ठिकाना चाहता है ।।तसव्वुर में तेरे मैंने लिखी थी।ग़ज़ल जो गुनगुनाना चाहता है ।।मेरी चाहत मिटा दे शौक से तू ।तुझे सारा ज़माना चाहता है ।।मेरी फ़ुरक़त पे है बेचैन सा वो ।मुझे जो भूल जाना चाहता है ।।चुभा देता है जो ख़ंजर खुशी से ।वही मरहम लगाना चाहता है ।।अदब से दूर जाता एक झोंका ।कोई आँचल उड़ाना चाहता है ।।दिखा देना हमारे ज़ख्म उसको ।वो हम पर…See More
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो
"आ0 कबीर सर विशेष आभार के साथ नमन ।"
Nov 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

2122 1212 22

उसकी खुशबू तमाम लाती है ।।

जो हवा घर से उसके आती है ।।



आज मौसम है खुश गवार बहुत ।

बे वफ़ा तेरी याद आती. है ।।



कितनी मशहूर हो गई है वो ।

कुछ जवानी शबाब लाती है ।।



टूटकर. मैं भी कसमकस में हूँ।

रात उलझन में बीत जाती है ।।



ओढ़ लेती बड़े अदब से वो ।

जब दुपट्टा हवा उड़ाती है ।।



यूँ तमन्ना तमाम रखता. हूँ ।

बेसबब. बात बदल जाती है ।।



हम भी दीवानगी से हैं गुजरे ।

जिंदगी मोड़ ढूढ लाती है… Continue

Posted on November 25, 2017 at 12:24am — 1 Comment

देश के हर इंसान में शंकर देखा है

22 22 22 22 22 2

आंखों में आबाद समंदर देखा है ।

हाँ मैंने उल्फ़त का मंजर देखा है ।।



कुछ चाहत में जलते हैं सब रोज यहां ।

चाँद जला तो जलता अम्बर देखा है ।।



आज अना से हार गया कोई पोरस ।

तुझमें पलता एक सिकन्दर देखा है ।।



एक तबस्सुम बदल गई फरमान मेरा ।

मैंने तेरे साथ मुकद्दर देखा है ।।



कुछ दिन से रहता है वह उलझा उलझा ।

शायद उसने मन के अंदर देखा है ।।



बिन बरसे क्यूँ बादल सारे गुज़र गए ।

मैंने उसकी जमीं को बंजर…

Continue

Posted on November 24, 2017 at 6:30pm

ग़ज़ल -आग हम अंदर लिए हैं

2122 2122 2122 2122

वो किसी पाषाण युग के वास्ते अवसर लिए हैं ।

देखिये कुछ लोग अपने हाथ मे पत्थर लिए हैं ।।



है उन्हें दरकार लाशों की चुनावों में कहीं से ।

अम्न के क़ातिल नए अंदाज में ख़ंजर लिए हैं ।।



जो बड़े मासूम से दिखते ज़माने को यहां पर ।

हां वही नेता सुरक्षा में कई नौकर लिए हैं ।।



अब कहाँ इस दौर में जिंदा बची इंसानियत है ।

मुजरिमों को देखिये अब देह पर खद्दर लिए हैं।।



सुब्ह वो देते नसीहत भ्रष्टता से दूर रहिये ।

बेअदब होकर… Continue

Posted on November 23, 2017 at 12:00am — 2 Comments

ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है

1222 1222 122

तपन को आजमाना चाहता है ।

समंदर सूख जाना चाहता है ।।



तमन्ना वस्ल की लेकर फिजा में।

कोई मुमकिन बहाना चाहता है ।।



जमीं की तिश्नगी को देखकर अब ।

यहाँ बादल ठिकाना चाहता है ।।



तसव्वुर में तेरे मैंने लिखी थी।

ग़ज़ल जो गुनगुनाना चाहता है ।।



मेरी चाहत मिटा दे शौक से तू ।

तुझे सारा ज़माना चाहता है ।।



मेरी फ़ुरक़त पे है बेचैन सा वो ।

मुझे जो भूल जाना चाहता है ।।



चुभा देता है जो ख़ंजर खुशी से… Continue

Posted on November 21, 2017 at 11:00pm — 8 Comments

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