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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन और आभार । उसे है खास ज़रूरत .......भाव कुछ इस तरह लिया है मैंने  बात सलाम करने के लहजे पर है ।  ज़रूरत पर लोगों के सलाम करने का अंदाज़ बदल जाता है ।  है जीतना तो खयालात ....... पूरे शेर का मफ़हूम कुछ इस प्रकार…"
7 minutes ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'उसे है ख़ास ज़रूरत  जरा पता करिए ।बड़े  सलीके  से  आया  सलाम किसका  है' उसे ख़ास ज़रूरत क्यों है? शैर का मफ़हूम स्पष्ट नहीं है,ऊला मिसरा…"
12 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1212     1122     1212      22क़ज़ा के वास्ते ये इंतिज़ाम किसका है । तेरे  दयार  में  जीना  हराम किसका  है ।।उसे है ख़ास ज़रूरत  जरा पता करिए । बड़े  सलीके  से  आया  सलाम किसका  है ।।दिखे हैं रिन्द बहुत तिश्नगी के साथ वहाँ । कोई बताए गली में मुकाम किसका है ।।है जीतना तो ख़यालात ऐब पर ले जा । खबर तो कर वो अभी तक गुलाम किसका है ।।वो पूछ बैठे हमीं से यूँ अजनबी बनकर । के उनके हुस्न  पे  लिक्खा कलाम किसका है ।।यही सवाल है साकी से आज महफ़िल…See More
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ0 मनोज भाई बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"मीर सब अपना वजूद मिसरे अलिफ वस्ल का सुंदर प्रयोग ।    अच्छी ग़ज़ल हुई । कबीर साहब की इस्लाह काबिल ए गौर है । "
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"ग़ज़ल का प्रयास बहुत सुंदर हुआ है । अच्छे मफ़हूम पर ग़ज़ल हुई । 221 1221 1221 122 उनके लिए कुर्बान मैंने हर खुशी कर दी । जिनके लिए कुर्बान हुई हर खुशी मेरी । बस लोग वही मुझको रुलाने के लिए हैं ।। एक सुझाव मात्र ।  ऐसी बह्र जहां 11 का प्रयोग हो वहाँ…"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"आ0 कबीर सर हर एक शेर बहुत खूब लिखा आपने  हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी है बेहतरीन शेर लगा । आ0 अजय तिवारी जी की बात से सहमत हूँ कि आसान शब्दो मे भी बहुत अच्छी गज़ल कही जा सकती है । यह आपकी ग़ज़ल से सीख मिली…"
Friday
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद. सादर. "
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब ग़ज़ल तक आने के लिए तहेदिल से शुक्रिया ।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 महेंद्र कुमार साहब आपकीं बात से भी सहमत हो गया । हार्दिक आभार ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर बहुत बहुत आभार के साथ नमन । मैं आपसे सहमत हो गया सर । "
Friday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"'दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो अभी तक वह खज़ाना चल रहा है' इस शैर में 'वो' और 'वह' शब्द के टकराव की सूरत बन रही है,इसका कारण ये है कि दोनों ही शब्द वस्तु के लिए इस्तेमाल हुए हैं,जबकि 'वो' शब्द वयक्ति और…"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 तेजवीर सिंह साहब तहेदिल से आभार ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 मुहम्मद अनीस शेख़ साहब तहेदिल से शुक्रियः । "
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 गुरुदेव कबीर सर हार्दिक आभार के साथ नमन । ग़ज़ल खटक मिटाने के लिए जो सुझाव दिया उसके लिए तहेदिल से आभारी हूँ । लेकिन प्रश्न एक रह जाता है वो और वह को लेकर । मैने पढा था सानी और ऊला में एक ही शब्द के टकराव से बचना चाहिए । सेम शब्द सानी और ऊला में…"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

1212     1122     1212      22

क़ज़ा के वास्ते ये इंतिज़ाम किसका है ।

तेरे  दयार  में  जीना  हराम किसका  है ।।

उसे है ख़ास ज़रूरत  जरा पता करिए ।

बड़े  सलीके  से  आया  सलाम किसका  है ।।

दिखे हैं रिन्द बहुत तिश्नगी के साथ वहाँ ।

कोई बताए गली में मुकाम किसका है ।।

है जीतना तो ख़यालात ऐब…

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Posted on January 21, 2019 at 8:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 122

अभी तक आना जाना चल रहा है ।

कोई रिश्ता पुराना चल रहा है ।।

सुना है शह्र की चर्चा में आगे ।

तुम्हारा ही फ़साना चल रहा है ।।

इधर दिल पर लगी है चोट गहरी ।

उधर तो मुस्कुराना चल रहा है ।।

कहीं तरसी जमीं है आब के बिन ।

कहीं मौसम सुहाना चल रहा है ।।

तुझे बख्सा खुदा ने हुस्न इतना ।

तेरे पीछे ज़माना चल रहा है ।।

दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो ।

अभी तक वह खज़ाना चल रहा है…

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Posted on January 16, 2019 at 11:37pm — 14 Comments

ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो

2122 2122 212

आज उनका है ज़माना चुप रहो ।

गर लुटे सारा खज़ाना चुप रहो ।।

क्या दिया है पांच वर्षों में मुझे ।

मांगते हो मेहनताना चुप रहो ।।

रोटियों के चंद टुकड़े डालकर ।

मेरी गैरत आजमाना चुप रहो ।।

मंदिरों मस्ज़िद से उनका वास्ता ।

हरकतें हैं वहिसियाना चुप रहों ।।

लुट गया जुमलों पे सारा मुल्क जब ।

फिर नये सपने दिखाना चुप रहो ।।

दांव तो अच्छे चले थे जीत के ।

हार पर अब…

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Posted on January 8, 2019 at 12:30pm — 10 Comments

हुस्न कोई नूरानी है



22 22 22 2



शायद    वह    दीवानी   है ।

लड़की   जो  अनजानी  है ।।

दिलवर से मिलना है क्या ।

चाल   बड़ी   मस्तानी  है ।।

इश्क़  हुआ है क्या  उसको ।

आँखों    में   तो   पानी  है ।।

खोए    खोए    रहते    हो ।

यह   भी   इक  नादानी  है ।।…

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Posted on January 6, 2019 at 11:55am — 3 Comments

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At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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