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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"जनाब सकूर साहब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है तहेदिल से बधाई ।"
21 hours ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"कोई मेरे सिवा न था उसमेंखोल कर दिल दिखा गया है मुझे आके हुजरे में एक शब कोई ख़ुशबुओं में बसा गया है मुझे वाह वाह वाह । आदरणीय कबीर सर बहुत ही खूब सूरत ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बधाई ।  सादर नमन ।"
21 hours ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"वाह वाह लाजबाब ग़ज़ल हुई आदरणीय । बहुत बधाई आपको । आश्वासन मुआवज़ा झेलूं,सब्र करना तो आ गया है मुझे। शोक में है वतन, दहन करकेराक्षस क्षोभ दे गया है मुझे।"
21 hours ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आ0नीलेश  जी वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई पढ़ कर मजा आ गया । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय बहुत अच्छी ग़ज़ल के लिए आपको बधाई देता हूँ ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब अशफ़ाक़ अली साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"2122    1212              112/22 फख्र से फिर  छला  गया  है  मुझे । ज़ह्र   बेशक  दिया गया  है  मुझे ।। वो सियासत में दांव चलचल कर । मक्तलों तक बुला …"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब सादर आभार ।"
Thursday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन के साथ तहेदिल से शुक्रिया सर । आपके आदेश का अविलम्ब पालन होगा । सादर नमन ।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 4थे शैर के सानी में 'खलिस' को "ख़लिश" कर लें । छटे शैर के सानी में 'तपिस' को "तपिश" कर लें ।"
Thursday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरी हर निशानी मिटाने से पहले
"आ0 राज नावादवी साहब हार्दिक आभार ।"
Thursday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरी हर निशानी मिटाने से पहले
"आ0 राज नावादवी साहब हार्दिक आभार ।"
Thursday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरी हर निशानी मिटाने से पहले
"आ0 कबीर सर सादर नमन के साथ आभार ।  ग़ज़ल पर आपकी महत्वपूर्ण इस्लाह से सहमत हूँ । कुछ सोच कर शेर को ठीक करूँगा ।  सराफत में टाइपो त्रुटि है । शराफत शब्द ही सहीह है ।  पुनः सादर नमन ।"
Wednesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर की महत्व पूर्ण इस्लाह का आकांक्षी ।"
Wednesday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1212 1122 1212 212खिजा के दौर में जीना मुहाल कर तो सही ।मेरी वफ़ा पे तू कोई सवाल कर तो सही ।।है इंतकाम की हसरत अगर जिग़र में तेरे । हटा नकाब फ़िज़ा में जमाल कर तो सही ।।निकल गया है तेरा चाँद देख छत पे ज़रा ।तू जश्ने ईद में मुझको हलाल कर तो सही ।।बिखरता जाएगा वो टूट कर शजर से यहां ।निगाह से तू ख़लिस की मज़ाल कर तो सही ।।मिलेंगे और भी आशिक तेरे जहां में अभी ।तू अपने हुस्न की कुछ देखभाल कर तो सही ।।ऐ अब्र दम है तो सावन सा इस जमीं पे बरस । तपिस में जलते गुलों को निहाल कर तो सही ।।यहां तो कुर्सियां मिलती…See More
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल



1212 1122 1212 212



खिजा के दौर में जीना मुहाल कर तो सही ।

मेरी वफ़ा पे तू कोई सवाल कर तो सही ।।

है इंतकाम की हसरत अगर जिग़र में तेरे ।

हटा नकाब फ़िज़ा में जमाल कर तो सही ।।

निकल गया है तेरा चाँद देख छत पे ज़रा ।

तू जश्ने ईद में मुझको हलाल कर तो सही ।।

बिखरता जाएगा वो टूट कर शजर से यहां ।

निगाह से तू ख़लिस की मज़ाल कर तो सही ।।

मिलेंगे और भी आशिक तेरे जहां में अभी ।

तू अपने हुस्न की कुछ देखभाल कर तो सही…

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Posted on October 17, 2018 at 3:49pm — 6 Comments

मेरी हर निशानी मिटाने से पहले

122 122 122 122 

मेरी हर निशानी मिटाने से पहले ।

वो रोया बहुत भूल जाने से पहले ।।1

गयी डूब कश्ती यहाँ चाहतों की ।

समंदर में साहिल को पाने से पहले ।। 2

जफ़ाओं के मंजर से गुज़रा है कोई ।

मेरा ख़त गली में जलाने से पहले ।।3

वो दिल खेलने के लिए मांगते हैं ।

मुहब्बत की रस्मे निभाने से पहले ।। 4



ये तन्हाइयां हो न जाएँ सितमगर ।

चले आइये याद आने से पहले ।।6



मेरे हाल पर छोड़ दे मुझको जालिम ।

मुझे और…

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Posted on October 12, 2018 at 11:15pm — 20 Comments

ऐ अब्र जरा आग बुझाने के लिए आ

221-1221-1221-122.



तपती जमीं है आज तू छाने के लिए आ ।

ऐ अब्र जरा आग बुझाने के लिए आ ।।

यूँ ही न गुजर जाए कहीं तिश्नगी का दौर ।

तू मैकदे में पीने पिलाने के लिए आ ।।

ये जिंदगी तो हम ने गुज़ारी है खालिस में ।

कुछ दर्द मेरा अब तो बटाने के लिए आ ।।

जब नाज़ से आया है कोई बज़्म में तेरी ।

क़ातिल तू हुनर अपना दिखाने के लिए आ।।

शर्मो हया है तुझ में तो वादा निभा के देख ।

मेरी वफ़ा का कर्ज चुकाने के…

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Posted on October 11, 2018 at 7:30pm — 8 Comments

मौत आंगन में आकर टहलती रही

212 212 212 212

जिंदगी रफ़्ता रफ़्ता पिघलती रही ।

आशिकी उम्र भर सिर्फ छलती रही ।।

देखते देखते हो गयी फिर सहर ।

बात ही बात में रात ढलती रही ।।

सुर्ख लब पर तबस्सुम तो आया मगर ।

कोई ख्वाहिश जुबाँ पर मचलती रही ।।

इक तरफ खाइयाँ इक तरफ थे कुएं ।

वो जवानी अदा से सँभलती रही ।।

जाम जब आँख से उसने छलका दिया ।

मैकशी बे अदब रात चलती रही ।।

देखकर अपनी महफ़िल में महबूब को।

पैरहन बेसबब वह बदलती रही…

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Posted on October 9, 2018 at 10:00am — 16 Comments

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At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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