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Naveen Mani Tripathi
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dandpani nahak left a comment for Naveen Mani Tripathi
"आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!"
Sep 29
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कुबूल है
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ग़ज़ल के सभी अशआर में रदीफ़ और क़वाफ़ी में ताल मेल नहीं है,ग़ौर करें ।"
Sep 29
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय समर कबीर सर सादर नमन के साथ आभार ।सर मैंने ग़ज़ल में कुल 11 अशआर ही भेजें हैं । 12 वाँ अशआर गिरह का है जो ग़ज़ल के शेर में शामिल नहीं है । सादर । "
Sep 28
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कुबूल है
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीय त्रिपाठी जी..."
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 धामी साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 नीलेश साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आखिरी शेर में तकाबुल रदीफ़ है देखिएगा ।"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 अंजली जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 पाठक साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"भाई मनन जी समर साहब सामान्य शायर नहीं हैं अगर इनकी बात या इस्लाह को गम्भीरता से लेंगे तो आप भी अच्छे शायर बन जाएंगे ।    अंजली गुप्ता जी की इस्लाह भी वाजिब और काबिले गौर है । सादर ।"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 क़मर साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 अग्रवाल साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 गुप्ता साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 अमित साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 खान साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 क़मर साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई "
Sep 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल - कुबूल है

1212 1212 1212 1212

शराब जब छलक पड़ी तो मयकशी कुबूल है ।

ऐ रिन्द मैकदे को तेरी तिश्नगी कुबूल है ।

नजर झुकी झुकी सी है हया की है ये इंतिहा ।

लबों पे जुम्बिशें लिए ये बेख़ुदी कुबूल है ।।

गुनाह आंख कर न दे हटा न इस तरह नकाब ।

जवां है धड़कने मेरी ये आशिकी कबूल है ।।

यूँ रात भर निहार के भी फासले घटे नहीं ।

ऐ चाँद तेरी बज़्म की ये बेबसी कुबूल है ।।

न रूठ कर यूँ जाइए मेरी यही है…

Continue

Posted on September 24, 2019 at 9:30pm — 2 Comments

लेती है इम्तिहान ये उल्फ़त कभी कभी

221 2121 1221 212

लेती है इम्तिहान ये उल्फ़त कभी. कभी ।

लगती है राहे इश्क़ में तुहमत कभी कभी ।।

आती है उसके दर से हिदायत कभी कभी ।

होती खुदा की हम पे है रहमत कभी कभी ।।

चहरे को देखना है तो नजरें बनाये रख ।

होती है बेनक़ाब सियासत कभी कभी ।।

यूँ ही नहीं हुआ है वो बेशर्म दोस्तों ।

बिकती है अच्छे दाम पे गैरत कभी कभी ।।

मुझ पर सितम से पहले ऐ क़ातिल तू सोच ले ।

देती सजा ए मौत है कुदरत कभी कभी…

Continue

Posted on August 14, 2019 at 6:42pm — 4 Comments

ग़ज़ल

212 212 212 212

जब से ख़ामोश वो सिसकियां हो गईं ।

दूरियां प्यार के दरमियाँ हो गईं ।।

कत्ल कर दे न ये भीड़ ही आपका ।

अब तो क़ातिल यहाँ बस्तियाँ हो गईं ।।

आप ग़मगीन आये नज़र बारहा ।

आपके घर में जब बेटियां हो गईं ।।

कैसी तक़दीर है इस वतन की सनम ।

आलिमों से खफ़ा रोटियां हो गईं ।।

फूल को चूसकर उड़ गईं शाख से ।

कितनी चालाक ये तितलियां हो गईं ।।

दर्दो गम पर…

Continue

Posted on July 28, 2019 at 12:17am — 2 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22

.

पूछिये मत कि हादसा क्या है ।

पूछिये दिल मेरा बचा क्या है।।

दरमियाँ इश्क़ मसअला क्या है।

तेरी उल्फ़त का फ़लसफ़ा क्या है

सारी बस्ती तबाह है तुझसे ।

हुस्न तेरी बता रजा क्या है ।।

आसरा तोड़ शान से लेकिन ।

तू बता दे कि फायदा क्या है ।।

रिन्द के होश उड़ गए कैसे ।

रुख से चिलमन तेरा हटा क्या है।।

बारहा पूछिये न दर्दो गम ।

हाले दिल आपसे छुपा क्या है ।।



फूँक कर…

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Posted on July 16, 2019 at 12:00am — 2 Comments

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At 11:34am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!
At 10:44am on May 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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