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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Dayaram Methani commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बड़ें यकीन से कहकर गया है फिर कोई ।खुदा मिलेंगे तुझे दूरियां मिटाने से ।।.........बहुत ही सुंदर भाव भरा शेर। भरम बनाए रखें दोस्ती का दुनिया में ।ये रिश्ते टूट न जाएं यूँ आजमाने से ।।..........जीवन की सच्चाई व्यक्त करता शेर। आदरणीय बहुत अच्छी गज़ल…"
Thursday
PHOOL SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"सूंदर रचना बधाई स्वीकारे""
Thursday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22 हर एक शख्स को मतलब है बस ख़ज़ाने से । गिला करूँ मैं कहाँ तक यहां ज़माने से ।।कलेजा अम्नो सुकूँ का निकाल लेंगे वो ।। उन्हें है वक्त कहाँ बस्तियां जलाने से ।।न पूछ हमसे अभी जिंदगी के अफसाने । कटी है उम्र यहां सिसकियां दबाने से ।।मैं अपने दर्द को बेशक़ छुपा के रक्खूँगा । मिले जो चैन तुझे मेरे मुस्कुराने से ।।हमारे हक़ पे न हमला करो यहां साहब । चलेगा मुल्क़ नहीं इस तरह चलाने से ।।वो रूठते हैं तो कुछ और आना जाना रख । बनेग़ा यार कोई  सिलसिले बनाने से ।।बड़ें…See More
Wednesday
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी. सुन्दर गज़ल. सादर. "
Dec 10
narendrasinh chauhan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
" बधाई आदरणीय नवीनजी।खूब सुन्दर  गज़ल।"
Dec 10
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 तेजवीर सिंह साहब तहे दिल से बहुत बहुत आभार ।"
Dec 9
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन । महत्व पूर्ण इस्लाह के लिए हार्दिक आभार ।"
Dec 9
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। बहुत हो चुकी अब यहाँ जुमले बाजी ।तुम्हारे मुख़ालिफ़ चली है हवा कुछ ।।"
Dec 9
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । '  मेरे कत्ल पर तो उँगलियाँ उठेंगी' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'मेरे क़त्ल पर उंगलियाँ तो उठेंगी'"
Dec 9
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी, आदाब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई. सादर. "
Dec 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन मणि जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधायी ।"
Dec 8
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

122 122 122 122दिया आप ने था हमें जो सिला कुछ । बड़ा फैसला हमको लेना पड़ा कुछ ।।कहा किसने अब तक नहीं है जला कुछ ।धुंआ रफ़्ता रफ़्ता है घर से उठा कुछ ।।बहुत हो चुकी अब यहाँ जुमले बाजी ।तुम्हारे मुख़ालिफ़ चली है हवा कुछ ।।बहुत दिन से ख़ामोश दिखता है मंजर ।कई दिल हैं टूटे हुआ हादसा कुछ ।।कदम मंजिलों की तरफ बढ़ गए जब ।तो अब पीछे मुड़कर है क्या देखना कुछ।।मेरा ऐब सबको बताने से पहले ।जरा देखिए आप भी आइना कुछ।।मेरे कत्ल पर तो उँगलियाँ उठेंगी ।करें इत्तला सबको मेरी ख़ता कुछ ।।करेंगे यकीं कब तलक लोग तुम पर ।मिला…See More
Dec 8
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर अति महत्वपूर्ण इस्लाह हेतु सादर नमन के साथ हार्दिक आभार ।"
Dec 8
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'रोता  हुआ  ये  दर्द  बताया  शज़र मुझे' इस मिसरे को यूँ कर लें,गेयता बढ़ जाएगी:- 'रोकर बता रहा था ये इक दिन शजर…"
Dec 7
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन जी बहुत बेहतरीन गजल लिखी आपने बधाई कुबूल कीजिए"
Dec 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22

हर एक शख्स को मतलब है बस ख़ज़ाने से ।

गिला करूँ मैं कहाँ तक यहां ज़माने से ।।

कलेजा अम्नो सुकूँ का निकाल लेंगे वो ।।

उन्हें है वक्त कहाँ बस्तियां जलाने से ।।

न पूछ हमसे अभी जिंदगी के अफसाने ।

कटी है उम्र यहां सिसकियां दबाने से ।।

मैं अपने दर्द को बेशक़ छुपा के…

Continue

Posted on December 12, 2018 at 9:08pm — 2 Comments

ग़ज़ल

122 122 122 122



दिया आप ने था हमें जो सिला कुछ ।

बड़ा फैसला हमको लेना पड़ा कुछ ।।

कहा किसने अब तक नहीं है जला कुछ ।

धुंआ रफ़्ता रफ़्ता है घर से उठा कुछ ।।

बहुत हो चुकी अब यहाँ जुमले बाजी ।

तुम्हारे मुख़ालिफ़ चली है हवा कुछ ।।

बहुत दिन से ख़ामोश दिखता है मंजर ।

कई दिल हैं टूटे हुआ हादसा कुछ ।।

कदम मंजिलों की तरफ बढ़ गए जब ।

तो अब पीछे मुड़कर है क्या देखना…

Continue

Posted on December 8, 2018 at 1:04am — 8 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

अच्छी लगी है आपकी तिरछी नज़र मुझे ।।

समझा गयी जो प्यार का ज़ेरो ज़बर मुझे ।।1

आये थे आप क्यूँ भला महफ़िल में बेनक़ाब ।

तब से सुकूँ न मिल सका शामो सहर मुझे ।।2

नज़दीकियों के बीच बहुत दूरियां  मिलीं ।

करना पड़ा है उम्र भर लम्बा सफर मुझे ।।3…

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Posted on December 5, 2018 at 12:34am — 10 Comments

ग़ज़ल

12221222 122



वो भौरे पास हैं जब से कली के ।

हैं बिखरे रंग तब से पाँखुरी के ।।

सुना है चांद आएगा जमी पर ।

बढ़े हैं हौसले अब चांदनी के ।।

जरा कमसिन अदाएं देखिए तो ।

अजब अंदाज़ उनकी बेख़ुदी के ।।

वो बेशक पास मेरे आ रही है ।

लगे हैं स्वर सही कुछ बाँसुरी के ।।

मुहब्बत हो गयी उनसे जो मेरी ।

हुए मशहूर किस्से आशिकी के ।।

तुम्हारा खत मिला जो…

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Posted on December 2, 2018 at 10:30am — 6 Comments

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At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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