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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 आमोद श्रीवास्तव जी हार्दिक आभार"
Sunday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन  ख़बर है मुझको तेरे इश्क़ की बुलन्दी से  मिसरे को ऐसा कर रहा हूँ "
Sunday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'ख़बर  मुझको  है तेरे इश्क़ की बलन्दी से' इस मिसरे की बह्र चेक करें ।"
Feb 15
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1212  1122 1212 22/112क़ज़ा का करके मेरी इंतिज़ाम उतरी है । अभी अभी जो मेरे घर मे शाम उतरी है ।।तमाम  उम्र  का ले तामझाम उतरी है । ये जीस्त मौत को करने  सलाम उतरी है ।।अदाएं देख के उसकी ये लग रहा है मुझे । कि लेने  हूर  कोई  इंतिकाम  उतरी है ।।वो शाम होते ही जायेगा मैकदे में फिर । शराब  उसको  बनाकर गुलाम उतरी है ।।मरेंगे आज  यहां  बेगुनाह  फिर देखो । सड़क पे ले के सियासत अवाम उतरी है ।।सियाह शब में उजालों की पैठ फिर होगी । किरन ये चाँद  का लेकर पयाम उतरी है ।।बिखेर दी…See More
Feb 15
amod shrivastav (bindouri) commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ  रचना के लिए बधाई ... ये...सड़क पे लेके सियासत अवाम उतरी है " बहुत खूब "
Feb 14
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1212  1122 1212 22/112क़ज़ा का करके मेरी इंतिज़ाम उतरी है । अभी अभी जो मेरे घर मे शाम उतरी है ।।तमाम  उम्र  का ले तामझाम उतरी है । ये जीस्त मौत को करने  सलाम उतरी है ।।अदाएं देख के उसकी ये लग रहा है मुझे । कि लेने  हूर  कोई  इंतिकाम  उतरी है ।।वो शाम होते ही जायेगा मैकदे में फिर । शराब  उसको  बनाकर गुलाम उतरी है ।।मरेंगे आज  यहां  बेगुनाह  फिर देखो । सड़क पे ले के सियासत अवाम उतरी है ।।सियाह शब में उजालों की पैठ फिर होगी । किरन ये चाँद  का लेकर पयाम उतरी है ।।बिखेर दी…See More
Feb 14
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 सुशील सरना साहब हार्दिक आभार "
Feb 13
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ गुरुदेव कबीर साहब हार्दिक आभार और नमन ।"
Feb 13
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Feb 13
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 सुशील सरन साहब बहुत बहुत तहेदिल से शुक्रियः।"
Feb 13
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"फ़ना के बाद भी अपनी निशानी छोड़ आये हैं । जिसे तुम याद रक्खो वो कहानी छोड़ आए हैं ।। सुकूँ मिलता हमें कैसे यहां परदेश में आकर । विलखती मां की आंखों में जो पानी छोड़ आये हैं ।। वाह आदरणीय डॉ नवीन मणि त्रिपाठी जी वाह इतने खूबसूरत अशआर कहने के लिए दिल…"
Feb 12
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222फ़ना के बाद भी अपनी निशानी छोड़ आये हैं ।जिसे तुम याद रक्खो वो कहानी छोड़ आए हैं ।।सुकूँ मिलता हमें कैसे यहां परदेश में आकर ।विलखती मां की आंखों में जो पानी छोड़ आये हैं ।।कलेजा मुँह को आता है जरा माँ बाप से पूछो ।जो घर से दूर जा बेटी सयानी छोड़ आये हैं ।।हमें इंसाफ का उनसे तकाज़ा ही नहीं था कुछ ।अदालत में तो हम भी हक़ बयानी छोड़ आये हैं ।lतेरे प्रश्नों का उत्तर था तेरे लहजे में ही लेकिन।शराफ़त के लिए हम बदज़ुबानी छोड़ आये हैं ।।यहां सब मुन्तज़िर हैं शेर का ऊला कहेगा तू । जो तेरी डायरी…See More
Feb 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आद0 नवीन मणि त्रिपाठी जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। उस पर आद0 समर साहब की इस्लाह से रचना और निखर गयी। बहुत बहुत बधाई आपको"
Feb 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 2
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'किस्मत खुदा ने ऐसी बनाई है सोच कर ।मिलती गमों की हमको भी सौगात ख़ुद ब ख़ुद' इस शैर के ऊला में 'सोच कर' की जगह "दोस्तो" कर लें और सानी मिसरा…"
Feb 1
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

221 2121 1221 212छलके जो उनकी आंख से जज़्बात ख़ुद ब ख़ुद । आए मेरी ज़ुबाँ पे सवालात ख़ुद ब  ख़ुद ।।किस्मत खुदा ने ऐसी बनाई है सोच कर । मिलती गमों की हमको भी सौगात ख़ुद ब ख़ुद ।।चर्चा  है  शह्र  में  उसी की  देख आज कल । बाँटा है जिसने इश्क़ को ख़ैरात ख़ुद ब ख़ुद ।।मेहनत पे कुछ भरोसा हो और हो नियत भी साफ। बढ़ जाएगी तुम्हारी भी औक़ात ख़ुद ब ख़ुद ।।आवाम की घुटन से ये अहसास हो रहा । बदलेगी  कुछ  तो सूरते  हालात ख़ुद ब ख़ुद ।।मुद्दत से इस तरह से मुझे देखते हो क्यूँ । कर दो कहीं न इश्क़ की…See More
Feb 1

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

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ग़ज़ल



1212  1122 1212 22/112

क़ज़ा का करके मेरी इंतिज़ाम उतरी है ।

अभी अभी जो मेरे घर मे शाम उतरी है ।।

तमाम  उम्र  का ले तामझाम उतरी है ।

ये जीस्त मौत को करने  सलाम उतरी है ।।

अदाएं देख के उसकी ये लग रहा है मुझे ।

कि लेने  हूर  कोई  इंतिकाम  उतरी है ।।…

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Posted on February 13, 2019 at 8:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222

फ़ना के बाद भी अपनी निशानी छोड़ आये हैं ।

जिसे तुम याद रक्खो वो कहानी छोड़ आए हैं ।।

सुकूँ मिलता हमें कैसे यहां परदेश में आकर ।

विलखती मां की आंखों में जो पानी छोड़ आये हैं ।।

कलेजा मुँह को आता है जरा माँ बाप से पूछो ।

जो घर से दूर जा बेटी सयानी छोड़ आये हैं ।।

हमें इंसाफ का उनसे तकाज़ा ही नहीं था कुछ ।

अदालत में तो हम भी हक़ बयानी छोड़ आये हैं ।l

तेरे प्रश्नों का उत्तर था तेरे लहजे में ही…

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Posted on February 11, 2019 at 12:55am — 3 Comments

ग़ज़ल



221 2121 1221 212

छलके जो उनकी आंख से जज़्बात ख़ुद ब ख़ुद ।

आए मेरी ज़ुबाँ पे सवालात ख़ुद ब  ख़ुद ।।

किस्मत खुदा ने ऐसी बनाई है सोच कर ।

मिलती गमों की हमको भी सौगात ख़ुद ब ख़ुद ।।

चर्चा  है  शह्र  में  उसी की  देख आज कल ।

बाँटा है जिसने इश्क़ को ख़ैरात ख़ुद ब ख़ुद ।।…

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Posted on February 1, 2019 at 3:01pm — 3 Comments

ग़ज़ल

1212     1122     1212      22

क़ज़ा के वास्ते ये इंतिज़ाम किसका है ।

तेरे  दयार  में  जीना  हराम किसका  है ।।

उसे है ख़ास ज़रूरत  जरा पता करिए ।

बड़े  सलीके  से  आया  सलाम किसका  है ।।

दिखे हैं रिन्द बहुत तिश्नगी के साथ वहाँ ।

कोई बताए गली में मुकाम किसका है ।।

है जीतना तो ख़यालात ऐब…

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Posted on January 21, 2019 at 8:30pm — 3 Comments

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At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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