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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 शेख शहज़ाद साहब तहे दिल से शुक्रिया।"
18 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हर शे'अर में दो टूक/सटीक/पते की बात कहती बेहतरीन पेशकश के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब नवीन मणि त्रिपाठी साहिब।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए
"कुछ फायदे के वास्ते दहशत पनप रही ।सत्ता में बैठे आप दलालों को देखिए ।। वाह! वाह!!  बहुत ख़ूब ! बहुत ख़ूब !! बहुत ही उम्दा शे'र । सत्ता में बैठे कुछ हरामी देशवासियों को चैन से जीने नहीं दे रहे हैं ।  उम्दा ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल…"
Thursday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Thursday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आप दिल में समाने लगे
"सेवार्थ श्री योगराज प्रभाकर जी  आ0 आपकी बेवसाइट में कमी है । मैं हमेशा व्यवस्थित करके भेजता हूँ परंतु पोस्ट होते ही सारे स्पेश खत्म हो जाते हैं और रचना गद्य जैसी दिखने लगती है । कृपया टेक्निकल टीम का सहयोग आपेक्षित है । और किसी वेबसाइट पर ऐसा…"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आ0 मो0 आरिफ साहब आभार "
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब शुक्रिया ।"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आ0 तस्दीक अहमद खान साहब शुक्रिया ।"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post शायद सनम की आँख से छलकी शराब है ।
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब बहुत बहुत शुक्रिया "
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आप दिल में समाने लगे
"हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आ. भाई नवीन जी , सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post शायद सनम की आँख से छलकी शराब है ।
"बैठे दिखे हैं रिन्द भी लम्बी कतार में ।। शायद सनम की आंख से छलकी शराब है ।। क्या कहने..... हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"जनाब नवीन साहिब ,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें। शेर7 ऐब-तकाबुले रदीफैंन हो गया , यूँ करसकते हैं "इश्क़ हुआ है शायद उसको " आखरी शेर में बात साफ नहीं हो सकी , "यूँ करके देखिए "मर घट पर भी ए परवानों ""
Feb 11
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,                        छोटी बह्र में उम्दा ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन  अपनी राय देंगे ।"
Feb 11
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आप दिल में समाने लगे
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,                              छोटी बह्र की बहुत ही प्यारी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ…"
Feb 11
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Feb 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

2211 2211 2211 22

यूँ जिंदगी के वास्ते कुछ कम नहीं है वो ।

किसने कहा है दर्द का मरहम नहीं है वो।।

सूरज जला दे शान से ऐसा भी नहीं है ।

फूलों पे बिखरती हुई शबनम नहीं है वो ।।

बेचेगा पकौड़ा जो पढ़ लिख के चमन में ।

हिन्दोस्तां के मान का परचम नहीं है वो ।।

बेखौफ ही लड़ता है गरीबी के सितम से ।

शायद किसी अखबार में कालम नहीं है वो ।।

मेहनत की कमाई में लगा खून पसीना ।

अब लूटिए…

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Posted on February 15, 2018 at 12:57am — 2 Comments

चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए

221 2121 1221 212



पत्थर से चोट खाए निशानों को देखिए ।

बहती हुई ख़िलाफ़ हवाओं को देखिए ।।

आबाद हैं वो आज हवाला के माल पर ।

कश्मीर के गुलाम निज़ामों को देखिए ।।

टूटेगा ख्वाब आपका गज़वा ए हिन्द का ।

वक्ते क़ज़ा पे आप गुनाहों को देखिये ।।

गर देखने का शौक है अपने वतन को आज ।

शरहद पे ज़ह्र बोते इमामों को देखिए ।।

कुछ फायदे के वास्ते दहशत पनप रही ।

सत्ता में…

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Posted on February 14, 2018 at 11:28pm — 1 Comment

ग़ज़ल - आप दिल में समाने लगे

212 212 212



आप फिर याद आने लगे ।

क्या हुआ जो सताने लगे।।

दिल तो था आपके पास ही ।

आप क्यूँ आजमाने लगे ।।

क्या कमी थी मेरे हुस्न में ।

गैर पर दिल लुटाने लगे ।।

रफ्ता रफ्ता नजर से मेरी ।

आप दिल में समाने लगे ।।

क्या हुआ आपको आजकल…

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Posted on February 10, 2018 at 2:44pm — 3 Comments

मेरा दर्द पता रहता है

22 22 22 22

मुद्दत से उलझा रहता है ।

यह मन कब तन्हा रहता है ।।

मिलता है अक्सर जो हंसकर ।

वो गम को पीता रहता है ।।

जो गुलाब भेजा था तुमने ।

वो दिल मे खिलता रहता है ।।

कब आओगे मेरे घर तुम ।

खत में वो लिखता रहता है ।।

मुझसे मेरा हाल न…

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Posted on February 10, 2018 at 2:36pm — 6 Comments

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At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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