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Naveen Mani Tripathi's Blog (237)

ग़ज़ल



1212 1122 1212 212



खिजा के दौर में जीना मुहाल कर तो सही ।

मेरी वफ़ा पे तू कोई सवाल कर तो सही ।।

है इंतकाम की हसरत अगर जिग़र में तेरे ।

हटा नकाब फ़िज़ा में जमाल कर तो सही ।।

निकल गया है तेरा चाँद देख छत पे ज़रा ।

तू जश्ने ईद में मुझको हलाल कर तो सही ।।

बिखरता जाएगा वो टूट कर शजर से यहां ।

निगाह से तू ख़लिस की मज़ाल कर तो सही ।।

मिलेंगे और भी आशिक तेरे जहां में अभी ।

तू अपने हुस्न की कुछ देखभाल कर तो सही…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 17, 2018 at 3:49pm — 6 Comments

मेरी हर निशानी मिटाने से पहले

122 122 122 122 

मेरी हर निशानी मिटाने से पहले ।

वो रोया बहुत भूल जाने से पहले ।।1

गयी डूब कश्ती यहाँ चाहतों की ।

समंदर में साहिल को पाने से पहले ।। 2

जफ़ाओं के मंजर से गुज़रा है कोई ।

मेरा ख़त गली में जलाने से पहले ।।3

वो दिल खेलने के लिए मांगते हैं ।

मुहब्बत की रस्मे निभाने से पहले ।। 4



ये तन्हाइयां हो न जाएँ सितमगर ।

चले आइये याद आने से पहले ।।6



मेरे हाल पर छोड़ दे मुझको जालिम ।

मुझे और…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 12, 2018 at 11:15pm — 20 Comments

ऐ अब्र जरा आग बुझाने के लिए आ

221-1221-1221-122.



तपती जमीं है आज तू छाने के लिए आ ।

ऐ अब्र जरा आग बुझाने के लिए आ ।।

यूँ ही न गुजर जाए कहीं तिश्नगी का दौर ।

तू मैकदे में पीने पिलाने के लिए आ ।।

ये जिंदगी तो हम ने गुज़ारी है खालिस में ।

कुछ दर्द मेरा अब तो बटाने के लिए आ ।।

जब नाज़ से आया है कोई बज़्म में तेरी ।

क़ातिल तू हुनर अपना दिखाने के लिए आ।।

शर्मो हया है तुझ में तो वादा निभा के देख ।

मेरी वफ़ा का कर्ज चुकाने के…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 11, 2018 at 7:30pm — 8 Comments

मौत आंगन में आकर टहलती रही

212 212 212 212

जिंदगी रफ़्ता रफ़्ता पिघलती रही ।

आशिकी उम्र भर सिर्फ छलती रही ।।

देखते देखते हो गयी फिर सहर ।

बात ही बात में रात ढलती रही ।।

सुर्ख लब पर तबस्सुम तो आया मगर ।

कोई ख्वाहिश जुबाँ पर मचलती रही ।।

इक तरफ खाइयाँ इक तरफ थे कुएं ।

वो जवानी अदा से सँभलती रही ।।

जाम जब आँख से उसने छलका दिया ।

मैकशी बे अदब रात चलती रही ।।

देखकर अपनी महफ़िल में महबूब को।

पैरहन बेसबब वह बदलती रही…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 9, 2018 at 10:00am — 16 Comments

ग़ज़ल



अभी तो यहाँ कुछ हुआ ही नहीं है ।

वो नादां उसे तज्रिबा ही नही है ।।1

उसे ही मिलेगी सजा हिज्र की अब ।

मुहब्बत में जिसकी ख़ता ही नहीं है ।।2

मिलेगा कहाँ से हमें कोई धोका ।

हमें आप का आसरा ही नहीं है ।।3

अगर आ गए हैं तो कुछ देर रुकिए ।

अभी तो मेरा दिल भरा ही नहीं है ।।4

है बेचैन कितना वो आशिक तुम्हारा ।

कहा किसने जादू चला ही नहीं है ।।5

जिधर जा रही वो उधर जा रहे हम ।

हमें जिंदगी से गिला ही नहीं…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 6, 2018 at 6:31pm — 8 Comments

ग़ज़ल



2122 2122 2122 212

भूख से मरता रहा सारा ज़माना इक तरफ़ ।

और वह गिनता रहा अपना ख़ज़ाना इक तरफ़ ।।

बस्तियों को आग से जब भी बचाने मैं चला ।

जल गया मेरा मुकम्मल आशियाना इक तरफ ।।

कुछ नज़ाक़त कुछ मुहब्बत और कुछ रुस्वाइयाँ ।

वह बनाता ही रहा दिल में ठिकाना इक तरफ ।।

ग्रन्थ फीके पड़ गए फीका लगा सारा सुखन ।

हो गया मशहूर जब तेरा फ़साना इक तरफ ।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on September 28, 2018 at 12:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22



सोचिये  मत   यहाँ  ख़ता  क्या  है ।

है  इशारा   तो   पूछना   क्या  है ।।

अब मुक़द्दर पे छोड़ दे  सब  कुछ ।

सामने    और   रास्ता   क्या   है ।।

वो   किसी  और  का  हो  जाएगा ।

बारहा   उसको  देखता  क्या   है ।।

गर है जाने की ज़िद तो जा तू  भी ।

अब  तेरा  हमसे  वास्ता  क्या  है ।।

इतना  …

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Added by Naveen Mani Tripathi on September 25, 2018 at 3:16am — 12 Comments

जो गिरफ़्तार है जुल्फों में वो फरार कहाँ



2122 1122 1212 22



इक ज़माने से गुलिस्ताँ में है बहार कहाँ ।

जान करता है गुलों पर कोई निसार कहाँ ।।

बारहा पूछ न मुझसे मेरी कहानी तू ।

अब  तुझे  मेरी  सदाक़त पे ऐतबार कहाँ ।।

एक मुद्दत से कज़ा का हूँ मुन्तजिर साहब ।

मौत पर मेरा अभी तक है इख़्तियार कहाँ ।।

आपकी थी ये बड़ी भूल मान जाते हम ।

दिख रहे आप…

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Added by Naveen Mani Tripathi on September 7, 2018 at 12:20am — 7 Comments

अब तीरगी से जंग कोई आर पार हो

221 2121 1221 212

कुछ दिन से देखता हूँ बहुत बेकरार हो।।

कह दूँ मैं दिल की बात अगर ऐतबार हो ।।

परवाने  की ख़ता थी  मुहब्बत चिराग  से ।

करिए न ऐसा इश्क़ जहां जां निसार हो ।।

रिश्तों की वो इमारतें ढहती जरूर हैं ।

बुनियाद में ही गर कहीं आई दरार हो ।।

कीमत खुली हवा की जरा उनसे पूँछिये ।

जिनको अभी तलक मयस्सर…

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Added by Naveen Mani Tripathi on August 28, 2018 at 6:40pm — 13 Comments

आना मेरे दयार में कुर्बत अगर मिले

221 2121 1221 212

कुछ रंजो गम के दौर से फुर्सत अगर मिले ।

आना मेरे दयार में कुर्बत अगर मिले ।।1

यूँ हैं तमाम अर्जियां मेरी खुदा के पास ।

गुज़रे सुकूँ से वक्त भी रहमत अगर मिले ।।2

आई जुबाँ तलक जो ठहरती चली गयी ।

कह दूँ वो दिल की बात इजाज़त अगर मिले ।।3…

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Added by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2018 at 1:25pm — 16 Comments

तेरे आने से आये दिन सुहाने ।

1222 1222 122

.

तेरे आने से आये दिन सुहाने ।

हैं लौटे फिर वही गुजरे ज़माने ।।

भरा अब तक नही है दिल हमारा ।

चले आया करो करके बहाने ।।

हमारे फख्र की ये इन्तिहाँ है ।

वो आये आज हमको आजमाने ।।

बड़ी शिद्दत से तुझको पढ़ रहा था ।

हवाएं फिर लगीं पन्ने उड़ाने ।।

शिकायत दर्ज जब दिल में कराया ।

अदाएँ तब लगीं पर्दा हटाने ।।

नज़र से लूट लेना चाहते हैं ।

हैं मिलते लोग अब कितने…

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Added by Naveen Mani Tripathi on August 19, 2018 at 8:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222 

बड़ी उम्मीद थी उनसे वतन को शाद रक्खेंगे ।

खबर क्या थी चमन में वो सितम आबाद रक्खेंगे ।।

है पापी पेट से रिश्ता पकौड़े बेच लेंगे हम।

मगर गद्दारियाँ तेरी हमेशा याद रक्खेंगे ।।

हमारी पीठ पर ख़ंजर चलाकर आप तो साहब ।

नये जुमले से नफ़रत की नई बुनियाद रक्खेंगे ।।

विधेयक शाहबानो सा दिये हैं फख्र से तोहफा ।

लगाकर आग वो कायम यहां उन्माद रक्खेंगे ।।

इलक्शन आ रहा है दाल गल जाए न फिर उनकी।

तरीका…

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Added by Naveen Mani Tripathi on August 14, 2018 at 8:06pm — 8 Comments

ग़ज़ल

122 122 122 122 

न जाने मुहब्बत में क्या चाहते हैं ।

जरा सी वफ़ा पर वो दिल मांगते हैं ।।

जिन्हें कुछ खबर ही नहीं दर्द क्या है ।

वही ज़ख़्म मेरा बहुत देखते हैं ।।

अगर वास्ता ही नहीं आपसे है ।

मेरा हाले दिल आप क्यूँ पूछते हैं ।।

असर चाहतों का दिखा फिर है उनका ।

अदाओं में चिलमन से जब झांकते हैं ।।

जो ठुकरा दिए थे मेरी बन्दगी को ।

मेरे घर का वो भी पता ढूढते हैं ।।

जुदाई में हमको ये तोहफ़ा…

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Added by Naveen Mani Tripathi on August 6, 2018 at 10:33pm — 7 Comments

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

कुछ धुंआ घर के दरीचों से उठा हो जैसे ।

फिर कोई शख्स रकीबों से जला हो जैसे ।।

खुशबू ए ख़ास बताती है पता फिर तेरा ।

तेरे गुलशन से निकलती ये सबा हो जैसे ।।

बादलों में वो छुपाता ही रहा दामन को ।

रात भर चाँद सितारों से ख़फ़ा हो जैसे ।।

जुल्म मजबूरियों के नाम लिखा जायेगा ।

बन के सुकरात कोई ज़ह्र पिया हो जैसे ।।

खैरियत पूँछ के होठों पे तबस्सुम आना ।

हाल ए दिल मेरा तुझे खूब पता हो जैसे…

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Added by Naveen Mani Tripathi on August 4, 2018 at 9:03pm — 14 Comments

आ जाती है मौत यहाँ अनजाने में

22 22 22 22 22 2



भीड़ बहुत है अब तेरे मैख़ाने में ।।

लग जाते हैं दाग़ सँभल कर जाने में ।।1

महफ़िल में चर्चा है उसकी फ़ितरत पर ।

दर्द लिखा है क्यों उसने अफ़साने में ।।2

इस बस्ती में मुझको तन्हा मत छोडो ।

लुट जाते हैं लोग यहाँ वीराने में ।।3

वह भी अब रहता है खोया खोया सा ।

कुछ तो देखा है उसने दीवाने में ।।4

होश गवांकर लौटा हूँ मैख़ानों से।

जब उभरा है अक्स तेरा…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 28, 2018 at 10:50pm — 13 Comments

ग़ज़ल

लुट गयी कैसे रियासत सोचिये ।

हर तरफ़ होती फ़ज़ीहत सोचिये ।।

कुछ यकीं कर चुन लिया था आपको ।

क्यों हुई इतनी अदावत सोचिये ।।

नोट बंदी पर बहुत हल्ला रहा ।

अब कमीशन में तिज़ारत सोचिये ।।

उम्र भर पढ़कर पकौड़ा बेचना ।

दे गए कैसी नसीहत सोचिये ।।

गैर मज़हब को मिटा दें मुल्क से ।

आपकी बढ़ती हिमाक़त सोचिये ।

दाम पर बिकने लगी है मीडिया ।

आ गयी है सच पे आफत सोचिये ।।

आज गंगा फिर यहां रोती मिली ।

आप भी अपनी लियाक़त सोचिये…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 19, 2018 at 7:51pm — 9 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

इन्साफ का हिसाब लगाया करे कोई।

होता कहीं तलाक़ हलाला करे कोई।।

उनको तो अपने वोट से मतलब था दोस्तों ।

जिन्दा रखे कोई भी या मारा करे कोई।।

मजहब को नोच नोच के बाबा वो खा गया ।

बगुला भगत के भेष में धोका करे कोई ।।

लूटी गई हैं ख़ूब गरीबों की झोलियाँ ।

हम से न दूर और निवाला करे कोई ।।

सत्ता में बैठ कर वो बहुत माल खा रहा ।

यह बात भी कहीं तो उछाला करे कोई ।।

आ जाइये हुजूर जरा अब ज़मीन…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 13, 2018 at 2:20pm — 15 Comments

न कोई तिश्नगी होती न कोई हादसा होता

1222 1222 1222 1222



यहां इंसानियत से गर सभी का राबिता होता ।।

यकीनन मुल्क का यह सर नहीं झुकता मिला होता ।।1

मुहब्बत के उसूलों को अगर उसने पढ़ा होता ।

न कोई तिश्नगी होती न कोई हादसा होता ।।2

बहुत बेचैन दरिया की उसे पहचान है शायद ।

वग़रना वह समंदर तो नदी को ढूढ़ता होता ।।3

तुम्हारी शर्त को हम मान लेते बेसबब यारों।

हमें अंजामे रुसवाई अगर इतना पता होता ।।4

सियासत दां…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 7, 2018 at 2:00pm — 13 Comments

कोई दुपट्टा उड़ा रहा था

121 22 121 22

वो शख्स क्यूँ मुस्कुरा रहा था ।

जो मुद्दतों से ख़फ़ा रहा था ।।

वो चुपके चुपके नये हुनर से ।

सही निशाना लगा रहा था ।।

अदाएँ क़ातिल निगाह पैनी।

जो तीर दिल पर चला रहा था ।।

तबाह करने को मेरी हस्ती ।

कोई इरादा बना रहा था ।।

मुग़ालता है उसे यकीनन ।

नया फ़साना सुना रहा था ।।

बदलते चेहरे का रंग कुछ तो ।

तुम्हारा मक़सद बता रहा था…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 3, 2018 at 3:09pm — 12 Comments

तोड़ कर आप दिल अब किधर जाएंगे

212 212 212 212



आप जब आईने में सँवर जाएंगे ।

फिर तसव्वुर मेरे चाँद पर जाएंगे ।।1

गर इरादा हमारा सलामत रहा ।

तो सितारे जमीं पर उतर जायेंगे ।।2

आज महफ़िल में वो आएंगे बेनकाब ।

देखकर हुस्न को इक नज़र जाएंगे ।।3

आज मौसम हसीं ढल गयी शाम है ।

तोड़कर आप दिल अब किधर जाएंगे ।।4

कीजिये बेसबब और इनकार मत ।

हौसले और मेरे निखर जाएंगे ।।5

जानकर क्या करेंगे…

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Added by Naveen Mani Tripathi on June 30, 2018 at 6:43pm — 12 Comments

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