For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज मौसम बड़ा आशिकाना रहा

212 212 212 212

मुद्दतों बाद फिर मुस्कुराना रहा ।

आज मौसम बड़ा आशिकाना रहा ।।

आप आये यहां ये थी किस्मत मेरी ।

इक मुलाकत से दिन सुहाना रहा ।।

मुफ़लिसी में सभी छोड़ कर चल दिये ।

इस तरह से मेरा दोस्ताना रहा ।।

वो मुकर ही गए आज पहचान से ।

जिनके घर तक मेरा आना जाना रहा ।।

आपकी इक अदा कर गई है असर ।

आपका तो गज़ब का निशाना रहा ।।

जाम उसने कहा हुस्न को देखकर ।

इश्क़ में तजरिबा कुछ सयाना रहा ।।

कह दिया है खुदा उसने महबूब को ।

उसका अंदाज तो सूफियाना रहा ।।

क्या करेंगे मेरा हाल अब पूछकर ।

कोई रिश्ता कहाँ अब पुराना रहा ।।

अजनबी बनके गुजरें हैं वो आज फिर ।

याद उनको कहाँ वो ज़माना रहा ।।

मान लूँ कैसे उनको खबर ही नहीं ।

बेसबब क्या नजर का झुकाना रहा ।।

दौलते हुस्न सब को मयस्सर कहाँ ।

आपके पास ही यह खज़ाना रहा ।।

तोड़ कर दिल मेरा वो चले जा रहे ।

कल तलक जिनका दिल में ठिकाना रहा ।।

--नवीन मणि त्रिपाठी

मौलिक अप्रकाशित

Views: 745

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by somesh kumar on February 8, 2018 at 10:24am

बहुत खूब 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 7, 2018 at 6:32pm

अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय त्रिपाठी जी..सादर

Comment by Naveen Mani Tripathi on February 6, 2018 at 3:10pm

आ0 कबीर सर नमन । चेक करता हूँ सर।

Comment by Naveen Mani Tripathi on February 6, 2018 at 3:09pm

आ0 लक्ष्मण धामी साहब आभार 

Comment by Naveen Mani Tripathi on February 6, 2018 at 3:08pm

आ0 रक्षिता सिंह जी आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 6, 2018 at 1:02pm

हार्दिक बधाई

Comment by Samar kabeer on February 4, 2018 at 9:37pm

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कई अशआर में रदीफ़ से इंसाफ़ नहीं हो सका, इसे जांचने का बहतर तरीक़ा ये है कि अपनी कही हुई पंक्ति को गद्ध में पढ़के देख लें ।

Comment by रक्षिता सिंह on February 4, 2018 at 2:53pm

आदरणीय नवीन जी, बहुत ही  खूबसूरत गज़ल ।

दिलीमुबारकबाद कुबूल करें।

Comment by Naveen Mani Tripathi on February 4, 2018 at 11:02am

बहुत बहुत शुक्रिया मु0 आरिफ़ साहब ।

Comment by Mohammed Arif on February 4, 2018 at 10:37am

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,

                                  बढ़िया अश'आरों से सुसज्जित ग़ज़ल । बेहतरीन शे'र । हर शे'र कुछ कहता है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
22 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
23 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
23 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
23 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service