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Balram Dhakar
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राज़ नवादवी commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"आदरणीय भाई बलराम धाकड़ साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद. सादर. "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"आ. भाई बलराम जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।  पहले मिसरे में एक वचन सूरज के लिए प्रयुक्त बहुवचन क्रिया खाँगाले के विषय में संशय है । मेरी शंका का समाधान करने की कृपा करें ।"
Thursday
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"आदरणीय बलराम जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Thursday
Balram Dhakar posted a blog post

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (जीवन सरोज खिल के भी सुरभित नहीं हुआ।)

221, 2121, 1221, 212आरोप ये गलत है कि पुष्पित नहीं हुआ। जीवन सरोज खिल के हाँ सुरभित नहीं हुआ।छल, साम, दाम, दण्ड, कुटिलता चरम पे थी, ऐसे ही कर्ण रण में पराजित नहीं हुआ।कैसा ये इन्क़लाब है, बदलाव कुछ नहीं, अम्बर अभी तो रक्त से रंजित नहीं हुआ।गिरकर संभल रहे हैं, गिरे जितनी बार हम,  साहस हमारा आज भी खण्डित नहीं हुआ।क्या मुझको मिल गया है, मुझे क्या नहीं मिला,मन में तो है विषाद, मैं चिंतित नहीं हुआ।विचलित हुई सदा ही ये नारी, ये सच नहीं, गौतम कभी अहिल्या सा शापित नहीं हुआ।मौलिक/अप्रकाशित।~बलराम धाकड़ ।See More
Thursday
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (चलो धुंआ तो उठा, इस गरीबख़ाने से)
"बहुत शुक्रिया, आदरणीय विनय कुमार जी, सुख़न नवाज़ी का। सादर।"
Thursday
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"ग़ज़ल में आपकी शिरक़त और हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया, आदरणीय महेंद्र कुमार जी। सादर।"
Thursday
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"बहुत बहुत धन्यवाद आपका, आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी। सादर।"
Thursday
Mahendra Kumar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय बलराम धाकड़ जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Wednesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"आद0 बकराम धाकड़ जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार कीजिये"
Wednesday
Asif zaidi commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
Tuesday
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"आली मोहतरम जनाब समर कबीर साहब, ग़ज़ल में आपकी शिरक़त ही हौसला अफजाई कर देती है। आपकी इस्लाह के मुताबिक़ सुधार कर लूँगा, सर। सादर।"
Tuesday
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"जनाब ज़ैदी साहब, सुख़न नवाज़ी और हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"जनाब बलराम धाकड़ जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'अब क़यामत का शोर बरपेगा' इस मिसरे में 'बरपेगा' शब्द ठीक नहीं,इसका सहीह व्याकरण है "बरपा होगा",इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:- 'अब क़यामत का शोर…"
Tuesday
Asif zaidi commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"जनाब बलराम धाकड़ साहिब आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने मेरी दुआएं हैं आप मज़ीद बलन्दीयों छूते जाएं।"
Monday
Balram Dhakar posted a blog post

ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)

2122 1212 112/22किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं।कितने मैले से ये उजाले हैं।आज के दौर के ये अहल-ए-वतन,बस दरकते हुए शिवाले हैं।अब तो किस्सा तमाम ही कर दे,ऐ हुक़ूमत! तेरे हवाले हैं।सच तिजोरी में क़ैद रख्खा है,झूठ ने मोरचे सँभाले हैं।यूँ तो मुद्दे सभी पुराने थे,उसने सिक्के नए उछाले हैं।चैन, उम्मीद, अम्न और सपने,ये सियासत के कुछ निवाले हैं।अब क़यामत का शोर बरपेगा,फिर से आँखों ने ख़्वाब पाले हैं।~ बलराम धाकड़ ।मौलिक/अप्रकाशित ।See More
Monday
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"मैं तेरे जज़्बात का पहले शनासा बन गया। फिर तेरी आँखों से जब उतरा, निशाना बन गया। बस यही अंजाम उल्फ़त में मेरे दिल का हुआ, मेघ जब पर्बत से टकराया, कुहासा बन गया। जान का जाना तो तय था यूँ मुक़द्दर में मेरे, आपका हँसके यूँ जाना, इक बहाना बन गया। आरज़ू…"
Dec 29, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Bareli, Raisen (MP)
Profession
Astr. Commissioner, GST

Balram Dhakar's Blog

ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)

2122 1212 112/22
किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं।
कितने मैले से ये उजाले हैं।
आज के दौर के ये अहल-ए-वतन,
बस दरकते हुए शिवाले हैं।
अब तो किस्सा तमाम ही कर दे,
ऐ हुक़ूमत! तेरे हवाले हैं।
सच तिजोरी में क़ैद रख्खा…
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Posted on January 14, 2019 at 4:44pm — 12 Comments

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (जीवन सरोज खिल के भी सुरभित नहीं हुआ।)

221, 2121, 1221, 212

आरोप ये गलत है कि पुष्पित नहीं हुआ।

जीवन सरोज खिल के हाँ सुरभित नहीं हुआ।

छल, साम, दाम, दण्ड, कुटिलता चरम पे थी,

ऐसे ही कर्ण रण में पराजित नहीं हुआ।

कैसा ये इन्क़लाब है, बदलाव कुछ नहीं,

अम्बर अभी तो रक्त से रंजित नहीं हुआ।

गिरकर संभल रहे हैं, गिरे जितनी बार हम, 

साहस हमारा आज भी खण्डित नहीं…

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Posted on December 18, 2018 at 4:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (चलो धुंआ तो उठा, इस गरीबख़ाने से)

1212,1122,1212,22/112

तमाम ख़्वाब जलाने से, दिल जलाने से।

चलो धुंआ तो उठा, इस गरीबख़ाने से।

हमें अदा न करो हक़, हिसाब ही दे दो,

नदी खड़ी हुई है दूर क्यों मुहाने से।

चराग़ ही के तले क्यों अंधेरा होता है,

ये राज़ खुल न सकेगा कभी ज़माने से।

वो सूखती हुई बेलों को सींचकर देखें,

ख़ुदा मिला है किसे घंटियाँ बजाने से।…

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Posted on December 12, 2018 at 9:55pm — 14 Comments

काँच पत्थर से भले टकरा गया। (ग़ज़ल- बलराम धाकड़)

2122 2122 212

काँच पत्थर से भले टकरा गया।

ज़िंदगी का फ़लसफ़ा समझा गया।

फ़िर सियासत में हुई हलचल कहीं,

मीडिया के हाथ मुद्दा आ गया।

सारी दुनिया एक कुनबा है अगर,

आयतन रिश्तों का क्यों घटता गया?

इक बतोलेबाज की डींगें सुनीं,

आदमी घुटनों के ऊपर आ गया।

फिर किसी औरत का दामन जल…

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Posted on November 2, 2018 at 3:30pm — 19 Comments

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At 9:17am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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