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Balram Dhakar
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 12
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय आशुतोष जी,ग़ज़ल में शिरक़त, सुखन नवाज़ी और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर।"
Nov 10
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय धर्मेंद्र जी,ग़ज़ल में शिरक़त और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर"
Nov 10
Dr Ashutosh Mishra commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"यक़ीनन छोड़ दी हम सबने अब शर्मिन्दगी लेकिन,हया का आँख में थोड़ा सा पानी अब भी क़ाइम है।.....................बहुत पसंद आया  धड़कना दिल ने कुछ कम कर दिया, इस दौर में लेकिन,लहू के चंद क़तरों में रवानी अब भी क़ाइम है।...lलहू के चंद कतरों में…"
Nov 10
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय बलराम जी, बधाई स्वीकार करें।"
Nov 10
Balram Dhakar's blog post was featured

अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

१२२२,१२२२,१२२२,१२२२दिलों पर कुछ ग़मों की हुक़्मरानी अब भी क़ाइम है,कि निचली बस्तियों में सरगरानी अब क़ाइम है।हक़ीक़त है कि उनके वास्ते सब कुछ किया हमने,मगर औरत के लव पर बेज़ुबानी अब भी क़ाइम है।मैं शादी तो करुँगी, मह्र, वालिद आप रख लेना,कि अपनी बात पर बिटिया सयानी अब भी क़ाइम है।यक़ीनन छोड़ दी हम सबने अब शर्मिन्दगी लेकिन,हया का आँख में थोड़ा सा पानी अब भी क़ाइम है।धड़कना दिल ने कुछ कम कर दिया, इस दौर में लेकिन,लहू के चंद क़तरों में रवानी अब भी क़ाइम है।मुख़ालिफ़ ज़ुल्म के कुछ लोग जो आए हैं सड़कों पर,ये जोख़िम ये…See More
Nov 7
Balram Dhakar posted a blog post

अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

१२२२,१२२२,१२२२,१२२२दिलों पर कुछ ग़मों की हुक़्मरानी अब भी क़ाइम है,कि निचली बस्तियों में सरगरानी अब क़ाइम है।हक़ीक़त है कि उनके वास्ते सब कुछ किया हमने,मगर औरत के लव पर बेज़ुबानी अब भी क़ाइम है।मैं शादी तो करुँगी, मह्र, वालिद आप रख लेना,कि अपनी बात पर बिटिया सयानी अब भी क़ाइम है।यक़ीनन छोड़ दी हम सबने अब शर्मिन्दगी लेकिन,हया का आँख में थोड़ा सा पानी अब भी क़ाइम है।धड़कना दिल ने कुछ कम कर दिया, इस दौर में लेकिन,लहू के चंद क़तरों में रवानी अब भी क़ाइम है।मुख़ालिफ़ ज़ुल्म के कुछ लोग जो आए हैं सड़कों पर,ये जोख़िम ये…See More
Nov 6
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय अजय जी,ग़ज़ल में शिरक़त और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर"
Nov 6
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय ब्रजेश जी, हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर"
Nov 6
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय समर सर, ग़ज़ल में आपकी शिरक़त और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया। आपकी समझाइश और सुझाव हमेशा ही बेशकीमती और इसीलिये शिरोधार्य होते हैं। सादर।"
Nov 6
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय बलराम जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक शुभकामनाएं. सादर"
Nov 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय बहुत ही खूबसूरत रवानगी लिए हुए ग़ज़ल हुई..सादर"
Nov 5
Samar kabeer commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"जनाब बलराम जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । कुछ बातें बहना राजेश कुमारी जी बता चुकी हैं,उनका संज्ञान लें,कुछ मैं बताता हूँ । सबसे पहली बात 'क़ायम'शब्द आम प्रचलन में बोला जाता है,लेकिन इसका सही तलफ़्फ़ुज़(उच्चारण)है…"
Nov 5
Balram Dhakar commented on Samar kabeer's blog post "अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"
"बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने समर सर। बहुत बहुत बधाई। सादर।"
Nov 4
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"धन्यवाद आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी। बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का। सादर।"
Nov 4
Gurpreet Singh commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"वाह वाह आदरणीय बलराम जी ..बहुत उम्दा ग़ज़ल कही आपने .. सभी अशआर अपना असर छोड़ रहे हैं ये सच है, मिल गई है उसमें अब बारूद की कुछ बू, मगर घाटी में खु़शबू जाफ़रानी अब भी क़ायम है। वाह बहुत खूबसूरत"
Nov 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Bareli, Raisen (MP)
Profession
Astr. Commissioner, GST

Balram Dhakar's Blog

अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

१२२२,१२२२,१२२२,१२२२



दिलों पर कुछ ग़मों की हुक़्मरानी अब भी क़ाइम है,

कि निचली बस्तियों में सरगरानी अब क़ाइम है।



हक़ीक़त है कि उनके वास्ते सब कुछ किया हमने,

मगर औरत के लव पर बेज़ुबानी अब भी क़ाइम है।



मैं शादी तो करुँगी, मह्र, वालिद आप रख लेना,

कि अपनी बात पर बिटिया सयानी अब भी क़ाइम है।



यक़ीनन छोड़ दी हम सबने अब शर्मिन्दगी लेकिन,

हया का आँख में थोड़ा सा पानी अब भी क़ाइम है।



धड़कना दिल ने कुछ कम कर दिया, इस दौर में लेकिन,

लहू के… Continue

Posted on November 6, 2017 at 6:32pm — 25 Comments

ग़ज़ल: बलराम धाकड़

1222-1222-1222-1222

जनम होगा तो क्या होगा मरण होगा तो क्या होगा

तिमिर से जब भरा अंतःकरण होगा तो क्या होगा



हरिक घर से यूँ सीता का हरण होगा तो क्या होगा

फिर उसपे राम का वो आचरण होगा तो क्या होगा



मेरे अहले वतन सोचो जो रण होगा तो क्या होगा

महामारी का फिर जब संक्रमण होगा तो क्या होगा



वो ही ख़ैरात बांटेंगे वो ही एहसां जताएंगे

विमानों से निज़ामों का भ्रमण होगा तो क्या होगा



जमा साहस है सदियों से हमारी देह में अबतक

नसों…

Continue

Posted on October 11, 2017 at 6:00pm — 16 Comments

अंधी जनता, राजा काना बढ़िया है ...गज़ल

22-22-22-22-22-2



नये दौर का नया ज़माना, बढ़िया है

अंधी जनता, राजा काना, बढ़िया है



अब तो है यह उन्नति की नव परिभाषा,

जंगल काटो, पेड़ लगाना, बढ़िया है



अपना राग अलापो अपनी सत्ता है,

अपने मुंह मिट्ठू बन जाना, बढ़िया है



नई सियासत में तबदीली आई है,

आग लगा कर आग बुझाना, बढ़िया है



हत्या करना बीते युग की बात हुई,

अब दुश्मन की साख मिटाना, बढ़िया है



अगर कोख में बिटिया अब तक जिंदा है,

खूब पढ़ाना, ख़ूब बढ़ाना, बढ़िया… Continue

Posted on August 18, 2017 at 8:30pm — 18 Comments

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