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Balram Dhakar
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dandpani nahak commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (मुहब्बत के सफ़र में सैकड़ों आज़ार आने हैं)
"आदरणीय बलराम धाकड़ जी आदाब , बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है ह्रदय से बधाई स्वीकार करें!"
Jul 29
Dayaram Methani commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (मुहब्बत के सफ़र में सैकड़ों आज़ार आने हैं)
"आदणीय बलराम धाकड़ जी, सुंदर गज़ल के ​लिए बधाई स्वीकार करें। "
Jul 28
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (मुहब्बत के सफ़र में सैकड़ों आज़ार आने हैं)
"आदरणीय बलराम जी, आपके शेरों में हमेशा एक अतिरिक्त ऊर्जस्विता होती है, वो इन शेरों में भी नुमायाँ है.  ख़ास तौर से ये शेर बहुत अच्छा लगा : 'बहार आने को है, बारूद की ख़ुश्बू फ़ज़ा में है, यही बाकी है शाख़ों पे भी अब अँगार आने…"
Jul 20
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (मुहब्बत के सफ़र में सैकड़ों आज़ार आने हैं)
"लाजवाब ग़ज़ल | आदरणीय समर सर की इस्लाह से तो जबरदस्त निखार आ गया है | "
May 27
Balram Dhakar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि)
"आदरणीय तसदीक़ साहब, बहुत बहुत बधाई इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ।  दाद के साथ मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ। सादर।"
Mar 2
Balram Dhakar posted a blog post

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (हम अपनी ज़िंदगी भर ज़िंदगी बर्दाश्त करते हैं)

1222 1222 1222 1222सुबह से शाम तक नाराज़गी बर्दाश्त करते हैं।हम अपने अफ़सरों की ज़्यादती बर्दाश्त करते हैं।अज़ल से हम उजाले के रहे हैं मुन्तज़िर लेकिन,मुक़द्दर ये कि अबतक तीरगी बर्दाश्त करते हैं।सँभालो लड़खड़ाते अपने क़दमों को, ख़ुदा वालो,ये पैमाने तो कितनी बेख़ुदी बर्दाश्त करते हैं।सुना है, मौत महबूबा है, उसकी इंतज़ारी में,हम अपनी ज़िंदगी भर ज़िंदगी बर्दाश्त करते हैं।कुछ ऐसे शख़्स जो हमदर्दियों के कारोबारी हैं,वो अपनी नेकियों से हर बदी बर्दाश्त करते हैं।तुम्हारे कान के झुमके सहमकर, कसमसाकर भी,तुम्हारी ज़ुल्फ़…See More
Mar 1
Balram Dhakar commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर
"आदरणीय रवि सर, सादर अभिवादन। बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है । शेर दर शेर के साथ मुबारकबाद पेश है, कुबूल फरमाएँ।  जो थे साहिल पे तमाशाई यही कहते थे,डूबने वाले को अब तक तो उभर जाना था। इस शेर के लिए अलग से बहुत बहुत बधाई । सादर। "
Mar 1
Balram Dhakar joined Admin's group
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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |धन्यवाद |See More
Feb 22
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय नवीन जी, सादर अभिवादन। बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। शेर दर शेर दाद के साथ दिली मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
Feb 22
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय अनीस जी, ग़ज़ल के उम्दा प्रयास के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकारें। सादर।"
Feb 22
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आली मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब, सादर अभिवादन। ग़ज़ल में आपकी शिरक़त का इंतज़ार था। हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया, सर। आपकी इस्लाह से ज़ाहिर है, ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है।  इस्लाह के मुताबिक़ बदलाव का प्रयास करता हूँ, सर। सादर।"
Feb 22
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय नवीन जी, आपकी एवं मंच के गुणीजनों की इस्लाह के मुताबिक ग़ज़ल में संकलन के समय सुधार का प्रयास रहेगा। आपने ग़ज़ल की कहन को बारीक़ी से समझा, इसके लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया। सादर।"
Feb 22
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय लक्ष्मण जी,  सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार। सादर।"
Feb 22
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय योगराज सर, सादर अभिवादन। ग़ज़ल में आपकी शिरक़त अपने आपमें हौसला अफजाई ही होती है। अवश्य ही ग़ज़ल में आपकी अमूल्य इस्लाह के मुताबिक़ सुधार कर लूँगा, सर। सादर।"
Feb 22
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय नादिर साहब, ग़ज़ल अच्छी हुई है। दिली मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
Feb 22
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।"
Feb 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Bareli, Raisen (MP)
Profession
Astr. Commissioner, GST

Balram Dhakar's Blog

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (हम अपनी ज़िंदगी भर ज़िंदगी बर्दाश्त करते हैं)

1222 1222 1222 1222
सुबह से शाम तक नाराज़गी बर्दाश्त करते हैं।
हम अपने अफ़सरों की ज़्यादती बर्दाश्त करते हैं।
अज़ल से हम उजाले के रहे हैं मुन्तज़िर लेकिन,
मुक़द्दर ये कि अबतक तीरगी बर्दाश्त करते हैं।
सँभालो लड़खड़ाते अपने क़दमों को, ख़ुदा…
Continue

Posted on February 11, 2019 at 10:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (मुहब्बत के सफ़र में सैकड़ों आज़ार आने हैं)

1222 1222 1222 1222
मदारिस हैं, मसाजिद, मैकदे हैं, कारख़ाने हैं।
हमारी ज़िन्दगी में और भी बाज़ार आने हैं।
ये लावारिस से पौधे बस इसी अफ़वाह से खुश हैं,
जताने इख़्तियार इन पर भी दावेदार आने हैं।
मैं मरना चाहता हूँ और वो कहते हैं जीता…
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Posted on January 31, 2019 at 10:30pm — 12 Comments

ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)

2122 1212 112/22
किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं।
कितने मैले से ये उजाले हैं।
आज के दौर के ये अहल-ए-वतन,
बस दरकते हुए शिवाले हैं।
अब तो किस्सा तमाम ही कर दे,
ऐ हुक़ूमत! तेरे हवाले हैं।
सच तिजोरी में क़ैद रख्खा…
Continue

Posted on January 14, 2019 at 4:44pm — 14 Comments

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (जीवन सरोज खिल के भी सुरभित नहीं हुआ।)

221, 2121, 1221, 212

आरोप ये गलत है कि पुष्पित नहीं हुआ।

जीवन सरोज खिल के हाँ सुरभित नहीं हुआ।

छल, साम, दाम, दण्ड, कुटिलता चरम पे थी,

ऐसे ही कर्ण रण में पराजित नहीं हुआ।

कैसा ये इन्क़लाब है, बदलाव कुछ नहीं,

अम्बर अभी तो रक्त से रंजित नहीं हुआ।

गिरकर संभल रहे हैं, गिरे जितनी बार हम, 

साहस हमारा आज भी खण्डित नहीं…

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Posted on December 18, 2018 at 4:00pm — 14 Comments

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At 9:17am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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