For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Balram Dhakar
Share

Balram Dhakar's Friends

  • Zid
 

Balram Dhakar's Page

Latest Activity

Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post काँच पत्थर से भले टकरा गया। (ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीय रवि शुक्ल जी, ग़ज़ल आपको पसंद आई, मेरा लिखना सार्थक हुआ। जी हाँ, सर, मुद्दा शब्द के प्रचलन अनुसार ही इस्तेमाल में कोई अड़चन न हो तो इसे ऐसा ही रहने दें। सादर।"
Nov 11
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post काँच पत्थर से भले टकरा गया। (ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीय अजय तिवारी जी, ग़ज़ल में आपकी शिरक़त और सुझावों हेतु बहुत बहुत शुक्रिया एवं आभार। सादर।"
Nov 11
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"बहुत बहुत शुक्रिया, आदरणीय रवि शुक्ल जी, ग़ज़ल में आपकी शिरक़त और हौसला अफजाई का। पयम्बर वाला यह शेर मूल ग़ज़ल से खारिज़ कर दिया है। सादर।"
Nov 11
Ravi Shukla commented on Balram Dhakar's blog post जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीय बलराम धाकड़ जी,  बहुत बहुत बधाई आपको इस ग़ज़ल के लिए पयम्बर वाले शेर पर समर साहब की बात से सहमत हूँं"
Nov 6
Ravi Shukla commented on Balram Dhakar's blog post काँच पत्थर से भले टकरा गया। (ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीय बलराम धाकड़ जी,  सुन्दर गजल की प्रस्तुति पे  मुबारकबाद पेश करता हूँ. मुद्दआ 212 के वज्न में होगाशायद देखियेगा आपने बोलचाल का मुद्दा 22 के वजन में लिया है "
Nov 6
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीया महिमा जी, ग़ज़ल में आपकी शिरक़त और हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर।"
Nov 4
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आपका बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय अजय तिवारी जी। सादर।"
Nov 4
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (वो मेरे साथ था, मेरा शिकार होने तक)
"ग़ज़ल में आपकी शिरक़त और हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया, आदरणीय विजय निकोर जी। सादर।"
Nov 4
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (वो मेरे साथ था, मेरा शिकार होने तक)
"आपका बहुत बहुत शुक्रिया, आदरणीय अजय तिवारी जी। सादर।"
Nov 4
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (वो मेरे साथ था, मेरा शिकार होने तक)
"बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय ब्रजेश जी। सादर।"
Nov 4
MAHIMA SHREE commented on Balram Dhakar's blog post जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"वाहह..बहुत खूब..बधाई.."
Nov 4
vijay nikore commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (वो मेरे साथ था, मेरा शिकार होने तक)
"गज़ल के शिल्प में तो अन्य माहिर हैं, गज़ल के भाव मुझको बहुत अच्छे लगे। बधाई, बलराम जी।"
Nov 4
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post काँच पत्थर से भले टकरा गया। (ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीय बलराम जी,  वासिते > वास्ते  फिर किसी औरत का दामन जल गया > जल गया दामन किसी औरत का फिर  शायरी के मायने समझा गया > शायरी है क्या मुझे/हमें समझा गया  अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 3
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)
"आदरणीय बलराम जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
Nov 3
Ajay Tiwari commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (वो मेरे साथ था, मेरा शिकार होने तक)
"आदरणीय बलराम जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.  "
Nov 3
Balram Dhakar commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहीं हद तोड़ कर तट भी अगर मझधार हो जाता - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार करें। सादर।"
Nov 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, Madhya Pradesh
Native Place
Bareli, Raisen (MP)
Profession
Astr. Commissioner, GST

Balram Dhakar's Blog

काँच पत्थर से भले टकरा गया। (ग़ज़ल- बलराम धाकड़)

2122 2122 212

काँच पत्थर से भले टकरा गया।

ज़िंदगी का फ़लसफ़ा समझा गया।

फ़िर सियासत में हुई हलचल कहीं,

मीडिया के हाथ मुद्दा आ गया।

सारी दुनिया एक कुनबा है अगर,

आयतन रिश्तों का क्यों घटता गया?

इक बतोलेबाज की डींगें सुनीं,

आदमी घुटनों के ऊपर आ गया।

फिर किसी औरत का दामन जल…

Continue

Posted on November 2, 2018 at 3:30pm — 19 Comments

जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे। ( ग़ज़ल- बलराम धाकड़)

चन्द अश्आर मेरे अश्क़ से बहकर उतरे।

जो पसीने में हुए तर, वही बेहतर उतरे।

तेरी यादों के यूँ तूफ़ां हैं दिलों पे क़ाबिज़,

जैसे बादल कोई पर्बत पे घुमड़कर उतरे।

स्याह रातों में तेरा ऐसे दमकता था बदन,

जिसतरह चाँद पिघलकर किसी छत पर उतरे।

मैं तुझे प्यार करूँ, और बहुत प्यार करूँ,

ऐसे जज़्बात मेरे दिल में बराबर उतरे।

ऐसी ज़ुल्मत…

Continue

Posted on October 30, 2018 at 11:47pm — 20 Comments

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (वो मेरे साथ था, मेरा शिकार होने तक)

1212, 1122, 1212, 22

अजीब बात है, दुश्मन से यार होने तक,

वो मेरे साथ था, मेरा शिकार होने तक।

उबलते खौलते सागर से पार होने तक,

ख़ुदा को भूल न पाए ख़ुमार होने तक।

हमें भी कम न थीं ख़ुशफ़हमियां मुहब्बत में,

हमारा दर्द से अव्वल क़रार होने तक।

तुम्हारा ज़ुल्म बढ़ेगा, हमें ख़बर है ये,

तुम्हारे हुस्न का अगला शिकार…

Continue

Posted on October 29, 2018 at 1:40pm — 20 Comments

ग़ज़ल~ बलराम धाकड़ (इरादा तो था मुहर्रम को ईद कर देंगे)

1212 1122 1212 112/22

इरादा तो था मुहर्रम को ईद कर देंगे।

तरीक़ा उनका था जैसे शहीद कर देंगे।

वो एक बार सही महफ़िलों में आएं तो,

उन्हें हम अपनी ग़ज़ल का मुरीद कर देंगे।

उम्मीद बन के जो इस ज़िन्दगी में शामिल हो,

तो कैसे तुमको भला नाउम्मीद कर देंगे।

जो तुमने ख़्वाब भी देखे बराबरी के तो,

वो ऐसे ख़्वाब की मिट्टी…

Continue

Posted on October 27, 2018 at 8:18pm — 20 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:17am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post सन्नाटा  -  लघुकथा  -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,हक़ीक़त से क़रीब, उम्दा तंज़,वाह, बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर…"
13 minutes ago
Vivek Raj commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -6 ( चल गया जादू सभी अंधे औ बहरे हो गए)
"जनाब क़मर साहब अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post सन्नाटा  -  लघुकथा  -
"हार्दिक आभार आदरणीय बबिता गुप्ता जी।"
3 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७१
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, आदाब. ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफज़ाई का तहेदिल से शुक्रिया. सादर "
4 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -7 ( गरीबों की लाशों में ढूंढें ख़ज़ाना)
"हौसला आफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया जनाब तेज वीर सिंह साहब।"
4 hours ago
Munavvar Ali 'taj' replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"मुहतरम राणा प्रताप साहिब गुज़ारिश है कि ग़ज़ल नं. 33 के सातवें शेर के सानी मिसरे में लफ्ज़ '…"
4 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

"अहसास"

ज़िंदगी दी है खुदा ने,मुस्कुराने के लिएभूलना लाज़िम है तुमको,याद आने के लिए बेखयाली मे कदम फ़िर, खींच…See More
5 hours ago
babitagupta commented on TEJ VEER SINGH's blog post सन्नाटा  -  लघुकथा  -
"बेहतरीन रचना के माध्यम से कटाक्ष करती , कि हम भावी पीढी को किस तरह का संस्कार दे रहे है।हार्दिक…"
6 hours ago
babitagupta commented on babitagupta's blog post बदहाल जनता (तुकांत अतुकांत कविता)
"नमस्कार! , आदरणीय तेजवीर सरजी, समर सरजी, राजेश सरजी, रचना पर टिप्पणी करने व पसंद करने के लिए…"
6 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -7 ( गरीबों की लाशों में ढूंढें ख़ज़ाना)
"हार्दिक बधाई आदरणीय कमर जौनपुरी जी। बेहतरीन गज़ल। ज़रूरी कहाँ है गिराना ज़मीं पेहै काफ़ी उसे बस नज़र से…"
7 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -7 ( गरीबों की लाशों में ढूंढें ख़ज़ाना)
"हार्दिक बधाई आदरणीय कमर जौनपुरी जी। बेहतरीन गज़ल।"
7 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post सन्नाटा  -  लघुकथा  -
"हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी।"
7 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service