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ग़ज़ल: अगर कोशिश करेंगे आबोदाना मिल ही जाएगा।

1222 1222 1222 1222

 

अगर कोशिश करेंगे आबोदाना मिल ही जाएगा।

किराए का सही कोई ठिकाना मिल ही जाएगा।

.

अगर तर्के तअल्लुक का अहद कर ही चुके हो तुम,

ज़ह्न पर ज़ोर दो, कोई बहाना मिल ही जाएगा।

.

हमें अच्छी बुरी कोई न कोई मिल ही जाएगी,

तुम्हें डिप्टी कलक्टर का घराना मिल ही जाएगा।

.

ज़रूरत क्या है दरिया के भँवर को आज़माने की, 

किनारा थाम कर चलिए, दहाना मिल ही जाएगा।

.

खुशी अपनी किसी लॉकर में रख कर भूल गए हम लोग,

तलाशी लें अगर अपनी ख़ज़ाना मिल ही जाएगा।

.

भले कितना भी कुछ कर लीजिए इनके लिए लेकिन,

अगर वालिद हैं तो बच्चों से ताना मिल ही जाएगा।

.

तेरी अच्छाइयां तुझ तक पलटकर आ ही जाएंगीं,

तुझे जो भी मुनासिब है, कहा ना मिल ही जाएगा।

 

बलराम धाकड़

मौलिक व अप्रकाशित.

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Comment

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Comment by Shyam Narain Verma on September 28, 2023 at 12:07pm
नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर और ज्ञान वर्धक प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर
Comment by Euphonic Amit on September 26, 2023 at 11:52pm

आदरणीय बलराम धाकड़ जी आदाब 

ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। 

कुछ बिंदुओं से अवगत करवाना चाहूँगा। 

अगर तर्के तअल्लुक का अहद× कर ही चुके हो तुम

ज़ह्न× पर ज़ोर दो, कोई बहाना मिल ही जाएगा।

सहीह शब्द हैं अह्द 21 और ज़िह्म 21

अच्छी बुरी कोई न कोई मिल ही जाएगी,

तुम्हें डिप्टी कलक्टर का घराना मिल ही जाएगा।

सानी में तुम्हें के साथ 'भी' शब्द की कमी महसूस हुई।

ज़रूरत क्या है दरिया के भँवर को आज़माने की,

किनारा थाम कर चलिए, दहाना मिल ही जाएगा।

'दहाना' की जगह 'किनारा' शब्द से सानी कहना

ज़ियादा सार्थक होता हालांकि किनारा क़ाफिया

यहाँ इस्तेमाल नहीं कर सकते।

खुशी अपनी// किसी लॉकर // में रख कर भू// ल गए× हम लोग,

उला बेबह्र हो रहा है

इस बह्र में साकिन की छूट नहीं ली जा सकती

मेरी शुभकामनाएँ सदैव आपके साथ हैं आदरणीय

कृपया ध्यान दे...

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