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दिगंबर नासवा
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दिगंबर नासवा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"तस्दीक साहब .. ढेरों बधाई इस लाजवाब ग़ज़ल पर ... किस लिए आप यकीं उन पे किए बैठे हैंफितरतन उनको तो वादे से मुकर जाना था ... कमाल का शेर है ...  गिरह का शेर भी जानदार है ...  बहुत बधाई ..."
yesterday
दिगंबर नासवा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"वो तो सूरज था उसे यूँ भी निखर जाना था ... गज़ब का शेर है नाथ साहब ... हर शेर काबिले तारीफ़ है ग़ज़ल का ..."
yesterday
दिगंबर नासवा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"सुरखाब साहब आपके शेर सच में चकते हैं सुरखाब की तरह ...  गिरह का शेर बहुत ही लाजवाब बन पड़ा है ... दिली दाद और बहुत बधाई इस ग़ज़ल की ...."
yesterday
दिगंबर नासवा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"नमन साहब ... हर शेर कमाल है ग़ज़ल का ... दिल से दाद कबूल फरमाएं ... आखरी शेर तो दिल से मिक्ली दुआ है ... मेरा भी नमन है हज़ारों हज़ारों बार वीर सैनिकों को .... "
yesterday
दिगंबर नासवा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"मटके के शेर के साथ कमाल की ग़ज़ल ... जावेद साहब दिली दाद क़ुबूल करें ... हर शेर पे वाह वाह निकलता है मुंह से  ...."
yesterday
दिगंबर नासवा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"वाह ... आदाब हसरत साहब ... हर शेर दिल की आवाज़ ... प्रेम की भावनाओं से लबरेज़ ...  बहुत बधाई इस ग़ज़ल की ..."
yesterday
दिगंबर नासवा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"मिथिलेश जी ... धमाकेदार आगाज़ है मुशायरे का ...  बहुत कह्माल के हुए हैं सभी ... एक के बाद एक शेर जिसकी शुरुआत मतले के शेर से ही हो गयी ...."
yesterday
दिगंबर नासवा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"ये ज़रूरी तो नहीं लौट के घर जाना था प्यार से जिसने बुलाया था उधर जाना था   दिल में उम्मीद का दीपक न जलाते मिल कर जब गवाही से तुम्हें यूँ ही मुकर जाना था   क्या हुआ वक़्त ने चहरे पे लिखे हैं किस्से यूँ भी तुमने तो अदाओं से निखर जाना…"
yesterday
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -3
"बहुत आभार समर कबीर साहब आपका इस मार्ग दर्शन के लिए ..."
Thursday
Samar kabeer commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -3
"जी,यही बहतर है,सहीह निर्णय ।"
Wednesday
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -3
"सहमत हूँ आदरणीय समर जी ... इस शेर को खारिज करना ही उचित है ..."
Wednesday
Samar kabeer commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नासवा -3
"मेरे नज़दीक "चाये" क़ाफ़िया उचित नहीं है ।"
Wednesday
दिगंबर नासवा commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ
"उम्दा ग़ज़ल और लाजवाब शेर ... बहुत बधाई "
Wednesday
दिगंबर नासवा commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल
"बहुत प्रभावी शेर हैं मेठानी जी ...  देश प्रेम की भावना और मन के उदगार लिखे हैं आपने ... "
Wednesday
दिगंबर नासवा commented on rakesh gupta's blog post तुम चाहते हो आज भी लिखूं, कुंमकुंम, चन्दन, रोली जी
"शब्द बहुत कुछ कर रहे हैं ... मन के आवेग को लिखा है आपने ... "
Wednesday
दिगंबर नासवा commented on Rakshita Singh's blog post उन्हें मालूम नहीं ...
"आपकी कहन ठीक है ... मौलिक विचार हैं आपके पास ...  इसको ग़ज़ल के अंदाज़ में लिखने का प्रयास करें तो जरूर सफल होंगी ... इस मंच पर उपलब्ध जानकारी और आदरणीय समर साहब से मार्गदर्शन ले के प्रयास करें ... जल्दी ही अच्छी ग़ज़ल और शेर कह पाएंगी आप ... बहुत…"
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Dubai
Native Place
Faridabad
Profession
CA

दिगंबर नासवा's Blog

गज़ल - दिगंबर नासवा -3

१२२२ १२२२ १२२२ १२२ 

तेरी हर शै मुझे भाए, तो क्या वो इश्क़ होगा

मुझे तू देख शरमाए, तो क्या वो इश्क़ होगा

 

कभी हो इश्क़ तो रुन-झुन कहीं महसूस होगी

इशारे कर के समझाए तो क्या वो इश्क़ होगा 

 

पिए ना जो कभी झूठा, मगर मिलने पे अकसर

गटक जाए मेरी चाए, तो क्या वो इश्क़ होगा

 

सभी से हँस के बोले, पीठ पीछे मुंह चिढ़ाए

मेरे नज़दीक इतराए, तो क्या वो इश्क़ होगा

 

हज़ारों बार हाए, बाय, उनको बोलने पर   

पलट के बोल दे…

Continue

Posted on February 17, 2019 at 2:28pm — 6 Comments

गज़ल - दिगंबर नासवा -२

इस नज़र से उस नज़र की बात लम्बी हो गई

मेज़ पे रक्खी हुई ये चाय ठंडी हो गई

 

आसमानी शाल ने जब उड़ के सूरज को ढका

गर्मियों की दो-पहर भी कुछ उनींदी हो गई

 

कुछ अधूरे लफ्ज़ टूटे और भटके राह में     

अधलिखे ख़त की कहानी और गहरी हो गई

 

रात के तूफ़ान से हम डर गए थे इस कदर

दिन सलीके से उगा दिल को तसल्ली हो गई

 

माह दो हफ्ते निरंतर, हाज़री देता रहा

पन्द्रहवें दिन आसमाँ से यूँ ही कुट्टी हो…

Continue

Posted on February 8, 2019 at 1:30pm — 8 Comments

गज़ल - दिगंबर नासवा

मखमली से फूल नाज़ुक पत्तियों को रख दिया

शाम होते ही दरीचे पर दियों को रख दिया

 

लौट के आया तो टूटी चूड़ियों को रख दिया

वक़्त ने कुछ अनकही मजबूरियों को रख दिया

 

आंसुओं से तर-बतर तकिये रहे चुप देर तक  

सलवटों ने चीखती खामोशियों को रख दिया

 

छोड़ना था गाँव जब रोज़ी कमाने के लिए

माँ ने बचपन में सुनाई लोरियों को रख दिया 

 

भीड़ में लोगों की दिन भर हँस के बतियाती रही 

रास्ते पर कब न जाने सिसकियों को रख…

Continue

Posted on January 23, 2019 at 9:30am — 12 Comments

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At 9:49am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय दिगंबर नासवा साहब
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:21am on April 20, 2011, nemichandpuniyachandan said…
Happy Birthday to you.
At 10:03pm on November 29, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 5:57pm on November 25, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 2:23pm on November 24, 2010, Ratnesh Raman Pathak said…

At 8:44pm on November 23, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 5:53pm on November 23, 2010, Admin said…

At 5:08pm on November 23, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

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"बहुत शुक्रिया आदरणीय मिथिलेश जी आपका आदेश सर माथे पर"
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सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय बहुत बढ़िया इस्लाह दी आपने। सादर"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"शुक्रिया"
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