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" नज़रें ज़माने भर की उस इक गुलाब पर हैं "

बहर - 221 2122 221 2122


यूँ मेरी नज़रें ग़ज़लों की हर किताब पर हैं .......
जैसे....... शराबियों की नज़रें शराब पर हैं ....

जब .चल दिया मैं उनकी महफ़िल से तो वो बोले
ठहरो ......कुछेक पल लब मेरे ज़वाब पर हैं .....


हाँ , बेगुनाह होती है अपनी भावनायें
इल्जाम इसलिये तो लगते शबाब पर हैं .....

ऐ - मौला तुम भी रखना अपनी निगाहें उस पर
नज़रें ज़माने भर की उस इक ग़ुलाब पर हैं ......

मैंने चमकने की है जब से यूँ बात ठानी
तब से मिरी निगाहें उस आफ़ताब पर हैं .....

इक मेरा मुस्कुराना , दूजा है काम लिखना
यूँ ..... ख़ास पर्दे होते मेरे अज़ाब पर है ....

पंकजोम " प्रेम ".....

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Comment by Manoj kumar shrivastava on December 21, 2017 at 3:47pm

आदरणीय पंकजोम जी सादर नमस्कार। इस बढ़िया रचना पर मेरी बधाई प्रेषित है।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 20, 2017 at 11:31pm

हार्दिक बधाई।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 20, 2017 at 8:10pm

बहुत ही खूब ग़ज़ल कही आदरणीय..सादर

Comment by Naveen Mani Tripathi on December 20, 2017 at 2:06pm

वाह बहुत खूब । कबीर साहब की इस्लाह कीमती है ।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 19, 2017 at 9:30pm

आदरणीय पंकज भाई,दिली मुबारकबाद 

Comment by SALIM RAZA REWA on December 19, 2017 at 7:02pm
भाई पंकजोम जी
ग़ज़ल के लिए बधाई. उस्तादों के मसवरे से ग़ज़ल को ज़रूर निखारें।
Comment by पंकजोम " प्रेम " on December 19, 2017 at 3:52pm

जी आ0 दादा samar kabeer जी अभी दुरूस्त कर देता हूँ ग़ज़ल को ....... बेहद शुक्रगुज़ार हूँ आपके आशिर्वाद का ...

Comment by पंकजोम " प्रेम " on December 19, 2017 at 3:51pm

बेहद शुक्रगुज़ार हूँ  .. आपके आशिर्वाद आ0 दादा mohammed arif जी ....

Comment by Samar kabeer on December 19, 2017 at 2:44pm

जनाब पंक्जोम 'प्रेम'साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

दूसरे शैर के सानी मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखिये, 'पल लब' ।

4थे शैर के ऊला में 'तुम' की जगह "तू" शब्द मुनासिब होगा ।

5वें शैर के ऊला मिसरे में 'बात ठानी' की जगह "दिल में ठानी" करना मुनासिब होग़ा ।

Comment by Mohammed Arif on December 18, 2017 at 7:47pm

आदरणीय पंकजोम जी आदाब,

                           एक अच्छी ग़ज़ल का प्रयास मगर और बेहतर हो सकती थी । हार्दिक बधाई.स्वीकार करें । गुणीजनों का इंतज़ार करें ।

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