For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dr T R Sukul
Share

Dr T R Sukul's Friends

  • Kalipad Prasad Mandal
  • vijay nikore
  • Abid ali mansoori
  • MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)
 

Dr T R Sukul's Page

Latest Activity

Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"विनम्र आभार  आदरणीया कल्पना भट्ट जी।"
Aug 11
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"विनम्र आभार  आदरणीय तस्दीक अहमद खान   साहब। "
Aug 11
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"विनम्र आभार  आदरणीय मोहम्मद आरिफ  साहब। "
Aug 11
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"विनम्र आभार  आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी  साहब। "
Aug 11
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"विनम्र आभार आदरणीय समर कबीर साहब। (१)यहाँ दीनों का अर्थ है ग़रीबों , लाचारों , भिखारियों। (२) आपके सुझाव पर आदर सहित धन्यवाद देना चाहूँगा परन्तु यह मैं अनेक बार प्रयास करने पर भी नहीं कर सका। शायद मुझे यह कार्य कर पाने में अभी और समय लगेगा। अभी तो…"
Aug 11
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
""शब्द " (अतुकान्त) दीनों के चिथड़ों पर मटमैले धब्बों औरजीर्ण देह को रोटी के टुकड़ों पर टिके देख,उनके मन में फूट पड़ा कवित्व !गन्दगी और दुर्गंध पर, लालायित मन ने उन्हें ऐसा दबोचा,कि रचे गये क्रन्द छन्द !सुनकर जिसे, श्रोता करने लगे आह ! वाह…"
Aug 11
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"विनम्र आभार  आदरणीया। "
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"विनम्र आभार  आदरणीया। "
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"विनम्र आभार आदरणीया। "
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"विनम्र आभार आदरणीय । "
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"धन्यवाद आदरणीय योगराज प्रभाकरजी , यहाँ निवेदन यह है कि कथा का नायक यह भलीभांति जानता है कि उसकी छाती पर मूंग दली जा रही है पर वह फिर भी सुखानुभूति करता है कि  वह अन्य कोई नहीं अपने ही हैं। सादर। "
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"आदरणीया शिखा तिवारी जी, कथा पर सार्थक टीप देने तथा उस पर अपना अनुमोदन के लिए विनम्र आभार।"
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी, अनुमोदन के लिए विनम्र आभार।"
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"आदरणीय समर कबीर साहब   जी, अनुमोदन के लिए  विनम्र आभार।  "
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"आदरणीय डॉ चंद्रेश  जी, अनुमोदन के लिए  विनम्र आभार।  आपकी जानकारी केलिए यह बता देना उचित समझता हूँ कि "सोच" शब्द पुल्लिंग है अतः प्रयुक्त वाक्य में कोई व्याकरणीय त्रुटि नहीं है , देखिये , 'ज्ञान मंडल लिमिटेड प्रकाशन…"
Jul 31
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"आदरणीय तेजवीर सिंह   जी, अनुमोदन के लिए  विनम्र आभार।  "
Jul 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Sagar Madhyapradesh
Native Place
Sagar
Profession
Retired from govt service since 8/2012
About me
I have been a lecturer in physics for twenty years and then worked as education officer, assistant director deputy director , etc and now working in the field of spiritual science and yogic science.

लौकी

लौकी
------
‘‘ अरे, सेठजी ! नमस्कार। अच्छा हुआ आप यहीं सब्जी बाजार में मिल गए, मैं तो आपके ही घर जा रहा था। समाचार यह है कि महाराज जी पधारे हैं, उनका कहना है कि इस एरिया में अहिंसा मंदिर का निर्माण कराना है जिसमें आपका सहयोग... ..।‘‘
‘‘ जी बिलकुल ! मेरी ओर से ग्यारह हजार , शाम को आपके पास पहुॅंचा दूॅंगा।‘‘
यह सुनकर, सब्जी का थैला टाॅंगे सेठजी के शिष्यनुमा नौकर से न रहा गया वह बोला,
‘‘सेठजी ! अभी आपने सब्जी की दूकान पर लौकी लेते समय लम्बी बहस के बाद, पूरे बाजार में बीस रुपये प्रति किलो रेट मिल रही लौकी पन्द्रह रुपये में खरीद कर ही साॅंस ली, जबकि इनके एक इशारे पर ग्यारह हजार रुपये दे दिए ?‘‘
‘‘ अरे तू नहीं समझेगा, पाॅंच रुपया अधिक देता तो वह पता नहीं उनका किस प्रकार दुरुपयोग करता , बीड़ी या शराब पीने में लगाता, परन्तु इस प्रकार बचाकर हमने मंदिर के काम में लगा दिया उससे तो सब लोगों का भला ही होगा ?‘‘
‘‘ पर आपने ही तो सिखाया है कि किसी को भी मन, कर्म और वचन से कष्ट पहुँचाना हिंसा कहलाती है। आपने उस किसान को आर्थिक नुकसान पहुॅंचाकर मानसिक कष्ट दिया जो लाभ के लिये नहीं अपनी आजीविका के लिए सब्जी बेचने बाजार में आया है। तो, इस प्रकार हिंसा करके जोड़ा गया धन अहिंसा मंदिर में लगाने पर क्या उसकी पवित्रता खंडित न होगी ? ‘‘
‘‘ अरे! प्रवचन न दे, चल आगे, अभी और बहुत कुछ खरीदना है, तू क्या यह नहीं जानता कि सब्जी उगाने से लेकर बेचने तक की क्रियाओं में किसानों के द्वारा कितने जीवों की हिंसा होती है ? तो क्या सब्जी भाजी खाना छोड़ देना चाहिए ? ‘‘
‘‘ वही तो मैं कह रहा हॅूं कि आप अहिंसा अहिंसा चिल्लाते हैं पर हिंसा से अर्जित भोजन करने से चूकते नहीं । आपकी कथनी और करनी में अन्तर क्यों है, मुझे आपके यहाॅं नौकरी नहीं करना। सम्हालो अपना थैला , मैं तो चला, इस माह के चार दिन का मेरा वेतन भी मेरी ओर से मंदिर को दे देना।‘‘
(मौलिक और अप्रकाशित )

Dr T R Sukul's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

Dr T R Sukul's Blog

लघुकथा

लखूचंद 

=====

एक दिन कालेज के कुछ युवक लखूचंद के सामने ही उसकी जमकर तारीफ कर रहे थे ,

‘‘‘ अरे ये तो लखूचंद के एक हाथ का कमाल है , दोनों हाथ होते तो पूरे जिले में मिठाई के नाम पर केवल इन्हें ही जाना जाता। लेकिन यार , ये तो बताओ कि दूसरा हाथ क्या जन्म से ही ऐसा है या बाद में कुछ हो गया ?‘‘

बहुत दिन बाद लखूचंद को अपनी जवानी के दिन याद आ गए, बोले ,



‘‘ युवावस्था में मैं यों ही बहुत धनवान होने का सपना देखा करता । पिताजी कहते थे कि मैं उनकी हलवाई की दूकान सम्हालूं…

Continue

Posted on March 26, 2017 at 11:54am — 1 Comment

लौकी (लघुकथा)

‘‘ अरे, सेठजी ! नमस्कार। अच्छा हुआ आप यहीं सब्जी बाजार में मिल गए, मैं तो आपके ही घर जा रहा था। समाचार यह है कि महाराज जी पधारे हैं, उनका कहना है कि इस एरिया में अहिंसा मंदिर का निर्माण कराना है जिसमें आपका सहयोग... ..।‘‘

‘‘ जी बिलकुल ! मेरी ओर से ग्यारह हजार , शाम को आपके पास पहुॅंचा दूॅंगा।‘‘

यह सुनकर, सब्जी का थैला टाॅंगे सेठजी के शिष्यनुमा नौकर से न रहा गया वह बोला,

‘‘सेठजी ! अभी आपने सब्जी की दूकान पर लौकी लेते समय लम्बी बहस के बाद, पूरे बाजार में बीस रुपये प्रति किलो…

Continue

Posted on March 6, 2017 at 10:00pm — 12 Comments

केवल तुम

51

केवल तुम

=======

मैं बार बार मन ही मन हर्षित सा होता हॅूं,

हर ओर तुम्हारा ही तो अभिनन्दन है।

मन मिलने को आतुर फिर भी कुछ डर है सूनापन है,

हर साॅंस बनाती नव लय पर संगीत अनोखी धड़कन है,

अब तो हर द्वारे आहट पर तेरा ही अवलोकन है,

मैं इसीलिये नवगीत कंठ करता रहता हॅूं

हर शब्द में बस तेरा ही तो आवाहन है।

मन की राह बनाकर इन नैनों के सुमन बिछाये हैं,

मधुर मिलन की आस लिये ये अधर सहज मुस्काये हैं,

हर पल बढ़ते संवेदन…

Continue

Posted on November 26, 2016 at 12:45pm — 6 Comments

प्रदूषण

151  प्रदूषण



जिंदगी जन्म से डूबी थी अश्रुसागर में,

अब तो लहरों के भंवर और भी गहरा रहे हैं!!



सांस की आस ले बाहर की ओर झाॅंका तो,

प्रदूषण की भभक से ही चेतना थर्रा गई।

डूबती उतरा रही नव कल्पनायें भी

घड़कते घड़घडाते घोष से घबरा गई।

विषैले गगनभेदी विकिरणों के दीर्घ ध्वज लहरा रहे हैं!!



स्वार्थी अर्थलोलुप वणिकवृत्ति व्याप्त घर घर में

मनुष्यता हर मनुज से दूर, कोसों दूर पाई।

परस्पर निकटतम संबंध भी दूषित विखंडित,

आत्मीयता, भ्रातृत्व और…

Continue

Posted on August 7, 2016 at 3:18pm

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 3:54pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय टी आर शुक्ल जी, ओ बी ओ द्वारा आपकी माह की सर्वश्रेष्ठ रचना के चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:59pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय डॉ. टी. आर. शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी कविता "कवच और कुंडल" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:43pm on December 2, 2015, Dr T R Sukul said…

Your attention is requested sir, towards my poems posted recently.

Respectfully,

Dr TRSukul.

At 3:15pm on August 15, 2015, vijay nikore said…

आदरणीय शुक्ल जी,

आपकी १९८५ की कविता पढ़कर आनन्द आया...सुन्दर भाव और शब्द संयोजन।

आपसे ऐसी ही और भी कविताएँ मिलेंगी, यह आशा है।

सादर

विजय निकोर

At 3:35am on August 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - चाँद छिपता रहा फासले के लिए
"आ0 कबीर सर सादर नमन । घूटने शब्द का अर्थ निगलने से है । शेष सुधार भी कर रहा हूँ ।"
14 minutes ago
vijay nikore commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - रोशनी है अगर तेरे दिल में- ( गिरिराज भंडारी )
"बहुत ही खूबसूरत गज़ल कही है। बधाई, आदरणीय गिरिराज जी।"
20 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on SALIM RAZA's blog post जब भी देखूँ वो मुझे  चाँद नज़र आता है: सलीम रज़ा रीवा
"अच्छा प्रयास है आदरणीय  SALIM RAZA साहिब , आदरणीय  Samar kabeer जी…"
34 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post संवाद -एक ग़ज़ल
"आदरणीय रवि शुक्ला जी राक्षस को का विकल्प दानव एकदम सही सुझाया आपने, तो शब्द को भी बदलकर इस प्रकार…"
1 hour ago
vijay nikore commented on मंजूषा 'मन''s blog post ग़ज़ल
"गज़ल अच्छी लगी। बधाई, आदरणीया मंजूषा जी।"
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post संवाद -एक ग़ज़ल
"आदरणीय Samar kabeer जी ग़ज़ल को आपने अपना अमूल्य समय दिया दिल सेउक्रिया आपका, आपके कथन का…"
1 hour ago
vijay nikore commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"अच्छी गज़ल कही। दिल से बधाई, बृजेश जी।"
1 hour ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post लौट आओ ....
" माता-पिता के प्रति बहुत ही सुन्दर, मार्मिक भावपूर्ण रचना। हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।"
1 hour ago
नयना(आरती)कानिटकर added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
Thumbnail

शफ़क--राजकुमारी नायक का कविता संग्रह

श्रीमती राजकुमारी नायक का काव्य संग्रह शफ़क  जब हमारी लेखिका संघ की अध्यक्षा आ. अनिता सक्सेना जी ने…See More
2 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - चाँद छिपता रहा फासले के लिए
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले का सानी मिसरा भर्ती…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA's blog post जब भी देखूँ वो मुझे  चाँद नज़र आता है: सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले के सानी…"
2 hours ago
नयना(आरती)कानिटकर joined Admin's group
Thumbnail

पुस्तक समीक्षा

इस ग्रुप में पुस्तकों की समीक्षा लिखी जा सकती है |
2 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service