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Bhupender singh ranawat
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Jan 12
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इंतज़ार

मुद्दत से इंतजार में बैठे थे हम जिनके ,वो आये भी तो अजनबियों कि तरहां।के तोड़ गये अरमानो के घरोंदों को वो ऐसे,उजाड़ देती है खिज़ा गुलशन को जिस तरहां।बेहाल दिल हे और रूह भी हमारी ,बहता है दर्द जिस्म में अब ऐसेजैसे मचलता हे पानी दरिया में जिस तरहां।के अश्क़ अब बहते नहीं इन आँखों से,बस आहें ही निकलती हे अब सांसो से ।ज़िन्दगी हमारी अब हो गई हे कुछ ऐसे,जैसे खाती हे नाव हिलोरे तूफां में जिस तरहां।अब   ना ख्वाब हैं ना चाह कोई,हो गए हैं अरमान जब्ज़ सिने में कुछ ऐसे,जैसे हो जाती है दफ़न लाश कब्र में जिस…See More
Jan 12
Bhupender singh ranawat is now a member of Open Books Online
Jan 8

Profile Information

Gender
Male
City State
Bundi rajasthan
Native Place
Kuradiya jahazpur bhilwara
Profession
Lecturer
About me
It is a extraordinary

Bhupender singh ranawat's Blog

इंतज़ार

मुद्दत से इंतजार में बैठे थे हम जिनके ,

वो आये भी तो अजनबियों कि तरहां।

के तोड़ गये अरमानो के घरोंदों को वो ऐसे,

उजाड़ देती है खिज़ा गुलशन को जिस तरहां।

बेहाल दिल हे और रूह भी हमारी ,

बहता है दर्द जिस्म में अब ऐसे

जैसे मचलता हे पानी दरिया में जिस तरहां।

के अश्क़ अब बहते नहीं इन आँखों से,

बस आहें ही निकलती हे अब सांसो से ।

ज़िन्दगी हमारी अब हो गई हे कुछ ऐसे,

जैसे खाती हे नाव हिलोरे तूफां में जिस तरहां।

अब   ना…

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Posted on January 12, 2020 at 11:28am — 1 Comment

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