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Bhupender singh ranawat
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Samar kabeer commented on Bhupender singh ranawat's blog post मेरा सपना
"जनाब भूपेंद्र सिंह राणावत जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । एक निवेदन ये कि रचना पर आई टिप्पणी के उत्तर यहीं देना उचित होता है,संज्ञान लें ।"
Mar 31, 2020
Bhupender singh ranawat left a comment for Samar kabeer
"shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar"
Mar 29, 2020
Bhupender singh ranawat posted a blog post

मेरा सपना

कल नींद में हमने एक सपना देखा।देखा कि ,मेरा देश बदल गया है।।जाति ,धर्म का नहीं है रगड़ाऊंच-नीच का खत्म है झगड़ा।।नारी का नहीं है शोषण,गरीब को भरपूर है पोषण।सब के, भंडार भरे हैं,निठल्ले भी काम करें हैं।ना अपराधों की कही है गंध,थाना ,कचहरी सब है बंद।नेता सब सुधर गए हैं,भ्रष्टाचारी ना जाने किधर गए हैं।ना रिश्वत है ,ना चित्कार कहीं,है शांति चहु ओर,पर जब नींद खुली तो देखा, हकीकत है कुछ और।।द्वारा भूपेंद्र सिंह राणावतमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Mar 29, 2020
Samar kabeer commented on Bhupender singh ranawat's blog post कोरोना पर जीत मंत्र
"जनाब भूपेंद्र सिंह राणावत जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई ।"
Mar 28, 2020
Samar kabeer commented on Bhupender singh ranawat's blog post मानव तेरी करनी
"जनाब भूपेंद्र सिंह राणावत जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 28, 2020
Bhupender singh ranawat posted a blog post

कोरोना पर जीत मंत्र

आप अपने आप को ,कर लो घर में बंद।फिर खुशियां ही खुशियां है, मुश्किल के दिन चंद।।सेनीटाइजर या साबुन से, धो लो अपने हाथ।ज्यादा गर याद आए अपनों की, तो फोन पर कर लो बात।।हम सबको मिलकर लड़नी है, कोरोना की लड़ाई।।एक दूजे से दूरी ही ,इसकी है दवाई ।।कानून तुम मान लो ,सुने कर दो रास्ते ।।हेलो हाय छोड़ के, बस करो नमस्ते ।।दाल रोटी से काम चला लो, छोड़ो तुम मेवा ।।घर पर रहकर कर लो, देश की सेवा।।द्वारा भूपेन्द्र सिंह राणावतSee More
Mar 26, 2020
Bhupender singh ranawat posted a blog post

मानव तेरी करनी

विवेक पर जब मन हावी हो जाता है,तभी तो ऐसा मंजर नजर आता है।हे मानव, तू अड़ा रहा मनमानी पे,किया निरंतर खिलवाड़ प्रकृति से।हे अधम, प्रगति के मद में,तूने प्रकृति का तिरस्कार किया।बस, मैं ही मैं हूं ,तू इस खुश फहमी में जिया।पर, मत भूल, प्रकृति जब विकराल रूप धर लेती है,फिर वह सांसे भी हर लेती है।अब भी समय है, हे मानव ,संभल जा,अपनी हरकतों से बाज आ।सुन, ए नादान ,गर जीना है सुकून से,तो प्रकृति की शरण में जा।वो मां है, तुझे अब भी अपना लेगी,बस, उसके आंचल में बच्चों सा मचल जा।द्वारा भूपेंद्र सिंह…See More
Mar 25, 2020
Bhupender singh ranawat left a comment for Samar kabeer
"आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।"
Jan 21, 2020
Samar kabeer commented on Bhupender singh ranawat's blog post इंतज़ार
"जनाब राणावत जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । टंकण त्रुटियों पर ध्यान दें ।"
Jan 19, 2020
khursheed khairadi commented on Bhupender singh ranawat's blog post इंतज़ार
"लाज़वाब आदरणीय राणावत साहब। ओपन बुक्स ऑनलाइन पर स्वागत है।"
Jan 14, 2020
Bhupender singh ranawat commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मनुष्य और पयोनिधि
"Shandaar rachna"
Jan 13, 2020
Bhupender singh ranawat commented on vijay nikore's blog post स्वप्न-मिलन
"Nice"
Jan 12, 2020
Bhupender singh ranawat posted a blog post

इंतज़ार

मुद्दत से इंतजार में बैठे थे हम जिनके ,वो आये भी तो अजनबियों कि तरहां।के तोड़ गये अरमानो के घरोंदों को वो ऐसे,उजाड़ देती है खिज़ा गुलशन को जिस तरहां।बेहाल दिल हे और रूह भी हमारी ,बहता है दर्द जिस्म में अब ऐसेजैसे मचलता हे पानी दरिया में जिस तरहां।के अश्क़ अब बहते नहीं इन आँखों से,बस आहें ही निकलती हे अब सांसो से ।ज़िन्दगी हमारी अब हो गई हे कुछ ऐसे,जैसे खाती हे नाव हिलोरे तूफां में जिस तरहां।अब   ना ख्वाब हैं ना चाह कोई,हो गए हैं अरमान जब्ज़ सिने में कुछ ऐसे,जैसे हो जाती है दफ़न लाश कब्र में जिस…See More
Jan 12, 2020
Bhupender singh ranawat is now a member of Open Books Online
Jan 8, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Bundi rajasthan
Native Place
Kuradiya jahazpur bhilwara
Profession
Lecturer
About me
It is a extraordinary

Bhupender singh ranawat's Blog

मेरा सपना

कल नींद में हमने एक सपना देखा।

देखा कि ,मेरा देश बदल गया है।।

जाति ,धर्म का नहीं है रगड़ा

ऊंच-नीच का खत्म है झगड़ा।।

नारी का नहीं है शोषण,

गरीब को भरपूर है पोषण।

सब के, भंडार भरे हैं,

निठल्ले भी काम करें हैं।

ना अपराधों की कही है गंध,

थाना ,कचहरी सब है बंद।

नेता सब सुधर गए हैं,

भ्रष्टाचारी ना जाने किधर गए हैं।

ना रिश्वत है ,ना चित्कार कहीं,

है शांति चहु ओर,

पर जब नींद खुली तो देखा, हकीकत है कुछ और।।



द्वारा भूपेंद्र… Continue

Posted on March 29, 2020 at 10:15am — 1 Comment

कोरोना पर जीत मंत्र

आप अपने आप को ,कर लो घर में बंद।
फिर खुशियां ही खुशियां है, मुश्किल के दिन चंद।।

सेनीटाइजर या साबुन से, धो लो अपने हाथ।
ज्यादा गर याद आए अपनों की, तो फोन पर कर लो बात।।

हम सबको मिलकर लड़नी है, कोरोना की लड़ाई।।
एक दूजे से दूरी ही ,इसकी है दवाई ।।

कानून तुम मान लो ,सुने कर दो रास्ते ।।
हेलो हाय छोड़ के, बस करो नमस्ते ।।

दाल रोटी से काम चला लो, छोड़ो तुम मेवा ।।
घर पर रहकर कर लो, देश की सेवा।।
द्वारा भूपेन्द्र सिंह राणावत

Posted on March 26, 2020 at 7:48pm — 1 Comment

मानव तेरी करनी

विवेक पर जब मन हावी हो जाता है,

तभी तो ऐसा मंजर नजर आता है।

हे मानव, तू अड़ा रहा मनमानी पे,

किया निरंतर खिलवाड़ प्रकृति से।

हे अधम, प्रगति के मद में,

तूने प्रकृति का तिरस्कार किया।

बस, मैं ही मैं हूं ,तू इस खुश फहमी में जिया।

पर, मत भूल, प्रकृति जब विकराल रूप धर लेती है,

फिर वह सांसे भी हर लेती है।

अब भी समय है, हे मानव ,संभल जा,

अपनी हरकतों से बाज आ।



सुन, ए नादान ,गर जीना है सुकून से,

तो प्रकृति की शरण में जा।

वो मां है,… Continue

Posted on March 25, 2020 at 2:11pm — 1 Comment

इंतज़ार

मुद्दत से इंतजार में बैठे थे हम जिनके ,

वो आये भी तो अजनबियों कि तरहां।

के तोड़ गये अरमानो के घरोंदों को वो ऐसे,

उजाड़ देती है खिज़ा गुलशन को जिस तरहां।

बेहाल दिल हे और रूह भी हमारी ,

बहता है दर्द जिस्म में अब ऐसे

जैसे मचलता हे पानी दरिया में जिस तरहां।

के अश्क़ अब बहते नहीं इन आँखों से,

बस आहें ही निकलती हे अब सांसो से ।

ज़िन्दगी हमारी अब हो गई हे कुछ ऐसे,

जैसे खाती हे नाव हिलोरे तूफां में जिस तरहां।

अब   ना…

Continue

Posted on January 12, 2020 at 11:28am — 2 Comments

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