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मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
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मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"      आदरणीय शेख उस्मानी जी, कमाल की सुंदर लघुकथा के लिए आप जी को बहुत बधाई हो "
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"       आदरणीया रचना जी , बहुत ही सुंदर लघुकथा के लिए आप जी को बहुत बधाई  "
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"आदरणीया अंजलि जी , सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो, बहुत ही अर्थ भरपूर रचना  "
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"    आदरणीया अंजलि जी , सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो, बहुत ही अर्थ भरपूर रचना  "
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
" दोस्तों क्या करूं हर काम में तेज़ी करना मेरी बहुत बड़ी कमजोरी है , जो इस लघुकथा में भी झलकती है, काश जिंदगी में ठहरा होता "
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"  आदरनीया कनक जी , बहुत प्यारी लघुकथा के लिए बधाई हो "
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"आदरनीय टी आर जी, बहुत सुंदर लघुकथा के लिए बधाई ,और हमें भी नए शब्द पढ़ने को मिले, बधाई हो "
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"आदरनीय  आसिफ जी , बहुत ही सुंदर ढंग से आप जी ने रिश्तों में हो रहे बिखराव के बारे कहा , बहुत बधाई हो "
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"  आदरनीय तेजवीर जी , कमाल की लघुकथा आप जी ने बुनी, हर धागे का रंग निखर कर दिखाई दे रहा था, जैसे इस लघुकथा में हरेक नियम ऐसा धागा जो मुत्यु के बाद भी जाल बन रहा हो "
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"     आदरनीय विनय जी , बहुत सुंदर लघुकथा हुई, आप की लघुकथा में गाँव व् शहर के स्लम जिन्दगी का विवरण कर दिया इस तरह की जिन्दगी लोग जी रहे हैं , मगर आस का पल्ला नहीं छोड़ते "
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"अस्तित्व        इंटरव्यू चल रही थी। कमरे के बाहर खड़ा मुलाज़िम लिस्ट में लिखे नाम के अनुसार आवाज़ दे कर इक-इक कैंडिडेट को अंदर भेज रहा था। इंटरव्यू लेने वाले लोग, कैंडिडेट से उसकी योग्यता व् काम करने की क्षमता के बारे सवाल पूछ रहे…"
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"      आदरणीय आसिफ जी , बहुत उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई हो  "
Jul 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"  आदरणीय नीलेश जी , बहुत सुंदर ग़ज़ल न के लिए बधाई हो  "
Jul 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"   आदरणीय नीलेश जी , बहुत सुंदर ग़ज़ल न के लिए बधाई हो  "
Jul 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"   आदरणीया रचना भाटिया जी , सुंदर ग़ज़ल न के लिए बधाई स्वीकार करें "
Jul 27
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए।
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । आपको अभी शिल्प और व्याकरण पर बहुत अभ्यास की ज़रूरत है ।"
Jul 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए।

है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए।

मुनीर जब किया दीया न रौशनी के लिए।

बताई जो मेरी माँ ने वही तो मैं भी कही,

अ़मल कहाँ हुआ बस बात शायरी के लिए।

फ़िराग कब मिली जब ये है जिंदगी झमेला,

नसीब कब हुआ वो चाँद आशिकी के लिए।

ख्याल ढूँढ रखा जो बता सकूँ मैं तुझे,

रखी ये चीज़ जो है खास आप ही के लिए।

ख़ता कभी न हो ऐसा कहाँ लिखा है बता,

तभी हुई है कहानी ये आदमी के लिए ।

फ़जा तलाश जहाँ में कहीं यहाँ या…

Continue

Posted on July 23, 2019 at 12:00pm — 1 Comment

इक कदम (लघुकथा)

गाड़ी रूकते ही मैं ढाबे की तरफ़़ बढ़ा। कुर्सी पर बैठते हुए छोटू को पास बुलाया।

उस से बात करने लगा, जैसे अक्सर ही मैं ऐसा   करता हूँ, ऐसा करना मेरा काम है, किसी को अच्छा या नहीं लगता।  ये जानना मेरा काम नहीं ।"

“आप इन से क्या बात करते हो?" दूसरी तरफ बैठे मालिक ने उठ कर बालो से उस  पकड़ा अंदर की ओर ले कर जाते हुए कहा

 आप को यहाँ काम के लिए रखा है, बातों के लिए नहीं।

"भाई साहिब,कुछ लेना है,आप ने।" उसने मेरी तरफ 

देखते हुए कहा

“नहीं,बात करनी है,इस और आप से।"…

Continue

Posted on June 2, 2019 at 4:30pm — 6 Comments

जो पतंगों को उड़ाता है।

जो पतंगों को उड़ाता है।
डोर खुद भी छोड़ जाता है।
जख्म सबको दिखाना मत,
हर न मरहम इस लगाता है।
पास आकर बैठ जाये जो,
क्यूँ वो आसूँ फिर छुपा ता है।
क्या हुआ देखों अँधेरे को,
बीज सपने क्यूँ चुराता है।
कलम कैसी भी रही होगी,
सोच अक्सर वो लिखाता है।
“मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 14, 2019 at 4:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल

पास  रखना है भला जो।
छोड़ देेेेना दिल जला  जो।

क्या मनाये वो  खुशी को,
खुद मनाने  दिल चला जो।

रौशनी हम तब  मिली है ,
रात भर  दीया जला जो।

आम का   बन  खास  जाना,
कुछ तो अच्छा दिन ढला जो।

रोज़   कहता   मुझ  बता दे
राज़  उस  खोला  भला जो।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 2, 2019 at 5:00pm — 3 Comments

Comment Wall (3 comments)

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At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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