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मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
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मोहन बेगोवाल replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"      आदरनीय योगराज जी , आप जी की तरफ़ से मेरी लघुकथा को संकलन में जगह देने के लिए बहुत धन्यवाद , आप जी की तरफ़ से मेरी लघुकथा के संपादन के लिए भी शुक्रिया , मैं संपादक लघुकथा को दुबारा पोस्ट कर रहा हूँ  मोह घर के एक कोने में…"
Feb 2
मोहन बेगोवाल replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"      आदरनीय योगराज जी , आप जी की तरफ़ से मेरी लघुकथा को संकलन में जगह देने के लिए बहुत धन्यवाद , आप जी की तरफ़ से मेरी लघुकथा के संपादन के लिए भी शुक्रिया , मैं संपादक लघुकथा को दुबारा पोस्ट कर रहा हूँ  मोह घर के एक कोने में…"
Feb 2
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"बेहतरीन लघुकथा के लिए बधाई हो, जनाब डाक्टर गोपाल जी"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"आदरनीया बबीता जी,सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो।"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"बहुत   ही प्यारी लघुकथा के लिए बधाई हो,प्रतिभा जी"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"आदरनीय शेख जी,बहुत सुंदर लघुकथा की बधाई हो ।"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"बहुत ही सुंदर लघुकथा के लिए बधाई कुबूल करो जी"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"आदरनीय योगराज जी,ऐसी लघुकथा पोस्ट करने का बहुत दु:ख हुआ।"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"   मोह वृधाश्रम खुलने से  बुज़ुर्ग अब घर के कोने से होते हुए  इन  में आकर रहने लगे।  हमारे शहर में भी  इस के बाहर एक वृधाश्रम खुल गया।   आज कॉलिज के स्टूडेंट्स की इस आश्रम में विज़ट रखी गई  थी…"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"  मोह वृधाश्रम खुलने से  बुज़ुर्ग अब घर के कोने से होते हुए  इन  में आकर रहने लगे।  हमारे शहर में भी  इस के बाहर एक वृधाश्रम खुल गया।   आज कॉलिज के स्टूडेंट्स की इस आश्रम में विज़ट रखी गई  थी ये …"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"मोह मोह वृधाश्रम खुलने से  बुज़ुर्ग अब घर के कोने से होते हुए  इन  में आकर रहने लगे।  हमारे शहर में भी  इस के बाहर एक वृधाश्रम खुल गया।   आज कॉलिज के स्टूडेंट्स की इस आश्रम में विज़ट रखी गई  थी ये  जानकारी…"
Jan 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"आदरनीय आसिफ़ जी, बहुत सचाई पेश कीआप जी ने बधाई हो ।"
Jan 29
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
" आदरनीय मुहेंद्र जी, बहुत ही कमाल की लघुकथा के लिए बधाई कुबूल करें । "
Jan 29
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"बहुत सुंदर लघुकथा की बधाई हो"
Jan 29
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-46 (विषय:मोह)
"मोह बस वृधाश्रम खुलने से जहाँ बुज़ुर्ग अब घर के कोने से होने की जगह यहां आकर रहने लगे हैं हमारे शहर में भी बाहर एक वृधाश्रम खुल गया है आज कॉलिज के स्टूडेंट्स की इस आश्रम में विज़ट रखी गई है तांकि ये जानकारी प्राप्त की जा सके कि बजुर्गों का कैसे…"
Jan 29
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
" आदरनीय आसिफ भाई जी, बहुत सुंदर ग़ज़ल की बधाई हो "
Jan 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

जो पतंगों को उड़ाता है।

जो पतंगों को उड़ाता है।
डोर खुद भी छोड़ जाता है।
जख्म सबको दिखाना मत,
हर न मरहम इस लगाता है।
पास आकर बैठ जाये जो,
क्यूँ वो आसूँ फिर छुपा ता है।
क्या हुआ देखों अँधेरे को,
बीज सपने क्यूँ चुराता है।
कलम कैसी भी रही होगी,
सोच अक्सर वो लिखाता है।
“मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 14, 2019 at 4:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल

पास  रखना है भला जो।
छोड़ देेेेना दिल जला  जो।

क्या मनाये वो  खुशी को,
खुद मनाने  दिल चला जो।

रौशनी हम तब  मिली है ,
रात भर  दीया जला जो।

आम का   बन  खास  जाना,
कुछ तो अच्छा दिन ढला जो।

रोज़   कहता   मुझ  बता दे
राज़  उस  खोला  भला जो।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 2, 2019 at 5:00pm — 3 Comments

मुजरिम : लघुकथा

आठवीं कक्षा तीसरा पीरीयड नैतिक शिक्षा का चल रहा था। जिंदगी अच्छे से कैसे गुजारी जाए के बारे सवाल मैडम से बच्चे पूछ रहे थे। मैडम सोचती है कि ऐसे सवाल तो हम ने भी पूछे थे,मगर हमारी जिंदगी का हिस्सा क्यूँ नहीं बने, वह सोचने लगी।

अब यही सवाल बच्चे उन से पूछ रहे हैं। क्या ऐसे करने से तबदीली आ सकती व्यहार से मैडम ने अपने आप से सवाल पुछाा।

"मगर जब वह जवाब की कौशिश करती है तो वह सोचती है क्यूँ न हम कहने की जगह करने को कहें,मगर ये तो तभी होगा जब हम खुद करेंगे,उस ने अपने सवाल का खुद को…

Continue

Posted on July 25, 2018 at 2:00pm — 4 Comments

पर्दा (लघुकथा)

पर्दा

हर समय मुस्कराता चेहरा, और दूसरों के चेहरे पे मुस्कराहट बिखेर देना उस का बाएँ हाथ का काम था।

कई बार मैं खुद छुप कर आईने के सामने उस जैसा मुस्कराने की कोशिश करता, मगर असफल रहता ।

तब खुद को कहता “क्या कमी है, अगर मैं मुस्करा दूँ तो कौन सा पहाड़ गिर जायेगा ?”

मगर कल शाम से सारा मौहला उदास नज़र आ रहा था ।

किसी ने आकर बताया कि सुबह के दस बज गए, अभी तक दरवाज़ा नहीं खुला था।

मैं और भी उदास हो गया,पता नहीं चल रहा ऐसा क्यूँ हुआ।

तब मेरे कानों में इक आवाज़ सुनाई… Continue

Posted on May 12, 2018 at 6:18pm — 5 Comments

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At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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