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Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
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Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीया अंजली गुप्ता जी एक अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाईयां"
Nov 23
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह जी ग़ज़ल कहने और मुशायरे में सहभागिता के लिए बधाइयां"
Nov 23
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी गजल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद"
Nov 23
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई जी गजल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद।"
Nov 23
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी गजल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद"
Nov 23
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीया अंजली गुप्ता जी गजल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद"
Nov 23
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय अजय गुप्ता जी गजल पर तवज्जो के लिए धन्यवाद दूसरे शेर में बहर का दोस मुझे महसूस नहीं हुआ हां समर सर में जो प्रतिक्रिया दी है वह ध्यान देने योग्य है। कृपया करके थोड़ा विस्तार में बताइए ताकि उसको सुधार पाऊं। सादर।"
Nov 23
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय समर सर आपकी प्रतिक्रिया का हमेशा इंतजार रहता है किंतु इस बार इंटरनेट ना चलने की वजह से समय पर रिप्लाई नहीं कर पाया और मुशायरे में पूरी तरह इन्वॉल्व नहीं हो पाया इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं। आप इतने अच्छे से हर शेर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं…"
Nov 23
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी बहुत ही बेहतरीन गजल हुई बधाइयां कबूल करें"
Nov 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई जी बहुत बेहतरीन गजल हुई शशे दर शेर दाद कबूल करें"
Nov 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी गजल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां अच्छी ग़ज़ल हुई बाकी गुनी जनों की बात पर ध्यान दें।"
Nov 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां। इस शेर का भाव स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कोई तो जान से अपनी गया है मेरे हम दमभला क्या मुस्कुराहट में तुम्हारा जा रहा है l"
Nov 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"अजय गुप्ता जी एक बेहतरीन और उम्दा ग़ज़ल के लिए बहुत-बहुत बधाइयां शेर दर शेर दाद कबूल कीजिए"
Nov 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
" आदरणीय महेंद्र जी बहुत ही बेहतरीन गजल हुई दाद के साथ मुबारकबाद कबूल कीजिए।"
Nov 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"मुहब्बत का कोई मारा बेचारा जा रहा है।। जमाना जीत कर वो खुद से हारा जा रहा है।।१।। हथेली की लकीरों को सुधारा जा रहा है। यूं मेरी जिंदगी को अब संवारा जा रहा है।।२।। मेरी हर एक कोशिश को बताकर के बेजा अब। मुझे नजरों से मेरी ही उतारा जा रहा…"
Nov 22
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-112
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल नमन जी गजल का बेहतरीन प्रयास हुआ है बहुत-बहुत बधाइयां"
Oct 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गीत - मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।

तुम मुझको चाहे जो भी समझो लेकिन सुनो प्रिय।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।



तुम अमृत जैसी दुर्लभ हो, तुम गंगाजल सी पावन हो।

तुम खुशबू से लबरेज पवन, तुम बहका-बहका सावन हो।

तुम कलियों में कचनार प्रिय, तुम नील गगन में चंदा हो।

उर्वशी-मेनका से सुंदर, जो जग पूजे वो वृंदा हो।



उस जीवन दाता रब का मुझ पर फजल समझता हूं।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।१।।



सांसो की मधुमय हाला से मदहोश सदा हो जाता हूं।

इन नैनो की मधुशाला… Continue

Posted on July 19, 2019 at 6:09pm — 3 Comments

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

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At 7:42am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी
At 10:31am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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