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Dayaram Methani's Blog (3)

ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122  2122  2122  212

याद करे दुनिया तुझे ऐसी निशानी छोड़ जा,

जोश भर दे जो सभी में वो जवानी छोड़ जा।

नाम पर तेरे कभी कोई उदासी हो नहीं,

प्यार से भरपूर कुछ यादें सुहानी छोड़ जा।

देश की खातिर लुटाओ जान अपनी शान से,

हर किसी की आँख में दो बूँद पानी छोड़ जा।

हो भरोसा हर किसी को तेरी बातों पर सदा,

देश हित की प्रेरणा दे वो बयानी छोड़ जा।

मौत आतीे है सभी को देख ‘‘मेठानी’’ यहां,

गर्व हो अपनाें को कुछ ऐसी…

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Added by Dayaram Methani on January 16, 2015 at 9:55am — 16 Comments

चार मुक्तक

चार मुक्तक

1.

झुकाना पड़े सिर मां को ऐसा कारोबार मत कीजिये,

अपने लहू से जिसने पाला उसे लाचार मत कीजिये,

कर सको तो करो ऐसा काम जगत में कि गर्व हो तुम पर,

कोख मां की हो जाये लज्जित ऐसा व्यवहार मत कीजिये,

2.

बरस बीत जाते है किसी के दिल में जगह पाने में,

एक गलत फहमी देर नहीं लगाती साथ छुड़ाने में,

बहुत नाजुक होती है मानवीय रिश्तों की डोर यहां,

नफरत में देर नहीं लगाते लोग पत्थर उठाने में।

3.

हर बात की अपनी करामात होती है,

कभी ये हंसाती तो…

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Added by Dayaram Methani on December 2, 2013 at 11:09pm — 8 Comments

मुक्तक

1.

जो चाहते हो सब मिलेगा, कोशिश करके तो देख,

अंधेरा मिट जायेगा, एक दीप जला करके तो देख,

आंसू बहाने से कभी मंजिल नहीं है मिला करती,

तू मझधार में अपनी नाव कभी उतार करके तो देख।



2..

करके अहसान किसी पर जताया मत कीजिये,

अपने काम को दुनिया में गिनाया मत कीजिये,

मेरे बिना चलेगा नहीं यहां किसी का काम,

ऐसे विचार दिल में कभी लाया मत कीजिये।

3.

आओ अब अंधविश्वासों को भुला कर देखते है,

इस धरा पर प्रेम की गंगा बहा कर देखते…

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Added by Dayaram Methani on October 17, 2013 at 12:00am — 13 Comments

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