For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2122 2122 2122

.
गांव भी अब तो शहर बनने लगा है
प्यार औ सद्भाव भी घटने लगा है

खुल गई है खूब शिक्षा की दुकानें
ज्ञान भी अब दाम पर बिकने लगा है

हो गये है लोग बैरी अब यहां भी
खून सड़कों पर बहुत बहने लगा है

गांव के हर मोड़ पर टकराव है अब
खेत औ खलियान तक जलने लगा है

सोच ’‘मेठानी‘’ हुआ है, क्या यहां पर
जो कभी बोया वही उगने लगा है


( मौलिक एवं अप्रकाशित )
- दयाराम मेठानी

Views: 1290

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Md. Anis arman on January 29, 2019 at 6:02pm

जी सर बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by नाथ सोनांचली on January 29, 2019 at 4:48pm

आद0 दयाराम जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़ल पर आद0 समर साहब ने इतनी बढ़िया जानकारी दी कि हम सीखने वालो को बहुत फायदा होगा। आद0 समर साहब का बहुत बहुत आभार

Comment by Samar kabeer on January 29, 2019 at 3:39pm

दिखा, सुना,का हर्फ़-ए-रवी ज़बर होता है ,ज़बर कहते हैं एक तरह का चिन्ह जिसे ऐराब कहते हैं ।

Comment by Md. Anis arman on January 29, 2019 at 12:02pm

आ स्वरांत     - दिखा, सुना, आ, सिखा, भा ,      

Comment by Samar kabeer on January 29, 2019 at 10:35am

कुछ क़वाफ़ी बताएँ?

Comment by Md. Anis arman on January 29, 2019 at 8:51am

समर सर एक बात और समझा दीजिये जब हम स्वरांत काफिया लेते है उसका हर्फ़ -ए -रवि क्या होता है 

Comment by Dayaram Methani on January 28, 2019 at 11:13pm

आदरणीय समर कबीर जी, एक कष्ट आपको आैर दे रहा हूं आैर वो ये कि मेरी इस गज़ल का काफिया अब कौन सा लूं ताकि ये गज़ल के तौर पर पूर्ण हो सके अन्यथा ये तो बेकार ही हो जायेगी। यदि संभव हो तो मशविरा अवश्य दे। सादर।

Comment by Dayaram Methani on January 28, 2019 at 11:08pm

आदरणीय समर कबीर जी,

                                 बहुत बहुत धन्यवाद। आपने जो मार्ग दर्शान किया है उसके लिए आभारी हूं। भविष्य में आपके सुझाव अनुसार प्रयास करुंगा। कृपया समय समय पर मार्ग दर्शन करते रहे। साभार।

Comment by Samar kabeer on January 28, 2019 at 8:30pm

//मैने काफिया अने लिया है और बन के साथ अने लगाया तो बनने हुआ, घट के साथ अने लगाया तो घटने बना। इसी तरह अन्य काफिया बने। आपके अनुसार काफिया ने है पर वास्तव में काफिया अने है क्योंकि हिन्दी में हर हर्फ के पहले अ उच्चारण में आता है जो लिखा नहीं जाता। ब के साथ अन आने पर बन बनता है।//

ये विधा फ़ारसी की है,इसलिए हिन्दी भाषा के सिद्धांत इसमें नहीं लिए जा सकते,आपका क़ाफ़िया 'ने' है  ।

//एक बात और कि जब निभाना, सिखाना, दिखाना हिलाना आदि काफिया हम लें तो क्या ये भी दोष पूर्ण माने जायेंगे?//

नहीं,ये क़वाफ़ी शुद्ध हैं ,इसमें 'ना' क़ाफ़िया है,और उसका हर्फ़-ए-रवी अलिफ़ यानी 'आ' है ।

उम्मीद है आप मुतमइन हुए होंगे?

Comment by Dayaram Methani on January 28, 2019 at 7:16pm

आदरणीय समर कबीर जी,
आपने काफिया बारे में जो बताया है वह समझ लिया और इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया। इसके बावजूद मैं यह कहना चाहता हूं कि मैने काफिया अने लिया है और बन के साथ अने लगाया तो बनने हुआ, घट के साथ अने लगाया तो घटने बना। इसी तरह अन्य काफिया बने। आपके अनुसार काफिया ने है पर वास्तव में काफिया अने है क्योंकि हिन्दी में हर हर्फ के पहले अ उच्चारण में आता है जो लिखा नहीं जाता। ब के साथ अन आने पर बन बनता है।
एक बात और कि जब निभाना, सिखाना, दिखाना हिलाना आदि काफिया हम लें तो क्या ये भी दोष पूर्ण माने जायेंगे?
बुरा न मानियेगा आदरणीय, मै सिर्फ ये समझना चाहता हूं कि काफिये कैसे लिए जाये जिसे दोष पूर्ण न कहा जा सके। अगर आप इस बारे में कुछ विशेष बतायेंगे तो मुझे मार्ग दर्शन मिलेगा।
आप ग़ज़ल विधा के बहुत अच्छे जानकार है। इसलिए आपको ये कष्ट दे रहा हूंं। पुन: आभार।
— दयाराम मेठानी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service