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1.
जो चाहते हो सब मिलेगा, कोशिश करके तो देख,
अंधेरा मिट जायेगा, एक दीप जला करके तो देख,
आंसू बहाने से कभी मंजिल नहीं है मिला करती,
तू मझधार में अपनी नाव कभी उतार करके तो देख।

2..
करके अहसान किसी पर जताया मत कीजिये,
अपने काम को दुनिया में गिनाया मत कीजिये,
मेरे बिना चलेगा नहीं यहां किसी का काम,
ऐसे विचार दिल में कभी लाया मत कीजिये।

3.
आओ अब अंधविश्वासों को भुला कर देखते है,
इस धरा पर प्रेम की गंगा बहा कर देखते है,
धर्म के ठेकेदारों ने सिखाया नफरत करना,
चलो अब नफरत की दीवार ढहा कर देखते है।

4.
अमीर बन जाओ भले ही पर बेज़मीर मत होना,
उम्मीदों की मंजिल जरुर मिलेगी अधीर मत होना,
चाहे लाख कांटे बिखेरे दुनिया तेरी राह में,
किसी की खुशियों की राह में तुम लकीर मत होना।

5.
भ्रष्टाचार अपने देश का एक इश्तिहार हो गया है,
काला धन नेताओं के दिल का करार हो गया है,
ईमानदारी व सच्चाई का हो रहा है उपहास,
छल कपट ही आज का बड़ा कारोबार हो गया है।

.
- दयाराम मेठानी

(मौलिक / अप्रकाशित)

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Comment by Dayaram Methani on October 18, 2013 at 1:43pm

बहुत बहुत धन्यवाद कूनटी मुखर्जी जी, अरुण कुमार निगम जी, बृजेश नीरज जी, एवं सौरभ पांडे जी। आप सभी का बहुत बहुत आभार। 
- दयाराम मेठानी

Comment by coontee mukerji on October 18, 2013 at 12:56pm

करके अहसान किसी पर जताया मत कीजिये,
अपने काम को दुनिया में गिनाया मत कीजिये,
मेरे बिना चलेगा नहीं यहां किसी का काम,
ऐसे विचार दिल में कभी लाया मत कीजिये.......बहुत खूब.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on October 18, 2013 at 9:09am

आदरणीय दयाराम जी, आपको पहली बार पढ़ने का सौभाग्य मिला है, ओबीओ पर आपका हृदय से स्वागत है.मुक्तक पर सुंदर प्रयास हेतु बधाई स्वीकार कीजिये............

Comment by बृजेश नीरज on October 18, 2013 at 7:05am

आपकी कोई पहली रचना पढ़ रहा हूँ! आपको हार्दिक बधाई!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 18, 2013 at 12:52am

आपका मंच पर स्वागत है आदरणीय..

Comment by Dayaram Methani on October 17, 2013 at 11:41pm

बहुत बहुत धन्यवाद सुशील जोशी जी, बैद्यनाथ जी,  अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, गिरिराज भंडारी जी, सरिता भाटिया जी, अभिनव अरुण जी, शिजू शकूर जी। आप सभी का बहुत बहुत आभार। 
- दयाराम मेठानी

Comment by Sushil.Joshi on October 17, 2013 at 8:29pm

सार्थक भावों से सुसज्जित इस प्रस्तुति के लिए आपको दिली शुभकामनाएँ आदरणीय दया राम जी...

Comment by Saarthi Baidyanath on October 17, 2013 at 5:41pm

आदरणीय , एक से बढ़कर एक बढ़िया मुक्तक! बधाई :)

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 17, 2013 at 4:27pm

भ्रष्टाचार अपने देश का एक इश्तिहार हो गया है, 
काला धन नेताओं के दिल का करार हो गया है,

दयाराम भाई बधाई इस् सुन्दर मुक्तक की ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 17, 2013 at 1:55pm

आदरणीय दया राम मेठानी जी , बहुत सुन्दत मुक्तक की रचना की है आपने !!! हार्दिक बधाई स्वीकार करें !!!

कृपया ध्यान दे...

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