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Sushil.Joshi
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Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक - 33 in the group चित्र से काव्य तक
"हा..हा.हा.... अरुण भाई...... आपके दोहों ने तो महोत्सव में एक रंग सा भर दिया है...... पुछल्ला वाकई बाप है... हा...हा..हा.... बधाई"
Dec 22, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक - 33 in the group चित्र से काव्य तक
"भावों का सुंदर संप्रेषण है आ0 सचिन भाई, इस हेतु बधाई.......किंतु जैसा कि बाकी प्रबुद्धजनों ने बताया, अभी थोड़ा और श्रम की आवश्यकता है आपको.... मात्रा गणना को ठीक प्रकार से समझ लीजिए...."
Dec 22, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक - 33 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह बहुत सुंदर छंद बन पड़ा है आ0 राजेश कुमारी जी..... चित्र के अनुरूप ही संपूर्ण रूपरेखा खींच दी है आपने..... बधाई स्वीकारें...."
Dec 22, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक - 33 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रदत्त चित्र से पूर्णतया न्यान करते हुए इस छंद के अंतिम पद में सार्थक संदेश दिया है आपने आ0 सौरभ जी.... इस अद्भुत, अतुलनीय छंद रचना हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.... देह जवान, खिले तन पौरुष, रक्त भरी धमनी यदि भावे काम करें सब लोग कि गाँव-समाज खुली…"
Dec 22, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक - 33 in the group चित्र से काव्य तक
"महोत्सव का शुभारंभ इन हास्य दोहों को साथ करने हेतु हार्दिक बधाई आ0 अखिलेश जी..."
Dec 22, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक - 33 in the group चित्र से काव्य तक
"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक - 33 में सबका हार्दिक अभिनंदन के साथ मेरी प्रथम प्रस्तुति सज़ा – कुंडलिया (1 दोहा + 1 रोला) मुर्गा कुकड़ू बोलता, नई हुई है भोर। ध्वनि अचानक सुनी तभी, पकड़ो, मारो, चोर।। पकड़ो, मारो, चोर, पकड़ में आए…"
Dec 22, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"हा...हा..हा.... बढ़िया तुकबंदी हुई है आ0 अलबेला जी..... बधाई हो...."
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"सुंदर घनाक्षरी के लिए हार्दिक बधाई आ0 संजय भाई जी....."
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"प्रदत्त विषय पर देशभक्ति रचना के लिए हार्दिक बधाई आ0 सुशील जी......"
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"बहुत ही सुंदर रचना है आ0 मीना जी..... हार्दिक बधाई....."
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"हा..हा..हा.... बहुत खूब आ0 अविनाश जी..... सुंदर हास्य रचना से संदेश दिया है..... बधाई हो...."
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति है आ0 वंदना जी.... बधाई हो...."
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"बहुत ही सार्थक एवं लयबद्ध छंद बना है आ0 अशोक जी... यद्दपि पहली पंक्ति पढ़कर में एक शब्द पर रुका जरूर था और उसके बाद मैंने सभी सुधीजनों की टिप्पणियाँ भी पढ़ी लेकिन अभी आ0 संजय भाई ने जिस बात की ओर अपनी जिज्ञासा को इंगित किया है वही मुझे भी परेशान कर…"
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"वाह.... वाह.... सुंदर शुरुआत के साथ संदेश छोड़ता हुआ शानदार कुंडलिया छंद..... बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति हेतु आ0 संजय मिश्रा जी......."
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"इस सुंदर सार्थक हिंदी गज़ल हेतु हार्दिक बधाई आ0 चंद्र शेखर जी...."
Dec 15, 2013
Sushil.Joshi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 38
"आहा.हा...... तीनों ही कुंडलिया बेहद खूबसूरत, लयबद्ध, संदेशपरक, शिल्प में खरी बन पड़ी हैं आ0 अरुण जी..... आप तो कुंडलिया विधा में आधुनिक काका हाथरसी हैं.... आपकी इस विधा पर कोई भी टिप्पणी बहुत छोटी होगी या कहूँ कि सूरज को दिया दिखाना..... और यह मैं…"
Dec 15, 2013

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Pauri Garhwal
Profession
Pvt. Job
About me
I like reading and writing hindi poetry.

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बताशा लगती हो तुम

बताशा लगती हो तुम

.

हिंदी के समान प्यारी, कोमल, सुरीली, मृदु,

घोले जो मिठास ऐसी भाषा लगती हो तुम,

जीवन में नीरसता, जैसे चहुँ ओर फैले,

तिमिर निराशाओं में आशा लगती हो तुम,…

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Posted on November 9, 2013 at 9:30am — 34 Comments

गीत (रिश्ते नाते हारे)

गीत (रिश्ते नाते हारे)

गया सवेरा, ख़त्म दोपहर, ढली सुनहरी शाम,   

आँखें ताक रहीं शून्य, और मुँह में लगा विराम,

गीत, गज़ल ख़ामोश खड़े औ कविता हुई उदास,

जब सबने छोड़ा साथ,…

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Posted on October 27, 2013 at 7:48am — 16 Comments

चोरी (लघु कथा)

“इन्सपैक्टर साहब, मैं तो कहती हूँ कि हो न हो मेरे गहने मेरी सास ने ही चुराए हैं..... बहुत तिरछी नज़र से देखती थी उनको...... अब सैर के बहाने चंपत हो गई होगी उन्हें लेकर।“ – बड़े गुस्से में रौशनी ने कहा

वहीं रौशनी का पति दीपक चुपचाप खड़ा था।

इससे पहले की इन्सपैक्टर साहब कुछ कहते रौशनी की सास घर वापस लौटती दिखी। अपने घर पर भीड़ देखकर वे कुछ परेशान हुईं और कारण जानकर वे फिर से साधारण हो गईं जैसे कि वे चोर के बारे में जानती हों। अंदर अपने कमरे में जाकर वो दो कड़े और एक चेन लेकर वापस…

Continue

Posted on October 26, 2013 at 6:30am — 26 Comments

जैसे को तैसा

जैसे को तैसा

आज करवाचौथ के दिन मैं अपनी बीवी से बोला – “प्रिये...

तुम मेरी किडनी के समान हो,

किंतु शादी के बाद के इन 5 वर्षों में

तुम्हारी हालत बिल्कुल

हमारी सरकार जैसी हो गई है,…

Continue

Posted on October 22, 2013 at 7:35am — 22 Comments

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At 10:49pm on November 2, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 5:39pm on November 2, 2010, Admin said…

At 1:32pm on November 2, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 1:26pm on November 2, 2010,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…
oBo परिवार मे आपका बहुत बहुत स्वागत है सुशील जोशी जी !
 
 
 

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