For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बताशा लगती हो तुम

बताशा लगती हो तुम

.

हिंदी के समान प्यारी, कोमल, सुरीली, मृदु,

घोले जो मिठास ऐसी भाषा लगती हो तुम,

जीवन में नीरसता, जैसे चहुँ ओर फैले,

तिमिर निराशाओं में आशा लगती हो तुम,

आँखें मूँद कर मृतप्राय हुए चित में यूँ,

सुंदर, सजग अभिलाषा लगती हो तुम,

नेह भरी देह का जो, रस पियूँ घोल-घोल,

चाशनी में डूबा सा बताशा लगती हो तुम।

----------------------------------- सुशील जोशी

“मौलिक व अप्रकाशित”

Views: 1306

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil.Joshi on November 14, 2013 at 4:08am

हा..हा..हा...... आपके अनुमोदन से मन प्रसन्न हो गया आ0 सौरभ जी.... वैसे उर्दू और हिंदी तो बहनें ही हैं..... इसलिए उर्दू बोलने वालों के लिए इसमें संशोधन की उचित छूट दे देता हूँ कि वे हिंदी के स्थान पर उर्दू लिख सकें.... हा..हा....हा......

आपके सुझाव को भविष्य में अपनी रचनाओं पर अमल में लाने का संपूर्ण प्रयास रहेगा....

Comment by Sushil.Joshi on November 14, 2013 at 4:05am

बहुत बहुत धन्यवाद आ0 बृजेश जी.....


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 14, 2013 at 12:02am

जलहरण घनाक्षरी [३२ वर्णों का १६-१६ यति पर लघु लघु से पदांत] का इतना सुन्दर और व्यंग्यात्मक मिसाल दिया है आपने, आदरणीय !!

हृदय से बधाइयाँ स्वीकार कीजिये..

हिंदी के समान प्यारी, कोमल, सुरीली, मृदु,

घोले जो मिठास ऐसी भाषा लगती हो तुम.... . .. जिसकी ज़ुबां उर्दू की तरह .. यानि उर्दू पर मिट-मिट जाने वालों को बढिया उत्तर दिया है आपने .. हा हा हा हा हा.......

बारम्बार बधाई

सादर

एक बात:

छांदसिक रचनाओं को प्रस्तुत करने क्रम में छंदों के नाम और उनका संक्षिप्त विधान अवश्य दे दिया करे.

Comment by बृजेश नीरज on November 12, 2013 at 11:23pm

बहुत सुन्दर! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Sushil.Joshi on November 12, 2013 at 7:36am

हा...हा..हा..... आ0 विजय जी....आपने सही कहा..... लेकिन इसी मिठास को तो बताने का प्रयास किया है मैंने यहाँ पर...... इतनी मीठी कि जैसे चाशनी में बताशा भी डाल दिया गया हो...... यानि डबल मीठी.... हा...हा..हा....... बहुत बहुत धन्यवाद आपकी टिप्पणी हेतु.....

Comment by Sushil.Joshi on November 12, 2013 at 7:31am

आपके अनुमोदन के लिए अतिश: धन्यवाद आ0 मीना जी....

Comment by Sushil.Joshi on November 12, 2013 at 7:30am

हा..हा...हा...... नेक सलाह एवं स्नेहिल टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार आ0 राजेश कुमारी जी.....

Comment by Sushil.Joshi on November 12, 2013 at 7:29am

बहुत बहुत धन्यवाद आ0 राम भाई जी....

Comment by विजय मिश्र on November 11, 2013 at 5:52pm
सुशीलजी , बेशक एक सुंदर श्रींगारिक रचना ,मजेदार शब्द संयोजन मगर एक खटका है ,बतासा तो स्वेम चासनी का रवा है और अगर इसे चासने की कोशीश की तो फिर चासनी ही बन जाता है .भाव की दृष्टि से रचना बहुत सुंदर है .बधाई .
Comment by Meena Pathak on November 11, 2013 at 2:03pm

बहुत सुन्दर मीठी सी रचना :) बहुत बहुत बधाई | सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
19 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
23 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
Monday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service