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Pawan Jain
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  • सतविन्द्र कुमार राणा
 

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Pawan Jain commented on kanta roy's blog post एक तुम्हारे होने से / कविता
"भाव पूर्ण सुंदर रचना हेतु बधाई आदरणीय ।"
Aug 2, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"आभारी हूँ आदरणीय तेज वीर सिंह जी ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"आभारी हूँ  आदरणीय प्रतिभा जी ,कथा पर सहमति एवं सराहना हेतु ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"जी  धन्यवाद  अर्चना जी, कथा में कुछ कमी रह गई है जो स्पष्ट नहीं कर पा रही है ।पुनः आभार । "
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"जी  धन्यवाद आदरणीय महेंद्र कुमार  जी ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"आभारी हूँ सुनील जी कुछ कमी रह गई कथा में एक लाइन छूट गई जो स्पष्ट  करती है कि शादी के बाद बे अपने परिवारों से दूर  हो गए।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"धन्यवाद आदरणीय कालीपद प्रसाद जी । "
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"साहब के पास दरोगा जी और अर्दली की भूमिका समझ नहीं आई आदरणीय । कथा के चित्रण हेतु बधाई ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
" अच्छा प्रयास किया है आ0 सतविंदर जी बधाई । "
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"धन्यवाद आदरणीय कल्पना जी ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"आभारी हूँ आदरणीय कथा पर समय दे कर समीक्षा करने हेतु ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"धन्यवाद आदरणीय शहजाद जी ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"धन्यवाद आदरणीय ओमप्रकाश जी ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"शुक्रिया जनाब तस्दीक अहमद खान साहेब ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"धन्यवाद आदरणीय चंद्रेश जी सराहना एवं बढ़िया सलाह हेतु ।"
Jul 31, 2016
Pawan Jain replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-16
"धन्यवाद, आदरणीय बबीता जी ।"
Jul 31, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
M.P.
Native Place
JABALPUR
Profession
Retired Manager Punjab National Bank

Pawan Jain's Blog

हिस्साबांट

पंडितजी पूजा के पहले साफ करते करते बुदबुदाते न खुश न दुखी अजीब सी ऊहापोह में दबाए रखते क्रोध को,न बाहर आने देते न जज्ब ही कर पाते।

"क्या हो गया पंडित जी ?"

"देखो तो, पूरा गर्भगृह गंदा कर देते हैं, रोज रोज रगड़ रगड़ के साफ करना पड़ता है।"

"अरे ये तो बहुत गंदगी करते हैं।"

मूर्ति की ओर इशारा करते हुए,"सब इनकी मर्जी है।"

"क्या इनकी मर्जी, शाम को सब प्रसाद उठा लिया करो,और बंद कर दो सारे बिल,पिंजरा भी रख दो।"

"शुभ शुभ बोलो भइया, उनका भी तो हिस्सा है इस चढावा में, हम…

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Posted on June 11, 2016 at 10:00am — 2 Comments

कन्या दान

कन्या दान के बाद से बिदाई तक लगातार रोती रही । रोते रोते सोफे पर बेसुध सी पडी़ रही।सभी बिदाई में व्यस्त जो थे।

दादा जी ने गोदी में उठाया,"उठ बिट्टो खाना खा ले, बुआ तो गई।"

तुनक कर गुस्से से बोली "नहीं कुछ नहीं खाउंगी आपने मेरी कल्लो बुआ और लाली बछिया दोनों को दान में दे दिया।बुआ को दूल्हा अपने साथ ले गया।"

"बुआ की शादी हुई है बिट्टो,बे तुम्हारे फूफा जी है।"

"कोई फूफा जी नहीं, मैं और बुआ दोनों रोते रहे फिर भी बुआ को साथ ले गए।"

"अगले हफ्ते ले आयेगे बुआ को।"

"अब…

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Posted on April 17, 2016 at 7:30am — 5 Comments

पर क्यों?

पर क्यों

पांच सौ रूपये महीने की बाई,

प्रतिस्थापित हो जाती है,

सहेली में,

सब सुख दुख,

सास की ज्यादतियां,

पति की बेवफाईयां,

बड़े प्रेम से सुनती है,

कमेंट्स भी देती है ,

मरहम भी रखती है,

चली जाती है दूसरे घर,

बेतार की सेवा प्रदान करने।

कभी कभी,

प्रतिस्थापित हो जाती है,

संशय के घेरे में,

शक के डेरे में,

सौत बन जाती है,

पर देहरी नहीं छुड़ाती,

अजीब सी कसमसाहट देती है,

रस भरी प्रेम पगी,

कथायें सुनाती है…

Continue

Posted on April 11, 2016 at 10:05am

पुन्न (पुण्य) लधु कथा

पुन्न (पुन्य)

आज बड़ी बुआ आ गई,थैला और पेटी के साथ ।

"ये लल्लू ,पइसा दे दे रिक्शा बाले को,मेरे पास फुटकर नहीं हैं ।"

रिक्शा के पैसे दे ,चरणस्पर्श का आशीर्वाद लेकर पेटी अम्मा के कमरे में रख दी ।बुआ ने पेटी पलंग के नीचे खिसका ,ताला हिला कर तसल्ली कर ली ।इस बार पेटी कुछ ज्यादा ही भारी है।पेटी पर लगा अलीगढ़ी ताला ,जिसकी चाबी उनके गले में पड़ी तीन तोले की चेन में लटकी रहती ।

क्या किस्मत है,इस लोहे की चाबी की ,चौदह वर्ष की उम्र से ब्लाउज के अंदर उनके साथ। बाल विधवा बुआ ने…

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Posted on March 21, 2016 at 2:30pm — 5 Comments

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At 9:00pm on October 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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