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सतविन्द्र कुमार
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  • karnal,haryana
  • India
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सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल/सतविन्द्र राणा
"आदरणीय बृजेश भाई जी सादर हार्दिक आभार उत्साहवर्धन के लिए!"
Aug 11
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल/सतविन्द्र राणा
"आदरणीय रवि शुक्ल सर सादर नमन!हौंसलाफ़ज़ाई और मार्गदर्शन के लिए बहुत् बहुत आभार!"
Aug 11
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल/सतविन्द्र राणा
"आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत आभार"
Aug 11
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल/सतविन्द्र राणा
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी सादर नमन!उत्साहवर्धN एवं मार्गदर्शन के लिए तहेदिल शुक्रिया। यथोचित परिष्कार का प्रयत्न किया है सादर।"
Aug 11
सतविन्द्र कुमार posted a blog post

एक ग़ज़ल/सतविन्द्र राणा

बह्र:1222 1222 122नहीं पहले-सी चेहरे पे चमक हैहँसी में आपकी गम की झलक हैनहीँ आमाल में जिसकी है नीयतउसी की क़ामयाबी पे भी शक हैकोई तो खेल में पानी बहाताकहीं पर प्यासा मरने की धमक हैपहुँचना उसका ही होगा फलक तकनज़र जिसकी बहुत आगे तलक हैरहेगी रात तन्हा, दिन अकेलाहमारा साथ कुछ ही देर तक हैउसे बंदिश भला क्या रोक पाए?नजर में जिसकी ये सारा फलक हैमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 10
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बिना आमाल के मिलता न हक है(ग़ज़ल)/सतविन्द्र राणा
"वाह वाह खूब ग़ज़ल कही आदरणीय..सादर"
Aug 8
Ravi Shukla commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बिना आमाल के मिलता न हक है(ग़ज़ल)/सतविन्द्र राणा
"आदरणीय सतविन्‍द्र जी अच्‍छी गजल कही आपने मुबारबाद पेश करते है ।  आदरणीय समर साहब का कहना सही है हक़ काफिया उर्दू के अनुसार गलत हो जाएगा पर हम सब अभी हिन्‍दी कोआधार मानकर गजल पर प्रयास कर रहे है इसलिये   उर्दू की जानकारी के…"
Aug 8
Ravi Shukla commented on सतविन्द्र कुमार's blog post लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है(गजल) /सतविन्द्र कुमार राणा
"आदरणीय सतविन्‍द्र जी अच्‍छी गजल कही आपने शेर दर शेर मुबारक बाद कुबल करें ।"
Aug 8
बसंत कुमार शर्मा commented on सतविन्द्र कुमार's blog post लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है(गजल) /सतविन्द्र कुमार राणा
"बहुत खूब "
Aug 7
सतविन्द्र कुमार posted blog posts
Aug 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बिना आमाल के मिलता न हक है(ग़ज़ल)/सतविन्द्र राणा
"आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर मेरी बधाई निवेदित है । सादर"
Aug 7
Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बिना आमाल के मिलता न हक है(ग़ज़ल)/सतविन्द्र राणा
"आदरणीय सतविंद्र जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल का प्रयास । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आदरणीय गिरिराज भंडारी जी और आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बातों पर ध्यान दें । मैं इन विद्वानों की बातों से सहमत हूँ ।"
Aug 6
सतविन्द्र कुमार commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - क्यों भला दंड वत हुआ जाये ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज सर उम्दा गजल के लिए हार्दिक बधाई,आपकी गजल पे चर्चा से हमारी भी जानकारी बढ़ी। आदरणीय समर कबीर जी को भी हार्दिक नमन!"
Aug 6
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बिना आमाल के मिलता न हक है(ग़ज़ल)/सतविन्द्र राणा
"आदरणीय समर कबीर जी सादर वन्दन! हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत आभार। आपके सुझाए गए दोष के निवारण के लिए प्रयास करूँगा।सादर"
Aug 6
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बिना आमाल के मिलता न हक है(ग़ज़ल)/सतविन्द्र राणा
"आदरणीय गिरिराज सर,प्रयास पर पुनः उपस्थित होकर मार्गदर्शन करने के लिए बहुत-बहुत आभार, आपके सुझाव के अनुसार परिष्कार का निवेदन करूँगा। सादर"
Aug 6
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बिना आमाल के मिलता न हक है(ग़ज़ल)/सतविन्द्र राणा
"जनाब सतविन्द्र कुमार'राणा'साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले के सानी मिसरे पर जनाब गिरिराज भाई का सुझाव उत्तम है । दूसरे शैर में क़ाफ़िया दोष है,सही शब्द "हक़" है,देखियेगा ।"
Aug 6

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार's Blog

लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है(गजल) /सतविन्द्र कुमार राणा

गजल

बह्र 1222 1222 122



फरेबी तू जो बन पाया नहीं है

तभी सिक्का तेरा चलता नहीं है



नहीं नीयत में ही जब काम करना

कहे क्यों तू, मिला मौका नहीं है



ज़ुबाँ में सादगी उसकी झलकती

भले देहात में रहता नहीं है



जिया था तू वतन के वास्ते पर

शहादत का तेरी चर्चा नहीं है



सरे बाज़ार देखो झूठ बिकता

जो' बिक जाए वो' फिर सच्चा नहीं है



लिखी तकदीर हाथों से ही जाती

लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है



मौलिक एवं… Continue

Posted on August 6, 2017 at 12:30pm — 2 Comments

एक ग़ज़ल/सतविन्द्र राणा

बह्र:1222 1222 122

नहीं पहले-सी चेहरे पे चमक है
हँसी में आपकी गम की झलक है

नहीँ आमाल में जिसकी है नीयत
उसी की क़ामयाबी पे भी शक है

कोई तो खेल में पानी बहाता
कहीं पर प्यासा मरने की धमक है

पहुँचना उसका ही होगा फलक तक
नज़र जिसकी बहुत आगे तलक है

रहेगी रात तन्हा, दिन अकेला
हमारा साथ कुछ ही देर तक है

उसे बंदिश भला क्या रोक पाए?
नजर में जिसकी ये सारा फलक है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 6, 2017 at 11:00am — 14 Comments

कुण्डलिया/सतविन्द्र राणा

सारे दादुर मोर खुश ,सावन जो घिर आय।
कारे बादल जलभरे ,नभ में जाते छाय।
नभ में जाते छाय, प्यास धरती की हरते।
नीर सुधा बरसाय,सुहागन इसको करते।
सतविन्दर कविराय, लगाओ पौधे प्यारे
मिट्टी उगले अन्न,सुखी हों प्राणी सारे।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 2, 2017 at 8:30pm — 8 Comments

वीर चेतक(आल्हा छ्न्द)/सतविन्द्र कुमार राणा

*वीर चेतक*(वीर छ्न्द)



घोड़े देखे बहुत जगत में,देखा कब चेतक-सा वीर



बिजली-सी चुस्ती थी जिसमें लेकिन रहता रण में धीर



कद था छोटा ही उसका पर,लम्बा उसका बहुत शरीर



मारवाड़ की अश्व-नस्ल में राणा ने पाया वह बीर





हल्दी घाटी समर क्षेत्र में,राणा उसपे रहे सवार



चेतक मुख पर सूंड लगाए,गज पर करता चढ़-चढ़ वार



राणा का भाला चलता था,संग चली टापों की मार



आगे-पीछे हटता चेतक,दिखती रण कौशल में धार





हल्दी घाटी… Continue

Posted on June 8, 2017 at 8:30pm — 9 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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