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सतविन्द्र कुमार
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सतविन्द्र कुमार posted a blog post

बहाने पर ज़माना चल रहा है-ग़ज़ल

1222 1222 122बहाना ही बहाना चल रहा हैबहाने पर ज़माना चल रहा हैबदलना रंग है फ़ितरत जहाँ कीअटल सच पर दिवाना चल रहा हैनही गम में हँसा जाता है फिर भीअबस इक मुस्कुराना चल रहा हैनिव%See More
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narendrasinh chauhan commented on सतविन्द्र कुमार's blog post कुंडलियां
"खूब सुन्दर रचना "
yesterday
Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार's blog post कुंडलियां
"आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब,                                बहुत ही सामयिक कुंडलियाँ लगी । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार's blog post कुंडलियां
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,बढ़िया कुण्डलिया छन्द लिखे,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
सतविन्द्र कुमार posted a blog post

कुंडलियां

कुण्डलियाँ१.मिलना-जुलना जान लो,है रिश्तों को खादस्नेह-मिलन होता रहे,चखें नेह का स्वादचखें नेह का स्वाद,बात औरों की जानेंकरकें बातें चार,स्वयं को अच्छा मानें'सतविंदर' इस स्नेह,की न हो सकती तुलनापनपें एक्य विचार,रहे यदि मिलना-जुलना।।२.समरथ हैं बस देवता,सच्चे रचनाकारगीत गजल संगीत के,हैं अच्छे फ़नकारहैं अच्छे फ़नकार,रचें नित न्यारी मायाइनका हर सद्कर्म, ज़माने को है भाया'सतविंदर' कविराय,करो न प्रयास भगीरथवाणी दे आशीष,बनोगे तुम भी।। समरथमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"हौंसलाफ़ज़ाई के लिए सादर हार्दिक आभार आप सबका! सभी सुधीजनों को सादर नमन"
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"वाःहः आदरणीय सतीश जी उत्तम दोहे कहे हैं"
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"आदरणीय धामी सर दोहावली भी गजब कहि है। हार्दिक बधाई"
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना दीदी,सुंदर केअविता हुई है"
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"छोटी कविता घाव करे गम्भीर। बधाई आदरणीय डॉ विजय शंकर जी"
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहौतीक सुख पाने के चक्कर में अशांत ही अशांत। बढ़िया अतुकांत कहि आपने आदरणीया डॉ संगीता गांधी जी"
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"हार्दिक बधाई आदरणीय दयाराम मैठाणी जीteenon मुक्तक सुंदर बन पड़े हैं"
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"आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी बेहतरीन दोहावली हुई है। हार्दिक बधाई"
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"बहुत सुंदर आदरणीय सुरेश भाई जी ,hहार्दिक बधाई"
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Ajay Tiwari commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक जुगनू भी है दीपक तीरगी में- गजल
"आदरणीय सतविंदर जी, अच्छे अशआर हुए हैं, हार्दिक बधाई.  मन रमा रहता हमेशा आशिकी में  > मन रमा रहता है हरदम आशिकी में  सादर "
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सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"हार्दिक बधाई आदरणीय टी आर सुकुल जी,उम्दाprstuti हुई है"
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Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

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कुंडलियां

कुण्डलियाँ



१.

मिलना-जुलना जान लो,है रिश्तों को खाद

स्नेह-मिलन होता रहे,चखें नेह का स्वाद

चखें नेह का स्वाद,बात औरों की जानें

करकें बातें चार,स्वयं को अच्छा मानें

'सतविंदर' इस स्नेह,की न हो सकती तुलना

पनपें एक्य विचार,रहे यदि मिलना-जुलना।।



२.

समरथ हैं बस देवता,सच्चे रचनाकार

गीत गजल संगीत के,हैं अच्छे फ़नकार

हैं अच्छे फ़नकार,रचें नित न्यारी माया

इनका हर सद्कर्म, ज़माने को है भाया

'सतविंदर' कविराय,करो न प्रयास… Continue

Posted on January 15, 2018 at 9:31am — 3 Comments

एक जुगनू भी है दीपक तीरगी में- गजल



2122 2122 2122

इश्क में, व्यापार में या दोस्ती में

दिल दिया है हमने अपना पेशगी में

बूँद भर भी आब काफी तिश्नगी में

एक जुगनू भी है दीपक तीरगी में

ठोकरें खाकर नहीं सीखा सँभलना

क्या मज़ा आएगा  ऐसी जिन्दगी में

दर्द,आंसू,बेबसी के बाद भी क्यों

मन रमा रहता हमेशा आशिकी में

किस जमाने…

Continue

Posted on January 9, 2018 at 8:30pm — 8 Comments

मत्त सवैया छंद

16,16 पर यति,चार पद, दो-दो पद समतुकांत

बढ़ती जाती है आबादी,रोजगार की मजबूरी है

पैसे की खातिर देख बढ़ी,किस-किस से किसकी दूरी है

उस बड़े शहर में जा बैठे, घर जहाँ बहुत ही छोटे हैं

विचार महीन उन लोगों के, जो दिखते तन के मोटे हैं

पहले गाँवों में बसते थे,घर आँगन मन था खुला-खुला

थोड़े में भी खुश रहते थे,हर इक विपदा को सभी भुला

कोई कठिनाई अड़ी नहीं,मिल उसका नाम मिटाते थे

जो रूखा-सूखा होता था,सब साथ बाँट कर खाते थे

तब धमा चौकड़ी होती…

Continue

Posted on December 25, 2017 at 2:21pm — 10 Comments

मोम नहीं जो दिल पत्थर है-ग़ज़ल

22 22 22 22

मोम नहीं जो दिल पत्थर है
उसका चर्चा क्यों घर-घर है?

मंजिल को पा लेता है वो
जिसने साधी खूब डगर है

लोग पुराने बात पुरानी
फिर भी उनका आज असर है

देख! सँभलना उसने सीखा
जिसने भी खायी ठोकर है

होठों पर मुस्कान भले हो
दिल में गम का इक सागर है

माना सच होता है कड़वा
'राणा' कहता ख़ूब मगर है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on December 16, 2017 at 8:00pm — 20 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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