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सतविन्द्र कुमार
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Afroz 'sahr' commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल
"आदरणीय सतविंदर जी आपने मेंरे कहे को मान दिया आपका मश्कूर हूँ। सादर,,"
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सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है(गजल) /सतविन्द्र कुमार राणा
"प्रयास को मान देने के लिए सादर आभार आ फूल सिंह जी"
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सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है(गजल) /सतविन्द्र कुमार राणा
"आदरणीय रवि शुक्ल सर,उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार। नमनसादर"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post लकीरों में तो कुछ रक्खा नहीं है(गजल) /सतविन्द्र कुमार राणा
"आदरणीय बसन्त कुमार शर्मा जी,अनुमोदन एवं उत्साहवर्द्धन के लिए बहुत-बहुत आभार,नमन सादर"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी सादर,हौंसलाफ़ज़ाई के लिए सादर हार्दिक आभार"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर,सादर नमन,हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी,उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय मुहम्मद आरिफ जी,सादर नमन प्रयास के अनुमोदन,एवं हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार,"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बचपन
"आदरणीय कल्पना दी सादर नमन,उत्साहवर्धन के लिए तहेदिल शुक्रिया"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल
"आ सलीम रज़ा जी,उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया,सादर नमन"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल
"आदरणीय अफ़रोज़ सहर जी,आपके मार्गदर्शन अनुसार परिष्कार की कोशिश की है। कृपया पुनः नजरे इनायत हो जाए। मआर्गदर्शन एवं प्रोतसाहन के लिए तहेदिल शुक्रिया"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल
"आदरणीय डॉ छोटे लाल जी,प्रयास को समय देकर उत्साहवर्धन के लिए बहुत हार्दिक आभार"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल
"आदर0 नीलेश भाई जी,उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार,नमन सादर"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post एक ग़ज़ल
"आदरणीय मुहम्मद आरिफ़ जी अनुमोदन,और उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार,सादर नमन"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार posted a blog post

एक ग़ज़ल

122 122 122 122न तकरार समझी न समझा गिला हैबुरी आदतों का यही फाइदा हैगलत ही तलाशा था मय में नशे कोनिगाहों में जबके नशा ही नशा हैन अल्फाज कुछ भी बयां कर सकें होंजो दिल में बसा आँखों से दिख रहा हैये चेहरे पे रौनक न जाने है कैसेजिगर जबकि छलनी हमारा हुआ हैकिसी तिफ्ल के रूठ जाने से सीखेंभुलाना किसी को अगर सीखना हैबना लो मुहब्बत को औजार यारो!शज़र नफरतों के अगर काटना हैक़मर पे चढ़ी जा रही है ख़ुमारीकहीं दूर सूरज कोई ढल रहा है,करे जिंदगी झूठे वादे वफ़ा केक़जा बिन हुआ क्या कोई बावफ़ा हैधँसा पेट जिसका हुआ…See More
6 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी सर उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार,नमन सादर"
6 hours ago

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार's Blog

एक ग़ज़ल

122 122 122 122



न तकरार समझी न समझा गिला है

बुरी आदतों का यही फाइदा है



गलत ही तलाशा था मय में नशे को

निगाहों में जबके नशा ही नशा है



न अल्फाज कुछ भी बयां कर सकें हों

जो दिल में बसा आँखों से दिख रहा है



ये चेहरे पे रौनक न जाने है कैसे

जिगर जबकि छलनी हमारा हुआ है



किसी तिफ्ल के रूठ जाने से सीखें

भुलाना किसी को अगर सीखना है



बना लो मुहब्बत को औजार यारो!

शज़र नफरतों के अगर काटना है



क़मर पे चढ़ी जा… Continue

Posted on October 16, 2017 at 10:30pm — 11 Comments

तरही गजल

1222 1222 122

कभी जिसमें कहीं अड़चन नहीं है
हो कुछ भी वो मग़र जीवन नहीं है

तराशा जाए तो पत्थर भी चमके
तपाए बिन कोई कुंदन नहीं है

बिना उलझे नहीं आता सुलझना
मज़ा ही क्या अगर उलझन नहीं है

अगर हैं जीतने की ख़्वाहिशें तो
न सोचो हारने का मन नहीं है

बहारें हर तरफ़ आने लगी हैं
खिला इक बस मेरा गुलशन नहीं है

नहीं अनबन, नहीं शिकवा ही कोई
*बस इतना है कि अब वो मन नहीं है*

मौलिक एवम अप्रकाशित

Posted on October 11, 2017 at 11:30pm — 10 Comments

बचपन

*बचपन*



न समंदर-सा गहरा,न पर्वत-सा ऊँचा



न ही लताओं-सा उलझा



जटिल तो हो ही नहीं सकता है



बचपन



क्योंकि बड़ा सादा-सा होता है



बचपन



बड़ा सीधा-सा होता है



बचपन



खुली उन्मक्त हवा-सा बहता है



करता है अठखेलियां



विभिन्न पत्तियों से



टहनियों से



कभी-कभी हिला देता है



वृक्ष को भी जड़ तक



क्योंकि बहती हवा-से



बचपन का विवेक इतना ही



होता… Continue

Posted on October 8, 2017 at 10:37pm — 4 Comments

तरही ग़ज़ल

122 122 122 12

उन्हें देखकर ये बदलने लगा
नहीं टिक सका दिल फिसलने लगा

नदी से मिलन की घड़ी आ गयी
*समन्दर खुशी से मचलने लगा*

जमाने से मिलती रही ठोकरें
उन्हीं की बदौलत सँभलने लगा

लगा संग दिल ही था जो अब तलक
वो किलकारियों से पिघलने लगा

पड़ोसी लगाता रहा आग जो
वही आज खुद देखो जलने लगा

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 24, 2017 at 6:46am — 8 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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