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ग़ज़ल - मेरे घर आज आ रहा है कोई

2122 1212 22

1

सोये जज़्बे जगा रहा है कोई 

दिल प हौले से छा रहा है कोई 

2

नज़रों से मय पिला रहा है कोई

मुझको मुझसे चुरा रहा है कोई

3

चाँद तारो न उम्र भर जाना

मेरे घर आज आ रहा है कोई

4

चन्दा कुछ देर ओढ़ ले बदरी

छत प मुझको बुला रहा है कोई

5

मुस्कुराहट सजा के होटों पर

इश्क करना सिखा रहा है कोई 

6

लौटना अपना मुस्तरद*करके

मेरा ओहदा बढ़ा रहा है कोई

अस्वीकृत

7

शे'र लिखकर उदास काग़ज़ पर

ग़म ग़लत करता जा रहा है कोई

8

नाम दिल पर उकेर कर "निर्मल"

मुझको ग़ाफ़िल बना रहा है कोई

मौलिक व अप्रकाशित 

रचना निर्मल 

Views: 376

Comment

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Comment by नाथ सोनांचली on April 4, 2023 at 1:51pm

आद0 रचना भाटिया जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने। बधाई

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 31, 2023 at 12:00pm

आदरणीया रचना जी अच्छी ग़ज़ल हुई...बधाई

Comment by Rachna Bhatia on March 9, 2023 at 10:13am

आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर भाई नमस्कार। हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 9, 2023 at 7:04am

आ. रचना बहन, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है। हार्दिक बधाई। 

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