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Rachna Bhatia's Discussions (182)

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"आदरणीय कृष मिश्रा जी नमस्कार। बेहतरीन ग़ज़ल एक अलग क्लेवर के साथ आपने कही। बधाई स्वी…"

Rachna Bhatia replied yesterday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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"आदरणीय सर् नमस्कार । सर् ऊला में 'गीला सा चाँद' की उपमा 'नदी' से की गई है। क्या इसे…"

Rachna Bhatia replied yesterday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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Reply by Samar kabeer

"आदरणीय दण्डपाणि'नाहक'जी, मैंने सीखने के उद्देश्य से टिप्पणी की थी।सर् की इस्लाह हमेश…"

Rachna Bhatia replied yesterday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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"आदरणीय दण्डपाणि 'नाहक' जी  नमस्कार। आदरणीय  , मेरी तक़्तीअ के हिसाब से आपने  क्या 2…"

Rachna Bhatia replied on Saturday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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"आदरणीय सर् सादर नमस्कार। सर् सब आपकी मेहनत का ही परिणाम है जो कुछ कह पाई। हौसला बढ़ा…"

Rachna Bhatia replied on Friday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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"2122 1122 1122 22 1 मैं नहीं कहती हूँ तुम झूठे हो हरजाई हो पर कहीं बातों में थोड़ी…"

Rachna Bhatia replied on Friday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

268 yesterday
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"आदरणीय रिचा यादव जी अच्छा प्रयास है आपका। बधाई। सुधार के बाद बहुत अच्छी ग़ज़ल हो गई…"

Rachna Bhatia replied on Friday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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"आदरणीय संजय शुक्ला जी नये अंदाज़ लिए आपकी ग़ज़ल बहुत ख़ूब लगी। बधाई।"

Rachna Bhatia replied on Friday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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"आदरणीय तस्दीक अहमद ख़ान जी। वाह वाह बहुत खूब ग़ज़ल। बधाई स्वीकार करें।"

Rachna Bhatia replied on Friday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी नमस्कार। बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई।पाँचवा बहुत पसंद आया।"

Rachna Bhatia replied on Friday to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127

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"/रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही// यूँ कहें तो:- 'रूह के पार मुझको बुलाती रही वाह वाह आदरणीय समर…"
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Gurpreet Singh jammu commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"आदरणीया रचना भाटिया जी नमस्कार। बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल का प्रयास आपकी तरफ से । पहले दोंनों अशआर बहुत…"
6 minutes ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"//रूह*हर दर्द अपना भुलाती रही// यूँ कहें तो:- 'रूह के पार मुझको बुलाती रही'"
1 hour ago
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1 hour ago
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"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् सुधारने की कोशिश की है। देखें क्या सहीह है ? एक आवाज़ कानों…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
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18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद। आपने गजल को…"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चाँद को जब बदसूरत करने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, पर्यावरण पर चिंता के भाव से उम्दा ग़ज़ल कही है आपने, दाद के…"
22 hours ago

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