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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी, मतला सुधार के बाद बहुत ख़ूब हुआ। कुछ जगह नुक़्ते रह गए हैं। उन्हें देख लें। गिरह अच्छी लगाई। वाह"
4 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"221 2121 1221 212 1 बैठेंगे कब तलक सुनो यूँ बे-ज़बाँ से हम कुछ तुम कहो वहाँ से कहें कुछ यहाँ से हम 2 चाहे बचें न अश्कों के आब-ए-रवाँ से हम माँगेंगे पर न कुछ तेरे ज़ालिम जहाँ से हम 3 भटके हैं शह्र शह्र गली कूचे कूचे में उठ्ठे अना में जब भी तेरी…"
5 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-इश्क़ महब्बत धोखा था
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार। सर् तुझसे मिलने से पहले मैं' इस मिसरे में एक फ़ा अधिक है 'मैं', हटा दें । सर् शे'र में "मैं" की कमी लग रही थी। इसलिए पहले और मैं की मात्रा गिराने का सोचा था।पर,अब "मैं" हटा देती…"
Sep 15
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-इश्क़ महब्बत धोखा था
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'तुझसे मिलने से पहले मैं' इस मिसरे में एक फ़ा अधिक है 'मैं', हटा दें । 'कल वो भी हरियाला था' इस मिसरे में 'हरियाला' की जगह दूसरा शब्द…"
Sep 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-इश्क़ महब्बत धोखा था
"आ. बबीता बहन , सादर अभिवादन।सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sep 13
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-इश्क़ महब्बत धोखा था

22 22 22 21आँख खुली तो जाना थाइश्क़ मुहब्बत धोका था2उधड़ी सीवन रिश्तों कीचुपके से वो सिलता था3तुझसे मिलने से पहले मैंजाने कैसे रहता था4झूठे सपनों की ख़ातिर मैं ख़ुद से ही हारा था5सूखा पत्ता कहता हैकल वो भी हरियाला था6जब भटकी रूह मेरी "निर्मल"रोया दिल का कोना था  मौलिक व अप्रकाशितSee More
Sep 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- शिवाला लगा
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीया...बधाई"
Sep 10
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-मिलती दुआ है
"आदरणीय समर कबीर सर् , मैं भी इसी शे'र को ठीक करना चाहती थी ।पर,हुआ नहीं। आपने बहुत अच्छा कर दिया। बेहद शुक्रिय:।"
Sep 6
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-मिलती दुआ है
"'घटाया कब उन्होंने बढ़ाकर फ़ासला है' यूँ कहें:- 'ज़बाँ की तल्ख़ियों ने बढ़ाया फ़ासला है'"
Sep 6
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-मिलती दुआ है
"आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी सही कहा आपने। सुधरने की कोशिश कर रही हूँ।"
Sep 6
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-मिलती दुआ है
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार। सर् फेयर में सुधार कर लेती हूँ।यहाँ एडिट करने से पोस्ट पैंडिंग में चली जाती है। सर्,इस तरह से शे'र कर लें क्या 1222/122 घटाया कब उन्होंने बढ़ाकर फ़ासला है"
Sep 6
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-मिलती दुआ है
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, छोटी बह्र में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'कसम से इक क़ज़ा है' इस मिसरे में 'क़ज़ा' की जगह "सज़ा" शब्द उचित होगा । 'कसम'--"क़सम"--कब…"
Sep 6
Manoj kumar Ahsaas commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-मिलती दुआ है
"नमस्कार आदरणीय ऐसा प्रतीत होता है कि आपने बहर के हिसाब से शब्दों को बिठाया है अभी आपको बहर पर मेरे ख्याल से और अधिक मेहनत करनी चाहिए बाकी भाव आपके बहुत अच्छे हैं और एक अच्छी गजल की बधाई आपको देता हूं"
Sep 5
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-मिलती दुआ है

1222/1221 हुआ वो ही ख़फ़ा हैकिया जिसका भला है2ज़माने को पता हैतू मेरा आश्ना है3बसर करना जहाँ मेंहुआ दुश्वार सा है4ख़यालों का समंदरकिनारा ढूँढता है5जफ़ाओं का ये तुहफ़ाकिसी की बद-दुआ है6बिना उल्फ़त के जीना कसम से इक क़ज़ा है7मेरी ईमानदारीप हर कोई हँसा है8ज़बाँ की तल्ख़ियाँ हीबढ़ातीं फ़ासला है9है ख़ुशक़िस्मत वो 'निर्मल'जिसे मिलती दुआ है मौलिक व अप्रकाशित See More
Sep 3
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- शिवाला लगा
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर भाई, हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद। "
Sep 1
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- शिवाला लगा
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार। सर्, आपकी इस्लाह के अनुसार पोस्ट में एडिट कर दिया है। एडिट करते ही पोस्ट रिअप्रूवल में चली गई थी। इसलिए जवाब नहीं दे पाई।  सर् एक बार फिर क़ीमती इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रियः।"
Sep 1

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Female
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Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

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ग़ज़ल-इश्क़ महब्बत धोखा था

22 22 22 2



1

आँख खुली तो जाना था

इश्क़ मुहब्बत धोका था

2

उधड़ी सीवन रिश्तों की

चुपके से वो सिलता था

3…

Continue

Posted on September 13, 2021 at 11:00am — 3 Comments

ग़ज़ल-मिलती दुआ है

1222/122

1

 हुआ वो ही ख़फ़ा है

किया जिसका भला है

2

ज़माने को पता है

तू मेरा आश्ना है

3…

Continue

Posted on September 3, 2021 at 11:04am — 6 Comments

ग़ज़ल- शिवाला लगा

122 122 122 12

1 तुझे जिसके लहज़े में ताना लगा

मुझे दिल से वो शख़्स सच्चा लगा

 2 ये मत पूछ क्या उसमें अच्छा लगा

 वो मासूम इक ज़िद्दी बच्चा लगा

3 तू सुन शोर पहले मेरे दिल का फिर

 बता क्यों तुझे मैं अकेला लगा

 4 बता वास्ता उससे रक्खूँ भी क्यों

 मुझे आदमी जब वो झूठा लगा

 5 थी कुछ बात या इश्क़ का था सरूर

हरिक चेहरा जो मुझको तेरा लगा

 6 मुहब्बत ही की है गुनह तो…

Continue

Posted on August 30, 2021 at 12:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल-गीत आशिक़ाना हो

2122 1212 22/112

 1

उसका जब मेरी कू में आना हो

उठ चुका ग़म का शामियाना हो

2

मिल रहा प्यार जब पुराना हो

लब प तब गीत आशिक़ाना हो

3

हिज्र की रात में वो आए जब

होटों पर वस्ल का तराना हो

4

ऐ ख़ुदा हर गरीब के घर में

पेट भरने को आब ओ दाना हो

5

टूटी कश्ती में बैठ कर कैसे

उस किनारे प अपना जाना हो

6

कह रहा है मरीज़-ए-इश्क़ मुझे

उसका दिल मेरा आशियाना…

Continue

Posted on August 18, 2021 at 1:20pm — 6 Comments

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