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Rachna Bhatia
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  • Aazi Tamaam
  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • DR ARUN KUMAR SHASTRI
 

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Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार।सर् आपके कहे अनुसार सुधार कर दिए हैं। ग़ज़ल सहीह करने के लिए बेहद शुक्रिय:।"
Friday
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-अपना है कहाँ

2122 2122 2122 2121औरों के जैसा मुकद्दर यार अपना है कहाँअपने दिल का जोर उसके दिल प चलता है कहाँ2रात होती है कहाँ और दिन गुज़रता है कहाँमन मुआफ़िक़़ ज़िन्दगी में जीना मरना है कहाँ3एक दिन में कुछ नहीं पर एक दिन होगा ज़रूरआदमी ये सब्र तब तक यार रखता है कहाँ'4आज तक कोई नहीं यह जान पाया दोस्तोइस ज़माने को बनाने वाला रहता है कहाँ 5किस तरह भर लूँ उनींदी आँखों में ख़्वाबों के रंगथपकियाँ देकर सुलाने चाँद आया है कहाँ6रूह को"निर्मल" मयस्सर क़ुर्ब हो भी किस तरह वो नज़र अपनी वहाँ तक ले के जाता है कहाँमौलिक…See More
May 13
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"''अपने दिल का जोर उसके दिल प चलता है कहाँ" अब मिसरा ठीक है ।"
May 12
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी ग़ज़ल तक आने तथा अपनी राय रखने के लिए हार्दिक धन्यवाद। आपने सही कहा लेकिन मुझे लगता है कि ख़्वाब नींद आने पर ही आते हैं और ख़्वाब ज़रूरी नहीं कि मनपसंद आएँ।  फिर भी आदरणीय समर कबीर सर् से बात कर लेती हूँ।  सादर।"
May 12
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। उत्तर देरी से देने के लिए क्षमा चाहती हूँ। आदरणीय सर्, आपने सही कहा कि मिसरअ बह्र में नहीं है। क्या पर को प कर दूँ। "अपने दिल का जोर उसके दिल प चलता है कहाँ" बाक़ी सही कर देती हूँ। सर् आपका ग़ज़ल तक आने…"
May 12
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ, मुहतरम समर कबीर साहिब ने बहतरीन इस्लाह फ़रमाई है,  "किस तरह भर लूँ उनींदी आँखों में ख़्वाबों के रंग" इस मिसरे के शिल्प पर ग़ौर कीजियेगा, 'उनींदी…"
May 10
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"मुहतरमा रचना भाटिया जी अआदाब , ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें I  'अपने दिल का जोर उसके दिल पर चलता है कहाँ'--ये मिसरा बह्र में नहीं देखें I  'मन मुआफ़िक ज़िन्दगी में जीना मरना है…"
May 10
Rachna Bhatia commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी बहुत सुंदर दोहे हुए । वाह वाह ।"आपने" पर अमीरुद्दीन जी से सहमत हूँ।"
May 6
Rachna Bhatia commented on Sushil Sarna's blog post ताकत (लघुकथा )
"आदरणीय सुशील सरना जी , मैं समीक्षा करने के लायक़ तो नहीं हूँ। पर समय मिलते ही अपनी सोच के अनुसार इस लघुकथा को लिखने की कोशिश ज़रूर करूँगी। सादर।"
May 6
Rachna Bhatia commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (इबादतों में अक़ीदत की सर-कशी न मिला)
"आदरणीय अमीरुद्दीन "अमीर" जी अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें। आदरणीय ज़ह्र का वज़्न क्या लिया है। सादर।"
May 6
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-अपना है कहाँ

2122 2122 2122 2121औरों के जैसा मुकद्दर यार अपना है कहाँअपने दिल का जोर उसके दिल प चलता है कहाँ2रात होती है कहाँ और दिन गुज़रता है कहाँमन मुआफ़िक़़ ज़िन्दगी में जीना मरना है कहाँ3एक दिन में कुछ नहीं पर एक दिन होगा ज़रूरआदमी ये सब्र तब तक यार रखता है कहाँ'4आज तक कोई नहीं यह जान पाया दोस्तोइस ज़माने को बनाने वाला रहता है कहाँ 5किस तरह भर लूँ उनींदी आँखों में ख़्वाबों के रंगथपकियाँ देकर सुलाने चाँद आया है कहाँ6रूह को"निर्मल" मयस्सर क़ुर्ब हो भी किस तरह वो नज़र अपनी वहाँ तक ले के जाता है कहाँमौलिक…See More
May 6
Rachna Bhatia commented on Sushil Sarna's blog post ताकत (लघुकथा )
"आदरणीय सुशील सरना जी अच्छी लघुकथा  हुई है बधाई। मैं शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी से सहमत हूँ कि कुछ शब्दों के हेरफेर से लघुकथा की कसावट बेहतर हो सकती है। सादर।"
May 2
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"नकली चेहरा "आप मेरी बात तो सुनिए, मैंने उसे धमकाया नहीं है ।"मैडम शालिनी राहुल की मम्मी को लगातार सफाई दे रहीं थीं। "पर, कोई कसर भी तो नहीं रखी आपने, देखें मेरा बच्चा कितना सहमा हुआ है। वो तो आॅनलाइन क्लास की वजह से आपकी असलीयत…"
Apr 30
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल -दिल लगाना छोड़ दें
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' भाई आपने सहीह कहा सर् की इस्लाह के बाद ग़ज़ल अच्छी हो गई है। आपका हार्दिक आभार।"
Apr 10
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल -दिल लगाना छोड़ दें
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी नमस्कार। आपने बिल्कुल सही कहा आदरणीय समर कबीर सर् के द्वारा दी गई इस्लाह के बाद उसमें न केवल और सुधार की गुंजाइश नहीं रहती बल्कि ग़ज़ल भी ग़ज़ल कहलाने लाइक़ हो जाती है। इसके लिए हम सब समर कबीर सर् के बहुत बहुत आभारी…"
Apr 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल -दिल लगाना छोड़ दें
"आ. रचना बहन सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है। भाई समर जी के सुझाव से यह और निखर गयी है । हार्दिक बधाई।"
Apr 10

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल-अपना है कहाँ

2122 2122 2122 212

1

औरों के जैसा मुकद्दर यार अपना है कहाँ

अपने दिल का जोर उसके दिल प चलता है कहाँ

2

रात होती है कहाँ और दिन गुज़रता है कहाँ

मन मुआफ़िक़़ ज़िन्दगी में जीना मरना है कहाँ

3

एक दिन में कुछ नहीं पर एक दिन होगा ज़रूर

आदमी ये सब्र तब तक यार रखता है कहाँ'

4

आज तक कोई नहीं यह जान पाया दोस्तो

इस ज़माने को बनाने वाला रहता है कहाँ

 5

किस तरह भर लूँ उनींदी आँखों में ख़्वाबों के…

Continue

Posted on May 6, 2022 at 10:30am — 6 Comments

ग़ज़ल -दिल लगाना छोड़ दें

2122 2122 2122 212

1

अश्क पीना छोड़ दें हम दिल लगाना छोड़ दें 

एक उनकी मुस्कुराहट पर ज़माना छोड़ दें

2

हर किसी के आप दिल में आना जाना छोड़ दें

इश़्क को सौदा समझ क़ीमत लगाना छोड़ दें

3

कह दें अपनी चूड़ियों से खनखनाना छोड़ दें 

दिल के रिसते ज़ख़्मों पर यूँ सरसराना छोड़ दें

4

लग गए हों ताले ख़ामोशी के जिनके होठों पर 

उनसे उम्मीदें सदाओं की लगाना छोड़ दें 

5

कब तलक फिरते रहेंगे आप ग़म के सहरा…

Continue

Posted on April 5, 2022 at 9:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल- भाते हैं कम

212 212 212

1

जाने क्यों इश्क़ के पेच ओ ख़म

ज़ेह्न वालों को भाते हैं कम

2

उनके सर की उठा कर क़सम

हम महब्बत का भरते हैं दम

3

मुस्कुरातीं हैं सब चूड़ियाँ

जब सँवारें वो ज़ुल्फ़ों के ख़म

4

जब जी चाहे बुला लेते हैं

करके पायल की छम-छम सनम

5

होंगे दिन रात मधुमास से

जब भी पहलू में बैठेंगे हम

6

जाएँ जब उनकी आग़ोश में

रौशनी शम्अ की करना कम

7

एक पल में ही मर…

Continue

Posted on January 2, 2022 at 1:01pm — 6 Comments

ग़ज़ल-रख क़दम सँभल के

1121 2122 1121 2122 

इस्लाह के बाद ग़ज़ल

  

1

है ये इश्क़ की डगर तू ज़रा रख क़दम सँभल के

चला जाएगा वगरना तेरा चैन इस प चल के

2

न…

Continue

Posted on December 12, 2021 at 11:00am — 6 Comments

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