For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Rachna Bhatia
Share

Rachna Bhatia's Groups

 

Rachna Bhatia's Page

Latest Activity

Neelam Upadhyaya commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीया रचना भाटिया जी, ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें । कृपया आदरणीय समर कबीर जी की टिपण्णी का संज्ञान लें।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ' इस मिसरे में 'माफियाँ' ग़लत शब्द है,सहीह शब्द है "मुआफ़ी" और इसका बहुवचन होगा "मुआफ़ियाँ",मिसरा…"
Jun 11
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212सिर पे पांव रख हमारे,चढ़ रहे हो सीढ़ियाँफैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँजिंदगी में देख लीं,बहुत सी हमने आंधियाँखत्म हो चुके हैं अश्क,बंद सी हैं सिस्कियाँदास्ताने जिंदगी, सुना सके न हम कभीदर खुदा के आ खड़े,ले चंद हम भी अर्जि़याँछा रही है तीरगी,न रोशनी दिखे कहींमौत है बुला रही,दे जिंदगी भी धमकियाँचापलूसी बोलती,न महनतों का मोल हैलग रही जगह जगह, इमान की ही बोलियाँसाथ छोड़ चल दिये,मकान खाली हो गयाहो मुबारकें तुम्हें, नई तुम्हारी बस्तियाँबारिशों की है झडी,या अश्क को गरूर हैखेल…See More
Jun 10
Rachna Bhatia commented on विनय कुमार's blog post अलग अलग कारण- लघुकथा
"हर दिल में उठती चिंता का चित्रण करती अच्छी लघुकथा। आदरणीय बधाई स्वीकार करें।"
Jun 10
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"लघुकथा  (2) जिन्दगी की उड़ान “मां,भगवान के लिए अब हमें सीख देना बंद करो। हम बड़े हो चुके हैं”। शारदा बेटे की बात पर हैरान थी। कुछ कहती इससे पहले ही पड़ोसन आशा ने छब्बीस साल के राहुल को टोक दिया। “मां से ऐसे बात करोगे? तुम…"
May 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी हौसला अफजाई के लिए आपका अत्यंत आभार । जी, बताई गई कमियों को दूर करने का पूरा प्रयास करूंगी ।"
May 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय समर कबीर जी हौसला अफजाई के लिए आपकी अत्यंत आभारी हूँ । जी, आप गुणीजनों द्वारा दी सलाह अनुसार सुधार करने का पूरा प्रयास करूंगी ।"
May 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय महेन्द्र कुमार जी आपकी लघुकथा पाठक को आखिर तक बांधे रखती है ।जिंदगी की कश्मकश दिखाती एक अच्छी रचना ।बधाई स्वीकार करें ।"
May 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय महेन्द्र कुमार जी, प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद ।मैं आदरणीय वीरेन्द्र वीर मेहता जी और आपके द्वारा दी गई सलाह को ध्यान में रखते हुए सुधार करने का पूरा प्रयास करूंगी ।"
May 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय वीरेन्द्र वीर मेहता जी बहुत बढ़िया तरीके से आपने बात को रखा ।साथ ही पाठक को सोचने पर भी मजबूर किया ।लघुकथा अपने उद्देश्य में सफल रही ।बधाई स्वीकार करें म"
May 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
" संवेदनशील बात को इतनी सहजता और प्रभावी तरीके से कहने के लिए बधाई स्वीकार करें ।"
May 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय शहजाद उस्मानी जी मैं आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ ।मैं आदरणीय वीरेन्द्र वीर मेहता जी द्वारा दी सलाह अनुसार सुधार करने का पूरा प्रयास करूंगी । आदरणीय शहजाद उस्मानी जी मैंने स्पष्ट किया है कि पिता की मृत्यु के बाद कोई काम न मिलने के कारण उसे यह…"
May 30
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय"
May 30
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"नाइट ड्यूटी “राहुल आज भी टिफिन नहीं लाये?कुछ खा कर आये या..?”मैडम कुछ कहती इससे पहले ही स्कूल की आया बोली,” रास्ते में इसकी माँ दिखाई दी थी,चमकीली साड़ी में,मेरे टोकने से पहले ही वो नज़र बचा खिसक ली।”आया की हंसी कुछ और भी…"
May 30
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय , ग़ज़ल पर इतने विस्तार से सलाह देने के लिए तहे दिल से शुक्रिया । मैं कमियों को दूर करने की पूरी कोशिश करूँगी। मैं ग़ज़ल कक्षा में भाग नहीं ले पा रही हूँ ।क्या करना होगा ।"
May 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जी  तूं और हमारा तो दोष युक्त नहीं हो जाएगा "
May 25

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



सिर पे पांव रख हमारे,चढ़ रहे हो सीढ़ियाँ

फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ



जिंदगी में देख लीं,बहुत सी हमने आंधियाँ

खत्म हो चुके हैं अश्क,बंद सी हैं सिस्कियाँ



दास्ताने जिंदगी, सुना सके न हम कभी

दर खुदा के आ खड़े,ले चंद हम भी अर्जि़याँ



छा रही है तीरगी,न रोशनी दिखे कहीं

मौत है बुला रही,दे जिंदगी भी धमकियाँ



चापलूसी बोलती,न महनतों का मोल है

लग रही जगह जगह, इमान की ही बोलियाँ



साथ छोड़ चल… Continue

Posted on June 10, 2019 at 7:55pm — 2 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

221 2121 1221 212ता-उम्र उजालों का असर ढूढ़ता रहा । मैं तो सियाह शब…See More
14 hours ago
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

जिंदगी के लिए — डॉo विजय शंकर

कभी लगता है , वक़्त हमारे साथ नहीं है , फिर भी हम वक़्त का साथ नहीं छोड़ते। कभी लगता है , हवा हमारे…See More
14 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

हो गए - ग़ज़ल

मापनी २१२*4 चाहते हम नहीं थे मगर हो गएप्यार में जून की दोपहर हो गए हर कहानी खुशी की भुला दी गईदर्द…See More
14 hours ago
Archana Tripathi posted a blog post

लघुकथा

प्रतिफलचन्द दिनों मे ही पर्याप्त नींद लेकर मैं स्वस्थ सी लगने लगी थी। उसमे करना भी कुछ ना था बस…See More
14 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a photo

पंडितन केर पिछलगा

मलिक मुहम्मद ‘जायसी’ की प्रसिद्धि हिन्दी साहित्य में एक सिद्ध सूफी संत और प्रेमाश्रयी शाखा के…
yesterday
dandpani nahak replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब आपकी बायीं आँख की तकलीफ का सुना ईश्वर से प्रार्थना है की आप शीघ्र…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आदरणीय हरिआेम श्रीवास्तव जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आदरणीय शैलेश चंद्राकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय नीलम उपाघ्याय जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी।"
Saturday
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आपका दिल से आभार आदरणीय"
Saturday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service