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सामाजिक सरोकार

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Nov 2
SALIM RAZA REWA commented on dr neelam mahendra's blog post क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें
"आ. ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई."
Oct 19
SALIM RAZA REWA commented on dr neelam mahendra's blog post क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें
"आ. नीलम जी, ख़ूबसूरत लेख के लिए बधाई."
Oct 17
dr neelam mahendra posted a blog post

क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें

क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायेंदिवाली यानी रोशनी, मिठाईयाँ, खरीददारी , खुशियाँ और वो सबकुछ जो एक बच्चे से लेकर बड़ों तक के चेहरे पर मुस्कान लेकर आती है। प्यार और त्याग की मिट्टी से गूंथे अपने अपने घरौंदों को सजाना भाँति भाँति के पकवान बनाना नए कपड़े और पटाखों की खरीददारी ! दीपकों की रोशनी और पटाखों का शोर बस यही दिखाई देता है चारों…See More
Oct 16

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क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें

क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें

दिवाली यानी रोशनी, मिठाईयाँ, खरीददारी , खुशियाँ और वो सबकुछ जो एक बच्चे से लेकर बड़ों तक के चेहरे पर मुस्कान लेकर आती है।

प्यार और त्याग की मिट्टी से गूंथे अपने अपने घरौंदों को सजाना भाँति भाँति के पकवान बनाना नए कपड़े और पटाखों…

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Posted on October 16, 2017 at 10:14pm — 2 Comments

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At 12:38pm on May 3, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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